02 जून 2011

भूत बंगला के भूत

नमस्ते राजीव जी ! यहाँ राजपुरा में सब आने वाली प्रेत कहानी का इन्तजार कर रहे हैं । रजत ने तो आपको 1 बहुत बढिया फ़ोटो भी भेजा था । प्रेत कहानी के लिये । आपने तो कहा था कि मई में प्रेत कहानी छप जायेगी । लेकिन आज 31 मई हो गयी है । तो हमारी बिनती है कि आप आने वाली प्रेत कहानी डायन पर लिखें । 
जैसे आपको याद होगा कि बहुत पहले 1 फ़िल्म बनी थी । जिसका नाम था - वीराना । वो फ़िल्म भी डायन पर ही थी । बहुत बढिया हिट फ़िल्म थी । अब आपकी आने वाली कहानी डायन पर ही होनी चाहिये । अब हमारे पेपर खत्म हो चुके हैं । और छुट्टियाँ चल रही हैं ।
हमारे कुछ और भी कालेज के मित्र आपके ब्लाग से जुङे हैं ( मेरे और रजत के कहने पर )  जिनके नाम हैं - नीरज । वरुण । दीपक । कपिल । जतिन । नितिन । अतुल । रोहित । ये सब हमारे साथ बी.ए के छात्र हैं । हम सब एक साथ पटेल पब्लिक कालेज राजपुरा में पढते हैं । आपको पता ही है कि मैं जिस लडकी से प्यार करता हूँ । वो सिख परिवार से है । और उसका नाम रविन्दर है । हम दोनों शादी भी करना चाहते हैं । ये बात हम दोनों के परिवार को पता है ।
पहले रविन्दर मेरे साथ आपका ब्लाग पढती थी । अब उसका भाई शैन्टी भी आपका ब्लाग पढने लगा है । मैं उसकी और अपनी तस्वीर भेज रहा हूँ । आज आपकी शिकायत दूर करते हुए मैं रजत की भी फ़ोटो भेज रहा हूँ । ताकि आप रजत को भी इंसान ही समझें । कही उसको भूत-प्रेत न समझ बैठें ।

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मेरे युवा मित्रों ! सत्यकीखोज पर आपका पहली बार बहुत बहुत स्वागत है । मैं सुभाष जी का विशेष आभारी हूँ । जो आप - नीरज । वरुण । दीपक । कपिल । जतिन । नितिन । अतुल । रोहित । शैन्टी । रविन्दर जी.. सभी नये मित्रों और हमारे भूत भाई रजत जी ( यह निगेटिव जैसी फ़ोटो इंसान की तो लगती नहीं है ) से मिलाया ।
सबसे पहले " वेरी सारी " कि आप लोगों को सेव किया ई मेल कहीं ( तमाम टेक्स्ट फ़ायलों में ) खो गया । और उत्तर जल्दी नहीं दे पाया । अभी भी - रजत जी । सुभाष जी ( की प्रतिक्रिया वाले ) को उत्तर देना शेष है । आपके अलावा रविन्दर जी - कनाडा । उनके पति कंवल सचदेव जी - कनाडा । और सुशील जी - पंचकूला हरियाणा को उत्तर देना शेष है ।
दरअसल आप सभी की जिग्यासाओं के बहुत से प्रमाणित उत्तर " अनुराग सागर " में मौजूद हैं । तो मैंने सोचा कि यदि शीघ्रता से खास खास लेख प्रकाशित कर दिये जायँ । तो तमाम पाठक काफ़ी हद तक संतुष्ट हो जायेंगे । और

तब आराम से आपसे बातचीत का सिलसिला चलता रहेगा । क्योंकि जब मैं कोई बात कहता हूँ । तो कुछ लोगों को शंका हो जाती है । जबकि प्रमाणित गृंथो से आप सोचने पर विवश हो जाते हो ।
खैर..आप सबकी बहुत माँग पर अगली कहानी " डायन " शीर्षक से होगी । और डायन के ऐसे पहलूओं से परिचित करायेगी । जैसी आपने विश्व इतिहास में नहीं पढी होगी ।
दूसरी प्रेत कहानी एक नीच किस्म की देवी सिद्धि पर होगी । इन दोनों कहानी पर कार्य शुरू हो चुका है ।
आप में से ही मेरे एक मित्र ( किसी कारणवश जिनके बारे में मैं नहीं बता सकता ) बहुत अच्छे सुझाव और सहयोग करते हैं । उनके अपनत्व के बदले में ...कहने के लिये मेरे पास शब्द नहीं हैं । वाकई आप लोगों का प्यार सच्चा प्यार है । कृपया शीर्षक को दिल पर न लें । युवा लोगों से हँसी मजाक करना मेरी आदत है ।
..रजत जी । सुभाष जी मुझे आप लोगों की कोई बात बुरी नहीं लगी । जैसा कि कुछ कुछ... आपको लगा । वैसा मैंने क्यों लिखा - उसी जबाब में स्पष्ट कर दूँगा । आपके उस कथित सतगुरु और उसकी मंडली की कोई भी बात हमारे सदगुरु ( महाराज जी ) और मंडल ( ध्यान दें - मंडली नहीं । ये विशाल मंडल है । ) से मैच नहीं करती । आज इतना ही । जय राम जी की ।
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