मुकदमा । शत्रु संघर्ष । दरिद्रता आदि के निवारण में बहुत प्रभावी है । इसके जैसी चमत्कारी वस्तु आज तक देखने में नही आई ? इसमें वशीकरण को भी अदभुत शक्ति है । भूत प्रेत आदि का भय नही रहता । यदि इसे तांत्रिक विधि से सिद्ध कर दिया जाए । तो साधक निश्चित रूप से चामुण्डा देवी का कृपा पात्र हो जाता है । यह जिसके पास होती है । उसे हर कार्य में सफलता मिलती है । धन संपत्ति देने वाली यह बहुत चमत्कारी साबित हुई है । तांत्रिक वस्तुओं में यह महत्वपूर्ण है । हत्थाजोड़ी में अदभुत प्रभाव निहित रहता है । यह साक्षात चामुंडा देवी का प्रतिरूप है ? यह जिसके पास भी होगी । वह अदभुत रुप से प्रभावशाली होगा । सम्मोहन, वशीकरण, अनुकूलन, सुरक्षा में अत्यंत गुणकारी होता है - हत्थाजोड़ी । हमारे तंत्र शास्त्र तथा तन्त्र का प्रयोग करने वालो के लिये 1 महत्वपूर्ण वनौषधि के नाम से जानी जाती है । इसके पत्ते हरे रंग के होते हैं । साथ ही यह भी देखा जाता है । इन पत्तों के नीचे के हिस्से मे सफ़ेद रंग की परत होती है । और इस सफ़ेद हिस्से पर बाल जैसे मुलायम रोंये होते हैं । इसके ऊपर गुलाब की तरह का फ़ूल आता है । कहीं कहीं पर फ़ूल में नीला रंग भी दिखाई देता है । यह प्राय: पंसारियों के पास या राशि रत्न बेचने वालों के पास से प्राप्त की जा सकती है । इसे तांत्रिक सामान बेचने वाले भी अपने पास रखते हैं ।
1 हत्थाजोडी को करजोडी हस्ताजूडी के नाम से भी जाना जाता है ।
2 उर्दू में इसे बखूर इ मरियम कहा जाता है ।
3 ईरान में इसे चबुक उशनान के नाम से जाना जाता है ।
4 लैटिन में इसे सायक्लेमेन परसीकम कहा जाता है ।
इसकी उपज किसी भी पेड की छाया में तथा नम जमीन में होती है । इसकी जड गोल होती है । और रंग काला होता है । इसी जड में हत्था जोडी बनती है । यदि आप खूब मेहनत और लगन से काम करके धनोपार्जन करते हैं । फिर भी आपको आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है । तो आपको अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए इससे सम्बंधित उपाय करने चाहिए । इसके लिए किसी भी शनिवार अथवा मंगलवार के दिन हत्था जोड़ी घर लाएं । इसे लाल रंग के कपड़े में बांधकर घर में किसी सुरक्षित स्थान में अथवा तिजोरी में रख दें । इससे आय में वृद्घि होगी । एवं धन का व्यय कम होगा । तिजोरी में सिन्दूर युक्त हत्थाजोड़ी रखने से आर्थिक लाभ में वृद्धि होने लगती है.
हत्थाजोड़ी के कुछ प्रयोग -
1 प्रसव की सुगमता के लिये ग्रामीण इलाकों में इसे चन्दन के साथ घिसकर प्रसूता की नाभि पर चुपड देते हैं । इससे बच्चा आराम से हो जाता है ।
2 गर्भपात करवाने के लिये भी इसे प्रयोग मे लाया जाता है । लेकिन इसके आगे के लक्षण बहुत खराब होते हैं । जैसे हिस्टीरिया का मरीज हो जाना ।
3 जब कभी पेशाब रुक जाती है । तो इसे पानी के साथ घिसकर पेडू पर लगाने से पेशाब खुल जाता है ।
4 पेट मे कब्ज रहने पर इसको पानी के साथ घिसकर पेट पर चुपडने से कब्जी दूर होने लगती है ।
5 मासिक धर्म के लिये इसके चूर्ण की पोटली बनाकर योनि में रखने से शुद्ध और साफ़ मासिक धर्म होने लगता है । लेकिन इस कार्य के लिये किसी योग्य डाक्टर या वैद्य की सहायता लेनी जरूरी होती है ।
6 हत्थाजोडी का चूर्ण पीलिया के बहुत उपयोगी है । पीलिया के मरीज को हत्थाजोडी के चूर्ण को शहद के साथ चटाने से लाभ मिलता है । लेकिन इसका चूर्ण शहद के साथ खिलाने के बाद रोगी को कपडा ओढ़ा देना जरूरी होता है । जिससे पीलिया का पानी पसीने के रूप में निकलने लगेगा । कुछ समय बाद पसीने को तौलिया से साफ़ कर लेना चाहिये । इससे यह समूल रोग नष्ट करने मे सहायक होती है.
7 पारा शोधन की प्रक्रिया में भी हत्थाजोडी को प्रयोग मे लाते हैं । हत्थाजोडी के चूर्ण को पारे के साथ खरल करते हैं । धीरे धीरे पारा बंधने लगता है । मनचाही शक्ल मे पारे को बनाकर गलगल नीबू के रस मे रख दिया जाता है । कुछ समय मे पारा कठोर हो जाता है । लेकिन पारा और हत्थाजोडी असली हो । तभी यह सम्भव है । अन्यथा कुछ हासिल नहीं होता
8 हत्थाजोडी को सिन्दूर में लगाकर दाहिनी भुजा में बांधने से कहा जाता है कि वशीकरण होता है ।
9 बिल्ली की आंवर/जेर हत्थाजोडी और सियारसिंगी को सिन्दूर में मिलाकर 1 साथ रखने से कहा जाता है कि भाग्य मे उन्नति होती है ।
10 यदि बच्चा रोता अधिक है । और जल्दी जल्दी बीमार हो जाता है । तो शाम के समय, हत्थाजोडी के साथ रखे लौंग इलायची को लेकर धूप देना चाहिए । स्वाहा । यह क्रिया शनिवार के दिन अधिक लाभकारी होती है ।
11 किसी भी व्यक्ति से वार्ता करने में साथ रखें । तो वो बात मानेगा ।
12 जिसको भी वश में करना हो । उसका नाम लेकर जाप करें । तो इसके प्रभाव से वह व्यक्ति वशीभूत होगा ।
13 त्रि-धातु के तावीज में गले में धारण करने से बलशाली से बलशाली व्यक्ति भी डरता है । सभी कार्यों में निरंतर निर्भय होता है ।
14 प्रयोग के बाद चांदी की डिबिया में सिन्दूर के साथ ही तिजोरी में रख दें ।
हत्थाजोडी को सिद्ध करने के तरीके -
1 - क्क हत्थाजोडी मम सर्वकार्य सिद्ध कुरू कुरू स्वाहाः ।
मंत्र से पीपल के पते पर अपना नाम लिखकर हत्थाजोड़ी को पत्ते पर रखें । रुद्राक्ष माला से रोजाना 3 माला 5 दिन तक जाप करें । इसे सिद्ध अभिमंत्रित होने पर पूजास्थल पर रखें । साधक के सभी कार्य करने हेतु जागृत हो जाती है ।

4 टिप्पणियां:
आप को भी सपरिवार होली की हार्दिक शुभकामनाएँ|
Kab layen kab kaise siddh karen
Kab layen kab kaise siddh karen
यह लेख पढ़कर लगता है कि लोकविश्वास, तंत्र और औषधि की बातें आपस में घुली हुई हैं। मैं मानता हूँ कि हत्थाजोड़ी एक वनस्पति की जड़ है, जिसे लोग प्रतीक और आस्था से जोड़ते हैं। लोग इसके अनुभव सुनाते हैं, इसलिए जिज्ञासा पैदा होती है। लेकिन मैं इसे चमत्कार से ज़्यादा विश्वास और परंपरा की चीज़ मानता हूँ।
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