11 सितंबर 2013

तुममें और ईश्वर में क्या फर्क है ?

कुछ बयान -
1 अकबर ओवैसी ने 100 करोड़ हिन्दुओं को 15 मिनट में काटने की बात की थी । क्योंकि उसकी वजह से आंध्र प्रदेश में कांग्रेस की सरकार चल रही है ।
2 आजम खान ने भारत माता को डायन कहा था । क्योंकि उसकी पार्टी सपा की वजह से केंद्र में कांग्रेस की सरकार चल रही है ।
3 असौद्दीन ओवैसी ने पूना में कहा - पाकिस्तान पर हमला किया । तो देश के मुस्लिम इस देश का साथ नहीं देंगे ।
4 गिलानी रोज देश तोड़ने की बात करता है । और अमरनाथ की यात्रा का विरोध करता है ।
5 बुखारी खुद को ISI का एजेंट बोलकर खुलेआम दिल्ली पुलिस को चेतावनी देता है । और पुलिस कुछ नहीं करती ।
और बहुत बड़ी लिस्ट है । जो बातें मीडिया, सेकुलरों और कांग्रेसियों को राष्ट्र विरोधी नहीं लगती । पर 1 हिन्दू शब्द से सबकी सुलग पडती है । जय भारत जय भवानी । साभार #Hindurashtra
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नेताजी सुभाषचंद बोस की भविष्यवाणी की सटीकता और देश के वर्तमान हालात । आज नेताजी प्रकाशन मंदिर शाहदरा दिल्ली से प्रकाशित हीरालाल दीक्षित की बर्ष 1969 में लिखी पुस्तक " कांग्रेस की शव परीक्षा और नेताजी के आने की प्रतीक्षा '' पढ़ने का अवसर मिला ।
जिसमें कांग्रेस के काले भृष्ट और देशद्रोही तथा गद्दार किस्म के कारनामों को पढ़कर मन और दिल दहल उठा कि ये कांग्रेसी आजादी के बाद से ही अपने स्वार्थों को पूरा करने के लिये किस तरह देश को खोखला करने के साथ नुकसान पहुंचाते रहे हैं । खैर.. बाकी चर्चा फिर कभी । आप सबके लिये प्रस्तुत है । इस पुस्तक के पेज संख्या 31 पर नेताजी द्वारा भारत के बारे में की गयी भविष्यवाणी । जो उन्होंने काबुल से जाते समय उत्तमचंद मल्होत्रा 

के प्रश्नों के जवाब में कही थी । 
- भारतवर्ष की 1 नहीं हजारों वीमारियाँ है । इस देश की तान ही नहीं टूट चुकी है । तानी भी टूट चुकी है । यदि भारत में प्रजातंत्र, जम्हूरियत या डेमोक्रेसी कायम हुई । तो 2-2  रुपये में 1-1 वोट बिकेगा । और व्हिस्की 1-1   पैग पर अफसर बिकेगा । देश का राष्ट्रीय चरित्र इतना गिर जाएगा कि दफ्तर में काम करने बाला बाबू भी एक दूसरे से रिश्वत लिये बिना एक दूसरे का काम नहीं करेगा ।
सुभाष चन्द्र बोस ने बहुत गंभीर मुद्रा में कहा था - India needs a man like Aattaruk Camal Pasa for 20 years  अर्थात भारत को अतार्तुक कमाल पाशा जैसे डिक्टेटर की 20 वर्ष के लिये आवश्यकता है ।
सुभाष चंद बोष का उपरोक्त कथन भारत के वर्तमान माहौल में कितना सार्थक और सटीक है । इस पर आप सभी के विचार सादर आमंत्रित हैं |
साभार #Hindurashtra
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ओशो के 10 सिद्धांत - ओशो के प्रारंभिक दिनों में जब वे आचार्य रजनीश के नाम से जाने जाते थे । किसी पत्रकार ने उनसे उनके 10 आधारभूत सिद्धांतों के बारे में पूछा । उत्तर में ओशो ने कहा - ये मुश्किल विषय है । क्योंकि वे किसी भी तरह के जङ सिद्धांत या नियम के विरुद्ध रहे हैं । परन्तु सिर्फ मजाक के लिए हल्के तौर पर वे निम्न हो सकते हैं ।
1 कभी किसी की आज्ञा का पालन न करें । जब तक कि वो आपके भीतर से भी न आ रही हो ।
2 अन्य कोई ईश्वर नहीं है । सिवाय स्वयं जीवन ( अस्तित्व ) के ।
3 सत्य आपके अन्दर ही है । उसे बाहर ढूंढने की जरुरत नहीं है ।
4 प्रेम ही प्रार्थना है ।
5 शून्य 0 हो जाना ही सत्य का मार्ग है । शून्य 0 हो जाना ही स्वयं में
उपलब्धि है ।
6 जीवन यहीं । अभी है ।
7 जीवन होश से जियो ।
8 तैरो मत - बहो ।
9 प्रत्येक पल मरो । ताकि तुम हर क्षण नवीन हो सको ।
10 उसे ढूंढने की जरुरत नहीं । जो कि यही है । रुको और देखो ।
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ले बढ़कर प्रतिशोध पर्थ अब कुचल शत्रु की चाल ।
यह दुविधा का समय नहीं है उठ गाण्डीव संभाल ।
बहुत हो चुकी शांति साधना अब हो शर संधान ।
अर्थ काम में छुट न जाये धर्म मोक्ष का ध्यान ।
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एक मर्मस्पर्शी सत्यकथा - इस साल मेरा 7 वर्षीय बेटा दूसरी कक्षा में प्रवेश पा गया । क्लास में हमेशा से अव्वल आता रहा है । पिछले दिनों तनख्वाह मिली । तो मैं उसे नयी स्कूल ड्रेस और जूते दिलवाने के लिए

बाज़ार ले गया । बेटे ने जूते लेने से ये कहकर मना कर दिया कि पुराने जूतों को बस थोड़ी सी मरम्मत की जरुरत है । वो अभी इस साल काम दे सकते हैं । अपने जूतों की बजाय उसने मुझे अपने दादा की कमजोर हो चुकी नज़र के लिए नया चश्मा बनवाने को कहा । मैंने सोचा । बेटा अपने दादा से शायद बहुत प्यार करता है । इसलिए अपने जूतों के बजाय उनके चश्मे को ज्यादा जरूरी समझ रहा है ।
खैर..मैंने कुछ कहना जरुरी नहीं समझा । और उसे लेकर ड्रेस की दूकान पर पहुंचा । दुकानदार ने बेटे के साइज़ की सफ़ेद शर्ट निकाली । डालकर देखने पर शर्ट एकदम फिट थी । फिर भी बेटे ने थोड़ी लम्बी शर्ट दिखाने को कहा । मैंने बेटे से कहा - बेटा ! ये शर्ट तुम्हें बिलकुल सही है । तो फिर और लम्बी क्यों ?
बेटे ने कहा - पिताजी ! मैंने शर्ट निक्कर के अंदर ही डालनी होती है । इसलिए थोड़ी लम्बी भी होगी । तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा । लेकिन यही शर्ट मुझे अगली क्लास में भी काम आ जाएगी । पिछली वाली शर्ट भी अभी नयी जैसी ही पड़ी है । लेकिन छोटी होने की वजह से मैं उसे पहन नहीं पा रहा । मैं खामोश रहा । घर आते वक़्त मैंने बेटे से पूछा - तुम्हे ये सब बातें कौन सिखाता है बेटा ?
बेटे ने कहा - पिताजी ! मैं अक्सर देखता था कि कभी माँ अपनी साडी छोड़कर तो कभी आप अपने जूतों को छोडकर हमेशा मेरी किताबों और कपड़ों पर पैसे खर्च कर दिया करते हैं ।
गली मौहल्ले में सब लोग कहते हैं कि आप बहुत ईमानदार आदमी हैं । और हमारे साथ वाले राजू के पापा को सब लोग चोर, कुत्ता, बेईमान, रिश्वतखोर और जाने क्या क्या कहते हैं । जबकि आप दोनों 1 ही आफिस में काम करते हैं । जब सब लोग आपकी तारीफ करते हैं । तो मुझे बड़ा अच्छा लगता है । मम्मी और दादाजी भी आपकी तारीफ करते हैं । पिताजी मैं चाहता हूँ । मुझे कभी जीवन में नए कपडे, नए जूते मिलें । या न मिलें । लेकिन कोई आपको चोर, बेईमान, रिश्वतखोर या कुत्ता न कहे । मैं आपकी ताक़त बनना चाहता हूँ पिताजी । आपकी कमजोरी नहीं ।
बेटे की बात सुनकर मैं निरुतर था । आज पहली बार मुझे मेरी ईमानदारी का इनाम मिला था । आज बहुत दिनों बाद आँखों में ख़ुशी, गर्व और सम्मान के आंसू थे ।
हाँ तो दोस्तो ! कभी इस किस्म की अनुभूति हुई है आपको ? अपनी जिन्दगी में ? या फिर कभी इस किस्म की अनुभूति महसूस करना चाहेंगे अपने जीवन में ? तो अपने बच्चे को 1 नया भृष्टाचार मुक्त भारत दीजिये । देखिये । पढ़िए । तुलना कीजिये । अपना दिमाग लगाईए । और फिर फैसला कीजिये । क्योंकि एक बात हमेशा याद रखिये कि - देश आपका । शहर आपका । घर आपका । बच्चा आपका । तो फैसला भी आपका । जय हिन्द । वन्दे मातरम !!
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1 जगह पर ज्ञानी सतसंग कर रहे थे । एकाएक जोरों से आँधी चली । छत के टीन छटपटाने लगे । भक्त लोग सब भाग गये । पक्के मकानों में आश्रय ले लिया । थोड़ी देर में आँधी शान्त हो गई । वापस आकर देखा तो स्वामी जी वैसे ही बैठे हैं । पूछा - बाबाजी ! इतनी आँधी चली । हम भाग गये । आप नहीं भागे ?
- हम भी भागे । तुम बाहर भागे । हम भीतर भागे । अन्तर्यामी परमात्मा से जुड़ जाओ । तो प्रकृति की सेवा पाना कोई बड़ी बात नहीं है । परमात्मा से मिल जाओ । ईश्वर में डूब जाओ । तुम कुछ नहीं कर सकते । ईश्वर सब कुछ कर सकता है । तुममें और ईश्वर में क्या फर्क होता है ? तुम जब संसार से सुख लेने की इच्छा करते हो । तो 2 पैसे के हो जाते हो । संसार से सुख लेने की इच्छा छोड़कर ईश्वर में गोता मारते हो । तो ईश्वर हो जाते हो । यह महापुरूषों का अनुभव है । शास्त्रों का प्रमाण है । भगवान श्रीकृष्ण भी कह रहे हैं -
प्रजहाति यदा कामान सर्वान पार्थ मनोगतान ।
आत्मन्येवात्मना तुष्टः स्थितप्रज्ञस्तदोच्यते ।
- हे अर्जुन ! जिस काल में पुरूष मन में स्थित सम्पूर्ण कामनाओं को भली भाँति त्याग देता है । और आत्मा से आत्मा में ही संतुष्ट रहता है । उस काल में वह स्थित प्रज्ञ कहा जाता है ।
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ट्रेफिक हवलदार - लायसेंस दिखाओ ।
चालक - नहीं है साब ।
ट्रेफिक हवलदार - क्या तुमने ड्रायविंग लायसेंस नहीं बनवाया ?
चालक - नहीं । ट्रेफिक हवलदार - क्यों ?
चालक - मैं बनवाने गया था । पर वो पहचान पत्र माँगते हैं । वो मेरे पास नही है । ट्रेफिक हवलदार - तो तुम मतदाता पहचान पत्र बनवा लो ।
चालक - मै वहाँ गया था साब । वो राशन कार्ड माँगते हैं । वो मेरे पास नहीं है । ट्रेफिक हवलदार - तो पहले राशन कार्ड बनवा लो ।
चालक - मैं म्युनिसिपल भी गया था साब । वो पासबुक माँगते हैं ।
ट्रेफिक हवलदार - तो मेरे बाप बैंक खाता खुलवा ले ।
चालक - मैं बैंक गया था साब । बैंक वाले ड्रायविंग लायसेंस माँगते हैं ।
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मन्दिरों में दान देने वाले हिन्दू भाई बहन सुप्रीम कोर्ट की ये न्यूज़ पढ़ें । आप सोचते हैं कि मन्दिरों में किया हुआ दान, पैसा, सोना आदि हिन्दू धर्म के उत्थान के लिए काम आ रहा है । और आपको पुण्य़ मिल रहा है । तो आप निश्चित ही बड़े भोले हैं । कर्नाटक सरकार के मन्दिर एवं पर्यटन विभाग ( राजस्व ) द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार 1997 से 2002 तक 5 साल में कर्नाटक Congress सरकार को राज्य में स्थित मन्दिरों से सिर्फ़ चढ़ावे में 391 करोड़ की रकम प्राप्त हुई । जिसे निम्न मदों में खर्च किया गया ।
1 मुस्लिम मदरसा ( Terrorist Trainng centre ) उत्थान एवं हज मक्का मदीना सब्सिडी, विमान टिकट - 180 करोड़ ( यानी 46% ) 
2 ईसाई चर्च को अनुदान ( To convert poor Hindus to Christian ) 44 करोड़ ( यानी 11.2% )
3 मन्दिर खर्च एवं रख रखाव - 84 करोड़ ( यानी 21.4% )
4 अन्य - 83 करोड़ ( यानी 21.2% )
कुल 391 करोड । ये तो सिर्फ 1 स्टेट का हिसाब है ।
सबसे अमीर - तिरुपति बालाजी, शिरडी साईबाबा, ये दोनों मन्दिर Congress के कब्जे में हैं । हर रोज हजारों करोड़ों पैसा, सोना, दान सच हिन्दुओं को ही पता नहीं चलेगा ।
दान देते वक्त अपनी सदबुद्धि विवेक से दान दें । ताकि वह समाज देश की भलाई में इस्तेमाल हो । नहीं तो दानी पाप का ही भागीदार है ।
हिन्दुओं के पैसों से, हिन्दुओं के ही विनाश का षडयंत्र 60 साल से चल रहा है । और यह सच्चाई हिन्दुओं को पता ही नहीं ।
Please send this to all Hindus for awareness  जय महाकाल साभार
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