01 अक्तूबर 2013

आवश्यकता है - 1 गर्ल फ्रेंड की

1 English अंतर्राष्ट्रीय भाषा है ?
2 English विज्ञान और तकनीक की भाषा है ?
3 English जाने बिना देश का विकास नहीं हो सकता ?
4 English बहुत समृद्ध भाषा है ?
मित्रो ! पहले आप 1 खास बात जानें । कुल 70 देश हैं । पूरी दुनिया में । जो भारत से पहले और भारत से बाद आजाद हुए हैं । भारत को छोड़कर उन सबमें 1 बात सामान्य हैं कि आजाद होते ही उन्होंने अपनी मातृभाषा को अपनी राष्ट्रीय भाषा घोषित कर दिया । लेकिन शर्म की बात है । भारत आजादी के 65 साल बाद भी नहीं कर पाया । आज भी भारत में सरकारी स्तर की भाषा अंग्रेजी है ।
अंग्रेजी के पक्ष में तर्क और उसकी सच्चाई ।
1 - अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है । दुनिया में इस समय 204 देश हैं । और मात्र 12 देशों में अंग्रेजी बोली पढ़ी और समझी जाती है । संयुक्त राष्ट संघ जो अमेरिका में है । वहाँ की भाषा अंग्रेजी नहीं है । वहाँ का सारा काम फ्रेंच में होता है । इन अंग्रेजों की जो बाइबिल है । वो भी अंग्रेजी में नहीं थी । और ईसामसीह अंग्रेजी नहीं बोलते थे । ईसामसीह की भाषा और बाइबिल की भाषा अरमेक थी । अरमेक भाषा की लिपि जो थी । वो हमारे बंगला भाषा से मिलती जुलती थी । समय के कालचक्र में वो भाषा विलुप्त हो गयी । पूरी दुनिया में जनसंख्या के हिसाब से

सिर्फ 3% लोग अंग्रेजी बोलते हैं । इस हिसाब से तो अंतर्राष्ट्रीय भाषा चाइनीज हो सकती है । क्योंकि ये दुनिया में सबसे ज्यादा लोगों द्वारा बोली जाती है । और दूसरे नंबर पर हिन्दी हो सकती है ।
2 अंग्रेजी बहुत समृद्ध भाषा है । किसी भी भाषा की समृद्धि इस बात से तय होती है कि उसमें कितने शब्द हैं । और अँग्रेजी में सिर्फ 12,000 मूल शब्द हैं । बाकी अँग्रेजी के सारे शब्द चोरी के हैं । या तो लैटिन के । या तो फ्रेंच के । या तो ग्रीक के । या तो दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ देशों की भाषाओं के हैं । आपने भी काफी बार किसी अँग्रेजी शब्द के बारे में पढ़ा होगा । ये शब्द यूनानी भाषा से लिया गया है । ऐसे ही बाकी शब्द हैं ।
उदाहरण - अंग्रेजी में चाचा, मामा, फूफा, ताऊ सब UNCLE चाची, ताई, मामी, बुआ सब AUNTY क्योंकि अंग्रेजी भाषा में शब्द ही नहीं हैं । जबकि गुजराती में अकेले 40,000 मूल शब्द हैं । मराठी में 48000+ मूल शब्द हैं । जबकि हिन्दी में 70000+ मूल शब्द हैं । कैसे माना जाए । अंग्रेजी बहुत समृद्ध भाषा है ?? अंग्रेजी सबसे लाचार/पंगु/रद्दी भाषा है । क्योंकि इस भाषा के नियम कभी 1 से नहीं होते । दुनिया में सबसे अच्छी भाषा वो मानी जाती है । जिसके नियम हमेशा 1 जैसे हों । जैसे - संस्कृत । अंग्रेजी में आज से 200 साल पहले This की स्पेलिंग Tis होती थी ।
अंग्रेजी में 250 साल पहले Nice मतलब बेवकूफ होता था । और आज Nice मतलब अच्छा होता है । अंग्रेजी भाषा में Pronunciation कभी 1 सा नहीं होता । Today को आस्ट्रेलिया में Todie बोला जाता है । जबकि ब्रिटेन

में Today. अमेरिका और ब्रिटेन में इसी बात का झगड़ा है । क्योंकि अमेरीकन अंग्रेजी में Z का ज्यादा प्रयोग करते हैं । और ब्रिटिश अँग्रेजी में S का । क्योंकि कोई नियम ही नहीं है । और इसीलिए दोनों ने अपनी अपनी अलग अलग अंग्रेजी मान ली ।
3 अंग्रेजी नहीं होगी । तो विज्ञान और तकनीक की पढ़ाई नहीं हो सकती । दुनिया में 2 देश इसका उदाहरण हैं कि बिना अंग्रेजी के भी विज्ञान और तकनीक की पढ़ाई होती है - जापान और फ़्रांस । पूरे जापान में इंजीनियरिंग, मेडिकल के जितने भी कालेज और विश्वविद्यालय हैं । सबमें पढ़ाई JAPANESE  में होती है । इसी तरह फ़्रांस में बचपन से लेकर उच्च शिक्षा तक सब फ्रेंच में पढ़ाया जाता है ।
हमसे छोटे छोटे, हमारे शहरों जितने देशों में हर साल नोबल विजेता पैदा होते हैं । लेकिन इतने बड़े भारत में नहीं । क्योंकि हम विदेशी भाषा में काम करते हैं । और विदेशी भाषा में कोई भी मौलिक काम नहीं किया जा सकता । सिर्फ रटा जा सकता है । ये अंग्रेजी का ही परिणाम है कि हमारे देश में नोबल पुरस्कार विजेता पैदा नहीं होते हैं । क्योंकि नोबल पुरस्कार के लिए मौलिक काम करना पड़ता है । और कोई भी मौलिक काम कभी भी विदेशी भाषा में नहीं किया जा सकता है । नोबल पुरस्कार के लिए P.hd  B.Tech  M.Tech की जरूरत नहीं होती है । उदाहरण - न्यूटन कक्षा 9 में फ़ेल हो गया था । आइंस्टीन कक्षा 10 के आगे पढे ही नहीं ।

और E=hv बताने वाला मैक्स प्लांक कभी स्कूल गया ही नहीं । ऐसे ही शेक्सपियर, तुलसीदास, महर्षि वेदव्यास आदि के पास कोई डिग्री नहीं थी । इन्होंने सिर्फ अपनी मात्र भाषा में काम किया ।
जब हम हमारे बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से हटकर अपनी मात्र भाषा में पढ़ाना शुरू करेंगे । तो इस अंग्रेज़ियत से हमारा रिश्ता टूटेगा ।
क्या आप जानते हैं । जापान ने इतनी जल्दी इतनी तरक्की कैसे कर ली ? क्योंकि जापान के लोगों में अपनी मातृभाषा से जितना प्यार है । उतना ही अपने देश से प्यार है । जापान के बच्चों में बचपन से कूट  कूट कर राष्ट्रीयता की भावना भरी जाती है ।
- जो लोग अपनी मातृभाषा से प्यार नहीं करते । वो अपने देश से प्यार नहीं करते । सिर्फ झूठा दिखावा करते हैं । 
- दुनिया भर के वैज्ञानिकों का मानना है कि दुनिया में कम्प्यूटर के लिए सबसे अच्छी भाषा संस्कृत है । सबसे ज्यादा संस्कृत पर शोध इस समय जर्मनी और अमेरिका चल रही है । नासा ने " मिशन संस्कृत " शुरू किया है । और अमेरिका में बच्चों के पाठ्यक्रम में संस्कृत को शामिल किया गया है । सोचिए । अगर अंग्रेजी अच्छी भाषा होती । तो ये अंग्रेजी को क्यों छोड़ते । और हम अंग्रेज़ियत की गुलामी में घुसे हुए हैं । कोई भी बड़े से बड़ा तीसमार खाँ अंग्रेजी बोलते समय सबसे पहले उसको अपनी मातृभाषा में सोचता है । और फिर उसको दिमाग में Translate करता है । फिर दोगुनी मेहनत करके अंग्रेजी बोलता है । हर व्यक्ति अपने जीवन के अत्यंत निजी क्षणों में मात्र भाषा ही बोलता है । जैसे - जब कोई बहुत गुस्सा होता है । तो गाली हमेशा मातृभाषा में ही देता है ।
मात्रभाषा पर गर्व करो । अंग्रेजी की गुलामी छोड़ो । अभी जो आपने ऊपर पढ़ा । ये राजीव दीक्षित जी के ( अँग्रेजी भाषा की गुलामी ) वाले व्यख्यान का सिर्फ 10% लिखा है ।
पूरा lecture सुनने के लिये यहाँ click करे ।
https://www.youtube.com/watch?v=ZqtRzpv52Ls
वन्देमातरम ! अमर शहीद राजीव दीक्षित जी की जय !
साभार - अबे तू खान्ग्रेसी है क्या ?
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हक तुझे बेशक है । शक से देख । पर यारी भी देख ।
ऐब हम में देख पर । वफादारी भी देख ।
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क्या आप जानते हैं कि हमारे हिन्दू सनातन धर्म ग्रंथों में उल्लेखित 84 लाख योनि का रहस्य क्या है ? क्योंकि 84 लाख योनियों को लेकर हम हिन्दुओं में ही काफी भृम की स्थिति बनी रहती है । और हरेक सु्ने सुनाये ढंग से इसकी व्याख्या करने की कोशिश में लगा रहता है । हमारे धर्म ग्रंथों में 84 लाख योनि विशुद्ध रूप से जीव विज्ञान एवं उसके क्रमिक विकास के सम्बन्ध में उल्लेखित है । इसका तात्पर्य यह है कि हमारे सनातन धर्म के धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि सृष्टि में जीवन का विकास क्रमिक रूप से हुआ है । और इसी की अभिव्यक्ति हमारे अनेक ग्रंथों में हुई है ।
सृष्टवा पुराणि विविधान्यजयात्मशक्तया । वृक्षान सरीसृपपशून खगदंशमत्स्यान । तैस्तैर अतुष्टहृदय: पुरुषं विधाय । व्रह्मावलोकधिषणं मुदमाप देव: । 11-9 -28 श्रीमदभागवत पुराण । 
- विश्व की मूलभूत शक्ति सृष्टि के रूप में अभिव्यक्त हुई । और इस क्रम में वृक्ष, सरीसृप, पशु, पक्षी, कीड़े, मकोड़े, मत्स्य आदि अनेक रूपों में सृजन हुआ । परन्तु उससे उस चेतना की पूर्ण अभिव्यक्ति नहीं हुई । अत: मनुष्य का निर्माण हुआ । जो उस मूल तत्व का साक्षात्कार कर सकता था ।
दूसरी मुख्य बात यह कि भारतीय परम्परा में जीवन के प्रारंभ से मानव तक की यात्रा में 84 लाख योनियों के बारे में कहा गया । इसका मंतव्य यह है कि पृथ्वी पर जीवन एक बेहद सूक्ष्म एवं सरल रूप से गुजरता हुआ धीरे धीरे संयुक्त होता गया । और 84 लाख योनि ( चरण ) के बाद ही मानव जैसे बुद्धिमान प्राणी का विकास संभव हो पाया । आज आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि अमीबा से लेकर मानव तक की यात्रा में चेतना लगभग 1 करोड़ 04 लाख योनियों से गुजरी है । हमारे धर्म ग्रंथों और आधुनिक विज्ञान में ये गिनती का थोडा अंतर इसीलिए हो सकता है कि हमारे धर्म ग्रन्थ लाखों वर्ष पूर्व लिखे गए हैं । और लाखों वर्ष बाद क्रमिक विकास के कारण प्रजातियों की संख्या में कुछ वृद्धि हो गयी हो । परन्तु आज से हजारों वर्ष पूर्व हमारे पूर्वजों ने यह साक्षात्कार किया । वो बेहद आश्चर्यजनक है । अनेक आचार्यों ने इन 84 लाख योनियों का वर्गीकरण किया है । हमारे धर्म ग्रंथों ने इन 84 लाख योनियों का सटीक वर्गीकरण किया है । और समस्त प्राणियों को 2 भागों में बांटा गया है - योनिज तथा अयोनिज । अर्थात 2 के संयोग से उत्पन्न प्राणी योनिज कहे गए । तथा अपने आप ही अमीबा की तरह विकसित होने वाले प्राणी अयोनिज कहे गए ।
इसके अतिरिक्त स्थूल रूप से प्राणियों को 3 भागों में बांटा गया ।
1 जलचर - जल में रहने वाले सभी प्राणी ।
2 थलचर - पृथ्वी पर विचरण करने वाले सभी प्राणी ।
3 नभचर - आकाश में विहार करने वाले सभी प्राणी ।
इसके अतिरिक्त भी प्राणियों की उत्पत्ति के आधार पर 84 लाख योनियों को इन 4 प्रकार में वर्गीकृत किया गया ।
1 जरायुज - माता के गर्भ से जन्म लेने वाले मनुष्य, पशु जरायुज कहलाते हैं ।
2 अण्डज - अण्डों से उत्पन्न होने वाले प्राणी अण्डज कहलाये ।
3 स्वदेज - मल, मूत्र, पसीना आदि से उत्पन्न क्षुद्र जन्तु स्वेदज कहलाते हैं ।
4 उदिभज - पृथ्वी से उत्पन्न प्राणियों को उदिभज वर्ग में शामिल किया गया ।
पदम पुराण में एक श्लोक है ।
जलज नव लक्षाणी, स्थावर लक्ष विम्शति, कृमयो रूद्र संख्यकः ।
पक्षिणाम दश लक्षणं, त्रिन्शल लक्षानी पशवः, चतुर लक्षाणी मानवः ।  78-5 पदम पुराण ।
अर्थात - 1 जलज/जलीय जीव/जलचर Water based life forms - 9 लाख 0.9 million
2 स्थिर अर्थात पेड़ पौधे Immobile implying plants and trees - 20 लाख 2.0 million
3 सरीसृप/कृमी/कीड़े-मकोड़े Reptiles - 11 लाख 1.1 million
4 पक्षी/नभचर (Birds) - 10 लाख 1.0 मिलियन
5 स्थलीय/थलचर terrestrial animals - 30 लाख 3.0 million
6  शेष मानवीय नस्ल के । कुल = 84 लाख ।
इस प्रकार हमें 7000 वर्ष पुराने मात्र 1 ही श्लोक में न केवल पृथ्वी पर उपस्थित प्रजातियों की संख्या मिलती है । वरन उनका वर्गीकरण भी मिलता है । इसी प्रकार शरीर रचना के आधार पर भी प्राणियों वर्गीकरण हुआ । इसका उल्लेख विभिन्न आचार्यों के वर्गीकरण के सहारे " प्राचीन भारत में विज्ञान और शिल्प " ग्रंथ में किया गया है ।
जिसके अनुसार - 1 एक शफ ( 1 खुर वाले पशु ) - खर ( गधा ) अश्व ( घोड़ा ) अश्वतर ( खच्चर ) गौर ( एक प्रकार की भैंस ) हिरण इत्यादि ।
2 द्विशफ ( 2 खुर वाले पशु ) - गाय, बकरी, भैंस, कृष्ण मृग आदि ।
3 पंच अंगुल ( 5 अंगुली ) नखों ( पंजों ) वाले पशु - सिंह, व्याघ्र, गज, भालू, श्वान ( कुत्ता ) श्रृंगाल आदि । ( प्राचीन भारत में विज्ञान और शिल्प - page no. 107-110 
इस प्रकार हमें 7000 वर्ष पुराने मात्र 1 ही श्लोक में न केवल पृथ्वी पर उपस्थित प्रजातियों की संख्या मिलती है । वरन उनका वर्गीकरण भी मिलता है । इससे सम्बंधित लेख 23 अगस्त 2011 के The New York Times में भी छपा था । जिसका लिंक ये है ।
http://www.nytimes.com/2011/08/30/science/30species.html?_r=1&
खैर..उपरोक्त वर्णन से यह बिलकुल स्पष्ट है कि हमारे ग्रंथों में वर्णित ये जानकारियां हमारे पुरखों के हजारों लाखों वर्षों की खोज हैं । और उन्होंने न केवल धरती पर चलने वाले अपितु आकाश व अथाह समुद्रों की गहराइयों में रहने वाले जीवों का भी अध्ययन किया । परन्तु पर्याप्त जानकारी एवं उसे ठीक से ना समझ पाने के कारण हम हिन्दू आज अन्धविश्वास से ग्रसित होते जा रहे हैं । जबकि अन्धविश्वास हम हिन्दुओं के लिए नहीं । बल्कि मुस्लिम और ईसाईयों के लिए है । जिनके धर्म ग्रंथों में विज्ञान कहीं नहीं है । बल्कि सिर्फ उस संप्रदाय विशेष को फ़ैलाने और खून खराबा की बातें ही लिखी हुई है । जागो हिन्दुओं और पहचानो । अपने ज्ञान एवं गौरव को । हम विश्वगुरु थे । और विश्वगुरु ही रहेंगे । जय महाकाल ! दहाडो हिन्दुओ ।
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अजीब कानून है भैया ! गाय का चारा खाया । तो जेल भेज दिया । और जो गाय को खा रहा है । उसको हज के लिए भेजते हो । Copy paste
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लङका बोला - दिलरुबा । लङकी बोली - पीजा खिला । 
लङका बोला - पैसे नहीं । लङकी बोली - ऐसे कैसे नहीं ?
लङका बोला - मंहगाई है । लङकी - आज से तू मेरा भाई है ।
साभार - मूर्खिस्तान ।
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आवश्यकता है - 1 गर्ल फ्रेंड की । 
निम्नलिखित पद के लिए आवेदन निमंत्रित की जाती है । सभी प्रकार के पैकेज, लाभ आदि का विवरण नीचे दिया हुआ है । कृपया आवेदन करने से पहले सभी नियम शर्ते एवं लाभ, पूर्ण रूप से पढ़कर अपनी अहर्ता जांच लें । 
पद - जूनियर गर्लफ्रेंड/सहायक प्रेमिका
अनुभव - कम से कम 2 लडकों की गर्ल फ्रेंड रह चुकी हो । तथा गर्ल फ्रेंड के सभी दायित्वों में पारंगत हो । ( अगर अन्य अहर्तायें पूरी हों । तो फ्रेशर/कम अनुभव वाली पर भी विचार किया का सकता है )
आयु - 18-25 वर्ष ( अगर कोई लड़की/महिला दिखने में अच्छी है । और ज्यादा उम्र होने के वावजूद इसी उम्र की लगती हो । तो वह अप्लाई कर सकती है ) लम्बाई, चौड़ाई, वजन, रंग का कोई भेद नहीं है । लाभ तथा मानदेय - सकल मासिक Gross Monthly - 1 उपहार प्रति महीना ( अधिकतम मूल्य Rs 1000 )  ( कोई मूल्यवान धातु जैसे सोना, चांदी या बहुमूल्य रत्न जैसे हीरा इत्यादि की अपेक्षा न रखे )
- लक्ज़री बाइक में मुफ्त सवारी ( अधिकतम 1 घंटा प्रतिदिन )
- कुल्फी/आइसक्रीम/चाकलेट प्रतिदिन ।
- प्रतिदिन Rs 50-100 के समकक्ष मुफ्त नाश्ता जैसे समोसा/ब्रेड पकोड़ा इत्यादि ।
- मुफ्त मूवी ( ऊपर कोने वाली सीट पर ) हर रविवार ।
- महीने में 1 बार मुफ्त - ब्रांडेड जींस/टीशर्ट अथवा स्कर्ट/टॉप अथवा डिज़ाइनर ।
परिधान पसंदानुसार ( लेकिन पिछले महीने का आचरण संतोष जनक होने पर ही यह सुविधा उपलब्ध है )
- मिस्ड कॉल मारने के लिए फ़ोन चालू रखने हेतु Rs 100 का रिचार्ज प्रति महीना । कृपया ध्यान दें कि ऊपर लिखे सब प्रावधान तभी मान्य हैं । जब आपका आचरण आशा अनुरूप एवं संतोषजनक होगा । यह पद 1 वर्ष के लिए अस्थायी होगा । उसके बाद पूर्ण कालिक प्रेमिका बनाने के लिए विचार किया जायेगा । इसमें सफल होने के बाद प्रतिवर्ष 1 नवीनतम स्मार्ट फ़ोन जैसे IPHONE या Galaxy S4  दिया जायेगा । तथा ऊपर लिखी सभी सुविधाएं अनलिमिटेड रूप से प्राप्त होंगी ।
स्थायी होने के बाद वर्ष में 2 बार हीरा या सोना के जवाहरात दिए जायेंगे । जो महिलायें इस ऑफर के लिए अपने आपको उपयुक्त नहीं मानती हैं । उन्हें मन छोटा करने की कोई जरूरत नहीं है । वो Suggest a friend सुविधा का लाभ उठाकर अपनी सहेलियों को Suggest कर सकती है । प्रत्येक सफल रिफरेन्स पर उन्हें फाइव स्टार होटल में लंच अथवा कैंडल लाइट डिनर, उपहार कृतज्ञता स्वरुप कराया जायेगा । विज्ञापनदाता द्वारा लिया निर्णय अंतिम होगा । इसमें कोई वाद विवाद स्वीकार नहीं । कृपया इस विज्ञापन के 5 दिनों के अन्दर अपना बायो-डाटा के साथ आवेदन करें । ( बिना फोटो कोई आवेदन स्वीकार नहीं जायेगा )
नोट - हमारी कोई शाखा नहीं है ।
साभार - मूर्खिस्तान ।
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