10 दिसंबर 2010

वास्तव में ये जीवन भी एक पाठशाला है ।

roop_kaur पोस्ट roop_kaur जी रब्ब आपकी ये मुराद पूरी करे । पर । rajeev ji, 1 zaroori baat ye hai ki jab tak main college mein thi tab sirf physical body ko hi sab kuch samajhati thi. lekin kuch time pehle jab wo padosan mili tab mujhe pata laga ki physical body hi sab kuch nahi iske andar aatma bhi hoti hai. lekin ab is time meri soch ye hai ki wo aatma(soul) main hi hun. main ye physical body nahi hun, ye body meri hai lekin main iske andar jo aatma hai (main wo hun). aur suna hai ki aatma ya soul ya rooh ye 1 bahut hi suksham prakash jaisi hoti hai. aur ye aatma Anaadi, Ajanma, Ajar, Amar aur Abinashi hone ke kaaran sada se hi iska astitav hai and hamesha hi rahega. it means ye aatma jo meri asli pehchaan hai ya jo mera asli savroop hai ye Anadi aur Anant hai. please mujhe is baare mein aap khud kuch batayie apne next article mein. i shall be very thankful to you.
@ roop_kaur जी । early morning आपके message देखे । जैसा कि आपने ( ऊपर ) लिखा है । बस इतनी ही बात समझाने के लिये मुझे खासतौर पर female को बहुत मेहनत करनी होती है । इतनी बात का ग्यान होते ही ye body meri hai lekin main iske andar jo aatma hai (main wo hun). कोई भी साधना बेहद आसान और सरल हो जाती है । आपकी family position के हिसाब से आप बेहतर साधना कर सकती है । अकेलेपन के इंसान को यदि प्रभु भक्ति प्राप्त हो जाय । तो वह वरदान के समान है । although मेरे blogs में अलग अलग article में साधना के बारे में काफ़ी कुछ matter है । फ़िर भी आपके कहने पर मैं soul का चक्र बता रहा हूं । अभी का इंसान योनि में जन्म । 0 to 17 year तक young age यानी बचपन के मस्ती के दिन । 17 to 55 जवानी के दिन । इसमें शादी बच्चे sex life और धन कमाना । औरत के लिये घर संभालना । 55 to 70 बुढापे का सफ़र । और अपने बच्चों को फ़लते फ़ूलते देखना । जो धन सम्मान आदि कमाया । उसका भोग करना । 70 to 125 ( इंसान की real age 125 ही होती है । ) बुढापे के कष्ट । और जीवन से मोहभंग । इस समय अहसास होता है । कि जीवन बेकार गया । और चीजों के साथ नाम भक्ति की होती । तो संतुष्टि होती । 70 to 125 किसी भी समय मौत बुला ले जायेगी ।

after death 84 लाख योनियों में साडे बारह लाख साल तक पशु पक्षी कीट पतंगा आदि योनियों में बेहद कष्ट से रहना । इसके बाद फ़िर से मानुष जन्म । ये सामान्य rule है । यहां 1 खास बात मुझे याद आ रही है । male से female या female से male ये change लाखों जन्म मानुष योनि के बाद हो पाता है । इसका कारन स्वभाव में स्थित रहने के कारन होता है । 1 female 84 में जाने के बाद भी female ही पैदा होगी । आपने कालेज टू पडोसन जो भी सीखा । सुन्दर है । वास्तव में ये जीवन भी एक पाठशाला है । हमारा शरीर अखिल बृह्मांड का map है । 9 द्वार के घर में हम रहते हैं । 2 कान 2 आंख 2 नाक 1 mouth 1 योनि या लिंग 1 गुदा । मृत्यु के समय कान से प्राण निकलने पर भूत प्रेत । आंख से कीट पतंगा । नाक से पक्षी । मुंह से पशु । योनि या लिंग से जलजीव मछली आदि । गुदा से नरक । ये पिंड शरीर ( आई ब्रो के नीचे ) का विवरण है । हम क्योंकि इन्ही अंगो से बरताव करते रहे । अतः ऊपर की बात नही जानते । लिहाजा 84 में जाने की यही मजबूरी हो जाती है । आई ब्रो
के बीच बिंदी या टीका का स्थान बृह्मांड में जाने के लिये द्वार है । यह lock होता है । इसकी चाबी पहुंचे हुये संतो के पास होती है । यह यदि समरपण हो जाय । तो 3 मिनट में खुल जाता है । और दिव्य साधना बडी आसानी से शुरू हो जाती है । इसके कुछ ऊपर जाने पर 10 वां द्वार मिलता है । जिसको एक बार जान लेने के बाद हमेशा मोक्ष होने तक मनुष्य शरीर ही प्राप्त होगा । अंत में इतना ही कहूंगा । realy glad to meet you । समय समय पर आपके प्रश्नों का उत्तर देता रहूंगा । अभी आपके सभी Q का ans नहीं हुआ है । शाम तक शायद दे पाऊं । आपका दिन मंगलमय हो । सत श्री अकाल ।
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