15 सितंबर 2010

क्या कुलदीप जी के प्रश्न का जबाब है । आपके पास ? 2




2- apne kaha ke ek chinti ko marne se kam paap lagta hai aur ek chidiya ko marne se adhik paap lagta hai aur ek kutte ke sharir ke brabar janwar ko marne se aur adhik paap lagta hai aur sabse zyada paap manushya ko marne se lagta haiab aap ye bataye ke chahe jeev atma 84 lakh yoniyo me se kisi bhi roop me ho, chahe wo chinti jaisa chota roop ho . ya kutte jaisa roop ho . aur ya manushya roop ho . un sabme parmeshwar ke ansh ke roop me jeev-atma vidyaman hai .to hum kaise keh sakte hai ke ek choti c chinti ko marne se kam lagega aur ek bade janwar ko marne se zyada paap lagega .jab ye nashwar sharir nashwan hi hai to kyon hum paap-punya ka lekha-jokha karte samay es sharir ka maapdand dekhte hai.?
@ एक चिडिया की आयु में चींटी के सौ और हजार जन्म हो सकते हैं । वहीं हाथी आदि की तुलना में लाख जन्म हो सकते हैं । इनमें तत्वों का अंतर है । किसी में जलतत्व प्रमुख होता है । किसी में अग्नितत्व प्रमुख होता है । चींटी पलक झपकते मर जायेगी । और कुत्ता आदि जानवर गोली से भी मारा जाय तो दस मिनट से दो घण्टा तक ले सकता है । इस दौरान उसको कष्ट की अनुभूति होगी । आत्मा सबमें समान है । पर उपयोग के आधार पर पाप पुन्य को तय किया गया है । मैं आपको एक सत्य घटना बताता हूं । एक राजाके लगभग हजार रानियां थी । फ़िर भी वो निसंतान था । बडे प्रयास के बाद सबसे छोटी रानी के पुत्र हुआ । तब अन्य रानियों ने जलन के कारण उस पुत्र को जहर देकर चुपचाप मार दिया कि पुत्रवती होने से छोटी की वैल्यू बढ जायेगी । राजा अपने इकलौते पुत्र की रहस्यमय मृत्यु के बारे में जानना चाहता था । उसने आत्माओं से सम्पर्क कराने वाले साधुओं से सम्पर्क किया । तो उसका पुत्र स्वर्ग में था । स्वयं उस पुत्र ने बताया कि मैं पिछले जन्म में भी राजकुमार था । और पूर्णतः धर्म आचरण वाला था । किन्तु बालकपन की अवस्था में खेलते समय मैंने चींटियों के बिल में पानी डाल दिया । जिससे हजार चीटिंया मर गयी । और उन्होंने जहर देकर अपना बदला एक साथ चुका लिया । अब यदि आपके सिद्धांत से सोचा जाय । तो प्रत्येक चीटीं को अलग अलग बदला लेना चाहिये ? लेकिन यहां valuation वाली बात लागू हुयी । दरअसल आपका पूरा प्रश्न जिसका केन्द्र बिन्दु चेतन और प्रकृति के border पर पहुंच जाता है । और जहां answer मौखिक नहीं बल्कि अनुभव या प्रक्टीकल से दिया जा सकता है । गो गोचर जंह लगि मन जाई । सो सब माया जानो भाई । गहराई से समझिये । जिस तरह सिनेमा के पर्दे पर दुख सुख साक्षात महसूस होता है । पर वास्तव में होता नहीं है । उसी तरह सुख दुख शरीर द्वारा मन से अनुभूति होती है । वास्तव में यह सब प्रपंच मात्र है । ये आत्मा का महज खेल मात्र है । हां सौभाग्य से मैं वो तरीका जानता हूं कि जिस border की मैं बात कर रहा हूं । वहां की यात्रा आपको करा सकूं । तब फ़िर कोई संशय की बात रह ही नहीं जायेगी । कबीर ने कहा है । तू कहता । कागज की लेखी । मैं कहता । आंखिन की देखी ।3- main apki baat se sehmat hun ke atma ka bhojan amiras hai par mera kendar bindu ye dehik sharir hai .es sharir ko jeevit banaye rakhne ke liye ise urja ki jarurat hoti hai jo sabjiyyo, kand-mul,fruits,etc aadi se prapat hoti hai .aur jab hum apne es sharir ki jarurato ko pura karne ke liye parmeshwar ke ansh rupi sabjiyo ko todte hai to ve bhi roti hai unhe bhi kashat hota hai .aur es tarah hum na chahte huye bhi jeev hatya ke paap se grast ho jate hai .kyoki ye sab bhi ek jeev hatya jaisa hi hai ya yun kahe ki ek prakar ki jeev hatya hi hai, jaise kisi maa ke bache ko china kar pka kar kha jana. agar apko lagta hai ke meri ye sabhi baate jayaz hai to kirpya apne gyaan se en par prakash daliye . mujhe apke jawab ki pratiksha rahegi .
@ अगर आपने हिन्दू सतसंग सुना हो । तो सम्भव है । ये प्रसंग आपके सुनने में आया हो । श्रीकृष्ण के परमात्म ग्यान के गुरु दुर्वासा एक बार वृन्दावन से यमुना पार मथुरा आये हुये थे । कुछ गोपियों को उनसे मिलने जाना था । पर यमुना बेहद चढी हुयी थी । यानी बाढ की तरह उसका जलस्तर बहुत ऊंचा था । ग्वालिनों ने सोचा कि यमुना पार जाने में श्रीकृष्ण ही कोई मदद कर सकते हैं । उन्होंने श्रीकृष्ण से मदद करने को कहा । तब श्रीकृष्ण बोले । बस इतनी सी बात । यमुना से कह देना । यदि श्रीकृष्ण लंगोट का पक्का हो । यानी पूरी तरह बृह्मचारी हो । तो यमुना हमें मार्ग दे दे । ग्वालिनों को बेहद आश्चर्य हुआ । दिन भर जवान गोपिकाओं से रास रचाने वाला लंगोट का पक्का कैसे हो सकता है ? पर उन्होंने उस समय कुछ कहा नहीं । खैर । यमुना ने यह सत्य बात सुनते ही तुरन्त मार्ग दे दिया । गोपियां दुर्वासा के पास पार चली गयीं । दुर्वासा केवल दूर्व या दूव घास का रस सेवन करके ही शरीर को भोजन देते थे । इसीलिये उनका नाम दूर्व आसा हुआ । खैर । दुर्वासा जी गोपियों द्वारा सेवा सत्कार हेतु लाया गया लड्डू मिष्ठान आदि लगभग 50 kg मिष्ठान स्वाद ले लेकर साफ़ कर गये । गोपियां आश्चर्य से दूर्व आसा को खाते देखती रहीं । और कुछ नहीं बोली । लेकिन उफ़नती हुयी यमुना को पार करना फ़िर एक समस्या थी । उधर से तो श्रीकृष्ण ने जुगाड कर दी थी । उन्होंने दुर्वासा से कहा । हम यमुना के पार कैसे जायें ? उन्होंने कहा । यमुना से कह देना । यदि दुर्वासा सिर्फ़ दूव के रस पर जीवित रहता हो । तो ये बात सत्य होने पर यमुना हमें मार्ग दे दे । गोपियों ने सोचा । 50 kg मिष्ठान तो हमारे सामने ही साफ़ कर गये । और कह रहे हैं कि सिर्फ़ दूव के रस पर ? जीवित रहता हो । लेकिन और कोई उपाय भी नहीं था । गोपियों ने यमुना से यही कहा । और यमुना ने तुरन्त मार्ग दे दिया । अब गोपियों के पेट में खलबली मची हुयी थी । एक दिन भर युवा सुन्दर बृज नारियों के साथ रास रचाता है । और खुद को बृह्मचारी कहता है । दूसरा हमारे सामने ही 50 kg मिष्ठान चट कर जाता है । और खुद को सिर्फ़ दूर्व रस सेवन करने वाला कहता है ।*******
..par mera kendar bindu ye dehik sharir hai .es sharir ko jeevit banaye rakhne ke liye ise urja ki jarurat hoti hai jo sabjiyyo, kand-mul,fruits,etc aadi se prapat hoti hai @ ये भी अनजाने में ही सही आप रहस्यमय बात पूछ गये । वास्तव में भोजन की जरूरत शारीरिक वासनाओं की वजह से होती है । अगर आपकी तरह तरह की वासनायें मर जांय । तो इस भोजन की जरूरत नहीं होगी । वासना से ही संस्कारों का निर्माण होता है । और संस्कार ही पाप पुण्य का कारण होते हैं । कहने का आशय यही है कि भूख वासनाओं को लगती है । आपको नहीं । अगर यकीन नहीं होता तो आप एक साधुई प्रयोग करके देखें । लपा @ अपामार्ग के एक मुठ्ठी चावलों की खीर खा के देखें । भूख गायब हो जायेगी । विभिन्न योग संयम द्वारा भूख प्यास जीतना चाहते हैं । तो कुछ दिन साधना करनी होगी । और न खाने के बाबजूद शरीर स्वस्थ और हष्टपुष्ट ही रहेगा । मैं फ़िर से अंत में एक ही बात कहूंगा । ये सब मैं कह ही नहीं रहा हूं । हकीकत में क्रियान्वित करके भी दिखा सकता हूं । than..are you ready..?from . kuldeep singhkuldeep_zk@yahoo.co.in
लेखकीय - अभी कुछ दिनों से आगरा में ट्रांसफ़ार्मर फ़ुक जाने के कारण internet relative कार्य बन्द ही रहा । कुछ और लोगों के उत्तर देने भी शेष हैं । मेरे अन्दाज से इन उत्तर में लगभग आठ दिन का बिलम्ब हो गया ।
एक टिप्पणी भेजें