21 अगस्त 2013

हे भगवान ! मुझे टीवी बना दो

दो मित्र थे । दोनों चुनाव लड़ने की योजना बनाते हैं । उनमें से एक को भाषण देना नहीं आता था । तो वो दूसरे वाले से कहता है - यार ! मुझे तो भाषण देना नहीं आता । तू सब सम्भाल लेगा ना ? दूसरा बोला - अरे चिन्ता मत करो यार । भाषण देने मेँ क्या है । बात से बात जोड़ते जाओ । और बन गया भाषण ।
खैर.. दोनों अपने योजना के अनुरूप चुनाव लड़ते हैं । और अब बारी आती है भाषण की । दूसरा वाला मंच से भाषण शुरू करता है - भाइयो एवं भौजाइयो ! मैं न कोई नेता हूँ । और ना ही कोई अभिनेता ।
सभी 'अभिनेता' मुम्बई शहर में रहते है । लेकिन दिल्ली भी एक 'शहर' है । दिल्ली में चश्मा बहुत मिलता है । चश्मे को उर्दू में झरना कहते है । झरने कश्मीर में बहुत पाये जाते हैं । कश्मीर एक सुन्दर प्रदेश है । सुन्दर तो हेमा मालिनी भी है । हेमा की पहली फिल्म सपनों के सौदागर थी । जिसके हीरो राजकपूर थे । हीरो बहादुर को कहते है । बहादुर तो शेर होता है । 40 'सेर' का 1 मन होता है । मन बहुत चंचल होता है । चंचल मधुबाला की छोटी बहन थी । जिन्होंने मुगले आजम में काम किया । काम तो गधा भी करता है । गधा सीधा और नेक होता है । सीधा तो लौह स्तम्भ भी है । लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल को कहते हैं । सरदार कौम का वफादार होता है । वफादार तो कुत्ता भी होता है । लेकिन कुत्ते की पूँछ टेढ़ी होती है ।
इसी टेढ़ी पूँछ को सीधी करने के लिए मुझे भारी मतों से विजयी बनायें । साभार - Masoom shaan फ़ेसबुक
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एक लड़के को सेल्समेन के इंटरव्यू में इसलिए बाहर कर दिया गया । क्योंकि उसे अंग्रेजी नहीं आती थी । लड़के को अपने आप पर पूरा भरोसा था । उसने मैनेजर से कहा - आपको अंग्रेजी से क्या मतलब ? यदि मैं अंग्रेजी 

वालों से ज्यादा बिक्री न करके दिखा दूँ । तो मुझे तनख्वाह मत दीजिएगा ।
मैनेजर को उस लड़के बात जम गई । उसे नौकरी पर रख लिया गया ।
फिर क्या था । अगले दिन से ही दुकान की बिक्री पहले से ज्यादा बढ़ गई । एक ही सप्ताह के अंदर लड़के ने तीन गुना ज्यादा माल बेचकर दिखाया ।
स्टोर के मालिक को जब पता चला कि एक नए सेल्समेन की वजह से बिक्री इतनी ज्यादा बढ़ गई है । तो वह खुद को रोक न सका । फौरन उस लड़के से मिलने के लिए स्टोर पर पहुँचा । लड़का उस वक्त एक ग्राहक को मछली पकड़ने का कांटा बेच रहा था । मालिक थोड़ी दूर पर खड़ा होकर देखने लगा ।
लड़के ने कांटा बेच दिया । ग्राहक ने कीमत पूछी । लड़के ने कहा – 800 रु. । यह कहकर लड़के ने ग्राहक के जूतों की ओर देखा । और बोला – सर ! इतने मंहगे जूते पहनकर मछली पकड़ने जाएंगे क्या ? खराब हो जायेंगे । एक काम कीजिए । एक जोड़ी सस्ते जूते और ले लीजिए ।
ग्राहक ने जूते भी खरीद लिए । अब लड़का बोला – तालाब किनारे धूप में बैठना पड़ेगा । एक टोपी भी ले लीजिए । ग्राहक ने टोपी भी खरीद ली । अब लड़का बोला – मछली पकड़ने में पता नहीं कितना समय लगेगा । कुछ 

खाने पीने का सामान भी साथ ले जायेंगे । तो बेहतर होगा । ग्राहक ने बिस्किट, नमकीन, पानी की बोतलें भी खरीद लीं ।
अब लड़का बोला – मछली पकड़ लेंगे । तो घर कैसे लायेंगे । एक बॉस्केट भी खरीद लीजिए । ग्राहक ने वह भी खरीद ली । कुल 2500 रु. का सामान लेकर ग्राहक चलता बना ।
मालिक यह नजारा देखकर बहुत खुश हुआ । उसने लड़के को बुलाया । और कहा – तुम तो कमाल के आदमी हो यार ! जो आदमी केवल मछली पकड़ने का कांटा खरीदने आया था । उसे इतना सारा सामान बेच दिया ?
लड़का बोला – कांटा खरीदने ? अरे वह आदमी तो अपनी बीरबानी ( पत्नी ) को मायके छोङकर माचिस खरीदने आया था । मैंने उससे कहा - अब तू घर में बैठा बैठा क्या करेगा । जा के मछली पकड़ ।
साभार masoom shan फ़ेसबुक
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प्राथमिक पाठशाला की एक शिक्षिका ने अपने छात्रों को एक निबंध लिखने को कहा । विषय था - भगवान से आप क्या बनने का वरदान मांगेंगे ?
इस निबंध ने उस क्लास टीचर को इतना भावुक कर दिया कि रोते रोते उस निबंध को लेकर वह घर आ गयी । पति ने रोने का कारण पूछा । तो उसने जवाब दिया - इसे पढ़ें । यह मेरे छात्रों में से एक ने यह निबंध लिखा है ।
निबंध कुछ इस प्रकार था - हे भगवान ! मुझे एक टीवी बना दो । क्योंकि तब मैं अपने परिवार में ख़ास जगह ले पाऊं । और बिना रूकावट या सवालों के मुझे ध्यान से सुना व देखा जायेगा । जब मुझे कुछ होगा । तब टीवी खराब की खलबली पूरे परिवार में सबको होगी । और मुझे जल्द से जल्द सब ठीक हालत में देखने के लिए लालायित रहेंगे । वैसे मम्मी पापा के पास स्कूल और ऑफिस में बिलकुल टाइम नहीं है । लेकिन मैं जब अस्वस्थ रहूँगा । तब मम्मी का चपरासी और पापा के ऑफिस का स्टाफ मुझे सुधरवाने के लिए दौड़ कर आएगा । दादा का पापा के पास कई बार फोन चला जायेगा कि - टीवी जल्दी सुधरवा दो ।
दादी का फेवरेट सीरियल आने वाला है । मेरी दीदी भी मेरे साथ रहने के लिए हमेशा सबसे लडती रहेगी । पापा जब भी ऑफिस से थक कर आएँगे । मेरे साथ ही अपना समय गुजारेंगे । मुझे लगता है कि परिवार का हर सदस्य कुछ न कुछ समय मेरे साथ अवश्य गुजारना चाहेगा । मैं सबकी आँखों में कभी ख़ुशी के तो कभी गम के आंसू देख पाऊंगा ।
आज मैं " स्कूल का बच्चा " मशीन बन गया हूँ । स्कूल में पढ़ाई घर में होमवर्क और ट्यूशन पे ट्यूशन । ना तो मैं खेल पाता हूँ । न ही पिकनिक जा पाता हूँ । इसलिए भगवान मैं सिर्फ एक टीवी की तरह रहना चाहता हूँ । कम से कम रोज़ मैं अपने परिवार के सभी सदस्यों के साथ अपना बेशकीमती समय तो गुजार पाऊंगा ।
पति ने पूरा निबंध ध्यान से पढ़ा । और अपनी राय जाहिर की - हे भगवान ! कितने जल्लाद होंगे । इस गरीब बच्चे के माता पिता ।
पत्नी ने पति को करुण आँखों से देखा । और कहा - यह निबंध हमारे बेटे ने लिखा है !!

साभार Manish Kumar फ़ेसबुक
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