30 अक्तूबर 2012

भारत पाकिस्तान बंटवारे का जिम्मेदार कौन ?


कांग्रेस वर्किंग कमेटी के 15 सदस्यों में से 13 वोट सरदार पटेल जी के पक्ष में पड़ने के बावजूद  इस नेहरू ने कैसे बापू को धमकी देकर हिंदुस्तान की सत्ता हांसिल की । और हमारे देश का बेडा गर्क किया । और आज तक इसके वंशज उसी काम में लगे है ।  कौन है । भारत पाकिस्तान के बंटवारे का जिम्मेदार ? यह जानिये । राजीव दीक्षित जी के वक्तव्य में ।  हिन्दू । मुसलमान । दोनों खास देखें । इस लिंक को खोल कर । और सुनें । पूरे  वक्तव्य को । और आँखे खोलें  अपनी । और लात मारें । ऐसे अय्याश घराने को । जिसने हिंदुस्तान के लाखों शहीदों की शहादत पर पानी फेर दिया । और एक लम्पट आदमी को हमारा प्रधान मंत्री बना दिया । अब सोचये । करना है । 1 और बंटवारा । या बनाना है । भारत को दुनिया में नंबर - 1 गुजरात जैसा ।
1 सुर में कहिये । 1 ही विकल्प मोदी । वन्दे मातरम । विक्रम बारोट ।
http://hindi.ibtl.in/video/6518/indian-partition-and-nehru-edwina-jinnah-relationship--exposed-by-rajiv-dixit
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पिछले 3 वर्ष से फेसबुक के माध्यम से प्रतिदिन धर्म शिक्षण देने का यथासंभव प्रयास कर रही हूँ । पिछले 3 वर्षों में सहस्रों रुपए और सहस्रों घंटे देकर आप तक विशुद्ध हिंदुत्व की विचारधारा पहुंचा रही हूँ । यदि फेसबुक आंकडों को मानें । तो मात्र " तनुजा ठाकुर पेज " की पहुंच 1 करोड़ 3 लाख है । उसी प्रकार प्रोफ़ाइल में भी 22 000 मित्र और सदस्य हैं । आप सब पढते ही होंगे कि प्रतिदिन अनेक व्यक्ति प्रश्न पूछते हैं । अनेक मित्र अनेक प्रकार से उपासना के कार्य की प्रशंसा 

करते हैं । कोई चरण वंदन । तो शत शत चरण वंदन लिखते हैं । परंतु आज तक 3 वर्ष में मात्र 10 मित्रों ने मुझे आर्थिक सहायता दी है । 4 मित्रों को छोड किसी ने नहीं पूछा कि आपके कार्य में धन कहां से आता है ? जबकि आप प्रवचन निशुल्क लेती हैं । अतः क्या मैं आपके कार्य में अंश मात्र आर्थिक सहायता कर सकता हूँ । या सकती हूँ ।
यदि प्रश्न का तुरंत उत्तर न दूँ । तो कई मित्रजन " वाल " पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं कि आपको उत्तर देने में इतनी देर क्यों हो रही हैं ? ( आज हिंदुओं को मात्र अपने अधिकार ज्ञात हैं । कर्तव्य नहीं )
- जब कुछ मित्र मुझसे प्रथम बार मिलने आते हैं । जब मैं उन्हें अपनी CD । ग्रंथ । पत्रिका इत्यादि देती हूँ । तो उसके पैसे तक नहीं देते ( आज हिंदुओं को मात्र ल ( लेना ) अक्षर पता है । द ( देना ) नहीं ) अभी 1 शहर में 1 प्रवचन के समय 1 पत्रकार महोदय ने प्रवचन से पूर्व मेरा परिचय देते हुए मेरी अत्यधिक प्रशंसा की । और प्रवचन के समय लगी हुई ग्रंथ प्रदर्शिनी एवं विक्रय केंद्र से 500 रुपए का साहित्य यूं ही उठाकर चले गए । 
- कुछ 3 या 5 दिवसीय कार्यक्रम करवाते हैं । परंतु टिकट के पैसे भी नहीं देते । दक्षिणा की तो बात ही छोड दें ( यह तो सामान्य बात है कि हम जब किसी से कुछ सीखते हैं । तो उन्हें कुछ तो अर्पण करना चाहिए )
- कुछ मित्रों से मिलने पर वे महंगे कपडे या अन्य कुछ ऊटपटांग मूल्यवान वस्तु मुझे भेंट करते हैं । जो मैं

पहन भी नहीं सकती । और न ही उपयोग में ला सकती हूं । मुझे वह सब किसी को देना पडता है । वे ये नहीं सोचते कि इसके स्थान पर यदि वे अंश मात्र धन अर्पण करें । तो वह मैं धर्म कार्य में लगा सकती हूँ ।
- आज फेसबुक के माध्यम से अनेक लोग साधना कर कर रहे हैं । मात्र 2 साधक मुझे मासिक अर्पण भेजते हैं । 1 नवंबर 2010 से भेज रहे हैं । और 2 महीने से अलीगढ के 1 साधक दंपति श्री और श्रीमती चौहान अपना दशांश अर्पण करते हैं ।
- मेरे जाल स्थान website और ब्लाग भी अनेक लोग पढते हैं । और प्रशंसा करते हैं । परंतु आज तक 1 भी व्यक्ति से 1 रुपए का भी अर्पण नहीं आया । 
- कुछ मित्र मेरे प्रवचन की आड लेकर अपने संस्था के लिए समाज से पैसे की उगाही करते हैं । और अंश मात्र भी धर्म कार्य हेतु अर्पण नहीं करते । पिछले वर्ष 1 शहर की 1 संस्था ने ऐसा किया था । 
- कुछ मित्र मुझे प्रतिदिन आध्यात्मिक लघु संदेश SMS भेजते हैं । और मुझसे उसके उत्तर की अपेक्षा रखते हैं । मुझे 1 SMS का 1.50 रुपए पडता है । यह भी उन्हें ध्यान नहीं आता है ।
मैं यह सब इसलिए नहीं कह रही कि मैं आपसे धन की अपेक्षा रख रही हूं । मैं तो मात्र यह बताना चाहती हूं कि धर्म की निष्काम भाव से सीख देने वाले कुछ तेजस्वी और सात्विक ब्राह्मणों ने पुरोहिताई और धर्म शिक्षण देना

इस कारण से भी छोड दिया है । आप निश्चिंत रहें । मेरा पूर्ण विश्वास है कि यदि मैं निष्काम भाव से उस ईश्वर की धरोहर ( धर्म ) रक्षणार्थ प्रयत्नशील रहूँगी । और यदि मुझे धन की आवश्यकता पडी । और किसी व्यक्ति ने नहीं दिया । तो साक्षात महा लक्ष्मी मेरे तिजोरी में धन रख कर जाएंगी । मैं तो मात्र आपका ध्यान समाज के इस पक्ष की ओर आकृष्ट करना चाहती हूं । 
- अभी जब मैं इंदौर गयी थी । तो वहाँ हमारे श्री गुरु के गुरु के गद्दी पर विराज मान परम पूज्य रामानन्द जी से भेंट हुई । मैंने सोचा । गुरुजन हैं । उन्हें कुछ अर्पण करना चाहिए । तो जब उन्हें कुछ रुपए अर्पण करना चाहा । तो वे कहने लगे - कैसे करती हो । इतना धर्म 

कार्य । मैंने कहा - भिक्षाटन में जो मिल जाता है । उसी से पाई पाई जोड कर । वे झट से बोले - तब तो मैं तुमसे नहीं ले सकता । मुझे तुम्हें देना होगा । और उन्होंने मुझे रुपए कार्य हेतु अर्पण किए । सामान्य व्यक्ति और संत में यह अंतर है । 1 लेना जानता है  । और दूसरा देना ।
और ये है । अपने ही लेख पर तनुजा ठाकुर का कमेंट ।
Tanuja Thakur - hahahaha pls dont give conditions and do the donation as I will do anything to restablsh dharm if I need I will enter politics too , but since that is not my area of operation would place someone eligible and go back to my den ! politics and dharm are not different they are complimentary to each other ! But I can assure you one thing I am not interested in anything in this world except my shreeguru  's lotus feet!
http://www.facebook.com/photo.php?fbid=432242916813679&set=a.100708143300493.1434.100000839237234&type=1&theater
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शाहरुख़ खान की कलकत्ता टीम में मुस्लिम लड़के ही क्यों ? टीम का कोच वसीम अकरम पाकिस्तानी मुल्ला ही क्यों ? पाकिस्तान में बाड पीडितों को सहायता क्यों । क्या भारत में भुकंप और बाढ पीड़ित नहीं हैं क्या ? भारत में IPL के लिए पाकिस्तानी खिलाडियों की पैरवी क्यों ? हिन्दू विरोधी जाकिर नायक से क्या रिश्ता ? शाहरुख़ का 1 खिलाडी आतंकी के संपर्क में कैसे ? ये IPL के जरिये आतंकियों का का पैसा भारत में ला रहा हे । ये आतंक वादी है । जिहादियो का एजेंट है । जय श्री राम राज सिंघल
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इस लिंक को खोलिये । और हिमाचल में मोदी जी का वक्तव्य सुनिये । और सुनिये - तालिबानी खांग्रेस की बेशर्मी की बातें । मजा आएगा । 
http://www.narendramodi.in/vote-for-lotus-to-prevent-sins-of-delhi-from-corrupting-dev-bhoomi-himachal-pradesh-cm/
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मिट्टी की अनोखी मूरत हो तुम । जिन्दगी की एक जरूरत हो तुम ।
फ़ूल तो खूबसूरत होते हैं । फ़ूलों से भी खूबसूरत हो तुम ।
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अकबर महान या शैतान ? अकबर का सच । जो हमसे छुपाया गया । और गलत इतिहास पढाया गया । कभी भी कोई भी आत्म सम्मान वाला देश और उसके देशवासी अपने देश को लूटने । अपनी बहन बेटी के बलात्कार करने वाले । और हर तरह के व्यभिचारी आक्रमण कर्ताओं लोगों के द्वारा लिखा इतिहास स्वीकार नही कर सकते । तो फिर हम लोगों को क्या हो गया है ? जो हम महाराणा प्रताप को कायर और अकबर को महान बोलते हैं । अकबर को महान बोलने वाले लोग यहाँ पर भी देखे कि कैसे हम लोगो से सच को 

छुपा कर आज तक गुलाम बना कर रखा गया है । हिन्दुस्तान का अस्तित्व मिटाने के लिए इतिहास कार विंसेट स्मिथ ने साफ़ लिखा है कि - अकबर 1 सबसे बड़ा दुष्कर्मी । घृणित । पूर्व विचारित । नृशंस हत्याकांड करने वाला क्रूर शासक था । और आप और हम सब क्या पढ़ रहे है कि - अकबर महान था । क्या ये सब महानता के लक्षण होते है ?
- जून 1561 - एटा जिले के ( सकित परंगना ) के 8 गावों की हिंदू जनता के विरुद्ध अकबर ने खुद 1 आक्रमण का संचालन करा और परोख नाम के गावों के 1 मकान मे 1000 से ज़्यादा हिंदुओं को बंद करके जिंदा जलवा दिया था । क्या ये था अकबर महान ?
- क्या अकबर ने हिंदू राजकुमारियों से इज़्ज़त के साथ विवाह करे ? नही । 1 से भी नहीं । जोधा बाई से भी नही । ये सभी बलात उठाई गयी थी । या फिर उनके बाप भाई को हिरासत मे लेकर दी गयी यातना बंद करने का एकमात्र शर्त पूरी करने का प्रतिफल थी । चाहे वो राजा भारमल और उनके 3 राजकुमारों को यातना देकर उनकी पुत्री को हरम मे भेजने को मज़बूर करना हो । इसके अनगिनत उदहारण हैं । सबूतों के साथ ।

- सबसे मनगढ़ंत किस्सा कि अकबर ने दया करके सती प्रथा पर रोक लगा दी । जबकि इसके पीछे उसका मुख्य मकसद केवल यही था कि उनके राजाओं को मार कर राजकुलिन हिन्दू नारियों को अपने हरम में ठूंस दो । राजकुमार जैमल की हत्या के पश्चात अपनी अस्मत बचाने को घोड़े पे सवार होकर सती होने जा रही उसकी पत्नी को अकबर ने शमशान घाट जा रहे सम्बन्धियों को बीच रास्ते से ही पकड़ कर उसके सारे सम्बन्धियों को कारागार में डाल के राजकुमारी को हरम में ठूंस दिया था । अगर वो दया वाला था । तो ससम्मान उसके जिंदा सम्बन्धियों को समर्पित कर देता । और जाने देता ।
- अकबर की प्रशंसा के गीत गाने वाला अबुल फज़ल आईने अकबरी को अकबर के समय के सारे मुगलों ने

अकबर का 1 नंबर का निर्लज्ज चापलूस बताया है ।
- जिसके खानदान के सारे पूर्वज़ जैसे हुमायूँ बाबर दुनिया के सबसे बड़े जल्लाद थे । और अकबर के बाद के जहागीर और औरंगजेब दुनिया के सबसे बड़े दरिन्दे थे । तो ये बीच में महानता की पैदायश कैसे हो गयी ? जबकि इसके कुकर्मों के सारे साक्ष्य आज भी उपस्थित है । लेकिन हम भारतीयों की हालत वही है कि ?
- अकबर के सभी धर्म के सम्मान करने का सबसे बड़ा सबूत - हिन्दुस्तान की सभी नदियों के किनारे छोटे छोटे घाट बने हैं । जहाँ हिन्दू अपने पर्व पर सरलता से स्नान और पूजा करते हैं । लेकिन हिन्दू राजाओं द्वारा निर्मित इलाहाबाद के किले में जहाँ ये रहता था । गंगा यमुना सरस्वती का संगम ( 

जहाँ कुम्भ का मेला होता आ रहा है ) के किनारे के सारे घाट इस पिशाच मुग़ल ने तोड़ डाले थे । आज भी वो सारे साक्ष्य वह मौजूद है ।
अकबर के सभी धर्म के सम्मान करने का सबसे बड़ा सबूत - 28 Feb 1580 को गोवा से 1 पुर्तगाली मिशन इसके 1 और निवास स्थान फतेहपुर पंहुचा । जहाँ उन लोगो ने इनको 1 बाइबल भेंट करी । जिसे इसने बिना खोले ही वापस कर दिया ( मोदी जी के मुल्ला टोपी न पहनने पर बवाल मचाने वाले सेकुलर इसके बारे में क्या कुछ बोलना चाहेंगे ? )
- हमारे इतिहास में हम लोगो को मुर्ख बनाने को कहा जाता है कि - अकबर को देवी आती थी । जबकि 1578 में

उसे पहली बार मिर्गी का दौरा पड़ा था । क्योंकि उसके सभी दरबारी उससे बगावत कर रहे थे जिससे उसकी मानसिक हालत ख़राब हो चुकी थी ।
- 4 aug 1582 को इस्लाम को अस्वीकार करने के कारण सूरत के 2 ईसाई युवकों को अकबर ने अपने हाथों से क़त्ल किया था । जबकि ईसाईयों ने इन दोनों युवकों को छोड़ने के लिए 1000 सोने के सिक्को का सौदा किया था । लेकिन उसने क़त्ल ज्यादा सही समझा ।
- aug1582 में 20 नवजात हिन्दू शिशुओं को उनकी माताओं से छीन कर भाषा उत्पत्ति नमक 1 गन्दा अमानवीय प्रयोग करने के लिए एकांत और निर्जन स्थान पर भेज दिया । जिसमे वो सभी अकाल मृत्यु के शिकार हो गए ।
- 1587 में जनता का धन लुटने और अपने खिलाफ हो रहे विरोधों को ख़त्म करने के लिए अकबर ने 1 आदेश

पारित करा कि - जो भी उससे मिलना चाहेगा । उसको अपनी उमृ के बराबर मुद्रायें उसको भेंट में देनी पड़ेगी ।
- जिन्दगी भर अकबर की गुलामी करने वाले हिन्दू राजा टोडरमल ने अपने जीवन के आखिरी समय में अपनी गलती मान कर उसके प्रेषित के लिए हरिद्वार में अपने प्राण त्यागने की इच्छा जताई थी ।
- औरतों का झूठा सम्मान करने वाले अकबर ने सिर्फ राजपाट और अपनी हवस के लिए न जाने कितनी मुस्लिम औरतों की अस्मत लुटी थी । और हिन्दू औरतों को हरम में ठूंस दिया था । इसमें मुस्लिम नारी चाँद बीबी का नाम भी है ।

औरतों का झूठा सम्मान करने वाले अकबर ने सिर्फ राजपाट और अपनी हवस के लिए अपनी सगी बेटी आराम बेगम की पूरी जिंदगी शादी नहीं की । और अंत में उसकी मौत अविवाहित ही जहागीर के शासन काल में हुयी ।
- दिन भर इसके चाटुकारिता करने वाले अबुल फज़ल की चापलूसी की हरकतों से तंग आकर अकबर के पुत्र सलीम ने ही उसको घात लगा कर ग्वालियर में हत्या कर दी थी ।
- जीवन भर इससे युद्ध करने वाले महान महाराणा प्रताप जी से अंत में इसने खुद ही हार मान ली थी । और इसको हरा कर हिन्दू राजाओं की अस्मत बचाने का श्रय हिन्दू राजाओं ने महाराणा प्रताप के ही सर पर बंधा था (  इन्ही महाराणा को मुस्लिम तुष्टिकरण और हिन्दू क़त्ल के प्यासे गाँधी ने कायर बताया था ) इसी परंपरा को अकबर के पुत्र जहागीर ने आगे बढ़ाया था कि अकबर के बार बार निवेदन करने पर भी जीवन भर जहागीर केवल ये बहाना करके .महाराणा प्रताप के पुत्र अमर सिंह से युद्ध करने नहीं गया कि उसके पास हथियारों और सैनिकों की कमी है । जबकि असलियत ये थी कि उसको अपने बाप का बुरा हश्र याद था ।
शेष जारी । अभी बहुत कुछ है बाकी
http://hindurashtra.wordpress.com/2012/03/27/372/
http://www.facebook.com/photo.php?fbid=552315601451014&set=a.402583873090855.113599.256288937720350&type=1&theater
- सभी विवरण नेट से साभार । सभी लिंक सलंग्न ।

26 अक्तूबर 2012

इस्‍लाम का साम्‍य भाव भाईचारा 1 निराधार कल्पना


जय गुरुदेव जी ! राजीव जी ।  नमस्कार । 1 राजीव जी ! वैदिक मंत्र व तांत्रिक मंत्र में क्या अंतर होता है ? मंत्र कैसे काम करते है ? मंत्र के अक्षरों में शक्ति कहाँ से आती है ? 1 मंत्र है - ॐ एं ह्यीं क्लीं चामुण्डा विच्ये नमः .. इस मंत्र का अर्थ होता है ? जो इस मंत्र जाप करते हैं । उन पर इसका क्या प्रभाब होता है । उन लोगों को क्या सिद्धि होती है ?  कृपया मार्गदर्शन करे ।
2 जन्म राशि रत्न का क्या प्रभाव होता है ? आपके अनुसार क्या रत्न धारण करना चाहिए ? जो आपकी राशि की अनुकूल हो । धन्यवाद
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कुछ लोगों का मानना है कि भारत में इस्लाम का प्रचार प्रसार बहुत ही सौहार्द पूर्ण वातावरण में हुआ है । उनका यह भी कहना है कि हिंदू समाज में छुआछूत के कारण भारत में हिन्दुओं ने बड़ी मात्रा में इस्लाम को अपनाया । उनके शब्दों में - हिंदुओं के मध्‍य फैले रूढिगत जातिवाद और छूआछूत के कारण वश खासतौर पर कथित पिछड़ी जातियों के लोग इस्‍लाम के साम्‍य भाव और भाईचारे की ओर आकृष्‍ट हुए  । और स्‍वेच्‍छा पूर्वक इस्‍लाम को ग्रहण किया ।
जिन लोगों ने अंग्रेजों द्वारा लिखे गए व स्वतंत्र भारत के वामपंथी " बुद्धिजीवियों "  द्वारा दुर्भावना पूर्वक विकृत किये गए भारतीय इतिहास को पढ़कर अपनी उपर्युक्त धारणाएँ बना रखीं हैं । उन्हें इतिहास का शोधपरक अध्ययन करना चाहिए । उपर्युक्त कथन के विपरीत । सूर्य जैसा जगमगाता हुआ । सच तो यह है कि भारत के लोगों का इस्लाम के साथ पहला पहला परिचय युद्ध के मैदान में हुआ था ।
भारतवासियों ने पहले ही दिन से दीन ? के बन्दों के ईमान ? में मल्लेछ प्रवृत्ति वाले असुरों की झलक को साफ़ 

साफ़ देख लिया था । तथा उस पहले ही दिन से भारत के लोगों ने उन क्रूर आक्रांताओं और बर्बर लोगों से घृणा करना शुरू कर दिया था ।
अतः इस कथन में कोई सच्चाई नहीं है कि भारत के लोगों ने इस्लाम के कथित साम्य भाव और भाईचारे के दर्शन किये । और उससे आकर्षित होकर स्वेच्छा पूर्वक इस्लाम को ग्रहण किया ।
असल में हिंदुत्व और इस्लाम दोनों बिलकुल भिन्न विचार धाराएँ हैं । बल्कि साफ़ कहा जाए । तो दोनों एक दूसरे से पूर्णतया विपरीत मान्यताओं वाली संस्कृतियाँ हैं । जिनके मध्य सदियों पहले शुरू हुआ संघर्ष आज तक चल रहा है ।
हाँ ! इस्लामी आकृमण के अनेक वर्षों बाद भारत में कुछ समय के लिए सूफियों का खूब बोलबाला रहा । सूफियों के उस उदारवादी काल में निश्चित रूप से इस्लामी क्रूरता भी मंद पड़ गयी थी । परन्तु उस काल में भी भारत के मूल हिंदू समाज ने कथित इस्लामी साम्य भाव ? से मोहित होकर स्वेच्छा पूर्वक इस्लाम को अपनाने का कोई अभियान शुरू कर दिया था । इस बात का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलता है ।
हाँ ! संघर्ष की इस लम्बी कालावधि में स्वयं समय ने ही कुछ घाव भरे । और अंग्रेजों के आगमन से पहले तक दोनों समुदायों के लोगों ने परस्पर संघर्ष रहित जीवन जीने का कुछ कुछ ढंग सीख लिया था । उस समय इस्लामिक कट्टरवाद अंततः भारतीय संस्कृति में विलीन होने लगा था ।

यथार्थ में भारत के हिन्दुओं को इस्लाम के कथित साम्य भाव और भाईचारे का कभी भी परिचय नहीं मिल पाया । इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण तो यही है कि मुसलमानों ने भारत के सनातन हिंदू धर्मावलम्बियों के साथ किसी दूसरे कारण से नहीं । बल्कि इस्लाम के ही नाम पर लगातार संघर्ष जारी रखा है । हिन्दुओं ने भी इस्लामी आतकवादियों के समक्ष कभी भी अपनी हार नहीं मानी । और वे मुसलमानों के प्रथम आक्रमण के समय से ही उनके अमानवीय तौर तरीकों के विरुद्ध निरंतर संघर्ष करते आ रहे हैं । महमूद गज़नबी हो । या तैमूर लंग । नादिरशाह हो । या औरंगजेब । जिन्ना हो । या जिया उल हक । अथवा मुशर्रफ । कट्टरपंथी मुसलमानों के विरुद्ध हिन्दुओं का संघर्ष पिछले 1200 वर्षों से लगातार चलता आ रहा है ।

जिस इस्लाम के कारण ? भारत देश में सदियों से चला आ रहा भीषण संघर्ष आज भी जारी हो । उसके मूल निवासियों के बारे में यह कहना कि - यहाँ के लोग उसी इस्‍लाम के साम्‍य भाव ? और भाईचारे ? की ओर आकृष्‍ट हुए । 1 निराधार कल्पना मात्र है । जो कि सत्य से कोसों दूर है । भारत के इतिहास में ऐसा 1 भी प्रमाण नहीं मिलता । जिसमे हिंदू समाज के लोगों ने इस्लाम में साम्य भाव देखा हो । और इसके भाई चारे से आकृष्ट होकर लोगों ने सामूहिक रूप से इस्लाम को अपनाया हो । 
आईये । अब हिन्दुओं के रूढ़िगत जातिवाद और छुआछूत पर भी विचार कर लें । हिन्दुओं में आदिकाल से गोत्र व्यवस्था रही है । वर्ण व्यवस्था भी थी । परन्तु जातियाँ नहीं थीं । वेद सम्मत वर्ण व्यवस्था समाज में विभिन्न कार्यों के विभाजन की दृष्टि से लागू थी । यह व्यवस्था जन्म पर आधारित न होकर सीधे सीधे कर्म ( कार्य ) पर आधारित थी । कोई भी वर्ण दूसरे को ऊँचा या नीचा नहीं समझता था ।

उदाहरणार्थ अपने प्रारंभिक जीवन में शूद्र कर्म में प्रवृत्त वाल्मीकि जी जब अपने कर्मों में परिवर्तन के बाद पूजनीय ब्राह्मणों के वर्ण में मान्यता पा गए । तो वे तत्कालीन समाज में महर्षि के रूप में प्रतिष्ठित हुए । श्री राम सहित चारों भाइयों के विवाह के अवसर पर जब जनकपुर में राजा दशरथ ने चारों दुल्हनों की डोली ले जाने से पहले देश के सभी प्रतिष्ठित ब्राह्मणों को दान और उपहार देने के लिए बुलाया था । तो उन्होंने श्री वाल्मीकि जी को भी विशेष आदर के साथ आमंत्रित किया था ।
संभव है । हिंदू समाज में मुसलमानों के आगमन से पहले ही जातियाँ अपने अस्तित्व में आ गयी हों । परन्तु भारत की वर्तमान जाति प्रथा में छुआछूत का जैसा घिनौना रूप अभी देखने में आता है । वह निश्चित रूप से मुस्लिम आक्रान्ताओं की ही देन है ।
कैसे ? देखिए । आरम्भ से ही मुसलमानों के यहाँ पर्दा प्रथा अपने चरम पर रही है । यह भी जग जाहिर है कि 

मुसलमान लड़ाकों के कबीलों में पारस्परिक शत्रुता रहा करती थी । इस कारण कबीले के सरदारों व सिपाहियों की बेगमें कभी अकेली कबीले से बाहर नहीं निकलती थीं । अकेले बाहर निकलने पर इन्हें दुश्मन कबीले के लोगों द्वारा उठा लिए जाने का भय रहता था । इसलिए ये अपना शौच का काम भी घर में ही निपटाती थीं । उस काल में कबीलों में शौच के लिए जो व्यवस्था बनी हुई थी । उसके अनुसार घर के भीतर ही शौच करने के बाद उस विष्टा को हाथ से उठाकर घर से दूर कहीं बाहर फेंककर आना होता था ।
सरदारों ने इस काम के लिए अपने दासों को लगा रखा था । जो व्यक्ति मैला उठाने के काम के लिए नियुक्त था । उससे फिर खान पान से सम्बंधित कोई अन्य काम नहीं करवाते थे । स्वाभाविक रूप से कबीले के सबसे निकम्मे व्यक्ति को ही विष्ठा उठाने वाले काम में लगाया जाता था । कभी कभी दूसरे लोगों को भी यह काम सजा के तौर पर करना पड़ जाता था । इस प्रकार वह मैला उठाने वाला आदमी इस्लामी समाज में पहले तो निकृष्ट नीच घोषित हुआ । और फिर एक मात्र विष्टा उठाने के ही काम पर लगे रहने के कारण बाद में उसे अछूत घोषित कर दिया गया ।
वर्तमान में हिंदू समाज में जाति प्रथा और छूआछूत का जो अत्यंत निंदनीय रूप देखने में आता है । वह इस समाज को मुस्लिम आक्रान्ताओं की ही देन है । आगे इसे और अधिक स्पष्ट करेंगे । कैसे ?
अपने लम्बे संघर्ष के बाद चंद जयचंदों के पाप के कारण जब इस्लाम भारत में अपनी घुसपैठ बनाने में

कामयाब हो ही गया । तो बाद में कुतर्क फ़ैलाने में माहिर मुसलमान बुद्धिजीवियों ने घर में बैठकर विष्टा करने की अपनी ही घिनौनी रीत को हिंदू समाज पर थोप दिया । और बाद में हिन्दुओं पर जातिवाद और छुआछूत फ़ैलाने के उल्टे आरोप मढ़ दिए ।
यह अकाटय सत्य है कि मुसलमानों के आने से पहले घर में शौच करने और मैला ढोने की परम्परा सनातन हिंदू समाज में थी ही नहीं । जब हिंदू शौच के लिए घर से निकल कर किसी दूर स्थान पर ही दिशा मैदान के लिए जाया करते थे । तो विष्टा उठाने का तो प्रश्न ही नहीं उठता । जब विष्टा ढोने का आधार ही समाप्त हो जाता है । तो हिंदू समाज में अछूत कहाँ से आ गया ?
हिन्दुओं के शास्त्रों में इन बातों का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि व्यक्ति को शौच के लिए गाँव के बाहर किस दिशा में कहाँ जाना चाहिए । तथा कब किस दिशा की ओर मुँह करके शौच के लिए बैठना चाहिए आदि आदि ।
प्रमाण - नैऋत्यामिषुविक्षेपमतीत्याभ्यधि कमभुवः । पाराशर
- यदि खुली जगह मिले । तो गाँव से नैऋत्य कोण ( दक्षिण और पश्चिम के बीच ) की ओर कुछ दूर जाएँ ।
दिवा संध्यासु कर्णस्थब्रह्मसूत्र उद्न्मुखः । कुर्यान्मूत्रपुरीषे तु रात्रौ च दक्षिणामुखः । याज्ञ 1। 16 बाधूलस्मृ 8 
- शौच के लिए बैठते समय सुबह शाम और दिन में उत्तर की ओर मुँह करें । तथा रात में दक्षिण की ओर ।

( सभी प्रमाण जिस नित्यकर्म पूजा प्रकाश । गीता प्रेस गोरखपुर । संवत 2054 । चौदहवाँ संस्करण । पृष्ठ 13 से उद्धत किये गए हैं । वह पुस्तक 1 सामान्य हिंदू के घर में सहज ही उपलब्ध होती है )
इस्लाम की विश्व व्यापी आँधी के विरुद्ध सत्व गुण संपन्न हिंदू समाज के भीषण संघर्ष की गाथा बड़ी ही मार्मिक है ।
दीन के नाम पर सोने की चिड़िया को बार बार लूटने के लिए आने वाले मुसलमानों ने उदार चित्त हिन्दुओं पर बिना चेतावनी दिए ही ताबड़ तोड़ हमले बोले । उन्होंने हिंदू ललनाओं के शील भंग किये । कन्याओं को उठाकर ले गए । दासों की मण्डी से आये बर्बर अत्याचारियों ने हारे हुए सभी हिंदू

महिला पुरुषों को संपत्ति सहित अपनी लूट की कमाई समझा । और मिल बाँटकर भोगा । हजारों क्षत्राणियों को अपनी लाज बचाने के लिए सामूहिक रूप से जौहर करना पड़ा । और वे जीवित ही विशाल अग्नि कुण्डों में कूद गयीं ।
हिन्दुओं को इस्लाम अपनाने के लिए पीड़ित करते समय घोर अमानवीय यंत्रणाएँ दी गयीं । जो लोग टूट गए । वे मुसलमान बन जाने से इनके भाई हो गए । और अगली लूट के माल में हिस्सा पाने लगे । जो जिद्दी हिंदू अपने मानव धर्म पर अडिग रहे । तथा जिन्हें बलात्कारी लुटेरों का साथी बनना नहीं भाया । उन्हें निर्दयता से मार गिराया गया । अपने देश में सोनिया माइनो के कई खास सिपाहसालार तथा मौके को देखकर आज भी तुरंत पाला बदल जाने वाले अनेकानेक मतान्तरित मुसलमान उन्हीं सुविधा भोगी तथाकथित हिन्दुओं की संतानें हैं । जो पहले कभी हिंदू ही थे । तथा जिन्होंने

जान बचाने के लिए अपने शाश्वत हिंदू धर्म को ठोकर मार दी । उन लोगों ने अपनी हिफाज़त के लिए अपनी बेटियों की लाज को तार तार हो जाने दिया । और उन नर भेड़ियों का साथ देना ही ज्यादा फायदेमंद समझा । बाद में ये नए नए मुसलमान उन लुटेरों के साथ मिलकर अपने दूसरे हिंदू रिश्तेदारों की कन्याओं को उठाने लगे ।
किसी कवि की 2 पंक्तियाँ हैं । जो उस काल के हिन्दुओं के चरित्र का सटीक चित्रण करती हैं ।
जिनको थी आन प्यारी वो बलिदान हो गए । जिनको थी जान प्यारी मुसलमान हो गए ।
विषय के विस्तार से बचते हुए यहाँ अपनी उस बात को ही और अधिक स्पष्ट करते हैं कि कैसे मुसलमानों ने ही हिन्दुओं में छुआछूत के कलंक को स्थापित किया । अल्लाह के दीन को अपने ईमान से दुनिया भर में पहुँचाने के अभियान पर निकले निष्ठुर 

कठमुल्लों ने हिंदू को अपनी राह का प्रमुख रोड़ा मान लिया था । इसलिए उन्होंने अपने विश्वास के प्रति निष्ठावान हिंदू पर बेहिसाब जुल्म ढाए । आततायी मुसलमान सुल्तानों के जमाने में असहाय हिंदू जनता पर कैसे कैसे अत्याचार हुए ? उन सबका अंश मात्र भी वर्णन कर पाना संभव नहीं है ।
मुसलमानों के अत्याचारों के खिलाफ लड़ने वाले हिन्दू वीरों की 3 प्रकार से अलग अलग परिणतियाँ हुईं ।
पहली परिणति - जिन हिंदू वीरों को धर्म के पथ पर लड़ते लड़ते मार गिराया गया । वे वीरगति को प्राप्त होकर धन्य हो गए । उनके लिए सीधे मोक्ष के द्वार खुल गए ?
दूसरी परिणति - जो हिन्दू मौत से डरकर मुसलमान बन गए । उनकी चांदी हो गई । अब उन्हें किसी भी प्रकार का सामाजिक कष्ट न रहा । बल्कि उनका सामाजिक रुतबा पहले से कहीं अधिक बढ़ गया । अब उन्हें धर्म के पक्के उन जिद्दी हिन्दुओं के ऊपर ताल्लुकेदार बनाकर बिठा दिया गया । जिनके यहाँ कभी वे स्वयं चाकरी किया करते थे । उन्हें करों में ढेरों रियायतें मिलने लगीं । जजिये की तो चिंता ही शेष न रही ।
तीसरी परिणति - 1000 वर्षों से भी अधिक चले हिंदू मुस्लिम संघर्ष का यह सबसे अधिक मार्मिक और पीड़ा जनक अध्याय है ।
यह तीसरे प्रकार की परिणति उन हिंदू वीरों की हुई । जिन्हें युद्ध में मारा नहीं गया । बल्कि कैद कर लिया गया । मुसलमानों ने उनसे इस्लाम कबूलवाने के लिए उन्हें घोर यातनाएँ दीं । चूँकि अपने उदात्त जीवन में उन्होंने असत्य के आगे कभी झुकना नहीं सीखा था । इसलिए सब प्रकार के जुल्मों को सहकर भी उन्होंने इस्लाम नहीं कबूला । अपने सनातन हिंदू धर्म के प्रति अटूट विश्वास ने उन्हें मुसलमान न बनने दिया । और परिवारों का जीवन घोर संकट में था । अतः उनके लिए अकेले अकेले मरकर मोक्ष पा जाना ? भी इतना सहज नहीं रह गया था ।
ऐसी विकट परिस्थिति में मुसलमानों ने उन्हें जीवन दान देने के लिए उनके सामने 1 घृणित प्रस्ताव रख दिया । तथा इस प्रस्ताव के साथ 1 शर्त भी रख दी गई । उन्हें कहा गया कि यदि वे जीना चाहते हैं । तो मुसलमानों के घरों से उनकी विष्टा ( टट्टी ) उठाने का काम करना पड़ेगा । उनके परिवार जनों का काम भी साफ़ सफाई करना और मैला उठाना ही होगा । तथा उन्हें अपने जीवन यापन के लिए सदा सदा के लिए केवल यही 1 काम करने कि अनुमति होगी ।
19 dec 1421 के लेख के अनुसार जाफर मक्की नामक विद्वान का कहना है - हिन्दुओं के इस्लाम ग्रहण करने के मुखय कारण थे । मृत्यु का भय । परिवार की गुलामी । आर्थिक लोभ ( जैसे मुसलमान होने पर पारितोषिक । पेंशन । और युद्ध में मिली लूट में भाग ) हिन्दू धर्म में घोर अन्ध विश्वास और अन्त में प्रभावी धर्म प्रचार ।
इस प्रकार समय के कुचक्र के कारण अनेक स्थानों पर हजारों हिंदू वीरों को परिवार सहित जिन्दा रहने के लिए ऐसी घोर अपमानजनक शर्त स्वीकार करनी पड़ी । मुसलमानों ने पूरे हिंदू समाज पर 1 मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति पर काम किया । और उन्होंने वीर क्षत्रियों को ही अपना मुख्य निशाना बनाया । मुस्लिम आतंकवाद के पागल हाथी ने हिंदू धर्म के वीर योद्धाओं को परिवार सहित सब प्रकार से अपने पैरों तले रौंद डाला । सभी तरह की चल अचल संपत्ति पहले ही छीनी जा चुकी थी । घर जला दिए गए थे ।
परिवार की महिलाओं और कन्याओं पर असुरों की गिद्ध दृष्टि लगी ही रहती थी । फिर भी अपने कर्म सिद्धांत पर दृढ़ विश्वास रखने वाले उन आस्थावान हिन्दुओं ने अपने परिवार और शेष हिंदू समुदाय के दूरगामी हितों को ध्यान में रखते हुए अपनी नियति को स्वीकार किया । और पल पल अपमान के घूँट पीते हुए अपने राम पर अटूट भरोसा रखा । उपासना स्थलों को पहले ही तोड़ दिया गया था । इसलिए उन्होंने अपने हृदय में ही राम कृष्ण की प्रतिमाएँ स्थापित कर लीं । परस्पर अभिवादन के लिए वेद सम्मत नमस्ते को तिलांजलि दे डाली । और राम राम बोलने का प्रचार शुरू कर दिया । समय निकला । तो कभी आपस में बैठकर सतसंग भी कर लिया । छुप छुप कर अपने सभी उत्सव मनाते रहे । और सनातन धर्म की पताका को अपने हृदयाकाश में ही लहराते रहे ।
उनका सब कुछ खण्ड खण्ड हो चुका था । परन्तु उन्होंने धर्म के प्रति अपनी निष्ठा को लेशमात्र भी खंडित नहीं होने दिया । धर्म परिवर्तन न करने के दंड के रूप में मुसलमानों ने उन्हें परिवार सहित केवल मैला ढोने के एकमात्र काम की ही अनुमति दी थी । पीढ़ी दर पीढ़ी वही करते चले गए । कई पीढ़ियाँ बीत जाने पर अपने कर्म में ही ईश्वर का वास समझने वाले उन कर्मनिष्ठ हिन्दुओं के मनो में से नीच कर्म का अहसास करने वाली भावना ही खो गई । अब तो उन्हें अपने अपमान का भी बोध न रहा ।
मुसलमानों की देखा देखी हिन्दुओं को भी घर के भीतर ही शौच करने में अधिक सुविधा लगने लगी । तथा अब वे मैला उठाने वाले लोग हिन्दुओं के घरों में से भी मैला उठाने लगे । इस प्रकार किसी भले समय के राजे रजवाड़े मुस्लिम आक्रमणों के कुचक्र में फंस जाने से अपने धर्म की रक्षा करने के कारण पूरे समाज के लिए ही मैला ढोने वाले अछूत और नीच बन गए ।
उक्त शोध परक लेख न तो किसी पंथ विशेष को अपमानित करने के लिए लिखा गया है । और न ही 2 पंथिक विचार धाराओं में तनाव खड़ा करने के लिए । केवल ऐतिहासिक भ्रांतियों को उजागर करने के लिए लिखे गये इस लेख में प्रमाण सहित घटनाओं की कृमबद्धता प्रस्तुत की गयी है ।
वर्ण और जाति में भारी अंतर है । तथा यह लेख मूलतः छूआछूत के कलंक के उदगम को ढूँढने का 1 प्रयास है ।
मुसलमानों ने मैला ढोने वालों के प्रति अपने परम्परागत आचरण के कारण और उनके हिंदू होने पर उनके प्रति अपनी नफरत व्यक्त करने के कारण उन्हें अछूत माना । तथा मुसलमान गौ हत्या करते थे । इसलिए मुसलमानों से किसी भी रूप में संपर्क रखने वाले ( भले ही उनका मैला ढोने वाले ) लोगों को हिंदू समाज ने अछूत माना । इस प्रकार दलित बन्धु दोनों ही समुदायों के बीच घृणा की चक्की में पिसते रहे ।
इस लेख में कहीं भी हिंदू समाज को छूआछूत को बढ़ावा देने के आरोप से मुक्त नहीं किया गया है ।
प्रमाण के रूप में कुछ गोत्र प्रस्तुत किये जा रहे हैं । जो समान रूप से क्षत्रियों में भी मिलते हैं । और आज के अपने अनुसूचित बंधुओं में भी । genome के विद्वान अपने परीक्षण से सहज ही यह प्रमाणित कर सकते हैं कि ये सब भाई 1 ही वंशावली से जुड़े हुए हैं ।
उदाहरण - चंदेल । चौहान । कटारिया । कश्यप । मालवण । नाहर । कुंगर । धालीवाल । माधवानी । मुदई । भाटी । सिसोदिया । दहिया । चोपड़ा । राठौर । सेंगर । टांक । तोमर आदि आदि ।
जरा सोचिये । हिंदू समाज पर इन कथित अछूत लोगों का कितना बड़ा ऋण है । यदि उस कठिन काल में ये लोग भी दूसरी परिणति वाले स्वार्थी हिन्दुओं कि तरह ही तब मुसलमान बन गए होते । तो आज अपने देश की क्या स्थिति होती ? और सोचिये । आज हिन्दुओं में जिस वर्ग को हम अनुसूचित जातियों के रूप में जानते हैं । उन आस्थावान हिन्दुओं की कितनी विशाल संख्या है । जो मुस्लिम दमन में से अपने राम को सुरक्षित निकालकर लाई है ।
क्या अपने सनातन हिंदू धर्म की रक्षा में इनका पल पल अपमानित होना कोई छोटा त्याग था ? क्या इनका त्याग ऋषि दधीचि के त्याग की श्रेणी में नहीं आता ?
स्वामी विवेकानंद ने कहा है - जब किसी 1 हिंदू का मतान्तरण हो जाता है । तो न केवल 1 हिंदू कम हो जाता है । बल्कि हिन्दुओं का 1 शत्रु भी बढ़ जाता है ।
स्वपनिल तिवारी । सनातन सत्य । फ़ेसबुक पेज से ।
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Bloom where you are planted . Don’t make excuses . Don’t go through life thinking; I have got a disadvantage…I come from wrong family,etc . Let me challenge you . This is not your destiny . You are made for more . Spending all your time and energy to change people will keep you away from blooming…You cannot change people, only God can . One of the best thing you can do is just bloom bigger than ever right in the middle of those weeds…When you bloom in the midst of weeds, you sow a seed to inspire and challenge the people around you to come up higher and that’s a seed for God to take you higher ~Spirited Butterfly

06 अक्तूबर 2012

21 लोगों को 1 दिन में फांसी जिनमें 3 महिलायें


लो जी ! राष्ट्रीय जीजाजी ? की अकूत सम्पति का खुलासा होते ही सरकार ने गैस टंकी के रेट और बढा दिये । अब मध्यम वर्गीय परिवारों का टूटना तय है । गैस सिलेंडर के मूल्य वृद्धि से बाल विवाह को बढ़ावा मिलेगा । मै सोच रहा हूँ । देव उठनी के बाद बेटे की शादी कर ही दूँ । जिससे बेटे या बहु के नाम से 1 गैस सिलेंडर का कनेक्शन और मिल जायेगा । चिरंजीव उदय के विवाह के लिए मध्य प्रदेश में कोई अच्छा सा रिश्ता हो तो बताएं । मध्य प्रदेश के सिंचाई । लोक निर्माण । राजस्व विभाग के चपरासी की बेटी को प्राथमिकता दी जाएगी । क्योंकि छापे में मध्य प्रदेश के चपरासी के यहाँ भी 10-20 करोड़ की सम्पति मिल ही जाती है । ललित शर्मा ब्लागर । फ़ेसबुक पेज पर ।
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1 ही दिन में काटे गए 21 आंतकवादियों के चलान - 1 हमारा देश है । जहाँ आंतकवादियों को कांग्रेस गोद में बैठाकर दूध पिलाती है । और 1 ये मुल्क है । जहाँ मुस्लिम्स आंतकवादियों को खुद 1 इस्लामिक देश यूँ सरे आम आंतकवाद में लिप्त होने पर अपने नागरिकों को ऐसे खुले आम फांसी देता है । बगदाद इराक में आतंकवाद से जुडे आरोपों में सजा पाये 21 लोगों को 1 ही दिन में फांसी पर लटका दिया । जिनमें 3 महिलाएं भी शामिल हैं । इसके साथ ही इस वर्ष अब तक 91 लोगों को फांसी पर लटका दिया गया है । संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन की प्रमुख 

नवी पिल्लै की ओर से इराक में मौत की सजा पर प्रतिबंध लगाने के आग्रह के बावजूद देश में 1 ही दिन में इतनी बडी संख्या में लोगों को फांसी की सजा दे दी गयी । न्याय मंत्रालय के अधिकारी हैदर अल सादी ने आज जारी 1 बयान में कहा कि मंत्रालय ने आतंकवाद से जुडे अपराधों में दोषी पाये गये 21 लोगों को कल सुबह फांसी की सजा दी । जिनमें 3 महिलाएं शामिल हैं । देश में इस वर्ष बडी संख्या में 1 साथ कई लोगो को फांसी की सजा दी गयी है । 7 FEB को 14 तथा 31 JAN को 17 लोगों को यह सजा दी गयी । सुश्री पिल्लै ने इस वर्ष की शुरूआत में इतनी बडी संख्या में लोगों को मौत के घाट उतारे जाने पर स्तब्धता व्यक्त की थी । उन्होंने न्यायालय की कार्यवाही में पारदर्शिता की कमी की आलोचना करते हुए मौत

की सजा को तत्काल स्थगित किये जाने का आग्रह किया था । उन्होंने जनवरी में कहा था - यदि इन मामलों की सुनवाई में पारदर्शिता बरती भी गयी हो । तो भी 1 ही दिन में इतनी बडी संख्या में लोगों को फांसी की सजा दिया जाना खौफनाक है ।
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नालंदा विश्वविद्यालय -  यहाँ 10 000 छात्रों को पढ़ाने के लिये  2 000 शिक्षक थे । प्रसिद्ध चीनी यात्री हवेनसांग ने 7वीं शताब्दी में यहाँ जीवन का महत्वपूर्ण 1 वर्ष 1 विद्यार्थी और 1 शिक्षक के रूप में व्यतीत किया था । इस विश्वविद्यालय की स्थापना का श्रेय गुप्त शासक कुमार गुप्त प्रथम 450-470 को प्राप्त है । इस विश्वविद्यालय में भारत के विभिन्न क्षेत्रों से ही नहीं । बल्कि - कोरिया । जापान । चीन । तिब्बत । इंडोनेशिया । फारस तथा तुर्की से भी विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते थे । नालंदा के विशिष्ट शिक्षा प्राप्त स्नातक बाहर जाकर बौद्ध धर्म का प्रचार करते थे । इस विश्वविद्यालय की 9वीं शती से 12वीं शती तक अंतरर्राष्ट्रीय ख्याति रही थी । अत्यंत सुनियोजित ढंग से और विस्तृत क्षेत्र में बना हुआ यह विश्वविद्यालय स्थापत्य कला का अदभुत नमूना था । इसका पूरा परिसर 1 विशाल दीवार से घिरा हुआ था । जिसमें प्रवेश के लिए 1 मुख्य द्वार था 

। उत्तर से दक्षिण की ओर मठों की कतार थी । और उनके सामने अनेक भव्य स्तूप और मंदिर थे । मंदिरों में बुद्ध भगवान की सुन्दर मूर्तियाँ स्थापित थीं । केन्द्रीय विद्यालय में 7 बड़े कक्ष थे । और इसके अलावा 300 अन्य कमरे थे । इनमें व्याख्यान हुआ करते थे । अभी तक खुदाई में 13 मठ मिले हैं । मठ 1 से अधिक मंजिल के होते थे । कमरे में सोने के लिए पत्थर की चौकी होती थी । दीपक पुस्तक इत्यादि रखने के लिए आले बने हुए थे । प्रत्येक मठ के आँगन में 1 कुआँ बना था । 8 विशाल भवन । दस मंदिर । अनेक प्रार्थना कक्ष । तथा अध्ययन कक्ष के अलावा इस परिसर में सुंदर बगीचे तथा झीलें भी थी । समस्त विश्वविद्यालय का प्रबंध कुलपति या प्रमुख आचार्य करते थे । जो

भिक्षुओं द्वारा निर्वाचित होते थे । कुलपति 2 परामर्शदात्री समितियों के परामर्श से सारा प्रबंध करते थे । प्रथम समिति शिक्षा तथा पाठयकृम संबंधी कार्य देखती थी । और द्वितीय समिति सारे विश्वविद्यालय की आर्थिक व्यवस्था तथा प्रशासन की देखभाल करती थी । विश्वविद्यालय को दान में मिले 200 गाँवों से प्राप्त उपज और आय की देख रेख यही समिति करती थी । इसी से सहस्त्रों विद्यार्थियों के भोजन । कपड़े तथा आवास का प्रबंध होता था । इस विश्वविद्यालय में 3 श्रेणियों के आचार्य थे । जो अपनी योग्यतानुसार प्रथम द्वितीय और तृतीय श्रेणी में आते थे । नालंदा के प्रसिद्ध आचार्यों में - शीलभद्र । धर्मपाल । चंद्रपाल । गुण मति और स्थिर मति प्रमुख थे । प्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ एवं खगोलज्ञ आर्यभट भी इस विश्वविद्यालय के प्रमुख रहे थे । प्रवेश परीक्षा अत्यंत कठिन होती थी । और उसके कारण प्रतिभाशाली विद्यार्थी ही प्रवेश पा सकते थे । शुद्ध आचरण और संघ के नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक था । संस्कृत में नालंदा का अर्थ होता है - ज्ञान देने वाला ( नालम = कमल । जो ज्ञान का प्रतीक है । दा = देना ) बुद्ध

अपने जीवनकाल में कई बार नालंदा आए । और लंबे समय तक ठहरे । जैन धर्म के तीर्थंकर भगवान महावीर क निर्वाण भी नालंदा में ही पावापुरी नामक स्थान पर हुआ । 1199 में तुर्क आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी ने इसे जला कर पूर्णतः नष्ट कर दिया । जब वह नालंदा पहुंचा । तो उसने नालंदा विश्वविद्यालय के शिक्षकों से पूछा कि - यहाँ पवित्र ग्रन्थ कुरआन ? है । या नहीं ? जवाब नहीं में मिलने पर उसने नालंदा विश्वविद्यालय को तहस नहस कर दिया । और पुस्तकालय में आग लगा दी । इरानी विद्वान मिन्हाज लिखता है कि - कई विद्वान शिक्षकों को ज़िन्दा जला दिया गया । और कईयों के सर काट लिये गए । यहाँ के पुस्तकालय में इतनी किताबें थी कि - आग 6 महीने तक जलती रही । अनेक महत्वपूर्ण ग्रन्थों के नष्ट हो जाने से भारत आने वाले समय में विज्ञान । खगोल शास्त्र । चिकित्सा और गणित जैसे क्षेत्रों मे पिछड़ गया ।
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LAPTOP USERS BE AWARE - A couple lost their 25 year old son in a fire at home on June 4th. The son who had graduated with MBA from the University of Wisconsin-Madison two weeks earlier had come home for a while. He had lunch with his dad at home and decided to go back to clean up his hostel room. His father told him to wait, to meet his mother, before he went back for a few days. He decided to take a nap while waiting for his mom to come back home from work. Some time later their neighbors called 911 when they saw black smoke coming out of the house. Unfortunately, the 

25 years old died in the three year old house. It took several days of investigation to find out the cause of the fire. It was determined that the fire was caused by the laptop resting on the bed. When the laptop was on the bed cooling fan did not get the air to cool the computer and that is what caused the fire. He did not even wake up to get out of the bed because he died of br
eathing in carbon monoxide. The reason I am writing this to all of you is that I have seen many of us and also our brothers & sisters sons & daughters friends & family using the laptop while in bed. Let us all decide and make it a practice not to do that. The risk is real. Let us make it a rule not to use the laptop on bed with blankets and pillows around. Please educate as many people as you can.

जब भी तेरी याद आई तुझे भुलाकर रोये


अरब देश का भारत भृगु के पुत्र शुक्राचार्य । तथा उनके पौत्र और्व से ऐतिहासिक संबंध प्रमाणित है । यहाँ तक कि - हिस्ट्री आफ पर्शिया.. के लेखक साइक्स का मत है कि - अरब का नाम और्व के ही नाम पर पड़ा । जो विकृत होकर “ अरब ” हो गया । भारत के उत्तर पश्चिम में इलावृत था । जहाँ दैत्य और दानव बसते थे । इस इलावृत में एशियाई रूस का दक्षिणी पश्चिमी भाग । ईरान का पूर्वी भाग । तथा गिलगित का निकटवर्ती क्षेत्र सम्मिलित था । आदित्यों का आवास स्थान देवलोक भारत के उत्तर पूर्व में स्थित हिमालयी क्षेत्रों में रहा था । बेबीलोन की प्राचीन गुफाओं में पुरातात्विक खोज में जो भित्ति चित्र मिले हैं । उनमें विष्णु को हिरण्यकश्यप के भाई हिरण्याक्ष से युद्ध करते हुए उत्कीर्ण किया गया है ।

उस युग में अरब 1 बड़ा व्यापारिक केन्द्र रहा था । इसी कारण देवों दानवों और दैत्यों में इलावृत के विभाजन को लेकर 12 बार युद्ध " देवासुर संग्राम " हुए । देवताओं के राजा इन्द्र ने अपनी पुत्री जयन्ती का विवाह शुक्र के साथ इसी विचार से किया था कि - शुक्र उनके ( देवों के ) पक्षधर बन जायें । किन्तु शुक्र दैत्यों के ही गुरू बने रहे । यहाँ तक कि जब दैत्यराज बलि ने शुक्राचार्य का कहना न माना । तो वे उसे त्याग कर अपने पौत्र और्व के पास अरब में आ गये । और वहाँ 10 वर्ष रहे । साइक्स ने अपने इतिहास ग्रन्थ “ हिस्ट्री ऑफ पर्शिया ” में लिखा है कि - शुक्राचार्य लिव्ड 10 इयर्स इन अरब । अरब में शुक्राचार्य का इतना मान सम्मान हुआ कि आज जिसे " काबा " कहते हैं । वह वस्तुतः " काव्य शुक्र " ( शुक्राचार्य ) के सम्मान में निर्मित उनके

आराध्य भगवान शिव का ही मन्दिर है । कालांतर में काव्य नाम विकृत होकर काबा प्रचलित हुआ । अरबी भाषा में " शुक्र " का अर्थ " बड़ा " अर्थात " जुम्मा " इसी कारण किया गया । और इसी से  जुम्मा ( शुक्रवार ) को मुसलमान पवित्र दिन मानते है ।
बृहस्पति देवानां पुरोहित आसीत । उशना काव्योऽसुराणाम । जैमिनिय ब्रा  01-125
अर्थात बृहस्पति देवों के पुरोहित थे । और उशना काव्य ( शुक्राचार्य ) असुरों के ।
प्राचीन अरबी काव्य संग्रह गंथ " सेअरूल ओकुल " के 257वें पृष्ठ पर हजरत मुहम्मद से 2 300 वर्ष पूर्व एवं ईसा मसीह से 1 800 वर्ष पूर्व पैदा हुए - लबी बिन ए अरव्तब बिन ए तुरफा .. ने अपनी सुप्रसिद्ध कविता में भारत भूमि एवं वेदों को जो सम्मान दिया है । वह इस प्रकार है ।

- अया मुबारेकल अरज मुशैये नोंहा मिनार हिंदे । व अरादकल्लाह मज्जोनज्जे जिकरतुन । 1 वह लवज्जलीयतुन ऐनाने सहबी अरवे अतुन जिकरा । वहाजेही योनज्जेलुर्ररसूल मिनल हिंदतुन । 2
यकूलूनल्लाहः या अहलल अरज आलमीन फुल्लहुम ।फत्तेबेऊ जिकरतुल वेद हुक्कुन मालन योनज्वेलतुन । 3 वहोबा आलमुस्साम वल यजुरमिनल्लाहे तनजीलन । फऐ नोमा या अरवीयो मुत्तवअन योवसीरी योन जातुन । 4 जइसनैन हुमारिक अतर नासेहीन का-अ-खुबातुन । व असनात अलाऊढ़न व होवा मश-ए-रतुन । 5
अर्थात - 1 हे भारत की पुण्य भूमि ( मिनार हिंद ) तू धन्य है । क्योंकि ईश्वर ने अपने ज्ञान के लिए तुझको चुना । 2 वह ईश्वर का ज्ञान प्रकाश । जो 4 प्रकाश स्तम्भों के सदृश्य सम्पूर्ण

जगत को प्रकाशित करता है । यह भारत वर्ष ( हिंद तुन ) में ऋषियों द्वारा 4 रूप में प्रकट हुआ । 3 और परमात्मा समस्त संसार के मनुष्यों को आज्ञा देता है कि - वेद जो मेरा ज्ञान है । इनके अनुसार आचरण करो । 4 वह ज्ञान के भण्डार साम और यजुर है । जो ईश्वर ने प्रदान किये । इसलिए हे मेरे भाइयों ! इनको मानो । क्योंकि ये हमें मोक्ष का मार्ग बताते है । 5 और 2 उनमें से रिक्, अतर ( ऋग्वेद । अथर्ववेद ) जो हमें भ्रातृत्व की शिक्षा देते हैं । और जो इनकी शरण में आ गया । वह कभी अन्धकार को प्राप्त नहीं होता ।
http://hindurashtra.wordpress.com/2012/03/29/148/
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15 Health Benefits of Grapes Juice -
1 Flavonoids found in grape juice raise the level of HDL ( good )
cholesterol. This prevents blockage of arteries and the heart remains healthy.
2 Resveratrol found in grape juice prevents the formation of tumors in the body. So this prevents cancer. Purple-colored grape juice prevents breast cancer.
3 By drinking this juice, the levels of nitric oxide is increased in the body which reduces the formation of clots in blood vessels. This reduces chances of heart attacks.
4 Drinking grape juice daily helps in lowering blood pressure.
5 Grape juice has anti-aging properties and it also helps to reduce weight.
6 Antioxidants present in grape juicerepair damaged cells and also prevent them from further damage.
7 Cough and acidity remain away from the person who drinks grape juice regularly.
8 Taking grape juice in the morning without sugar helpsin curing migraine. It is a good home remedy for migraine.
9 Grape juice cures blood disorders and is a very good purifier of blood. Itflushes out harmful toxins from the body.

10 Grape juice also cures constipation problem as it acts as a good laxative.
11 Red colored grape juice has strong antiviral and antibacterial properties. So it saves from different infections.
12 Grape juice has been foundto be very effective in asthma treatment due to its eminent therapeutic value.
13 Antioxidants present in grape juice can help in preventing aging related problems like Alzheimer’s disease.

14 The purple grape juice helps in fighting atherosclerosis .
15 Antioxidants present in grape juice boost the immune system.
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8 Amazing Health Benefits of Lemon Essential Oil
1 Stress Relief - One of the most important health benefits of lemon essential oil is stress relief. Lemon essential oil has been used to alleviate stress because of its calming nature. It is a cure for mental fatigue, anxiety, dizziness and exhaustion. This oil refreshes and invigorates the mind by replacing negative emotions with positive mind frame. Inhalation of lemon essential oil also increases concentration of the mind.

2 Better Sleep - Another great health benefit of lemon essential oil is that it can be used to treat insomniac people. This is due to its ability to induce sleep when used.
3 Improved Immunity - Consistent use of lemon essential oil can greatly improve your body immunity due to its high vitamin content. It also stimulates the white blood cells, increasing the white blood cells’ ability to fight off diseases. It also improves the circulation of blood in your body.
4 Cure for Stomach Ailments - These lemon essential oils have been used to cure stomach ailments,

such as amoeba and stomachache. In addition, it treats cramps, reduces acidity in the stomach, and cures indigestion.
5 Improved Hair Health - If you have problems with your hair, such as constant dandruff, these lemon essential oils will be good for you. For women who treasure shining and healthy hair, you just need to use these lemon essential oils and have a wonderful hair.
6 Relief from Different Diseases - Continued use of these oils increases the ability of the body to fend off attacks from diseases such as malaria and typhoid. These essential oils also relieve you from fever, throat infections and asthmatic conditions.

7 Better Skin - If you have a bad skin, you can improve its luster by just applying these oils. It detoxifies and gives dull skins a new lease of life, so that they look delicate and vibrant. Due to its antiseptic properties, it readily treats skin conditions such as pimples. Its fresh lemon scent reduces sebum production by your skin, which makes it extremely beneficial to aging skins.
8 Weight Loss - The use of lemon essential oil reduces weight and can be a perfect remedy for you if you have weight problems.
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Raw cucumber and cabbage juice - Effective Hair Growth Remedy -
Ingredients - Raw cucumber juice – 30ml  Raw cabbage juice – 30 ml

Mix together raw cucumber and cabbage juices. Massage this mixture into the scalp and hair roots thoroughly for 10 - 15 minutes before going to bed. Leave on until morning.
Repeat 3 times a week - Raw cucumber juice and raw cabbage juice are rich in silicon and sulfur that stimulate hair growth and slow hair loss. In addition, raw cabbage juice is especially good for dry hair. It makes hair soft and shiny.
If you enjoy drinking raw juice, you may also like to enhance the result with the following raw juice cocktail: mix together 80ml raw cucumber juice + 40ml raw cabbage juice + 80ml raw carrot juice.

Drink raw juice everyday and get healthy beautiful hair!
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May, O Ocean of Mercy, through thy grace my mind - the mind that in the wakeful state travels long distances, and, possesses brilliant qualities, which self-same mind - light of the senses - in sleep attains to the state of profound slumber and in dreams wanders over different places - always entertain pure thoughts for the good of the self as well as for that of all other living beings. May it never desire to injure any one  -YAJUR VEDA 34 । 1
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कन्या है वरदान साथियो । कन्या है वरदान ।
कल तक प्यारी नन्हीं बिटिया इस घर की हरियाली थी । उसकी भोली बातों में बसती जान हमारी थी ।

कल जो चिड़िया फुदक रही थी अपने घर आँगन में । आज अचानक वो 1 कोने में खड़ी हो गई ।
ऊफ़ ! नन्हीं सी बिटिया कितनी बड़ी हो गई ।
कल तक जो आँखों में अपने काजल लगा न पाती थी । अपने बालों की चोटी भी अम्मा से बँधवाती थी ।
रूप अनूप हुआ अब वो दिव्य रूप हो गयी है । देखते देखते वो बरखा की रिमझिम झड़ी हो गई है ।
अब वो नन्हीं सी बिटिया इतनी बड़ी हो गई है ।
हमें देखते ही जो गुड़िया कमरे में छुप जाती थी । आज सामने आकर वो बस शांत खड़ी हो गई है ।
अम्मा ठीक कहती थीं यह चिड़िया तुमसे बिछुड़ जायेगी । अपने घरोंदे की ओर यह फुर्र 1 दिन हो जायेगी । हमें पता भी न चला इतनी चंचल इतनी नटखट कब इतनी गंभीर हो गई है ।
मगर अब लगता है कि बिटिया कितनी बड़ी हो गई है ।
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टाटा को इतना पैसा कमाने में 100 साल लगे । धीरू भाई अम्बानी को 50 साल । लेकिन राष्ट्रीय दामाद को मात्र 10 साल । शादी से पहले दामाद का इनकम टैक्स रिटर्न देखने पर पता लगा कि - इनकी इनकम महज 5 लाख की थी । शादी के बाद पहले भाई । फिर बहन । और उसके बाद बाप की " बलि " देने के बाद । आज की तारीख में दामाद की इनकम है - 2 अरब रूपये । DLF कंपनी दिल्ली की बहुत बड़ी construction company है । और इस कंपनी ने दामाद की कंपनी को बिना गारंटी के लोन दिया हुआ है । कामन वेल्थ गेम में 

कलमाडी ने इसी कंपनी को सबसे ज्यादा काम दिया । इन दामाद की हिस्सेदारी unitech में भी है । जिसका नाम 2G कांड में आ चूका है । और भी बहुत कुछ है । जैसे कि इनके पास वो ताकत है । जो इस देश के सेना प्रमुख के पास भी नहीं है । इनके बाडी गार्ड संसद में भी पिस्टल लेकर जा सकते हैं । हम इस देश के दुसरे दर्जे के क्या तीसरे या फिर चौथे दर्जे के नागरिक हैं । हमें केवल वोट के लिये इस्तेमाल किया जाता है । तो देते रहिये वोट । और अपनी व देश की अस्मत लुटवाते रहिये । जय जन जय भारत
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कभी रोकर मुस्कराये कभी मुस्करा कर रोये । जब भी तेरी याद आई तुझे भुलाकर रोये ।

1 तेरा ही नाम था जिसे हज़ार बार लिखा । जितना लिखकर खुश हुये उससे ज्यादा मिटाकर रोये ।
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मुसलमान मुहम्मद के चरित्र चित्रण से क्यों डरते हैं ? मुहम्मद का कार्टून बना । तो पूरी दुनिया के मुसलमानों ने अपनी अपनी जगहों पर बलवा किया । दुनियां को इतनी बुरी तरह से बदलने वाला व्यक्ति रहस्य बना हुआ हैं । कोई कुछ जानता ही नहीं । उसके बारे में । प्रश्न तो ये उठता है कि - ईसाई ईसा मसीह के नाटक मंच पर दोहराते हैं । ताकि उनके अच्छे गुण अन्य लोग जान सकें । और ले सकें । हिंदू राम लीला रचाते हैं । ताकि राम के अच्छे कृत्यों को दिमाग में रख सकें । अच्छाई की बुराई पर जीत । पर मुहम्मद के नाम पर ऐसा क्या कि - उनका कोई चित्र नहीं हो सकता । मुस्लिम कहते हैं । इस्लाम में बुत परस्ती मना हैं इसलिए । बुत परस्ती मना होने से चित्रण का क्या लेना देना ? क्या काबा मंदिर ( उनके लिये मस्जिद ) की तस्वीर रखना नहीं । गलत है । पर रखते हैं । तस्वीर रखने से उसकी बुत परस्ती थोड़े हो जाती है । बल्कि अपने आदर्श कृत्यों की याद बनी रहती हैं । जैसे आर्य समाजी ऋषि दयानंद की तस्वीर रखते हैं । दूसरा तर्क ये दे सकते कि - इससे उनका अपमान होगा । मान अपमान तो जीवित लोगो का होता है । अगर ये भेद नहीं पता उन्हें । तो बुत परस्ती भी नहीं पता । इसीलिए वे हजरे अस्वाद को संरक्षित करे हुए हैं । और बुत परस्ती के विरोध में होने का ढोंग करते हैं ।

वास्तविक बात तो ये है कि - मुहम्मद का कोई चरित्र ही नहीं था । जिसका चित्रण किया जाए । क्या दिखाएंगे मुसलमान कि - कैसे मुहम्मद के दादा अबू मत्लिब काबा मंदिर का सरक्षण करते थे । तीर्थ यात्रियों का प्रबंध करते थे । किस प्रकार मुहम्मद को बचपन में मिर्गी के दौरे पड़ते थे । कैसे उसने अपने से 15 वर्ष आयु में बड़ी और अरब की अमीर बुडिया से शादी की । उस अमीर बुडिया के मरते ही किस प्रकार 51 वर्षीय मुहम्मद ने 6 वर्ष की बच्ची से शादी ( माफ़ी चाहूँगा । इस गंदे कृत्य को मुस्लिम शादी कहते हैं ) की । किस प्रकार 9 वर्ष की होने पर उस बच्ची से सम्भोग किया । अपनी मुँह बोले बेटे की बीवी से शादी की । और कैसे भिन्न भिन्न 31 से ऊपर औरते रखी ।

कैसे मुहम्मद ने उम किर्फा की वृद्ध नेत्रानी बनू फस्रह के हाथ पाँवों को 2 ऊँटो से बंधवा के फड़वा दिया । ऊँट की चोरी करने वाले 8 लोगों के हाथ पाँव कटवा दिये । वो ऊँट जो खुद मुहम्मद ने चुराये थे ।
http://hindurashtra.wordpress.com/2012/04/21/567/
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1 यक्ष प्रश्न - 1 200 सालों का मुस्लिम शासन । और इतने सालों तक हिंदूओं पर सिर्फ जुल्म ।

मुहम्मद गौरी । गजनवी से लेकर अकबर औरंगजेब । और पूरी मुग़ल सल्तनत । उसके बाद आदिल शाह  अब्दाली । फिर आजादी से पहले बंगाल और पंजाब में हिंदू और सिखों क नरसंहार । और आज भी लव जिहाद के जरिये हिंदू लड़कियों को फँसाकर उनका ज़बरन धर्म परिवर्तन करवाना । और भोले भाले हिंदू को प्रलोभन और हिंसा द्वारा मुसलमान बनाने के बाद भी क्या आपको लगता है कि - मुसलमान देश भक्त हो सकता है ।
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बिन बेटी ये मन बेकल है बेटी है तो ही कल है । बेटी से संसार सुनहरा बिन बेटी क्या पाओगे ?

बेटी नयनों की ज्योति है सपनों की अंतर ज्योति है । शक्ति स्वरूपा बिन किस देहरी द्वारे दीप जलाओगे ?
शांति क्रांति समृद्धि वृद्धि श्री सिद्धि सभी कुछ है उनसे । उनसे नजर चुराओगे तो किसका मान बढ़ाओगे ?
सहगल रफ़ी किशोर मुकेश और मन्ना दा के दीवानों । बेटी नहीं बचाओगे तो लता कहां से लाओगे ?
सारे खान जान बच्चन द्वय रजनीकांत ऋतिक रनबीर । रानी सोनाक्षी विद्या ऐश्वर्य कहाँ से लाओगे ?
अब भी जागो सुर में रागो भारत माँ की संतानों । बिन बेटी के बेटे वालो किससे ब्याह रचाओगे ?
बहन न हो तो तिलक न होगा किसके वीर कहाओगे ? सिर आंचल की छांह न होगी मां का दूध लजाओगे ।