28 फ़रवरी 2012

प्राणायाम से प्राण संकट

अभी सुबह के लेख में ही मैंने इस बात का जिक्र किया कि बहुत कम लिख पाने की कई वजहें हैं । उनमें फ़ोन काल्स की भी बात है । दैहिक दैविक भौतिक परेशानियों से जूझते । आत्म ज्ञान की तलाश में लगे । सत्य को खोजते । लोगों को जब लगता है कि उन्हें मेरे पास कोई हल मिल सकता है । तो फ़िर एक लम्बी बातचीत का सिलसिला शुरू हो जाता है । अपनत्व जुङते ही और भी ढेरों बातें ।
मेरी कोशिश यथासंभव उन्हें सही राह दिखाने की होती है । ये और बात है कि वे फ़िर कहीं जाना ही नहीं चाहते । हमारे ही होकर रह जाते हैं । कहते हैं - जीवन का भटकाव समाप्त हो गया ।
अभी आज ही 4 बजे की बात है । किसी जानकारी पर कोई लेख लिखने का मन बना रहा था । तभी एक फ़ोन आ गया । फ़ोन बङा खास था । इसलिये दूसरे विषय पर लिखने का  इरादा त्याग दिया । और इसी विषय पर आपको जानकारी देने की इच्छा  हुयी ।
आपको याद होगा । मैंने बहुत पहले ही लिखा था । गायक सोनू निगम प्राणायाम अनुलोम विलोम और  ध्यान का अच्छा अभ्यास करते थे । और करते हुये काफ़ी समय हो गया था । फ़िर ऐसा हुआ कि उनको अजीव अजीव अनुभव होने लगे । कुछ डरावने से । सोनू ने बहुत जानकारों बाबाओं से मशविरा लिया । पर शायद कोई उनकी समस्या हल नहीं कर पाया । और फ़िर एक जगह स्टेज पर कार्यकृम करते समय उन्हें काफ़ी डरावना अनुभव हुआ । जिसमें शायद स्टेज के तख्ते टूटना और डरावनी आकृतियाँ प्रकट होना शामिल थी । सोनू बेहद डर गये  । और मुश्किल से नियन्त्रित हुये । यह समाचार - अमर उजाला अखबार में सोनू के साक्षात्कार सहित छपा था ।
बात बहुत छोटी सी थी । मेरे नियमित पाठकों के लिये तो बहुत मामूली । डरावने दिखने वाले अशरीरी गाना गाने

नृत्य करने आये थे । पर सोनू डर गये । राजीव बाबा होते । तो उनका भी कार्यकृम शामिल करवा देते । बस इतनी सी बात थी ।
खैर..बदायूँ के प्रमोद शर्मा बहुत परेशान थे । और अभी अभी पतंजलि हरिद्वार से निराश होकर लौटे थे । और नेट पर कुण्डलिनी जागरण शब्द सर्च गूगल कर रहे थे । तो उनको विश्व प्रसिद्ध राजीव बाबा का नम्बर मिल गया । ध्यान रहे । वो ब्लाग तक नहीं आ पाये । बल्कि कुण्डलिनी जागरण शब्द के साथ ही मेरा नाम और फ़ोन नम्बर उन्हें सर्च रिजल्ट में ही मिल गया । एक उम्मीद सी बँधी । और तुरन्त उन्होंने मेरा फ़ोन मिलाया । हालांकि जो उन्होंने बताया । उसमें मेरे लिये कोई हैरान होने वाली बात नहीं थी । फ़िर भी मुझे बहुत हैरानी हुयी । OH MY GOD ! WHERE ARE YOU ?
आईये प्रमोद शर्मा ने जो बताया । उसको जानते हैं । प्रमोद की आयु 32 वर्ष है । और वो गुटखा बहुत खाते थे । इससे लगभग 2 साल पहले उनके गले में बहुत दिक्कत हुयी । यहाँ तक कि थूक पानी निगलने में परेशानी होने लगी । और जाहिर है । आजकल अनुलोम विलोम बाबा रामदेव ऐसे मामलों के एक्सपर्ट है । प्रमोद पतंजलि गये । और दवा तथा अनुलोम विलोम आदि नाङी शोधन प्राणायाम शुरू किया ।
मृत्यु को करीब देखता आदमी बङे लगन से उपाय करता है । वही प्रमोद ने भी किया । सुबह शाम 3 से चार घन्टे तक अनुलोम विलोम । और वो भी पूरी लगन आस्था से ।
मैं खुद 100% इस बात से सहमत हूँ । किसी भी शारीरिक या मानसिक रोग में भी अनुलोम विलोम नाङी शोधन प्राणायाम बेहद लाभकारी है । इसको सही तरीके से करने पर प्रारम्भिक और जटिल स्थिति को छोङकर दवा की 


भी आवश्यकता नहीं । प्रारम्भिक से मेरा आशय है । जब अनुलोम विलोम प्रभावी होने लगे तव तक । दवा खाना जरूरी है ।
खैर .. प्रमोद जी को भी लाभ हुआ । उन्होंने बीच में छोङ दिया । और अभी फ़िर से करने लगे । लेकिन अब जो हुआ ? वहाँ बाबा रामदेव की दाल नहीं गलती । हुआ ये कि जैसी कि मैंने बहुत पहले ही आशंका जतायी थी कि अधिक अनुलोम विलोम और गहराई से ध्यान अभ्यास करने पर योग क्रियायें जागृत हो सकती हैं । वही हुआ । प्रमोद जी की कुण्डलिनी जागरण की शुरूआती अवस्था बनने लगी । उनके माथे पर कई स्थानों पर गुदगुदी । स्पंदन । ह्रदय । नाभि आदि चक्रों पर तेज आनन्ददायी कंपन महसूस होने लगा । रीढ की हड्डी में सुन्नता और रेंगन सी मालूम पङी ।
प्रमोद बोले - गुरुजी वो मेरी ऐसी अवस्था थी कि मैं न उसे रोक पाता । न ही और कुछ कर पाता । मजा भी आता । और डर भी लगता । अब ये बताईये । ये सब क्या है ? और इसमें कोई खतरा तो नहीं है ।
हाँ गुरूजी ! मैं अभी पतंजलि हरिद्वार गया । तो मैंने उन्हें ये अनुभव या परेशानी बताये । तो वो बोले - अरे ये सब कुछ नहीं । फ़ालतू बातें हैं । कुण्डलिनी वगैरह कुछ नहीं होता । इस तरह कुण्डलिनी से सब होने लगे । तो दवायें

ही बन्द हो जायें । तुम फ़ालतू भृम ? से ध्यान हटाकर ये दवायें ले जाकर खाओ । उसी से सब सही होगा ।
अब जो आदमी परेशान है । उसको तसल्ली कैसे आये । आपने तो कह दिया । सब ठीक हो जायेगा । प्रमोद को कोई रास्ता नहीं सूझा । अपने परिचित भाईयों आदि से बात की । तो उन्होंने मौखिक रूप से थोङी सी जानकारी बता दी । कोई ठोस बात वे भी नहीं जानते थे । तब परेशान प्रमोद ने नेट पर सर्च किया । और थोङी ही देर में मेरे फ़ोन की घण्टी बजने लगी ।
मुझे उनकी बात सुनकर बेहद हैरानी हुयी । जो स्थिति वो बता रहे थे । इसके लिये कुण्डलिनी वाले लोग कितना ही  जतन करते हैं । पर प्राप्त नहीं होती । और उन्हें अपनी ही स्थिति के बारे में पता नहीं था ।
खैर ..मैंने कहा - अगर आप अपनी स्थिति को नियन्त्रण ( कुण्डलिनी जागरण की स्थिति बनने पर ) कर सके । तो यह बहुत बङी उपलब्धि हुयी । आपकी आशा कल्पना से भी अधिक । और नहीं कर पाये । तो पागलपन । मृत्यु । या मृत्यु सम कष्ट ।
अब जाहिर है । कोई इंसान नियन्त्रण तो तभी कर पायेगा । जब कोई सपोर्ट कोई सम्बन्धित ज्ञान उसके पास होगा । अगर ऐसा उनके पास होता । फ़िर मुझे फ़ोन ही क्यों करते ? फ़िर और भी बहुत सी बातें हुयी । और अंततः उन्होंने पूछा - इसका स्थायी समाधान कैसे होगा ?
- समर्थ गुरु द्वारा । मैंने उत्तर दिया । बाकी बहुत सी जानकारी मेरे  ब्लाग्स पर मौजूद है ही ।
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