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18 नवंबर 2012

1 मटर के दाने से बनी है पूरी दुनियां


यह सदियों से जिज्ञासा का बिषय रहा है कि - आखिर यह बृह्मांड ( दुनियाँ ) किसने बनाया ? कब बना ? कैसे बना ? इसका जबाब तलाश करने के लिए बहुत सारी कल्पनाएं की गयी ? ये कल्पनाएं ? 2 भागों में बांटी जा सकती हैं ।
1 धार्मिक क्षेत्र के विद्वानों द्वारा  2 विज्ञान के क्षेत्र के विद्वानों द्वारा ।
धार्मिक क्षेत्र में कहा गया कि इस UNIVERSE की रचना GOD ने की । कुछ धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार भगवान के अलावा यह कार्य कोई और कर ही नहीं सकता है । GOD ने ही प्रथ्वी की रचना की । और  जीवों की । जिससे मानव । पशु । पक्षी  वनस्पति आदि बने । किसी कथा में आता है कि - यह प्रथ्वी गाय के सींगों पर टिकी हुई है ? और यह  माँ की तरह हमारा लालन पालन कर रही है । इसलिए हम सब इसे पृथ्वी माता कहते है । जब गौ माता अपने सींगों को हिलाती है । तभी  भूकंप । ज्वालामुखी । तूफान आदि आते हैं । इन आधारहीन बातों को लोग पहले तो मानते थे ? पर इनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं । बस आधार है । तो केवल आस्था का । और अंध भक्ति का ।
विज्ञान के क्षेत्र में विद्द्वानों के द्वारा प्रथ्वी और बृह्मांड की उत्पत्ति में भगवान का कोई हाथ/प्रयोजन नहीं माना जाता है ? बल्कि भगवान का अस्तित्व शरीर धारी के रूप में नहीं । 1 परम शक्ति जिसे हम प्रकृति NATURE कहते हैं ? के रूप में माना जाता है ?  NATURE बादल ( वर्षा ) वायु । गर्मी । मिट्टी के रूप में नियंत्रित करती रहती है । इस प्रकार UNIVERSE की उत्पति किसी शरीर धारी भगवान ने नहीं ? बल्कि प्रकृति में स्वयं ? 1 महा विस्फोट BIG BANG के रूप में हुई । वैज्ञानिकों के द्वारा जो कुछ विज्ञान के नियमों को ध्यान में रखते हुये जो परिकल्पनाएं की गयी । समय समय पर नये नियमों की खोज होने के बाद नए नियमों के आधार पर पुरानी कल्पनाओं के स्थान पर नई कल्पनाओं ने स्थान ले लिया । जो  सबसे अधिक तर्कपूर्ण परिकल्पना THEORY दुनियाँ के  सबसे अधिक वैज्ञानिकों द्वारा मान्य है । वह BIG BANG 

THEORY  है । वैज्ञानिकों के अनुसार लगभग 14 अरब वर्ष पहले 1 मटर के दाने ? जैसे अति सघन पिंड ? के महा विस्फोट हुआ ? और उसी के बाद UNIVERSE का जन्म हुआ । दृश्य अदृश्य अन्तरिक्ष के समस्त गृह नक्षत्र और अन्य तत्व और यौगिक आदि इसी पिंड में दृव्य रूप में समाहित रहे थे ।  और कुछ भी नहीं था । बस 1 बिन्दु था ।
वैज्ञानिकों ने इसके लिए बहुत शक्तिशाली दूरवीन TELESCOPE बनाये । सैकड़ों वर्षों तक अध्ययन किया । और कई बातें जो रहस्य बनी थी के बारे में विश्वास किए जाने योग्य कारण/स्पष्टीकरण दिये । यद्यपि वैज्ञानिक अभी तक जो ज्ञान  प्राप्त कर पाये हैं । वह बहुत थोड़ा है ? लेकिन आधार हीन ज्ञान से ? तो आधार पूर्ण कुछ ज्ञान ज्यादा अच्छा है ? इसलिए वैज्ञानिको ने अपनी इस जिज्ञासा के तहत कि " महा विस्फोट " के ठीक पहले पल या पलों में क्या हुआ होगा ? और गृह । नक्षत्र । तारे । आकाश गंगा आदि का निर्माण कैसे हुआ होगा ? ऐसे अनेकों प्रश्नों की सूची वैज्ञानिकों के पास थी । जिनके वे संतोषजनक कारण /व्याख्या जानना चाहते थे । और इस पर तमाम वर्षों से प्रयोग करके किसी निर्णय पर पहुँचना चाहते थे । यह सब किसी 1-2 या 4 वैज्ञानिकों के द्वारा मिलकर खोज करना अत्यंत कठिन था । THEORY के आधार पर परिकल्पनाएं बहुत थीं । लेकिन उनको प्रक्टीकल करके जानना । अति कठिन कार्य था । परंतु करना तो था ही ।
उक्त विषय में कारण जानने के लिए जहाँ स्विटजरलेंड और फ्रांस देशों की सीमा है । वहाँ जमीन के 100 मीटर नीचे 27 Km लम्बी प्रयोगशाला बनाई गयी । जिसमे लार्ज हेडरेंन कोलाइडर नामक महा मशीन  लगाई गयी । उसमें अनेकों देशों के सैकड़ों वैज्ञानिकों ने अपना योगदान दिया । और इस मशीन से जमीन के अंदर ही प्रयोग किए । इसमे 9300 चुंबक लगाए गए । जो प्रोटान बीम को निर्देशित करते थे । प्रत्येक चुम्बक का तापमान 271.30  से0 था । इनको ठंडा रखने के लिए तरल निट्रोजन और हीलियम का उपयोग किया गया ( इसे दुनियाँ का सबसे बड़ा फ्रिज मान सकते है ) प्रोटान प्रति सेकेण्ड 11245 खरब चक्कर सुरंग ( जो विशेष रूप से बनाई गयी थी ) में लगाते थे । और प्रति सेकिण्ड  4 करोड़ प्रोटान टकराते थे ।
इन टकराहटों से जो आंकड़े उत्पन्न हुए ( मिले ) बे इतनी अधिक संख्या में थे कि केवल 20% को ही प्रयोगशाला में विश्लेषित किया जा सकता था । बाकी 80% आंकड़ों को  दुनियाँ की अन्य प्रयोगशालायो में विश्लेषण हेतु भेजा गया ।
इस प्रयोग में करीब 450 अरब रुपये का खर्चा हुआ । यह प्रयोग 10 SEPT 2008 को शुरू हुआ । और JULY 2012 में पूरा हुआ । प्रयोगों में प्रोटानो की " महा भिड़ंत " कराई गयी । ताकि परिकल्पना के आधार पर प्रयोगशालाओं में कुछ कुछ वैसी ही परिस्थितियाँ पैदा हो जाय । जो परिकल्पना के अनुसार महाविस्फोट अर्थात BIG BANG के समय रही होंगी । अर्थात UNIVERSE के उदभव के समय रही होंगी । वैज्ञानिकों ने यह संभावना जताई कि इस प्रयोग से कई मूलभूत कण Fundamental Particle निकल सकते हैं । जिनमें से 1 

हिग्ग्स बोसोंन कण हो सकता है । जिसके बारे में हिग्ग्स और सत्येन्द्रनाथ बॉस वैज्ञानिकों ने बहुत वर्षों पहले कल्पना कर ली थी । और इनके ही नाम पर हिग्ग्स बोसोंन नाम रखा गया । तथा इसको GOD PARTICLE भी कहा गया । परंतु वैज्ञानिक अभी तक यह निश्चित रूप से नहीं कह सके हैं कि जो Particle उन्होने खोजा है । वह हिग्ग्स बोसोंन कण ही है । अतः इस पर कार्य जारी है ।
क्या है - हिग्ग्स बोसोंन कण ?  तथा इसका UNIVERSE की उत्पत्ति से क्या संबंध है ?
विज्ञान के अनुसार पदार्थ और कुछ नहीं । बल्कि ऊर्जा का ही दूसरा रूप है ? अर्थात पदार्थ और ऊर्जा 1 ही चीज हैं ? ऊर्जा का कोई दृवमान अर्थात भार नहीं होता । और इसी भार की बजह से यह UNIVERSE अस्तित्व में आया ? अब प्रश्न यह है कि - यह दृव्यमान ( भार ) कहाँ से आया ? कैसे आया ? आता है ? यह बात इस तरह सरलता से समझी जा सकती है कि - हिग्ग्स बोसान नाम की परिकल्पना इसी जबाब की खोज से संबन्धित है । माना जाता है कि लगभग 14 अरब  वर्ष पहले ऊर्जा के BIG BANG के बाद सेकिंड  के पहले अरब बे हिस्से ( सेकंड के 1 00 00 00 000 भाग के प्रथम भाग । अर्थात 1/ 1 00 00 00 000 भाग ) के दौरान भार रहित भौतिक कण प्रकाश की गति से अर्थात 3 लाख Km की गति से विखरने लगे । उसके बाद ये कण हिग्ग्स फील्ड के रूप संपर्क में आए । संपर्क में आने के बाद ये सभी कण भारी हो गए । और इनके आपस में मिलने से ही प्रथ्वी की उत्पत्ति हुई । हिग्ग्स बोसान इस हिग्ग्स फील्ड का भार युक्त  प्रतिनिधि कण है ।
इसका महत्व इस बात से है कि इस प्रयोग और हिग्ग्स बोसान से यह  समझने में  सहायता मिलेगी कि दृव्यमान की उत्पत्ति कैसे हुई ? अर्थात भार कैसे ? और कहाँ से आता है ?
इसका नाम GOD PARTICLE क्यों और कैसे पड़ा ? जो मूलभूत कण खोज लिये जाने की संभावना वैज्ञानिकों ने जताई है । उसका नाम हिग्ग्स बोसान रखा गया था । पहले तो यह समझें कि - इसका नाम हिग्ग्स बोसान क्यों रखा गया ? ब्रिटेन के वैज्ञानिक पीटर हिग्ग्स तथा भारतीय वैज्ञानिक सत्येन्द्रनाथ बॉस ने बहुत पहले ही इस कण की खोज के बारे में परिकल्पना कर ली थी । इन दोनों के नाम पर ( हिग्ग्स + बॉस ) हिग्ग्स बोसान रखा गया । इस कण को प्रायः लोग  GOD PARTICLE  अर्थात ईश्वरीय कण के नाम से संबोधित कर रहे हैं । क्योंकि GOD का अर्थ - ईश्वर और PARTICLE का अर्थ - कण  होता है । इस आधार पर कहा जा रहा है कि - ईश्वरीय कण की खोज हो गयी है । और यह बात यह बताती है कि - कण कण में भगवान है । और इसी आधार पर यह पुष्टि होती है कि यह बृह्मांड ईश्वर/भगवान ने ही बनाया है ।
परंतु यह स्थिति भृम की स्थिति है । क्योंकि यह GOD PARTICLE  है । और चूंकि इसी कण/पदार्थ से  दुनियाँ 

का निर्माण हुआ है ? जबकि इस कण/पदार्थ का ईश्वर/भगवान /धर्म आदि से कोई लेना देना नहीं है ? इसकी कहानी एकदम अलग है । जो ज़्यादातर लोगों को नहीं मालूम है । हुआ यह कि लियोन लेडरमेन 1 वैज्ञानिक । जिसने नोवल प्राइज़ जीता ने पीटर हिग्ग्स के इस कण ( हिग्ग्स बोसॉन ) के सिद्धान्त की कटु आलोचना 1 पुस्तक लिखकर की । उसने पीटर हिग्ग्स को गलत सवित करने के लिए अपनी पुस्तक का नाम रक्खा था  GOD DAM PARTICLE  प्रकाशक ने जब पुस्तक की पाण्डुलिपि पढ़ी । तो सोचा कि इसका नाम भडकाऊ है । लोग पढ़कर बौखला जाएंगे । बबाल मचेगा । इसलिये प्रकाशक ने पुस्तक का नाम DAM शब्द हटाकर केवल  GOD PARTICLE रख दिया । जिस पर हिग्ग्स ने कोई आपत्ति नहीं की । तबसे इस कण का नाम GOD PARTICLE कहा जाने लगा । स्पष्ट है कि इस कण का ताल्लुक GOD ईश्वर/धर्म आदि से बिलकुल नहीं है ? यह कई मूल कण में से 1 मूल कण Fundamental Particle  है ।
इस संबंध में भारत के IIT संस्थान के वैज्ञानिक  प्रो. डॉक्टर रूप राम चौधरी और प्रो पंकज जैन जो इस   कार्य से जुड़े हैं का कहना है कि - इस मूल कण से धर्म या आध्यात्म से कोई संबंध नहीं है ? यह मूल कण है । स्टेंडर्ड माडल पूरी तरह से सफल नहीं होते हैं । क्योंकि जो आज खोजा गया पदार्थ है । उसके गुण में बदलाव भी आ सकते हैं । इसी संस्थान के वैज्ञानिक प्रो एच सी वर्मा ने बताया - अभी तक जितने मूल  कणों की परिकल्पना की गयी है । उनमे हिग्ग्स बोसॉन नाम के कण की खोज शेष थी । उसी कमी को पूरा करने के लिए यह प्रयोग किया गया था । यह फिर भी निश्चित नहीं है कि यह वही कण है ? जिसकी परिकल्पना की गयी थी । अर्थात जिसकी खोज शेष थी । प्रो तपोव्रत सरकार ने भी यही कहा - यह मूल कण है । यह GOD का मामला नहीं है ?
इस सम्पूर्ण विवरण से स्पष्ट है कि इस खोज में जिस कण की खोज की गयी है । वह वास्तव में वही मूल कण है । जिसकी खोज की जा रही थी ? दूसरी बात यह कि अगर यह सिद्ध भी हो जाय कि यह वही कण अर्थात हिग्ग्स बोसॉन कण है ।  फिर भी इसका धर्म/आध्यात्म/ईश्वर/भगवान आदि से कोई संबंध नहीं है । और यह प्रयोग यह सिद्ध करता है कि बृह्मांड ( प्रथ्वी । और गृह । और नक्षत्र आदि ) ईश्वर ने नहीं बनाए थे । http://myviews-krishnagopal.blogspot.in/2012/08/blog-post_7.html
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इस लेख के लेखक भारत सरकार के उच्च पद से रिटायर्ड ( 64 ) हैं । मैंने ये लेख सत्यकीखोज के पाठकों के चिंतन मनन व प्रश्नों के हेतु साझा किया है । आप चाहें । तो टिप्पणी द्वारा इस लेख में उठे प्रश्नों के उत्तर भी दे सकते हैं । या फ़िर ( मूल ) प्रश्न निकाल कर मुझसे उत्तर पूछ भी सकते हैं । इन सभी के सरल सहज प्रयोगात्मक स्तर पर उत्तर मेरे पास हैं ।