13 जून 2016

कब्रपूजा याने महामूर्खता

समाचार पत्रों में अक्सर छपता है कि बालीवुड के किसी प्रसिद्ध अभिनेता, अभिनेत्री, क्रिकेट खिलाड़ी, राजनेता ने अजमेर के गरीब नवाज की कब्र पर चादर चढ़ाकर अपनी फिल्म को सुपरहिट करने, मैच में जीत के लिए दुआ मांगी । 
भारत की नामीगिरामी हस्तियों के दुआ मांगने से साधारण जनमानस में एक भेड़चाल सी आरंभ हो गयी कि अजमेर में दुआ मांगने से बरकत हो जाएगी । किसी की नौकरी लग जाएगी । किसी के यहाँ लड़का पैदा हो जायेगा । किसी का कारोबार नहीं चल रहा । तो वह चल जायेगा । किसी का विवाह नहीं हो रहा । तो वह हो जायेगा ।
कुछ सवाल हमें अपने दिमाग पर जोर डालने को मजबूर कर रहे हैं । जैसे कि यह गरीबनवाज़ कौन थे ? कहाँ से आये थे ? इन्होंने हिंदुस्तान में क्या किया और इनकी कब्र पर चादर चढ़ाने से हमें सफलता कैसे प्राप्त होती है ?
गरीबनवाज़ भारत में लूटपाट करने वाले, हिन्दू मंदिरों का विध्वंस करने वाले, भारत के अंतिम हिन्दू राजा पृथ्वीराज चौहान को हराने वाले व जबरदस्ती इस्लाम में धर्म परिवर्तन करने वाले मुहम्मद गौरी के साथ भारत में शांति का पैगाम लेकर आये थे । 
पहले वे दिल्ली के पास आकर रुके । फिर अजमेर जाते हुए उन्होंने करीब 700 हिन्दुओं को इस्लाम में दीक्षित किया और अजमेर में वे जिस स्थान पर रुके । उस स्थान पर तत्कालीन हिन्दू राजा पृथ्वीराज चौहान का राज्य था ।
ख्वाजा के बारे में चमत्कार की अनेकों कहानियां प्रसिद्ध है कि जब पृथ्वीराज के सैनिकों ने ख्वाजा के वहाँ पर रुकने का विरोध किया । क्योंकि वह स्थान राज्य सेना के ऊँटो को रखने का था । तो पहले तो ख्वाजा ने मना कर दिया । फिर क्रोधित होकर शाप दे दिया कि जाओ तुम्हारा कोई भी ऊंट वापिस उठ नहीं सकेगा ।
जब राजा के कर्मचारियों ने देखा कि वास्तव में ऊंट उठ नहीं पा रहे है । तो वे ख्वाजा से माफ़ी मांगने आये । और फिर कहीं जाकर ख्वाजा ने ऊँटों को दुरुस्त कर दिया ।
दूसरी कहानी अजमेर स्थित आनासागर झील की है । ख्वाजा अपने खादिमों के साथ वहाँ पहुँचे और उन्होंने एक गाय को मारकर उसका कबाब बनाकर खाया । कुछ खादिम पनसिला झील पर चले गए । कुछ आनासागर झील पर ही रह गए । 
उस समय दोनों झीलों के किनारे करीब 1000 हिन्दू मंदिर थे । हिन्दू ब्राह्मणों ने मुसलमानों के वहाँ पर आने का विरोध किया । और ख्वाजा से शिकायत कर दी । ख्वाजा ने तब एक खादिम को सुराही भरकर पानी लाने को बोला । जैसे ही सुराही को पानी में डाला । तभी दोनों झीलों का सारा पानी सूख गया । ख्वाजा फिर झील के पास गए । और वहाँ स्थित मूर्ति को सजीव कर उससे कलमा पढवाया । और उसका नाम सादी रख दिया ।
ख्वाजा के इस चमत्कार की सारे नगर में चर्चा फैल गई । पृथ्वीराज चौहान ने अपने प्रधानमंत्री जयपाल को ख्वाजा को काबू करने के लिए भेजा । मंत्री जयपाल ने अपनी सारी कोशिश कर डाली पर असफल रहा । और ख्वाजा ने उसकी सारी शक्तियों को खत्म कर दिया । पृथ्वीराज चौहान सहित सभी लोग ख्वाजा से क्षमा मांगने आये । काफी लोगों ने इस्लाम कबूल किया । पर पृथ्वीराज चौहान ने इस्लाम कबूलने इंकार कर दिया । 
तब ख्वाजा ने भविष्यवाणी की कि - पृथ्वीराज को जल्द ही बंदी बनाकर इस्लामिक सेना के हवाले कर दिया जायेगा । निजामुद्दीन औलिया जिसकी दरगाह दिल्ली में स्थित है ने भी ख्वाजा का स्मरण करते हुए कुछ ऐसा ही लिखा है ।
बुद्धिमान पाठक स्वयं अंदाजा लगा सकते हैं कि इस प्रकार के करिश्मों को सुनकर कोई मूर्ख ही इन बातों पर विश्वास कर सकता है । भारत में स्थान स्थान पर स्थित कब्रें उन मुसलमानों की हैं । जो भारत पर आक्रमण करने आये थे । और हमारे वीर हिन्दू पूर्वजों ने उन्हें अपनी तलवारों से परलोक पहुँचा दिया था ।
ऐसी ही एक कब्र बहराइच गोरखपुर के निकट स्थित है । यह कब्र गाज़ी मियां की है । गाज़ी मियां का असली नाम सालार गाज़ी मियां था । एवं उसका जन्म अजमेर में हुआ था । इस्लाम में गाज़ी की उपाधि किसी काफ़िर यानि गैर मुसलमान को क़त्ल करने पर मिलती थी ।
गाज़ी मियां के मामा मुहम्मद गजनी ने ही भारत पर आक्रमण करके गुजरात स्थित प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर का विध्वंस किया था । कालांतर में गाज़ी मियां अपने मामा के यहाँ पर रहने के लिए गजनी चला गया । कुछ काल के बाद अपने वज़ीर के कहने पर गाज़ी मियां को मुहम्मद गजनी ने नाराज होकर देश निकाला दे दिया । उसे इस्लामिक आक्रमण का नाम देकर गाज़ी मियां ने भारत पर हमला कर दिया । हिन्दू मंदिरों का विध्वंस करते हुए, हजारों हिन्दुओं का क़त्ल अथवा उन्हें गुलाम बनाते हुए, नारी जाति पर अमानवीय कहर बरपाते हुए गाज़ी मियां ने बाराबंकी में अपनी छावनी बनाई । और चारो तरफ अपनी फौजें भेजी । 
कौन कहता है कि हिन्दू राजा कभी मिलकर नहीं रहे ? मानिकपुर, बहराइच आदि के 24 हिन्दू राजाओं ने राजा सोहेलदेव पासी के नेतृत्व में जून की भरी गर्मी में गाज़ी मियां की सेना का सामना किया । और उसकी सेना का संहार कर दिया ।
राजा सोहेलदेव ने गाज़ी मियां को खींच कर एक तीर मारा । जिससे कि वह परलोक पहुँच गया । उसकी लाश को उठाकर एक तालाब में फेंक दिया गया । हिन्दुओं ने इस विजय से न केवल सोमनाथ मंदिर के लूटने का बदला ले लिया था । बल्कि अगले 200 सालों तक किसी भी मुस्लिम आक्रमणकारी का भारत पर हमला करने का दुस्साहस नहीं हुआ ।
कालांतर में फ़िरोज़शाह तुगलक ने अपनी माँ के कहने पर बहराइच स्थित सूर्यकुण्ड नामक तालाब को भरकर उस पर एक दरगाह और कब्र गाज़ी मियां के नाम से बनवा दी । जिस पर हर जून के महीने में सालाना उर्स लगने लगा । 
मेले में एक कुण्ड में कुछ बहरूपिये बैठ जाते हैं । और कुछ समय के बाद लाइलाज बीमारियों को ठीक होने का ढोंग रचते हैं । पूरे मेले में चारों तरफ गाज़ी मियां के चमत्कारों का शोर मच जाता है । और उसकी जय जयकार होने लग जाती है । हजारों की संख्या में मूर्ख हिन्दू.. औलाद की, दुरुस्ती की, नौकरी की, व्यापार में लाभ की दुआ गाज़ी मियां से मांगते हैं । शरबत बांटते हैं । चादर चढ़ाते हैं । और गाज़ी मियां की याद में कव्वाली गाते हैं ।
कुछ सामान्य से 10 प्रश्न हम पाठकों से पूछना चाहेंगे ?
1 एक कब्र जिसमें मुर्दे की लाश मिट्टी में बदल चुकी है । क्या वो किसी की मनोकामना पूरी कर सकती है ?
2 सभी कब्रें उन मुसलमानों की है । जो हमारे पूर्वजों से लड़ते हुए मारे गए थे । उनकी कब्रों पर जाकर मन्नत मांगना क्या उन वीर पूर्वजो का अपमान नहीं है । जिन्होंने अपने प्राण धर्म रक्षा करते की बलिवेदी पर समर्पित कर दिये थे ?
3 क्या हिन्दुओं के राम, कृष्ण अथवा 33 करोड़ देवी देवता शक्तिहीन हो चुके हैं । जो मुसलमानों की कब्रों पर सर पटकने के लिए जाना आवश्यक है ?
4 गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि - कर्म करने से ही सफलता प्राप्त होती है । तो मजारों में दुआ मांगने से क्या हासिल होगा ?
5 भला किसी मुस्लिम देश में वीर शिवाजी, महाराणा प्रताप, हरीसिंह नलवा आदि वीरों की स्मृति में कोई स्मारक आदि बनाकर उन्हें पूजा जाता है । तो भला हमारे ही देश पर आक्रमण करने वालों की कब्र पर हम क्यों शीश झुकाते हैं ?
6 क्या संसार में इससे बड़ी मूर्खता का प्रमाण आपको मिल सकता है ?
7 हिन्दू जाति कौन सी ऐसी आध्यात्मिक प्रगति मुसलमानों की कब्रों की पूजा कर प्राप्त कर रही है । जिसका वर्णन पहले से ही हमारे वेदों उपनिषदों आदि में नहीं है ?
8 कब्र पूजा को हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल और सेकुलरता की निशानी बताना हिन्दुओं को अँधेरे में रखना नहीं तो और क्या है ?
9 इतिहास की पुस्तकों में गौरी, गजनी का नाम तो आता है । जिन्होंने हिन्दुओं को हरा दिया था । पर मुसलमानों को हराने वाले राजा सोहेलदेव पासी का नाम तक न मिलना, क्या हिन्दुओं की सदा पराजय हुई थी । ऐसी मानसिकता को बनाकर उनमें आत्मविश्वास और स्वाभिमान की भावना को कम करने के समान नहीं है ?
10 क्या हिन्दू फिर एक बार 24 हिन्दू राजाओं की भांति मिलकर संगठित होकर देश पर आये संकट जैसे कि आंतकवाद, जबरन धर्म परिवर्तन, नक्सलवाद, लव जिहाद, बंगलादेशी मुसलमानों की घुसपैठ आदि का मुंहतोड़ जवाब नहीं दे सकते ?
आशा है इस लेख को पढ़कर आपकी बुद्धि में कुछ प्रकाश हुआ होगा । अगर आप आर्य राजा राम और कृष्ण जी महाराज की संतान हैं । तो तत्काल इस मूर्खतापूर्ण अंधविश्वास को छोड़ दें । और अन्य हिन्दुओं को भी इस बारे में प्रकाशित करें ।
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साभार - महेश हिन्दू । 
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