31 अगस्त 2013

खायकै मूतै सूतै बाउं कायकौं वैद बसाबै गाउं

लोक कहावतों में स्वास्थय चर्चा - संसार में उसी व्यक्ति को पूर्ण रूप से
सुखी कहा जा सकता है । जो कि शरीर से निरोगी हो । ओर निरोगी रहने के लिए यह आवश्यक है कि बच्चों को उनकी बाल्यावस्था ही से स्वस्थ रखने का ध्यान रखा जाए । उनको संयमी बनाया जाए । उनको ऐसी शिक्षा दी जाए । जिससे कि वे स्वस्थ रहने की ओर अपना विशेष ध्यान दे सकें ।
माना कि समय की तेज रफ्तार के आगे आज शहरी और ग्रामीण समाज का अन्तर धीरे धीरे मिटता जा रहा है । लेकिन इतने पर भी आपको अभी भी गाँवों में बसते उस समाज की झाँकी देखने को मिल सकती है । जो कि युग परम्परा से श्रवण ज्ञान द्वारा अपने स्वास्थय का ख्याल रखता आया है । यह ज्ञान बहुत कुछ उन्हे अपनी लोक कहावतों में मिल जाता है । आप देख सकते हैं कि लोक कहावतों के ज्ञान के कारण ही आज भी अधिकांश ग्रामीण समाज शहरी समाज की अपेक्षा कहीं अधिक स्वस्थ एवं निरोग मिलेगा ।
लोक कहावतों में प्रात:काल से लेकर रात्रि तक की विविध अनुभूतियां मिला करती हैं । कोई भी उनके अनुसार आचरण करके देख ले । उनकी सत्यता की गहरी छाप ह्रदय पर पडकर ही रहेगी । उदाहरणार्थ यहाँ कुछ कहावतें दी जा रही हैं ।

प्रात:काल खटिया से उठकै । पियै तुरन्तै पानी ।
कबहूँ घर मा वैद न अइहै । बात घाघ कै जानि ।
आँखों में त्रिफला । दांतों में नोन । भूखा राखै । चौथा कोन ।
अर्थात - त्रिफला..जो कि नेत्रों हेतु ज्योति वर्द्धक एवं उनकी अन्य विभिन्न प्रकार के रोगों से बचाव हेतु रामबाण औषधि मानी जाती है ।
जो व्यक्ति त्रिफला के जल से आँखों का प्रक्षालन करता है । नमक ( में सरसों का तेल मिलाकर ) से दाँत साफ़ करता है । और सप्ताह में एक बार उपवास रखता है । तो इन तीनों विधियों के अतिरिक्त उसे अन्य चौथा कार्य करने की कोई आवश्यकता ही नहीं है । सिर्फ इन तीन उपायों से ही वो अपने पूरे शरीर को निरोग रख सकता है ।
मोटी दतुअन जो करै । भूनी हर्र चबाय ।
दूद बयारी जो करै । उन घर वैद न जाय ।
अर्थात - उपरोक्त की ही भांति ही यहाँ भी शरीर रक्षार्थ तीन विधियाँ बताई गई हैं । नीम, कीकर इत्यादि कि मोटी लकडी ( दातुन ) को चबाकर करने से दाँत मजबूत होते हैं । भूनी हुई हर्र ( हरड ) के सेवन से पाचन तन्त्र मजबूत होता है । और कच्चे दूध से नेत्र प्रक्षालन ( नेत्रों को धोना ) करने से नेत्रों की ज्योति बढती है । जो व्यक्ति इन तीन कार्यों को करता है । उसे फिर किसी चिकित्सक की कोई आवश्यकता ही नहीं रहती ।
प्रात:काल करै अस्नाना । रोग दोष एकौ नई आना ।
अर्थात - जो प्रात:काल नित्य कर्म से निवृत होकर स्नान कर लेते हैं । वे सदैव निरोग रहते हैं ।
खाय कै मूतै, सूतै बाउं । काय कौं वैद बसाबै गाउं ।
अर्थात - भोजन करने के पश्चात जो मूत्र त्याग करते हैं । और बायीं करवट लेकर सोते हैं । उनको यह चिन्ता नहीं रहती कि उनके गाँव में वैद्य डाक्टर रहता है । या नहीं ।
वर्ष के बारह महीनों में कब कम भोजन करना हितकर है । क्या क्या खाद्य पदार्थ किस किस मास में वर्जित हैं । यह ज्ञान भी कहावतों में
हैं । यथा -
सावन ब्यारो जब तब कीजे । भादौं बाकौ नाम न लीजे ।
क्वारं मास के दो पखवारे । जतन जतन से काटौ प्यारे ।
अर्थात - श्रावण मास में रात्रि का भोजन कभी कभी ही करना चाहिए । भाद्रपद में रात्रि का भोजन करना ही नहीं चाहिए । आश्विन मास के
दोनों ही पक्ष सतर्कता पूर्वक व्यतीत करने चाहिए । अन्यथा अस्वस्थ हो जाने की आशंका हो ही जाती है ।
क्वार करेला, चेतै गुड । भादौं में जो मूली खाय ।
पैसा खोवै गांठ का । रोग झकोरा खाय ।
अर्थात - अश्विन मास में जो करेला । चैत्र मास में गुड । और भाद्रपद मास में मूली का सेवन करते हैं । वें गाँठ का पैसा गंवाकर उससे रोग ही अपने पास में बुलाते हैं ।
कातिक मास, दिवाली जलाय । जै बार चाबै, तै बार खाय ।
अर्थात - कार्तिक मास में दीपावली की पूजा करने के पश्चात ऐसी ऋतु आ जाती है कि भोजन का परिपाक भली प्रकार से होने लगता है । उन
दिनों इच्छानुसार भोजन जितनी बार चाहें कर लिया करें । सब खाया पिया अच्छी तरह से शरीर को लगेगा । और चेहरे पर कांति रहेगी ।
चैते गुड, वैसाखे तेल । जेठे पंथ, अषाडै बेल ।
साउन साग, भादौं दही । क्वांर करेला, कातिक मही ।
अगहन जीरा, पूसै धना । माघै मिसरी, फागुन चना ।
जो यह बारह देई बचाय । ता घर वैद कभऊं नइं जाए ।
अर्थात - चैत्र मास में गुड का सेवन करना अहितकर है । क्योंकि नया गुड शरीर में कफ कारक होता है । और इस मास में प्रकृति के अनुसार कफ की बहुलता रहती है । वैशाख में गर्मी की प्रखरता रहती है । तेल की प्रकृति गर्म होती है । इसलिए हानिकारक है । ज्येष्ठ मास में लू
लपट का दौर रहता है । अतएव यात्राएं वर्जित हैं । आषाढ मास में बेल का सेवन नहीं करना चाहिए । क्योंकि वह अनुकूल नहीं पडता । पेट
की अग्नि को मंद कर देता है. सावन में वायु का प्रकोप रहता है । साग वायुकारक हैं । अतएव प्रतिकूल रहता हैं । भाद्रपद में वर्षा होती रहती है । और दही पित्त को कुपित करता है । आश्विन में करेला पककर पित्त कारक हो जाता है । अतएव हानिकर सिद्ध होता है ।
कार्तिक मास, जो कि वर्षा और शीत ऋतु का संधि स्थल है । उसमें पित्त का कोप और कफ का संचय होता है । और मही ( मट्ठा ) से शरीर में
कफ बढता है । इसलिए त्याज्य है । अगहन ( मार्गशीष ) में सर्दी अधिक होती है । जीरा की तासीर भी शीतकारक है । इसलिए इससे
बचना चाहिए । पौष मास में धान । माघ में मिसरी । और फाल्गुन में चना । शरीर के लिए प्रतिकूल बैठते हैं । इनको ध्यान में रखकर जो मनुष्य खानपान में सावधानी रखते हैं । वे सदैव निरोग रहते हैं ।
उनको कभी डाक्टर वैद्य की आवश्यकता नहीं पडती ।
साभार चक्रपाणि त्रिपाठी फ़ेसबुक पेज से  
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Because you identify yourself with the body you think the Guru, too, to be some body. You are not the body, nor is the Guru. You are the Self and so is the Guru - Ramana Maharshi
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रूपये का अवमूल्यन और सोना गिरवी रखने के बारे में - 
www.secretsofthefed.com/ending-the-masquerade-the
http://www.amarujala.com/news/samachar/business/personal-finance/banks-buy-gold-from-citizens-to-ease-rupee-crisis/
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मुसलमान जब अल्पसंख्यक होते हैं । तो भाई बनकर रहते हैं । और बहुसंख्यक होते ही ये कसाई बन जाते हैं । इतिहास गवाह है कि जिस भी देश में मुसलमान बहुसंख्यक हो गए । वो देश आतंकवाद, जिहाद, दंगे, और बम धमाकों की भेंट चढ़ गया । पाकिस्तान, बांग्लादेश, सऊदी अरब , इराक, अफगानिस्तान, सीरिया जैसे देश इसका जीता जागता उदहारण हैं । आज इन देशों में हिन्दू, बौद्ध, यहूदी धर्म समाप्त हो चुके हैं । या तो उन्हें मार दिया गया । या जबरन धर्म परिवर्तन करा दिया गया । और महिलाओं को बलात्कार के बाद यातना पूर्वक मार दिया गया ।
और यही स्थिति अगर हिंदुस्तान की रही । तो यहाँ भी वही हालत हो जाएगी । असम , कश्मीर और किश्तवाड़ में हम ये देख भी चुके हैं ।
जागो हिन्दू जागो ।
साभार HINDUTWA UNITES INDIA फ़ेसबुक पेज

29 अगस्त 2013

बङी बेदर्दी से होती है - गौ हत्या

भारत सरकार ने 3 चरणों में कुल 1400 टन सोना जेनेवा स्थित विश्व बैंक के बोल्ट में गिरवी रखने की मंजूरी दी ।
पहले चरण में 500 टन सोना 1 विशेष विमान से जेनेवा गिरवी रखने भेजा जायेगा ।  भारत को अब तक 2 बार सोना गिरवी रखना पड़ा है । 1991 में जब कांग्रेस समर्थित चंद्रशेखर सरकार थी ।  तब बड़े ही गुप्त तरीके से 13 ट्रक सोना मुंबई के रिजर्व बैंक से एयरपोर्ट के लिए निकले । लेकिन रास्ते में 1 ट्रक का एक्सीडेंट हो गया । और वो पलट गया । फिर जब पुलिस आई । और सोना देखी । तो पुलिस भी चौंक उठी । फिर खुलासा हुआ कि ये सोना रिजर्व बैंक का है । और इसे जेनेवा भेजा जा रहा है ।
आखिर किसी देश को अपना रिजर्व सोना गिरवी क्यों रखना पड़ता है ??
सोना गिरवी रखना । मतलब उस देश की अर्थव्यवस्था टूट चुकी है । और विश्व समुदाय को उस देश की आर्थिक स्थिति पर भरोसा नही है । उस देश की साख अब मिट्टी में मिल चुकी है । और उस देश का विदेशी मुद्रा रिजर्व भंडार खत्म हो चूका है ।
सोना गिरवी रखने के दुष्परिणाम - इसका सबसे बड़ा असर आयात और निर्यात करने वालों पर पड़ेगा । क्योंकि अब विश्व का कोई भी देश भारत के किसी भी बैंक की गांरटी पर विश्वास नही करेगा । और आयात करने वालों को एडवांस में ही पूरा पेमेंट डालर में करना होगा ।
चूंकि भारत विश्व का सबसे बड़ा क्रूड आयातक देश है । इसलिए अब भारत में डालर की डिमांड और बढ़ जायेगी । क्योंकि तेल कम्पनियों को क्रुड आयात करने के लिए डालर की जरूरत पड़ेगी । और रुपया और नीचे जायेगा ।
अजीब इत्तफाक है - इस देश का प्रधानमन्त्री भी अर्थशास्त्री । राष्ट्रपति भी अर्थशास्त्री । वित्तमंत्री भी अर्थशास्त्री । 

और रिजर्व बैंक का गवर्नर भी अर्थशास्त्री । फिर भी इस देश की अर्थव्यवस्था डूब रही है ।
साभार एक ही विकल्प मोदी ( EK Hi Vikalp Modi ) फ़ेसबुक पेज से
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सबसे बड़ी खबर - रुपये के गिरते भाव का कारण पता चल गया है । रूपया इसीलिए गिराया गया । ताकि सोना अमेरिका को बेचा जा सके । 1100 टन भारत का सोना अमेरिका को दे दिया जाएगा । इसमें से 400 टन को मंजूरी मिल गयी है । जिसमें कुछ टन पद्मनाभ मंदिर का सोना भी शामिल है । भारत के फाइनेंस मिनिस्टर को अमेरिका के फेडरल रिजर्व और रोथ चाइल्ड ने खरीद लिया है । ये रहा इसका सबूत - अमेरिका के फेड रिजर्व में सोना का भण्डार खाली हो गया है । अमेरिका का दिवाला निकल चुका है । और जर्मनी फ़्रांस अदि यूरोपियन देश अमेरिका से सोना वापस मांग रहे है । चाइना ने अमेरिका द्वारा दिया गया सोने से भरा हुआ जहाज वापिस कर दिया है । क्योंकि अमेरिका ने नकली सोना भेजा था । टंगस्टन धातु पर सोने की परत चढा हुआ ( गूगल कीजिये ) और अमेरिका के फेडरल रिजर्व में सोने की पूर्ति के लिए भारत का फाइनेंस मिनिस्टर भारत में सोने पर टैक्स बढ़ा रहा है । आम जनता को सोना खरीदने से दूर रहने की सलाह दे रहा है । और भारत में शुद्ध (

बिस्कुट ) सोना खरीदने पर रोक । क्या हम अंग्रेजों के ज़माने में जी रहे है ??
its time to sue the Finance minister of India for imposing so many restrictions and taxes on Indians to buy gold! SO THAT the american fedral reserve is filled up.. his sinister motives are exposed now..he iz just a puppet in the hands of American fedral reserve and Rothchilds....C THIS..AND FOR MORE CLICK ON THE WEBSITE..
And the central planners ( also ) went to INDIA and said, ‘Look, you’ve got to do something about all of this gold buying in INDIA.’ So we’ve had ten different steps by the INDIAN government to try to curb demand - a 2% tax, a 4% tax, a 6% tax, an 8% tax, and a ruling that banks couldn’t lend money for people to buy gold.
They also convinced the INDIAN Jewelers Association that as of July 1st they couldn’t sell gold bars and coins. Just last week there was a new rule implemented that if you are importing gold you have to prove that a certain amount is being re-exported. We’ve probably had ten or twelve things ( restrictions ) happen in six months
http://www.secretsofthefed.com/ending-the-masquerade-the-coming-shortage-of-physical-gold-that-will-change-everything-wvideo/

साभार नरेश आर्य posted to एक ही विकल्प मोदी ( EK Hi Vikalp Modi )
क्यों गिराया गया रुपया..लिंक देखें - https://www.facebook.com/photo.php?fbid=378597838935083&set=a.123905557737647.17980.100003546114467&type=1&theater

बीजेपी...कांग्रेस....सी पी एम...सीपीआई...जनता दल सब ख़त्म हो गई l हमने दस पन्द्रह सालों में देखा है । सबके सब अमेरिका के दुमछल्ले हो गए ।
http://www.youtube.com/watch?v=Fbc7TLzhL24
( दो मिनट का वीडियो )
बात करते हैं - राजीव जी के उस वीडियो की । बात उनकी है । आवाज मेरी है । हूबहू उनकी बात नहीं है l
https://www.youtube.com/watch?v=hCcPuXVYmKI

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कल ही मैंने 5 घंटे का ये वीडियो भी सुना था । http://www.youtube.com/watch?v=9uA_-aaAH0I 
इसलिए मेरी पीड़ा और बढती गई l  इस वीडियो में भैंस को पूतना बताया गया है । जिसका दूध कभी लाभ नहीं पहुंचाता l  गाय तो हमारी माता है । ये सब जानते हैं l  1 और ख़ास बात इस वीडियो में थी कि जिस बेदर्दी से भारत में गौ हत्या होती है । उस बेदर्दी से कहीं नहीं होती l  पहले गौ माता को 200 डिग्री के भाप से जिन्दा पर ही खौलाया जाता है । फिर बड़ी सिरिंज से उनके पेट में इतनी हवा भरी जाती है कि चमड़ा अलग हो जाए । ये सब काम जिन्दा गौ माता के साथ किया जाता है l  उसके बाद गौ माता के सर पर बड़े हथौड़े से चोट की जाती है l  तब कहीं आखिरी में उनकी गर्दन को काटा जाता है l  वीडियो में ही सुना कि गौ माता का सारा मांस एक्सपोर्ट करने के लिए काटा जाता है । एक्सपोर्ट होता है । अमेरिका और यूरोप के देशों में l
साभार दीक्षा राईट टू रिकाल फ़ेसबुक पेज से
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पत्रकार - आप तो बहुत से किसानों के यहाँ गए हैं । उनके यहाँ खाना खाया । और रात भी गुजारी है । क्या आप उनमें से किन्ही 3 किसानों के नाम बता सकते हैं ?
राहुल गाँधी - जरुर  1 रोबर्ट वाड्रा 2 अमिताभ बच्चन 3 अमर सिंह
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एक चाय वाले लड़के ने स्टेशन पर एक बहुत खूबसूरत लड़की को देखा ।
लड़की देखते ही उसके मन में भूचाल आ गया । और वह जोर जोर से गाने लगा - भोली से सूरत..आँखों में मस्ती.. दूर खड़ी शरमाये...हाये हाये..
यह सुनते ही लड़की आग बबूला हो गयी । और कहने लगी - काली सी सूरत..हाथ केतली.. टेशन पर चिल्लाये... चाय चाय
साभार masoom shaan फ़ेसबुक

27 अगस्त 2013

जानू जान डार्लिंग या रिचार्ज वाले भैया ?

एक लड़की अपने ब्वॉय फ्रेंड के साथ एक रेस्टोरेंट में लंच पर गई ।
खाने का आर्डर देने के बाद लड़की ने वॉश रूम की तरफ इशारा करते हुए अपने ब्वॉय फ्रेंड से कहा - एक्सक्यूज़ मी ! और वॉश रूम की तरफ चल पड़ी । उसके जाने के बाद लड़के ने देखा कि वह अपना मोबाइल टेबल पर ही छोड़ गई है ।
लड़के ने सोचा - देखता हूं कि इनसे मेरा नंबर कौन से नाम से सेव किया है । जानू ? जान ? डार्लिंग या कुछ और ?
जैसे ही लड़के ने अपनी गर्ल फ्रेंड के मोबाइल से अपना नंबर डायल किया । स्क्रीन पर नाम आया - रिचार्ज वाले भैया ।
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लड़ाई के बदलते तरीके ।
1980 - घर से बाहर आ फिर देखता हूँ ।
1990 -  एक बार मेरे इलाके में आ..अपने इलाके में तो कुत्ता भी शेर होता है ।
2000 -  फोन पे शेर मत बन..सामना कर तो बताता हूँ ।
2013 -  तू फेसबुक पे मिल साले .तेरी वाल पे ऐसे ऐसे कमेन्ट मारूंगा कि अकाउंट ही डिलीट कर देगा ।
साभार मूर्ख shaan फ़ेसबुक पेज

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एक लेख का महत्वपूर्ण अंश - अब अंत में मैं ऐसे आविष्कार का लिंक दे रहा हूँ । जिसे आप आसानी से पेट्रोल डीज़ल की निर्भरता खत्म कर केवल पानी के विघटन से उत्पन्न उर्जा से अपनी कार बाईक चला सकते है । इस ई-पुस्तक को डाउनलोड कर ध्यान से पढ़िए । मुझे विश्वास है । इस यंत्र को आप आसानी से बना लेंगे । इस आविष्कारक की हत्या कर दी गयी थी । और उसके शोध में मिलावट कर दी गयी थी । ताकि नतीजा गलत

आये । और आप न बना पाए । लेकिन उसका ओरिजिनल नोट लीक हो गया है । और कुछ दूरदर्शी लोगों ने इसे आम आदमी को आसानी से समझ में आने के लिए विस्तार पूर्वक लिखा है । उन वैज्ञानिकों का धन्यवाद ।

http://thepiratebay.sx/torrent/4266059/HHO_run_your_car_on_water
इस दूसरे लिंक में वीडियो को अन क्लिक करिये ( डाउनलोड मत करिये ) सिर्फ बीस पच्चीस एम बी की पुस्तकें डाउनलोड होगी ।
https://thepiratebay.sx/torrent/4619548/Free_energy__hho_gas_blue_prints__all_real_data_


साभार नरेश आर्य फ़ेसबुक पेज
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अलग अलग तरह के मोबाइल- ( केवल व्यंग्य )
मनमोहन सिंह - हमेशा सायलेन्ट मोड में ही रहता है ।
राहुल गाँधी - हमेशा कवरेज क्षेत्र के बाहर रहता है ।
चिदंबरम - कितना भी रीचार्ज कराओ । साला बेलेन्स ही नहीं दिखाता ।
दिग्विजय - हमेशा बकवास काल आती रहती है ।

मनीष तिवारी - सिर्फ राँग नम्बर ही लगता है ।
एन्टोनी ( रक्षा मंत्री ) - इसमें सिक्योरटी लाक ही नहीं है ।
शिन्दे - कोइ नेटवर्क ही नहीं आता ।
जायसवाल ( कोयला मंत्री ) - कोई भी फाइल डालो । डिलीट ही हो जाती है ।
अजय माकन- काल आये न आये । रिंगटोन बजती है ।
सोनिया - इसका तो key Pad लाक ही नहीं खुलता । यूज़ करें । तो कैसे ?
साभार - Satyendra Verma Sunny posted to HINDUTWA UNITES INDIA फ़ेसबुक पेज
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एक शराब फेक्टरी में शराब टेस्ट करने वाला छुट्टी पर चला गया  । और फेक्टरी के मालिक को एक नए आदमी की तलाश थी । जो शराब टेस्ट करने का काम बखूबी कर सके । एक दिन उसका एक कर्मचारी किसी पियक्कड को पकड़ लाया । और बोला - सर ! इसके टेस्टिंग स्किल की सभी बहुत तारीफ़ करते हैं । इसे रख लीजिए ।
शराब फेक्टरी के मालिक ने देखा कि वो आदमी बहुत ही गंदा और
बदबूदार था । और वो उसे रखना नहीं चाहता था ।
फिर भी उसने एक वाइन उसे चखने के लिए दी । चखते ही पियक्कड बोला - ये रेड वाइन है । नोर्थ अमेरिका में बनी है । तीन साल पुरानी है । और इसे लकड़ी के बॉक्स में मेच्योर किया गया है ।
फेक्टरी के मालिक की आंखें खुली की खुली रह गयी । क्योंकि पियक्कड ने एकदम सही पहचान की थी उस शराब की । उसको उसने एक एक करके बीस तरह की शराब पिलाई । और उसने एकदम सही जवाब दिया । पर फेक्टरी के मालिक को उसके शरीर से आ रही बदबू बहुत परेशान कर रही थी । और उसने अपनी सेक्रेटरी को बुलाया । और कहा - मैं इसे फेल करके नौकरी नहीं देना चाहता । कोई उपाय बताओ ।
सेक्रेटरी ने कहा - सर मैं अपना urine एक गिलास में लेकर आती हूँ । और इसे पीने के लिए देती हूँ । और आपको इसे न रखने का बहाना मिल जाएगा । पियक्कड उसे पीते ही बोला - उमृ छब्बीस साल । प्रेग्नेंट है । तीन महीने हो चुके हैं । और अगर नौकरी नहीं दी । तो ये भी बता दूंगा कि - बच्चे का बाप कौन है ??
यह सुनते ही फैक्ट्री के मालिक और उसकी सेक्रेटरी बेहोश हो गए ।
साभार मूर्ख shaan फ़ेसबुक पेज
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संता समुद्र में दही डाल रहा था । बंता - क्या कर रहा है ?
संता - लस्सी बना रहा हूँ ।
बंता - ये क्या पागलपन है । तेरी ऐसी हरकतों से ही लोग हम पर joke बनाते हैं । अब बता ...इतनी सारी लस्सी कौन पियेगा ?
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एक बार रेलवे स्टेशन पर एक वृद्ध सज्जन बैठे रेल का इंतजार कर रहे थे । वहां संता जी आए । और उन वृद्ध आदमी से पूछा ।
संता - अंकल ! टाइम क्या हुआ है ? वृद्ध सज्जन – मुझे नहीं मालूम ?
संता - लेकिन आपके हाथ में घडी तो है । प्लीज बता दीजिए । न कितने बजे हैं ?
वृद्ध सज्जन - मैं नहीं बताऊंगा । संता – पर क्यों ?
वृद्ध सज्जन - क्योंकि अगर मैं तुम्हे टाइम बता दूंगा । तो तुम मुझे थैंक्यू बोलोगे । और अपना नाम बताओगे । फिर तुम मेरा नाम 
काम आदि पूछोगे । फिर संभव है । हम लोग आपस में और भी बातचीत करने लगें । हम दोनों में जान पहचान हो जायेगी । तो हो सकता है कि ट्रेन आने पर तुम मेरी बगल वाली सीट पर ही बैठ
जाओ । फिर हो सकता है कि तुम भी उसी स्टेशन पर उतरो । जहाँ मुझे उतरना है । वहाँ मेरी बेटी..जो कि बहुत सुन्दर है । मुझे लेने स्टेशन आयेगी । तुम मेरे साथ ही होगे । तो निश्चित ही उसे देखोगे । वह भी तुम्हें देखेगी । हो सकता है । तुम दोनों एक दूसरे को दिल दे बैठो । और शादी करने की जिद करने लगो । इसलिए भाई ! मुझे माफ
करो । मैं ऐसा कंगाल दामाद नहीं चाहता । जिसके पास टाइम देखने के
लिए अपनी घडी तक नहीं है ।
साभार मूर्ख shaan फ़ेसबुक पेज

26 अगस्त 2013

ईसाई धर्मगुरु कितने कट्टरपंथी हैं ?

बाबा किन्हें किन्हें समझावे रे..अंधेरी दुनियां ।
सिर्फ पाल दिनाकरन ही नहीं । पूरा यूरोप और अमेरिका ईसाई अंध विश्वास को बढावा देता है ।
- पेरू में ईसाई धर्म से ताल्लुक रखने वाले 12 लोगों को उस समय जान से हाथ धोना पड़ा । जब इन लोगों ने " अंधविश्वास " में खुद को आग के हवाले कर दिया ।
- 50 साल के पॉल बाबा भगवान यीशु ? के नाम पर कृपा का कारोबार करते हैं । वे जब कृपा के कारोबार का प्रचार करते हैं । तब दावा करते हैं कि उन्हें प्रभु यीशु की काया में प्रवेश हो जाने का अनुभव होने लगता है । और प्रभु के प्रचार के बहाने कृपा बरसाने लग जाते हैं । वे जिन पर कृपा करते हैं । उनका यदि कोई व्यापार है । तो उसमें हिस्सेदारी की मांग भी करते हैं । पॉल का यह भी दावा है कि वे ईसामसीह के साक्षात दर्शन भी कर चुके हैं । इसी मुलाकात के बाद उन्हें ज्ञान के प्राप्ति और कृपा बांटने की आध्यात्मिक उपलब्धि हासिल हुई । पॉल दिनाकरण कारूण्या विश्वविद्यालय और जीसस कॉल्स नामक संस्थाओं के मुखिया हैं । वे कॉल्स जीसस संस्था के नाम से ही कृपा बांटने का शुल्क लेते हैं । पॉल चेन्नई के ईसाई धर्मगुरु एवं प्रचारक डा. डी जी एस दिनाकरण के पुत्र हैं । डी जी एम ने भी प्रभु यीशु से 20 साल पहले साक्षात रु-ब-रु होने का दावा किया था । पॉल दिनाकरण की पत्नी इवेंजीलाइन विवाह से पूर्व का नाम विजयाध्द और उनकी तीन संतानें कृपा कारोबार का प्रबंधन देखती हैं । धर्म कोई भी हो । उससे जुङे ज्यादातर संत उसे अंधविश्वास को बढ़ावा देने और अर्थ दोहन का ही काम करते हैं । भारतीय मूल की दिवंगत नन सिस्टर अल्फोंजा को वेटिकन 

सिटी में पोप ने ईसाई संत की उपाधि से विभूषित किया था । दरअसल धर्म की बुनियाद ही चमत्कारी अंधविश्वासों पर रखी गई है । अल्फोंजा को संत की उपाधि से इसलिए अलंकृत किया गया था । क्योंकि उनका जीवन छोटी उमृ में ही भ्रामक दैवीय व अतीन्द्रिय चमत्कारों का दृष्टांत बन गया था । इससे साफ होता है कि - धर्म चाहे ईसाई हो । चाहे इस्लाम हो । या हिन्दू । उनके नीति नियंत्रक ठेकेदार धर्मों को यथार्थ से परे चमत्कारों से महिमा मंडित कर कूप मंडूकता के ऐसे कट्टर अनुयायियों की श्रृंखला खड़ी करते रहे हैं । जिनके विवेक पर अंधविश्वास की पट्टी बंधी रहे । और वे आस्था व अंधविश्वास के बीच गहरी लकीर के अंतर को समझ पाने की सोच विकसित ही न कर पाएं ?
चमत्कार की महिमा - मानवीय सरोकारों के लिए जीवन अर्पित कर देने वाले व्यक्तित्व की तुलना में अलौकिक चमत्कारों को संत शिरोमणि के रूप में महिमा मंडित करना किसी एक व्यक्ति को नहीं । पूरे समाज को दुर्बल बनाने की कोशिशें हैं । सिस्टर अल्फोंजा से जुड़े चमत्कार किवदंती जरूर बनने लगे हैं । लेकिन यथार्थ की कसौटी पर इन्हें कभी नहीं परखा गया । अब इस चमत्कार में कितनी सच्चाई है कि अल्फोंजा की समाधि पर प्रार्थना से एक बालक के मुङे हुए पैर बिना किसी उपचार के ठीक हो गए ? यह समाधि कोट्टयम जिले के भरनागणम गांव में बनी हुई है ।

ईसाई धर्म गुरुओं द्वारा बचाव - यही अलौकिक कलावाद धर्म के बहाने व्यक्ति को निष्क्रिय व अंधविश्वासी बनाता है । वही भावना मानवीय मसलों को यथास्थिति में बनाए रखने का काम करती है । और हम ईश्वरीय तथा भाग्य आधारित अवधारणा को प्रतिफल व नियति का कारक मानने लग जाते हैं ।
ईसाई धर्मगुरु कितने कट्टरपंथी हैं ? यह इस बात से भी पता चलता है कि जब बाबा रामदेव का " योग " प्रचार के चरम पर दुनिया में विस्तार पा रहा था । तब इंगलैंड की दो चर्चों में योग के पाठ पर पाबंदी लगा दी गई थी । टॉन्टन की एक चर्च के पादरी स्मिथ ने तो यहां तक कहा था कि - योग ईसाई धर्म से भटकाने का एक रास्ता है । और यह भारतीय मूल के हिन्दू, बौद्ध व जैन दर्शन से कतई अलग नहीं है । इसी तरह 2007 में अमेरिकी सीनेट के उदघाटन के अवसर पर जब हिन्दू पुरोहित ने वैदिक मंत्रों का शंखनाद किया । तो सूली पर टंगे ईसाई धर्म की चूलें हिल गई । सदन में मौजूद कट्टरवादी ईसाईयों ने भविष्य में वेद मंत्रों के पाठ पर पाबंदी लगाने के लिए हल्ला बोल दिया । यह शोर तभी थमा । जब मंत्रोच्चार पर भविष्य में स्थाई तौर से रोक लगा दी गई ।
दरअसल भारत या अन्य पूर्वी देशों से कोई ज्ञान यूरोपीय देशों में पहुंचता है । तो इन देशों की ईसाईयत पर संकट के बादल मंडराने लगते हैं । ओशो रजनीश ने जब अमेरिका में उपनिषद और गीता को बाइबिल से तथा राम और कृष्ण को जीसस से श्रेष्ठ घोषित करने के दावे शुरू किए । और धर्म तथा अधर्म की अपनी विशिष्ट शैली में व्याख्या की । तो रजनीश के आश्रम में अमेरिकी बुद्धिजीवियों का तांता लग गया । उन्हें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि - पूरब के जिन लोगों को हम हजारों मिशनरियों के जरिये शिक्षित करने में लगे हैं । उनके ज्ञान का आकाश तो कहीं बहुत ऊंचा है । यही नहीं । जब रजनीश ने व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति रोनाल्ड रोगन जो ईसाई धर्म को ही दुनिया का एकमात्र धर्म मानते थे । और वेटिकन सिटी में पोप को धर्म पर शास्त्रार्थ करने की चुनौती दी । तो ईसाईयत पर संकट छा गया । और षडयंत्र पूर्वक रजनीश को अमेरिका से बेदखल कर दिया गया । अब तो अमेरिका और ब्रिटेन में हालात इतने बदलाव है कि वहाँ के कई राज्यों में डार्विन के विकासवादी सिद्धांत को स्कूली पाठ्यक्रमों से हटाने की मांग जोर पकड़ रही है । क्योंकि डार्विन को ईसाई धर्म का विरोधी और नास्तिक माना जाता है । यही कारण है कि पॉल बाबा पर सवाल उठना शुरू हुए । तो कई चर्चों के फादर उनका बचाव करते दिख रहे हैं । बहरहाल खुद को ईसाई धर्म का प्रचारक बताते हुए पॉल दिनाकरण का ईश्वर तक भक्तों की बात पहुंचाने और फिर कृपा बरसाने का कारोबार निष्कंटक जारी है ।
पूरी पोस्ट देखें । कमेंट कर विचारों से अवगत कराएं ।
साभार Ramgopal Sharma's फ़ेसबुक
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अध्यात्मिक किताबें शायद आपके काम आयें । हमारे एक शुभचिंतक द्वारा मुझे प्रेषित किया गया लिंक
http://arunkumarsharma.com/Books.html
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ये भी जानिये । 
- 1 , 10 , 100 , 1000 , 10000 इत्यादि के बढ़ते कृम को ही दशमलव प्रणाली कहा जाता है । क्योंकि इसमें हर अलग अंक में पिछले अंक से 10 गुणा की बढ़ोत्तरी होती चली जाती है । इस दशमलव प्रणाली को बाल्मीकि रामायण में कुछ इस तरह समझाया गया है ।
इक पानी का छींटा सहस्त्र आयुत लक्ष प्रयुत कोट्यः क्रमशः ।
अर्बुदम अब्दम खर्व निखार्वं महापद्मं शंख्वः तस्मात ।
निधिः चा अन्तम मध्यम परर्द्हम आईटीआई पानी का छींटा गुना उत्तरं संज्ञाह । संख्याय स्थानानाम व्यवहार अर्थम कृताः पूर्विः इति ।
(  वाल्मीकि रामायण 3/39/44 )

अर्थात -
एक = 1
1 दस = 10 ।
10 दस = 1 सौ ।
10 सौ = 1 हजार ( Ayut )
10 हजार ।
हजार 100 = 1 लाख ।
1 प्रयुतम = 10 लाख = 1 मिलियन ।
100 लाख = 1 कोटि = 1 करोङ ।
100 करोड़ = 1 अर्बुद ( अरब ) = 1 अरब ।
100 अर्बुद = 1 वृन्दा ।
100 वृन्दा = 1 खर्व ( खरब )
100 खर्व = 1 निखर्व ( नील )
100 निखर्व = 1 महा पद्म ( पद्म )
100 महा पद्म = 1 शंकु ( शंख ) = 1 लाख करोड़ ।
100 शंकु = 1 समुद्र ।
100 समुद्र = 1 अन्त्य ।
100 अन्त्य = 1 मध्यम ।
100 मध्यम = 1 परार्ध ।
- साभार फ़ेसबुक के एक पेज से ( जिसका नाम कापी करना भूल गया । इसका खेद है )
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आज दिव्य भास्कर में एक लेख पढ़ा - जार्ज बुश एप्पल के सी ई ओ स्टीव जाब्स की प्रतिभा से बहुत प्रभावित थे । और उन्हें अमेरिकी सरकार और राष्ट्रपति का मुख्य तकनीक सलाहकार जैसे भारी भरकम पद पर नियुक्त करना चाहते थे ।
लेकिन एफ बी आई ने अपनी रिपोर्ट में राष्ट्रपति को लिखा - स्टीव जाब्स ईसाई धर्म छोडकर बौद्ध धर्म अपना चुके हैं । और अपनी युवावस्था में हरे रामा हरे कृष्णा ( इस्कान ) सम्प्रदाय से जुड़कर लोगों को हिन्दुत्व के तरफ आने की प्रेरणा देते थे । इसलिए उन्हें इतनी बड़े पद पर नियुक्त करना उचित नहीं है । फिर जार्ज बुश ने उनकी नियुक्ति नहीं की ।
सोचिये मित्रो ! जो अमेरिका आज अपने आपको विश्व का धर्म निरपेक्षता का सबसे बड़ा पैरोकार समझता है । वो खुद धर्म निरपेक्षता की किस कदर धज्जियां उड़ाता है । शायद इसीलिए बाबी जिंदल को ईसाई धर्म स्वीकार करना पड़ा ।
साभार फ़ेसबुक पेज एक ही विकल्प मोदी ( EK Hi Vikalp Modi ) से
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एक बहरा स्कूटर खींचकर ले जा रहा था । दूसरा बहरा - क्या हुआ ? पेट्रोल खतम हो गया क्या ?
पहला - नहीं यार । पेट्रोल खतम हो गया ।
दूसरा - अच्छा ! मुझे लगा । पेट्रोल खतम हो गया ।
साभार - मूर्ख shaan फ़ेसबुक पेज मूर्खिस्तान से ।
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जेम्स बॉन्ड - मेरा नाम है बॉन्ड…जेम्स बॉन्ड । और तुम्हारा ?
दक्षिण भारतीय छोरा - मेरा नाम है साई… मूर्ख वेंकटा साई…शिवावेंकटा साई…लक्ष्मीनारायणनाशिवावेंकटा साई…श्रीनिवासुलु लक्ष्मीनारायणनाशिवावेंकटा साई… राजशेखरा श्रीनिवासुलु लक्ष्मीनारायणनाशिवा वेंकटा साई… सीतारामानजनाएलुराजशेखरा श्रीनिवासुलु लक्ष्मीनारायणनाशिवावेंकटा साई…बोम्मिराजु सीतारामानजनाएलुराजशेखरा श्रीनिवासुलु लक्ष्मीनारायणनाशिवावेंकटा साई…
जेम्स बॉन्ड बेहोश !
साभार - मूर्ख shaan फ़ेसबुक पेज से ।

24 अगस्त 2013

शक्ल से ही बंदरिया लगती है

आदरणीय राजीव दीक्षित के इस वीडियो से नरेंद्र दाभोलकर की असलियत पता चलती है कि वह किस तरह ईसाई मिशनरियों से संचालित होकर प्राचीन भारतीय संस्कृति को बदनाम कर रहा था । http://www.youtube.com/watch?v=qP5tY_IWc4s

ये जनाब 15 -20 साल से महाराष्ट्र मे अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति नाम की संस्था चलाते हैं । अमेरिका से आई funding से । इनको हिन्दू समाज के कार्यों में ही अंधश्रद्धा नजर आती थी । राजीव भाई इनको 1 बार अपने साथ सितारा से कराड़ जाने वाली सङक पर ले गए । वहाँ 1 गाँव है । उसमें 1 मजार है । इस्लाम को मानने वालों की मजार । वहाँ 1 फकीर बैठता है । लोग उसके बारे में कहते हैं । जो कोई इस फकीर के पास आता है । उसे वो ताबीज देता है । और फिर वो व्यक्ति रोड से करोड़पति बन जाता है । जो लंगड़ा है । वो चलने लग जाता है । जिसके मुँह में जुबान नहीं । वो बोलने लग जाता है । ऐसी चर्चा पूरे क्षेत्र में है । राजीव भाई ने नरेन्द्र दाभोलकर से पूछा - इसको आप क्या कहेंगे । ये अंधश्रद्धा है । या नहीं ?? 
तो नरेन्द्र दाभोलकर कहते हैं - हमारी समिति में ये काम करने का नहीं । मतलब ईसाईयत और इस्लाम वाले कुछ करें । उनसे नरेन्द्र दाभोलकर को कोई तकलीफ नहीं है । हिन्दू धर्म वाले कुछ करें । उसी को गालियाँ देना । उन्हीं के खिलाफ FIR करवाना । ये काम

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ( नरेन्द्रा दाभोलकर ) करते हैं ।
ये अंधश्रद्धा निर्मूलन कानून अगर पास होता है । तो मंदिर में घंटी बजाना । अंधश्रद्धा माना जाएगा । मंदिर मे दीपक जलाना अंधश्रद्धा । भारत में बहुत साधू संत हैं । जो भिक्षा मांगकर अपना जीवन चलाते हैं । तो इस कानून के पास होते ही भिक्षा मांगने वाले और भिखारी
एक बराबर माने जाएंगे । क्योंकि इन मूर्खों को भिखारी और भिक्षा मांगने वाले का अन्तर नहीं मालूम । इस कानून के पास होने के बाद अगर मान लो आप किसी व्यक्ति के पास जाते हैं । वो आपके दुख दर्द दूर करता है । मान लो आपके पेट मे दर्द है । आप किसी आयुर्वेद का ज्ञान ( अधूरा...यहीं तक था )
हमारे भारत के वैदिक गणित के 17 सूत्र हैं । जो भी इसे सीख ले । वो कलकुलेटर या कम्प्युटर से भी ज़्यादा तेज़ हो जाता है । पर आज के जमाने में जो गणित हमारे भारत में पढ़ाया जाता है । वो अंग्रेजों के तरीके से सिखाते हैं । जो ज्यादातर सभी विद्यार्थी को बोरिंग लगता है । जबकि इसकी तुलना में हमारा वैदिक गणित बहुत ही रोचक है । हमारी शिक्षा पद्धति की यही खूबी रही है कि हम हर विषय को रसप्रद बनाकर हंसते खेलते बच्चों को सिखाते थे ।
http://www.youtube.com/watch?v=SA4TxGcgbLY

Facebook video page : https://www.facebook.com/RajivDixitVi...
Official website : http://www.rajivdixit.com/ 
http://www.rajivdixit.in/


साभार - Manish Kumar फ़ेसबुक
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- छछूंदर 1 रात में लगभग 300 फीट की दूरी तक खोद सकती है ।
- 1 आदमी साल भर में औसतन 1460 सपने देखता है ।
- कॉकरोच सिर कटने के बाद भी कई सप्ताह तक जिंदा रह सकता है ।
दरअसल वह सिर कटने से नहीं । भूख से मरता है ।
- गधे की आंखों की स्थिति कुछ ऐसी होती है कि वह अपने चारों पैरों को 1 साथ देख सकता है ।
- ऊंट की आंख में 3 पलकें होती हैं । जो उन्हें रेगिस्तान में उड़ने वाली रेत से बचाती हैं ।
- बिजली की कुर्सी का आविष्कार 1 दंत चिकित्सक ने किया था ।
- सूर्य धरती से 3  30  330 गुना बड़ा है ।

- हर साल लगभग 2500 बाएं हाथ से काम करने वाले लोग, उन वस्तुओं व उपकरणों का उपयोग करने से मारे जाते हैं । जिन्हें दांए हाथ से काम करने वाले लोगों के लिए बनाया जाता है ।
- किसी भी वर्गाकार सूखे कागज को आधा आधा करके 7 बार से अधिक बार नहीं मोड़ा जा सकता ।
- दुनिया के लगभग आधे अखबार अकेले अमेरिका और कनाडा में प्रकाशित होते हैं ।
- 1 वायलिन बनाने में लकड़ी के 70 विभिन्न आकार के टुकड़े लगते हैं ।
- आकाशीय बिजली कड़कने से जो तापमान पैदा होता है । वह सूर्य की सतह पर पाए जाने वाले तापमान से 5 गुना ज्यादा होता है ।
- जब कांच टूटता है । तो इसके टुकड़े 3000 मील प्रति घंटा की गति से छिटकते हैं ।

- यदि कभी आप आइसलैण्ड जाएं । तो वहां कभी भी रेस्त्रां में बैरे को टिप न दें । ऐसा करना वहाँ अपमान समझा जाता है ।
- लास वेगास के जुआघरों में घड़ियां नहीं होती ।
- मनुष्य के शरीर में हर सेकेण्ड 15 मिलियन लाल रक्त कणिकाएं पैदा होतीं हैं । और मरती हैं ।
- अपनी गुफा से निकलते समय चमगादङ हमेशा बाईं तरफ को ही मुड़ते हैं ।
- जिराफ की जीभ इतनी लंबी होती है कि वह अपने कान साफ़ कर सकता है ।
- जापान के शहर टोकियो में, 50 मिनट से कम दूरी वाली यात्रा के लिए 1 साइकिल कार से ज्यादा तेज मानी जाती है ।
साभार masoom shaan फ़ेसबुक

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मूर्ख in bmw at Petrol Pump - 5 रुपये का पेट्रोल डाल दो । 
पम्प वाला ( गुस्से में ) इतना सारा पेट्रोल डलवा के कहाँ जाना है ?
मूर्ख - जाना कहीं नहीं है पगले । हम तो ऐसे ही पैसे उङाते हैं ।
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दो लडकियां आमने सामने जब बात करती हैं ।
पहली - हाए..स्वीट हार्ट । दूसरी - हाई...मेरी शोना...आई मिस यू ।
..और दोनों एक दुसरे के बारे में पीठ पीछे बोलती हैं ।
पहली - अरे वो 1 नंबर की नकचढ़ी है । घमंडी है ।
दूसरी - मैं तो उसे भाव ही नहीं देती । शक्ल से ही बंदरिया लगती है ।
जब 2 लड़के मूर्ख जब आमने सामने बात करते हैं ।
पहला - कैसा है कमीने । लाल शर्ट में तो पूरा ***या लग रहा है बे ।
दूसरा - अपने बाप से मजाक करता है साले ।
और दोनों एक दुसरे के बारे में पीठ पीछे बोलते हैं ।
पहला - मस्त बंदा है यार
दूसरा - खबरदार ! उसके बारे में कुछ गलत बोला तो । भाई है वो मेरा ।
साभार masoom shaan फ़ेसबुक
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There was a young girl named liss Bright
who could travel much faster than light
She departed one day
in an Einstein way
and came back on the previous night
अर्थात - 1 युवा लड़की । जिसका नाम मिस ब्राइट था । वह प्रकाश से भी अधिक वेग से यात्रा कर सकती थी । 1 दिन वह आइंस्टीन विधि से यात्रा पर निकली । और बीती रात्रि में वापस लौट आई ।
जार्ज गेमोव , पुस्तक - one two three infinity में
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वैदिक गणित सीखने के लिये भारती कृष्ण तीरथ जी की पुस्तक - Vedic Mathematics का लिंक
http://www.flipkart.com/vedic-mathematics-8120801644/p/itmdytehcpcjdhtb?pid=9788120801646&_l=j9Xfifej1tnSUjNow6B3Vw--&_r=8EIiwaUoH87BbdAmr+twIQ--&ref=faa51a98-9d38-4841-a76d-75e3a76df7bf 

http://www.dhoopchhaon.com/2012/01/vedic-mathematics-multiplication-using.html

21 अगस्त 2013

हे भगवान ! मुझे टीवी बना दो

दो मित्र थे । दोनों चुनाव लड़ने की योजना बनाते हैं । उनमें से एक को भाषण देना नहीं आता था । तो वो दूसरे वाले से कहता है - यार ! मुझे तो भाषण देना नहीं आता । तू सब सम्भाल लेगा ना ? दूसरा बोला - अरे चिन्ता मत करो यार । भाषण देने मेँ क्या है । बात से बात जोड़ते जाओ । और बन गया भाषण ।
खैर.. दोनों अपने योजना के अनुरूप चुनाव लड़ते हैं । और अब बारी आती है भाषण की । दूसरा वाला मंच से भाषण शुरू करता है - भाइयो एवं भौजाइयो ! मैं न कोई नेता हूँ । और ना ही कोई अभिनेता ।
सभी 'अभिनेता' मुम्बई शहर में रहते है । लेकिन दिल्ली भी एक 'शहर' है । दिल्ली में चश्मा बहुत मिलता है । चश्मे को उर्दू में झरना कहते है । झरने कश्मीर में बहुत पाये जाते हैं । कश्मीर एक सुन्दर प्रदेश है । सुन्दर तो हेमा मालिनी भी है । हेमा की पहली फिल्म सपनों के सौदागर थी । जिसके हीरो राजकपूर थे । हीरो बहादुर को कहते है । बहादुर तो शेर होता है । 40 'सेर' का 1 मन होता है । मन बहुत चंचल होता है । चंचल मधुबाला की छोटी बहन थी । जिन्होंने मुगले आजम में काम किया । काम तो गधा भी करता है । गधा सीधा और नेक होता है । सीधा तो लौह स्तम्भ भी है । लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल को कहते हैं । सरदार कौम का वफादार होता है । वफादार तो कुत्ता भी होता है । लेकिन कुत्ते की पूँछ टेढ़ी होती है ।
इसी टेढ़ी पूँछ को सीधी करने के लिए मुझे भारी मतों से विजयी बनायें । साभार - Masoom shaan फ़ेसबुक
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एक लड़के को सेल्समेन के इंटरव्यू में इसलिए बाहर कर दिया गया । क्योंकि उसे अंग्रेजी नहीं आती थी । लड़के को अपने आप पर पूरा भरोसा था । उसने मैनेजर से कहा - आपको अंग्रेजी से क्या मतलब ? यदि मैं अंग्रेजी 

वालों से ज्यादा बिक्री न करके दिखा दूँ । तो मुझे तनख्वाह मत दीजिएगा ।
मैनेजर को उस लड़के बात जम गई । उसे नौकरी पर रख लिया गया ।
फिर क्या था । अगले दिन से ही दुकान की बिक्री पहले से ज्यादा बढ़ गई । एक ही सप्ताह के अंदर लड़के ने तीन गुना ज्यादा माल बेचकर दिखाया ।
स्टोर के मालिक को जब पता चला कि एक नए सेल्समेन की वजह से बिक्री इतनी ज्यादा बढ़ गई है । तो वह खुद को रोक न सका । फौरन उस लड़के से मिलने के लिए स्टोर पर पहुँचा । लड़का उस वक्त एक ग्राहक को मछली पकड़ने का कांटा बेच रहा था । मालिक थोड़ी दूर पर खड़ा होकर देखने लगा ।
लड़के ने कांटा बेच दिया । ग्राहक ने कीमत पूछी । लड़के ने कहा – 800 रु. । यह कहकर लड़के ने ग्राहक के जूतों की ओर देखा । और बोला – सर ! इतने मंहगे जूते पहनकर मछली पकड़ने जाएंगे क्या ? खराब हो जायेंगे । एक काम कीजिए । एक जोड़ी सस्ते जूते और ले लीजिए ।
ग्राहक ने जूते भी खरीद लिए । अब लड़का बोला – तालाब किनारे धूप में बैठना पड़ेगा । एक टोपी भी ले लीजिए । ग्राहक ने टोपी भी खरीद ली । अब लड़का बोला – मछली पकड़ने में पता नहीं कितना समय लगेगा । कुछ 

खाने पीने का सामान भी साथ ले जायेंगे । तो बेहतर होगा । ग्राहक ने बिस्किट, नमकीन, पानी की बोतलें भी खरीद लीं ।
अब लड़का बोला – मछली पकड़ लेंगे । तो घर कैसे लायेंगे । एक बॉस्केट भी खरीद लीजिए । ग्राहक ने वह भी खरीद ली । कुल 2500 रु. का सामान लेकर ग्राहक चलता बना ।
मालिक यह नजारा देखकर बहुत खुश हुआ । उसने लड़के को बुलाया । और कहा – तुम तो कमाल के आदमी हो यार ! जो आदमी केवल मछली पकड़ने का कांटा खरीदने आया था । उसे इतना सारा सामान बेच दिया ?
लड़का बोला – कांटा खरीदने ? अरे वह आदमी तो अपनी बीरबानी ( पत्नी ) को मायके छोङकर माचिस खरीदने आया था । मैंने उससे कहा - अब तू घर में बैठा बैठा क्या करेगा । जा के मछली पकड़ ।
साभार masoom shan फ़ेसबुक
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प्राथमिक पाठशाला की एक शिक्षिका ने अपने छात्रों को एक निबंध लिखने को कहा । विषय था - भगवान से आप क्या बनने का वरदान मांगेंगे ?
इस निबंध ने उस क्लास टीचर को इतना भावुक कर दिया कि रोते रोते उस निबंध को लेकर वह घर आ गयी । पति ने रोने का कारण पूछा । तो उसने जवाब दिया - इसे पढ़ें । यह मेरे छात्रों में से एक ने यह निबंध लिखा है ।
निबंध कुछ इस प्रकार था - हे भगवान ! मुझे एक टीवी बना दो । क्योंकि तब मैं अपने परिवार में ख़ास जगह ले पाऊं । और बिना रूकावट या सवालों के मुझे ध्यान से सुना व देखा जायेगा । जब मुझे कुछ होगा । तब टीवी खराब की खलबली पूरे परिवार में सबको होगी । और मुझे जल्द से जल्द सब ठीक हालत में देखने के लिए लालायित रहेंगे । वैसे मम्मी पापा के पास स्कूल और ऑफिस में बिलकुल टाइम नहीं है । लेकिन मैं जब अस्वस्थ रहूँगा । तब मम्मी का चपरासी और पापा के ऑफिस का स्टाफ मुझे सुधरवाने के लिए दौड़ कर आएगा । दादा का पापा के पास कई बार फोन चला जायेगा कि - टीवी जल्दी सुधरवा दो ।
दादी का फेवरेट सीरियल आने वाला है । मेरी दीदी भी मेरे साथ रहने के लिए हमेशा सबसे लडती रहेगी । पापा जब भी ऑफिस से थक कर आएँगे । मेरे साथ ही अपना समय गुजारेंगे । मुझे लगता है कि परिवार का हर सदस्य कुछ न कुछ समय मेरे साथ अवश्य गुजारना चाहेगा । मैं सबकी आँखों में कभी ख़ुशी के तो कभी गम के आंसू देख पाऊंगा ।
आज मैं " स्कूल का बच्चा " मशीन बन गया हूँ । स्कूल में पढ़ाई घर में होमवर्क और ट्यूशन पे ट्यूशन । ना तो मैं खेल पाता हूँ । न ही पिकनिक जा पाता हूँ । इसलिए भगवान मैं सिर्फ एक टीवी की तरह रहना चाहता हूँ । कम से कम रोज़ मैं अपने परिवार के सभी सदस्यों के साथ अपना बेशकीमती समय तो गुजार पाऊंगा ।
पति ने पूरा निबंध ध्यान से पढ़ा । और अपनी राय जाहिर की - हे भगवान ! कितने जल्लाद होंगे । इस गरीब बच्चे के माता पिता ।
पत्नी ने पति को करुण आँखों से देखा । और कहा - यह निबंध हमारे बेटे ने लिखा है !!

साभार Manish Kumar फ़ेसबुक

19 अगस्त 2013

चिलमिल की चूँ...बता के हो सै ?

मोबाइल से जुडी कई ऐसी बातें । जिनके बारे में हमें जानकारी नहीं होती । लेकिन मुसीबत के वक्त यह मददगार साबित होती है ।
इमरजेंसी नंबर - दुनिया भर में मोबाइल का इमरजेंसी नंबर 112 है । अगर आप मोबाइल की कवरेज एरिया से बाहर हैं । तो 112 नंबर द्वारा आप उस क्षेत्र के नेटवर्क को सर्च कर लें । ख़ास बात यह है कि यह नंबर तब भी काम करता है । जब आपका की पैड लाक हो ।
जान अभी बाकी है - मोबाइल जब बैटरी लो दिखाए और उस दौरान जरूरी कॉल करनी हो । ऐसे में आप *3370# डायल करें । आपका मोबाइल फिर से चालू हो जायेगा । और आपका सेलफोन बैटरी में 50 प्रतिशत का इजाफा दिखायेगा । मोबाइल का यह रिजर्व दोबारा चार्ज
हो जायेगा । जब आप अगली बार मोबाइल को हमेशा की तरह चार्ज
करेंगे ।
मोबाइल चोरी होने पर - मोबाइल फोन चोरी होने की स्थिति में सबसे पहले जरूरत होती है । फोन को निष्क्रिय करने की । ताकि चोर उसका दुरुपयोग न कर सके । । अपने फोन के सीरियल नंबर को चेक करने के लिए *#06# दबाएँ । इसे दबाते ही आपकी स्क्रीन पर 15 डिजिट का कोड नंबर आयेगा । इसे नोट कर लें । और किसी सुरक्षित स्थान पर रखें । जब आपका फोन खो जाए । उस दौरान अपने सर्विस प्रोवाइडर को ये कोड देंगे । तो वह आपके हैण्ड सेट को ब्लोक कर देगा ।

कार की चाभी खोने पर - अगर आपकी कार की रिमोट केलेस इंट्री है
और गलती से आपकी चाभी कार में बंद रह गयी है । और दूसरी चाभी घर पर है । तो आपका मोबाइल काम आ सकता है । घर में किसी व्यक्ति के मोबाइल फोन पर कॉल करें । घर में बैठे व्यक्ति से कहें कि वह अपने मोबाइल को होल्ड रखकर कार की चाभी के पास ले जाएँ । और चाभी के अनलॉक बटन को दबायें । साथ ही आप अपने मोबाइल फोन को कार के दरवाजे के पास रखें । दरवाजा खुल जायेगा ।
है न विचित्र किन्तु सत्य ?
साभार - True Indian's फ़ेसबुक
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एक बे गोधू कलकता घुम्मन गया । हावड़ा तें सियालदा आली ट्रेन में बैठ ग्या । ऊसके सामी एक बंगाली दादा भी बेठा था । बंगाली दादा नै सोची अक सफ़र भी कट ज्या गा । और किम्मे पिस्से भी बन ज्यागे । ईस मोलड नै ठग लू ।
माड़ी - मोटि बात कर कें वो बंगाली गोधू तें बोल्या - अक में तेरे तें एक सवाल बुझुगा । ज तन्ने जवाब ना आया । तो तू मन्ने 100 रपिये दिए । फेर तू मेरे तें सवाल बूझिये । मन्ने ना आया । तो में तन्ने 1000  रपिये दूंगा ।
गोधू तय्यार होग्या ।
बंगाली दादा - गेटवे ऑफ़ इंडिया कहा है ।
गोधू - दिल्ली में ।
बंगाली दादा - गलत ,मुंबई में हे । ला दे 100 रपिये ।
गोधू ने 100 रपिये दे दिए ।
अब गोधू की बारी थी सवाल बुझ्न की ।
गोधू - चिलमिल की चूँ , बता के हो सै ।
बंगाली दादा - थोड़ी वार सोच के हार मान ले स वो गोधू तै नु बोल्या ये ले 1000  रपिये , मन्ने कोणी बेरा, तू बता ।
गोधू - ये ले 100  रपिये ,बेरा मन्ने भी को ।
साभार masoom shaan फ़ेस बुक
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शादी के बाद पत्नी कैसे बदलती है । जरा गौर कीजिए ।
पहले साल - मैंने कहा जी ! खाना खा लीजिए । आपने काफी देर से कुछ खाया नहीं ।
दूसरे साल - जी ! खाना तैयार है । लगा दूँ ।
तीसरे साल - खाना बन चुका है । जब खाना हो । तब बता देना ।
चौथे साल - खाना बनाकर रख दिया है । मैं बाजार जा रही हूं । खुद
ही निकालकर खा लेना ।
पांचवे साल - मैं कहती हूँ । आज मुझसे खाना नहीं बनेगा । होटल से ले आओ ।
साभार Prem Lohana फ़ेसबुक

बाबा रामदेव का अष्टांग योग

संभवतः ये पेज बाबा रामदेव के किसी अनुयायी द्वारा लिखा गया है ।
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अब समझो । अष्टांग योग - दुनिया का सबसे बड़ा योग । जिन्हें सुखी परिवार चाहिए । वो दोनों दम्पत्ति इसे अवश्य अपनाएं । व कम धन में दिव्य आनंदित जीवन जीते हुए मोक्ष प्राप्त करें । योग का अर्थ है - ईश्वर को पाना । व यह मानव जन्म मात्र ईश्वर को पाने को ही है । 
ईश्वर को पाने के तीन मार्ग हैं - ज्ञान मार्ग - ज्ञान योग । कर्म मार्ग - कर्म योग । भक्ति मार्ग - भक्ति योग ।
अष्टांग योग - एक समय के अति विकसित विज्ञान से उत्पन्न है । यह ज्ञान योग से उत्पन्न है।
यम । नियम । आसन । प्राणायाम । प्रत्याहार । धारणा । ध्यान । समाधि ।
यम - सत्य । अहिंसा । अस्तेय । अपरिग्रह । बृह्मचर्य ।
नियम - शौच । संतोष । तप । स्वाध्याय । ईश्वर प्राणीध्यान ?
यम - नियम एक सुखी जीवन का विज्ञान है । जिसे सुखी जीवन चाहिए । वो इन्हें अवश्य अपनाए । ये चित्त विज्ञान से जुड़े हैं । एक एक नियम चित्त से होते हुए पूरे शरीर की रासायनिक व विद्युत चुम्बकीय प्रणाली से जुडा है । किसी भी नियम से हटने पर रोग दुःख बनने शुरू हो जाते हैं । अष्टांग योग सिद्ध करने हेतु ये बड़े आवश्यक हैं । जिन्हें अष्टांग योग शीघ्र पाना है । वो इसे दृण निश्चय से पालन करें । बाकी लोग दोनों समय मात्र अनुलोम विलोम ही करते जाओ । धीरे धीरे अनुलोम विलोम कुछ वर्षो में अष्टांग योग आप में स्थापित कर देगा ।
इसमें स्वाध्याय + ईश्वर प्राणीध्यान = ज्ञान योग है । 
स्वाध्याय = यानी मैं कौन हूँ ? क्या हूँ ? यहाँ क्या कर रहा हूँ ? मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है ?
ईश्वर प्राणीध्यान = ईश्वर को समझना । ईश्वर को पाना ।
यह ज्ञान योग इस योग का मूल है । व पाना इसे ही मुक्ति। मोक्ष । समाधि है । बाकी सब यम नियम प्राणायाम तो देह चित्त शुद्धि हेतु थे । जीवन को आरोग्य देने हेतु थे । यदि कोई ज्ञान योग से ईश्वर पा ले । तो स्वतः यम

नियम प्रत्याहार धारणा समाधि सक्रिय हो जाते हैं । फिर इन नियमों की ओर नहीं भागना होता । बस मात्र प्राणायाम व्यायाम आदि ही नित्य कर्म रह जाते हैं । ज्ञानमार्गी आँख बंदकर समाधि नहीं लगाते मिलेंगे । हाँ चिन्तन हेतु कर सकते हैं ।
प्रारम्भ में प्राणायाम करते जाओ । व ईश्वर का चिंतन करते जाओ । अपना व ईश्वरीय अध्ययन करते जाओ । फिर अपने आप ध्यान सक्रिय हो । सीधे समाधि में आ जाओगे । यह समाधि सतत मोक्ष है ।
यम नियम की वैज्ञानिकता संक्षेप में । 
यम = सत्य । अहिंसा । अस्तेय । अपरिग्रह । बृह्मचर्य । 
सत्य - सत्य का पालन इतना प्रभावी है कि सत्यवादी जो कह दे । होकर रहता है । यही पूर्व के ऋषियों के श्राप या वरदान का रहस्य था । सत्य से हटने पर आपके रोगी होने । कब्ज होने । पाचन या अन्य बीमारियों की सम्भावनाएं बढ़ जाती हैं । झूठ बोलने से हृदय गति बढने से कुछ अलग विकार जन्म ले सकते हैं । कभी किसी "अत्यधिक हितकर" हो । तो झूठ भी बोल लेना । नहीं तो सच बोलने से जितना आपका रासायनिक संतुलन नहीं बनेगा । उससे ज्यादा उस सच से हुए अनिष्ट से दुःख से जीवन भर रासायनिक संतुलन बिगड़ा रह सकता है । पर यह झूठ अपने लाभ के लिए नहीं । किसी की जान बचाने को ही हो । तब आपको अपराध बोध नही होगा ।  रासायनिक संतुलन नहीं बिगड़ेगा ।
अहिंसा - सब कुछ ईश्वर है । अतः नितांत आवश्यक होने पर ही मांसाहार करो । व हिंसा 84 प्रकार की है । जहाँ तक हो सके । न करो । फिर भी जो हो जाए । तो मन में पाप बोध न रखो । घर परिवार में भी मन की अंदर भी हिंसा न करो । मन में हिंसा से भी कुछ अति महीन रक्त वाहिकाएं मष्तिष्क में फट जाती हैं । अतः हिंसा का भोग तुरंत व सबसे पहले स्वयं को मिलता है । अत्यावश्यक या निरंतर पाप होने पर हिंसा आगे के जीवन में अहिंसा की प्राप्ति है । अतः तब अवश्य करो । पर शांत होकर ।
अस्तेय - अर्थात चोरी । किसी भी प्रकार की चोरी से आपका पूरा विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र दिन रात बिगड़ा रहता है । व आप रोगोन्मुख हो जाते हो । अतः इसको गहराई से समझो । छोटी छोटी बातों पर चोरी कुटिलता व होने वाली कब्ज व गैस व उससे जन्में अनेको रोगों में इसके सम्बन्ध को समझो ।
अपरिग्रह - इस दुनिया में दो ही चीज हैं - या तो योग । या भोग । जीवन के लिये नितांत आवश्यक वस्तुओं के पीछे भागना भोग नहीं । पर उससे अधिक व कभी कभी आवश्यक न होने पर भी पागलों की तरह पडोसी मित्रों को दिखाने होड़ में शरीर को या परिवार को कष्ट में डालकर चीजों के पीछे भागना । आपकी नींद उडा कर रोग दे देता है । यह अवश्य है कि जिस चीज कि प्राप्ति के पीछे भागोगे । वो मिलेगी ही । पर क्या लाभ ? जब स्वयं ही रोगी बन बैठो । कुछ दिन जीवन का व जीवन के मूल उदेश्य का चिंतन करो । फिर अपरिग्रह का पालन करते हुए आनंद की जिन्दगी बिताओ । अपरिग्रह - अर्थात अनावश्यक वस्तुओं का त्याग । आवश्कता हो । तो हवाई जहाज लो । नहीं तो साइकल या पैदल ही चलो । धन भोग की दौङ में रासायनिक अवस्था हिली रहती ही व संयमित जीवन नहीं मिलता ।
बृह्मचर्य - इसका अर्थ है । बेमतलब अपनी वीर्य तत्व की रसायन उर्जा को व्यय न करो । एक निश्चित अवधि में जल्द विध्या/रोजगार सीख विवाह करो । व तब इन रसायनों का थोडा संयम से आनन्द लो । व संतान बनाओ । यह अपने आप में बड़ी आवश्यक शक्ति है । जिसके गलत व्यय से । अधिक व्यय से । हड्डियों में कमजोरी । तेज का अभाव । रोगी शरीर । संतान न होने की सम्भावना । वैवाहिक जीवन में निराशा व अंदरूनी रासायनिक व्यवस्था में लगातार असंतुलन रहेगा । जो कई रोग दे सकता है । बृह्मचर्य वैधानिक सम्बन्धो को ही कहता है । क्योंकि अवैध सम्बन्ध होने पर शरीर की रासायनिक व्यवस्था लगातार बिगड़ी रहती है । व आज यह अनेकों नर नारियों में अनेकों रोग दे रही है । व्यर्थ में किसी का काम चिंतन न करो । क्यों ? जैसे ही काम चिंतन करोगे । आपकी रासायनिक क्रिया उत्तेजित होकर रसायन व्यय की ओर जाएगी । अतः काम विचार सिर्फ व सिर्फ तब ही उत्पन्न करो । जब वैधानिक साथी साथ हो ।
गर्भ निरोधक से सतीत्व पतिव्रता नष्ट होने में बड़ी सहायता मिली है । पतिव्रता होना अपने में आरोग्य की शक्ति है । पर आज सब भटके हैं । स्टार मूवीज देख कर । एक ओर जिसका पति बिगड़ता है । उस नारी में उसके पति के दिए इस तनाव से थयोरोइड-गांठे-कैंसर-सिस्ट बनते हैं । बच्चे नही होते हैं । जिससे उस नर का ही धन नारी के रोगोपचार में जाता है । व गलत संबंधो में झूठ बोलने से उस नर में भी रासायनिक क्रियायें गडबड होकर तनाव देकर उसे भी रोगी करती हैं । दूसरी ओर वो बाहरी नारी गर्भ निरोधक खा खाकर अनेकों रोग ले रही है । इसीलिए समर्थ हो । तो दो विवाह कर लो ? यह धर्म विज्ञान कहता है ( हालांकि जिस घर में दो तीन नारी हों । उसके परिणाम देखे ही हैं सबने । अतः राम की तरह एक नारी ही धर्म है ) और कुकर्म कर सच बोला । तो तलाक युक्त जीवन का तनाव भरा आनंद जो नशे की ओर ले जाता है ।
बृह्मचर्य का अर्थ है - विवाह तक काम से दूरी । फिर बेमतलब असमय मन में काम विचार उत्पन न करो । रासायनिक साम्य बनाये रखो । विवाहोपरांत संयमित काम हो ।
बृह्मचर्य का अर्थ कुंवारा रहना नहीं है । व योग साधना के लिए कोई भी कुंवारा न रहे । न घर छोड़ कहीं अन्य जगह जाकर रहे । यह मान लो कि घर में रहकर ईश्वर को पाना ही मेरा तप है । अतः यदि जीवन साथी साथ नहीं । तो काम उत्पन ही न करो । व ऐसे दर्शन - कारको से दूर रहो ।
नियम - शौच । संतोष । तप । स्वाध्याय । ईश्वर प्राणीध्यान ? 
शौच - इसका अर्थ है । शरीर की अंदर व बाहर से सफाई । वाणी व मन की सफाई । अच्छी भाषा का उपयोग । इस नियम से वाणी में दिव्यता आती है ।
संतोष - यह बड़ा गुणकारी है । व जीवन में आरोग्य में इसका बड़ा योगदान है । यह अपने आप में एक प्राणायाम सा है ? अति संतोषी एक खूब प्राणायाम करने वाले भोगी योग साधक से अधिक स्वस्थ मिलेगा । संतोष न होने पर रोगों के बनने की परमाणु स्तर पर अनुभूति है मुझे । मन अशांत तो पथरी भी बन जाती है ।
तप - अपने जीवन को अपने कर्म को एक तपस्या घोषित कर दो । व फिर जो भी कठिनाई आयें । कैसी भी । उसे इस तपस्या का हिस्सा मानो । इससे स्वास्थ्य में बड़ा लाभ होगा ।
स्वाध्याय - अपना अध्ययन करो - मैं कौन हूँ ? मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है ?
ईश्वर प्रानिध्यान - यानि वो ईश्वर क्या है ? जिसे हम पूजते हैं । इसका चिन्तन करो ।
जिस दिन आप स्वाध्याय व ईश्वर प्रानिध्यान जान जाते हो । आपकी समाधि सक्रिय हो जाती है । यह समाधि खुली आँखों से होती है ? यह ज्ञान योग की समाधी है ।
इस समाधि के सक्रिय होने के बाद योगी यम नियम से पार चला जाता है । वो आँख बंद ध्यान करे । न करे । उसकी समाधि सतत होती है । लोग पूछते हैं - बाबा कहाँ ध्यान धारणा समाधि लगाते दीखते हैं ? इसका कारण ही यह है । जिसकी ज्ञान से समाधि लगी । उसे आँख बंद नही करनी पडती । और जो आँख बंदकर लगाते हैं । व ईश्वर चिन्तन नहीं करते । वो मात्र मष्तिष्क को विद्युत की आपूर्ति रोक आराम देते हैं । उन्हें सत्य नही मिलता । लाभ अवश्य होता है ।
हालाँकि यह बताया जाता है कि - यम नियम करो । फिर आसन प्राणायाम करो । फिर ज्ञान इन्द्रियों से बाहर के भोगों का त्याग कर ( प्रत्याहार ) कर मन को किसी एक उर्जा क्षेत्र पर एकाग्र करो । नासाग्र पर एकाग्र करो । फिर यह एकाग्रता लम्बी होगी । तो यह धारणा है । यानि किसी एक ऊर्जा क्षेत्र पर लम्बी एकाग्रता धारणा है । व यह और लम्बी हुई । तो ध्यान हुआ । व यह ही और लम्बी हुई तो समाधि है ।
आप कोशिश कीजिये । ध्यान इसे बोला जाता है । पर यह ध्यान नहीं है । जो ज्ञान योग था । वह ज्ञान ही ध्यान है ? वह ज्ञान ही प्रत्याहार का कारण स्वतः बनता है । वह ज्ञान ही धारणा बनती है । व वह ज्ञान ही ध्यान बनता है । व वह ज्ञान ही समाधि बन जाता है । बिन उस ज्ञान के चित्त स्थिर नही होता । चित्त की क्लिष्ट ( बार बार दुःख देने वाली वृत्तियाँ - यादें । स्मृतियाँ । अतृप्त इच्छाएं ) वृत्तियों का नाश नहीं होता । जब यह ज्ञान सक्रिय हो जाता है । तब प्रत्याहार । धारणा । ध्यान सब जल्द ही हो जाते हैं ।
अब सब उस ज्ञान को पा नहीं पाते । अतः जान भी नहीं पाते कि ये खेल क्या है ? व प्राणायाम से वापस लौट जाते हैं । व आगे सब गोल गोल जलेबी हो जाती है । असली खेल इस रोज के ज्ञान योग चिंतन से ही शुरु होता है । व इसी से ईश्वर प्राप्ति है । समाधि ईश्वर प्राप्ति है । व यह ही विलीनता है । यह ही मोक्ष है । यह ही पाना था ।
इसके बाद यम नियम प्रत्याहार गुरु सब भूल जाओ । क्योंकि मोक्ष / समाधि में आप ईश्वर हो । रोज व्यायाम आसन प्राणायाम करते हुए । नए जन्म के साथ अलग जीवन का आनंद लो ।
यहाँ तक बाबा ने बताया । सो निशुल्क है । ज्ञान योग - आप स्वयं चिंतन करें । अवश्य पायेंगे । व गीता की मदद लें । ध्यान रहे । आप बृह्म हो । व आपको आपको ही पाना था ।
यह योग दुनिया का सबसे बड़ा विज्ञान है ? यह ज्ञान योग से उत्पन्न है ? व इसमें ज्ञान योग समाहित है ।
ज्ञान योग में - राज योग । ध्यान योग । सांख्य योग समाहित है ?? सारे योगों की उत्पत्ति ज्ञान योग से ही है ? ज्ञान योग का अर्थ है - ईश्वर जो कि विज्ञान है को विज्ञान से पाना ।
ज्ञान योग अर्थात विज्ञान से ईश्वर को जानने के बाद उपलब्ध सारे विज्ञान को स्वास्थ्य की और मोड़ना । जिस युग में प्राणायाम की खोज की गयी । अनुलोम विलोम की खोज की गयी । अरे किसी झोपडी में बैठे योगी को सपना थोड़े ही आएगा कि - इङा पिंगला सुष्मणा तीन नदियाँ , नाड़ियाँ नासा व मष्तिष्क से होती हुई जाती हैं । व अनुलोम विलोम करने से विद्युत सुष्मणा में जायेगा । उस समय इससे भी विकसित विज्ञान था । व इस रहस्य को उस युग के विज्ञान से खोजा गया । व प्राण को चिकित्सक बनाया गया । इस सुष्मना नाडी के द्वारा व अनुलोम विलोम को हर व्यक्ति ने सबसे कारगर फ़ोकट वैध के रूप में अपनाया । उस समय भी विज्ञान था । व दाह संस्कार की मान्यताओं के विपरीत शरीर फाड़ फाड़ कर देखे गये । जो अनेको ऋषियों ने मरणोपरांत अनुसंधान हेतु दान दिए । तब अंदर देखने से नाडी विज्ञान समझ आया । व मष्तिष्क से नीचे जाती तीनों नाड़ियो के खेल व ऊर्जा चक्रों की खोज हुई । फिर महर्षि पतंजलि ने रोगों के अनेको कारकों को एक सूत्र में पिरोया । देखो मान लो । आप प्राणायाम करते हो । तो प्राणायाम से रासायनिक साम्य की प्राप्ति होगी ही । पर दिन भर आपने गाली गलौज । कोसना । ईर्ष्या । द्वेष । लोभ । काम झूठ में बिताये । तो प्राणायाम भी क्या करेगा ? लाभ हुआ - 100 ग्राम । और दिन भर खर्च किया 4 किलो । तो रोग तो बनेंगे ही । अतः पतंजली ने सारे सूत्रों को एक साथ पिरो के प्रस्तुत किया । व हो सकता है । 200 करोड़ वर्ष पुरानी संस्कृति में यह न जाने कब खोज गया हो । व पतंजली ने इसे पुनः जीवित किया हो । जैसे आज बाबा रामदेव ने किया । तप व्यर्थ नहीं जाता । हज़ारों वर्षों बाद भी पतंजलि जीवित हु्ये । एक अवतार सा ही है । 
तो अष्टांग योग अपने जीवन के सत्य को पाने के लिए सबसे वैज्ञानिक तरीका है । यह जीते जी आरोग्य भी देता है । व गिरते पड़ते मोक्ष समझ आ ही जाता है ।
ईश्वर के ज्ञान के बाद प्राण शक्ति से बड़ी कोई शक्ति नहीं । व प्राण धारण होते हैं - हीमोग्लोबिन से । अतः आहार में हीमोग्लोबिन बनाये रखो । महिलाएं विशेष ध्यान दें - हीमोग्लोबिन पर । मासिक में रक्त व्यय से उनके अनेकों रोग इस व मन के बुरे भावो से ही हैं । हो सके । तो छोटा हवन बिन पंडित अवश्य करें ।
सामान्य श्वास लेने में आप 500 मिलीलीटर ऑक्सीजन ही अंदर लेते हो । पर जब भस्त्रिका या अनुलोम विलोम करते हो । तो 4 लीटर से 6 लीटर तक ऑक्सीजन ले लेते हो एक बार में । यह ऑक्सीजन अनेकों प्रकार से रोग नष्ट कर आरोग्य तनाव रहित जीवन अच्छी नींद देती है ।
जब आप सतत लम्बा अनुलोम विलोम करते हो । तो विद्युत आवेश सुषुम्णा नाडी में प्रवाहित होकर शरीर के सारे उर्जा चक्रों को सक्रिय कर वहाँ के रासायनिक असंतुलन को दूर कर आपकी कुण्डलिनी को जाग्रत कर देता है । इसे देर तक लगातार करना इसीलिए आवश्यक है । कुण्डलिनी जागरण में कोई लट्टू या बल्ब नहीं जलते भीतर ? व न इसके जाग्रत होने पर मानव उड़ने लगता है । यह लम्बे अनुलोम विलोम से सभी चक्रों की शुद्धि है । व आरोग्य है । ज्ञान योग से चित्त ईश्वरीय करने पर कुण्डलिनी अति शीघ्र जाग्रत होती है । आप इसे लोगों के बहकावे में आके अन्यथा न लेना । यह मात्र एक भौतिकी व रसायन की एक साम्य अवस्था है ।
योगी को बस अपना योग यहीं रोक देना होता है ( कुण्डलिनी जागरण -आरोग्य - दिव्य कर्म - मोक्ष ) इससे आगे के योग जीवन के उद्देश्य को नष्ट करते हैं । 
तो आदर्श दिनचर्या व अष्टांग योग का समावेश जीवन में पति पत्नी बच्चे सब करो । रोग बढ़ रहे हैं । व आलूपैथी जानलेवा है । धन से भी व धन देकर तन से भी । कलयुग में बिन अष्टांग योग गुजारा नहीं । आयुर्वेद अभी बाबा प्रयास कर तो रहे हैं । पर एक कुशल वैध बनने में वर्षों लगते हैं ।
साभार - https://www.facebook.com/Ashtu18

16 अगस्त 2013

शेम शेम..कुछ तो शरम करो - एजेण्डा नंबर - 21

जब बच्चे चड्डी नहीं पहनने की जिद करते हैं । तो माँ बाप या बङे भाई बहन शेम शेम बोलते हैं । तो बच्चा चड्डी पहन लेता है । बच्चों में इतनी तो शरम होती है । बङे शरम छोड रहे हैं ।
मानवता के दुश्मनों ने दुनिया में " शैमलेस सोसायटी " बनाने की ठानी हुई है । प्रजा को " शेम शेम " बना देना है । इस बच्चे की तरह । आदमी की शरम लिहाज छुडाने के लिए कई तरीके एक साथ काम में लगाये हैं । प्राणी की ही टोली होती है । ऐसा नहीं है । साधनों की भी टोली होती है । मीडिया - आप कोई भी माध्यम देखो । टीवी, सिनेमा, समाचार की साइट खोलते ही दो चार शेम शेम आर्टिकल नजर आ ही जाते हैं । नेताओं की प्रेरणा – क्या नेताओं की धोती इतनी ढीली होती जा रही है । कला के सभी रूप । साहित्य । और सबसे बडा साधन है - धर्म और राजनीति । ये रही सारे साधनों की टोली । बच्चों के रूप में ।

इन बच्चों के संकेतों पर मत जाईये । लेकिन ऐसे ही संकेत मानवता के दुश्मनों ने भी खोज लिए हैं । ये खास संकेत होते हैं । संकेत बता रहे हैं । आपको क्या होना है । ये संकेत हैं । मेसोनिक और थियोसोफिस्ट शैतानों के । हालांकि ये संकेत तो मानवों के जन्म के साथ ही शुरु हो गये थे । शब्द नहीं थे । इशारों में बातें होती थी । फिर गूँगे बहरों को ये अच्छा काम में आया । ये एक भाषा ही है । जो हर देश में अलग अलग है । लेकिन " हेलन किलर " नाम की गूँगी बहरी और अंधी महिला ने थियोसोफिस्टों के आपसी परिचय के लिए इसका 1 खास स्वरूप दिया । दूसरा कोई इसे नहीं समझ सकता । हेलन खुद एक समाज सेवी एक्टिविस्ट थी । उसकी टीचर थियोसोफिस्ट थी । तो खुद भी थियोसोफिस्ट बन गई थी ।

सिर्फ शारीरिक नग्नता की बात नही है । आदमी की हर अभिव्यक्ति से नग्नता टपकती है । बेशर्म होकर भृष्टाचार या चोरी करना नंगापन है । ऐसे काम नंगे लोग करते हैं । जूठे बयान नंगे नेता करते हैं । जनता की हालत और गरीबी का मजाक नंगे प्लानिंग कमीशन वाले करते हैं । धर्म को भी नही छोङा । हर 2-4 महीने में 1 नंगा खङा हो जाता है । और धर्म का 1 टुकडा ले के चलता बनता है । ये टुकङा मेरा । ये धर्म मेरा । इतने भक्त मेरे । और भक्तों की नंगाई को भी क्या कहें ? सब भगवानों के बाप महादेव को छोड विधर्मियों की कबर की भी खाक छानने लगते हैं । जैसे मुँह में लड्डू आ जायेगा । जो अपने धर्म का वफादार नहीं । वो नंगा नहीं । तो क्या है ? ऐसा व्यापक नंगापन क्यों ? और कैसे फैलाया गया । जान लीजिये ।
1847 में हेलेना पेत्रोव्ना नाम की एक 16 साल की रसियन लडकी को रसिया के राजकुमार से प्यार हो गया । उसके दादा राजा के पास नौकरी करते थे । 1 साल प्यार का खेल चला । बचपन से माँ का साया नहीं था । तो ये लङकी विद्रोही और आजाद ख्याल की हो गई थी । 1 साल बाद जब राजकुमार मर गया । तो इधर उधर मुँह मारने लगी । तो उसकी आया ने ताना मारा कि - तुझे तो अब कोई बूढा भी नहीं ले जायेगा । उस लङकी ने अपनी आया को जूठा साबित करने की खातिर 17 साल की आयु में 42 साल के बूढे नाइसफोर ब्लॅवत्स्की से शादी कर ली । 3 महीने में ही अपने पति को छोङकर भाग गई । 1848 -1858 के दौरान उसका जीवन आवारा की तरह बीता । ज्यादातर तिब्बत में 1 लामा के पास रही । आत्मा परमात्मा, और तंत्र मंत्र और काली विध्या सीखती रही ।

जब वो रसिया लौटी । तो अपने पति के पास 1 शर्त पर रहने लगी कि उसका पति यथासंभव उससे दूर ही रहे । अपनी आध्यात्मिक प्रवृत्ति के कारण उसे 1 एस्टोनिया के व्यापारी निकोलस मेयेन्द्रोफ से संबंध हो गया । निकोलस ने अपने 1 दोस्त को मना लिया कि वो अपना घर उनके मिलन स्थान की तरह उपयोग करने दे । हेलेना से अपने पति से तलाक लेकर शादी करने की मांग भी रखी । 1861 में 60 साल का मेत्रोविच यूरोप से लौट आया । हेलना को पहले से ही जानता था । अब इस उमृ में वो हेलना को पाना चाहता था । हेलना 1 साथ तीन 3 पुरुषों को संभालने लगी । प्रेग्नेन्ट हो गई । तो स्कॅन्डल से बचने और बच्चा पैदा करने के लिए वो ओजुर्गेटी चली गई । अपंग बच्चा हुआ । और 5 साल में वो मर गया । इन सालों वो वहीं पर रही ।
घर जाने का रास्ता बंद कर चुकी थी । मेत्रोविच के साथ पेरिस गई । पेरिस में कुछ कर न पाने की वजह से इजिप्त जाने के लिए शिप में बैठे । शिप में हुई दुर्घटना में मेत्रोविच मर गया । ग्रीक सरकार के फंड पर उसे एलेक्जांड्रिया छोङ दिया गया । वहाँ उसके साथी की अंतिम क्रिया करके आगे इजिप्त के केरो पहुँच गई । वहाँ 1 साथी मिल गई । जो अफ़्रीकी गूढ और काली विध्या की जानकार थी । कुछ समय इस जोङी ने साथ में काम किया । उसने सुना कि अमेरिका में अच्छे चांस हैं । वो नकली हिन्दू नाम देकर शिप में बैठ गई । क्योंकि रसियन लोगों को जासूस समझा जाता था । इसलिये अमेरिका जाने में परेशानी खङी हो सकती थी ।
1873 में न्यूयार्क पहुँच गई । सिंगल महिलाओं की होस्टेल में रहकर कपङे की फेक्टरी में काम करने लगी ।
उसकी जिन्दगी में तभी मोङ आया । जब उसने 14 OCT 1874 में हेनरी स्टील ओल्कोट का लेख पढा । वो ओल्कोट के पास पहुँच गई । 10 दिन तक अपनी आध्यात्म की जादुई टेकनीक बताती रही । ओल्कोट आध्यात्मवादी नहीं था । उसे आध्यात्म से कोई घटना घटती है । उसे देखने समझने में रूचि रखता था ।
आत्माओं को बुलाना । जादू । अफ़्रीकन आध्यात्म । बौद्ध आध्यात्म । तरह तरह के प्रयोग करते करते उनके लेख पब्लिश करते रहे । दुनिया भर के धर्मों को नकार दिये । और सबके ऊपर सत्य को रखा । सत्यकीखोज को रखा ।

न्यूयार्क के 1 न्युरोपेथोलोजिस्ट डाक्टर ने आरोप लगाया कि - ये काले जादू करने वाली गेंग फ़्राड है । ग्लोबलिस्टों का ध्यान इस गेंग पर गया । उन लोगों के सारे लेख सारा काम पब्लिश करने में मदद की । पूरे न्यूयार्क शहर में नाम हो गया । हेलेना को आर्थिक सुरक्षा की जरूरत थी । ओल्कोटो नही दे सकता था । उसे पत्नि और 2 बच्चे थे । उसके ग्रुप में बेटनेली था । उसने प्रस्ताव रखा शादी का । april 1875 में शादी कर ली । ओल्कोट को बताया नहीं था । जब उसे पता चला । तो कहा - ये तो पागलपन है । उसने हेलेना को फटकार लगाई - अपने बच्चे की आयु के और कई गुना कम मेन्टल केपिसिटी वाले आदमी से शादी करना मूर्खता है ।
ओल्कोट - नंगे सत्यकीखोज में 1 भटका हुआ वकील । हेलेना - चरित्र से ही नंगी । जादू टोने करने वाली महिला । विलियम, बेन्कर - माफिया का आदमी । जो इन 2 प्यादों की मदद से दुनिया की जनता का दिमाग घुमाने के लिये निकल पडा - मेसोन । इन सबने 1875 में " थियोसोफिकल सोसायटी " की स्थापना की । ये 1 मिरेकल क्लब था । गोपनीयता की पोलिसी बनाई गई । एक दूसरे मेम्बर को पहचानने के लिए सीक्रेट सिम्बल का उपयोग किया । प्रत्येक सदस्य अपने नाम के बाद FTS  ( फैलो थियोसोफिकल सोसायटी ) लिखने लगे ।
स्थापना के बाद " थियोसोफिकल सोसायटी " ने बौद्ध धर्म के स्वेच्छाचार के गूढ़ रहस्य । और प्रकृति के नियमों । और आदमी में अव्यक्त दिव्य शक्तियों की जांच करने में जुट गई । जो नतीजा मिला । जो थ्यौरी बनाई गई । उसके लिए दावा किया गया । ये सब तो गुप्त महात्माओं के निर्देश हैं । माना जाता है कि महात्माओं के सबूत खुद हेलिना के तिब्बत वास के दरम्यान उसके प्रेमी रहे लामा थे । या हेलेना ने खुद लिखे थे । महात्माओं के पत्रों को दिखाकर हेलना ने अपने आपको सही ठहरा दिया । वो जो करती है । सब सही है । इन पत्रों के बारे में । पक्ष में । और विरोध में । मीडिया में काफी चर्चा हुई । Who Wrote the Mahatmas Letters नाम की किताब भी छपी ।    
1878 मे हेलेना रसिया की प्रथम महिला अमेरिका की सिटीजन बनी । ऐसा इसलिए किया गया । ताकि वो रसियन है । वो बात खुल जाती । तो जासूस होने का आरोप लग सकता था । उसी साल हेलेना और ओल्कोट भारत का कल्याण करने के लिए भारत आये । वो कल्याण आज हम भुगत रहे हैं ।
हेलना को भारत में मेसोनिक बेन्कर माफियाओं के इशारे । उनके प्लान के अनुसार काफी समर्थक मिल गये । समर्थकों में प्रमुख था - एलन ओ. हयूम । यहूदियों की मूल संस्था " वर्ल्ड कांग्रेस " की भारत ब्रांच का स्थापक - आल्फ्रेड सिनेट । ध पायोनियर का एडिटर । गोरे और काले अधिकारी वर्ग । और भारत के विभिन्न जाति के धनवान धनपति । महात्माओं के पत्र का नाटक यहाँ भी नहीं थमा । दावा किया गया कि - भारत के 2 साधक कूट हुमी और मोर्य ने " थियोसोफिकल सोसायटी " की रचना में बहुत मदद की है । और उनके पत्र सिनेट और हयूम को दिखाये गये । हस्ताक्षर से पता चल गया कि ये मेडम हेलना ने लिखा है । विवाद होने से पहले बात दब गई ।  
1882 मे सोसायटी का हैड क्वार्टर मद्रास के पास अद्यार में ले जाया गया । 1884 में हेलना और ओल्कोट यूरोप की टूर पर गये । तो अमेरिका में हेलना के लिखे पत्र छापे गये । जिसमें मंदिर के संचालन के लिए नियुक्त रहस्यमय काली पेनल के लिए निर्देश थे । हेलना का भांडा फोङने के लिए उस पत्र को छापा गया था । साईकीकल रिसर्च सोसायटी का रिचर्ड होड्गसन तपास करने के लिए अद्यार पहुंच गया । उसने हेलना और सहयोगियों पर धोखाधङी और ठगी का आरोप लगाते कटु रिपोर्ट जारी किया । बाद में ये रिपोर्ट 100 साल तक विवादित रहा था । हेलना और सोसायटी पर अंधेरा छा गया । विवाद के कारण आखिर ओल्कोट ने 1885 में हेलना को यूरोप भेज दिया । अलग अलग देश में रही । अंत में तबियत खराब होने पर जर्मनी में सेटल हुई । हजार तरह की बीमारी ने घेर लिया । और 1899 अपने घर में ही मर गई ।
थियोसोफिकल सोसायटी के काम की जिम्मेदारी एक्टिविस्ट " एनी वूड बेसेन्ट " ने ले ली । एनी बेसेन्ट का घर ही हैड क्वार्टर बन गया । नई पीढी के उदारमत वादी बुद्धिजीवियों को सोसायटी में जोङने के लिए बहुत मेहनत की । 1907 में ओल्कोट मर गया । तो वो सोसायटी की प्रमुख बन गई ।  
थियोसोफिकल सोसायटी का असली बोध पाठ तो किसी को पता नहीं होता । सीनियर मेंम्बर के सिवा । फिर भी इस बात को जनता के सामने रखा है । 
बृह्माण्ड और मानव के बीच का गुप्त रिश्ता मुख्य तीन बात पर आधारित है ।
1  आखिरी सत्य - एक सर्वव्यापी रूप में । सिद्धांत विचारों से परे है ।
2  कुदरत में सर्वव्यापी चक्र ( सायकल ) का कानून । ( युग )
3  बृह्माण्ड में रहे सभी आत्मा की पहचान । अगर पुनर्जन्म है । तो उसका सफर । चक्रिय और कार्मिक कानून से होती है ।  
ये सारी बातें जनता को उल्लू बनाने के लिए थी । ऐसा ही लगता है । जूठे लोग और सत्य की बातें ?
ये गन्दगी सिर्फ भारत में ही नहीं फैली । दुनियाँ के दूसरे देशों मे भी फैल गई ।
Madame Helena Petrovna Blavatsky, Annie Besant, Alice Bailey, Edgar Casey, Alister Crowley, Benjamin Creme  _ are the founders and perpetrators of today’s New Age Movement, false messiahs, antichrist hoaxes, and, in general, a whole lot of gibberish, deception and distraction. 
ये एक ईसाई की लिखी बात है । उसे एन्टी क्राईस्ट लगा । मुझे हिन्दू विरोधी लगता है । न्यू एज मूवमेन्ट देश विदेश सब जगह फैल गई । हिन्दू के ही युग सतयुग कलयुग और प्रलय का आधार लिया । प्रलय के बाद सतयुग = न्यू एइज, गोल्डन एइज आयेगा । आत्मा और परमात्मा को जानने वाला ही बचेगा । बाकी सबको मरना है । मानसिक रूप से जगत के नागरिकों को मरने के लिए तैयार करना था । और हकीकत में बेंकर माफिया यहूदियों का असली ऐजेण्डा - न्यू वर्ल्ड आर्डर । और उसके लिए डिपोपुलेशन ऐजेण्डा नंबर- 21 का कातिल हथियार चले । तो उस पर किसी का ध्यान ना जाये । और नागरिकों में उसका सामना करने की ताकत ना बचे । जगत के धर्मों को तोङने का उनका सपना भी पूरा होता था । 400 साल से चलाया हुआ सेक्युलिरिज्म भी बङी तीवृता से मजबूत होता था ।
Beware of the New Age Movement
http://israelsmessiah.com/religions/new_age.htm
उनके लोगों का सूत्र है - सत्य सभी धर्मों के ऊपर है । कौन सा सत्य ? इन जूठे और चरित्रहीन लोगों का सत्य ? ऐसे ही 1 सत्य के पुजारी ने भारत देश को बरबाद कर दिया । आबाद होने से पहले । एलन ओ. हयूम के संगत में । कौन से, कितने कांग्रेसी इसमें फंसे होंगे । एक कल्पना का विषय है । क्योंकि इस सोसायटी की स्थापना के 10 साल बाद इस आदमी ने यहूदियों की बहुमुखी संस्था वर्ल्ड कांग्रेस की दुनियां के देशों पर राज्य करने की विंग की 1 शाखा भारत में भी खोल दी थी । और बाद में एनी बीसेन्ट भी तो भारत में हाजिर हो गई थी ।
एनी बीसेन्ट की ऊल जुलुल हरकतों से तंग आकर उसके पति फ्रेन्क बिसेन्ट ने उसे भगा दिया । उसके बेटे की कस्टडी उसके पति को मिली । और बेटी उसे मिली । वो चार्ल्स ब्रेडलेफ नाम के झोला छाप डाक्टर के चक्कर में पङ गई । उस जमाने में बढती आबादी का कोई प्राब्लम नहीं था । पर ये दोनों बर्थ कंट्रोल की मूवमेंट करने लगे । उनकी मूवमेंट से ही वो दोनों समाज के लिए नंगे हो गये थे । ऊपर से डाक्टर साहब सिर्फ 14 वीक ( सप्ताह ) मेडिसिन के क्लास करके 1 महिला का गैर कानूनी आपरेशन कर दिया । उस जुर्म में जेल चले गये । जेल में उसने शरीर, आत्मा और धर्म का चिन्तन करके ड्युअल ( dualism ) थ्यौरी खोज ली । उसकी ड्युअल थ्यौरी कुछ भी हो । लेकिन हमारे सामने उसका परिणाम है - सेक्युलर जनता । और उनका डबल स्टैंडर्ड के रूप में - कहना कुछ । करना कुछ । बिलकुल नंगापन । धर्म की बात नहीं । धर्म की बात नहीं.. करते करते उनकी सुई धर्म पर ही अटक जाती है । करना है हर काम - धर्म आधारित । पर बोलना है सेक्युलरों की जै हो ।  
ग्लोबल माफियाओं ने ब्रिटिश साम्राज्य को खत्म करने के लिए इस मैडम को भारत के क्रांतिकारियों की मदद के लिए भारत भेजा । और 1997 में कांग्रेस की पहली महिला प्रमुख बनाया । और वो सच्चे दिल से अपने ही देश के अंग्रेजों से लङी । हुआ ना डबल स्टैंडर्ड ? डबल भी नहीं - ट्रिपल । असली आजादी के क्रांतिवीरों की अवहेलना करके टटपूंजिए हलकट नकली क्रांतिवीरों को अपने चेले बनाकर सेक्युलरी घुटी पिलाकर उनको बढावा देती रही ।
गांधीवादी मुझे माफ करें । ये कङवा घूँट पिला रहा हूं ।
गांधी जन्म से ही विद्रोही स्वभाव के थे । जब वो लन्दन पढने गये । तो थियोसोफिकल सोसायटी के चक्कर में फंस गये । बेसेन्ट भी उस समय वहाँ पर ही थी । गांधी को गीता पढने के लिए दी गई । गांधी को धर्म में कोई रुचि नहीं थी । लेकिन वो गीता अच्छी लगी । तो पढने लगे । और पूरी जिन्दगी उसका अनुसरण भी किया । केथरिन टिड्रिक का कहना था कि - वो गीता थियोसोफिकल थी । यानी असली गीता नहीं थी । गांधी ने जब जोहंसबर्ग में अपना आफिस खोला । तो दीवाल पर साम्यवादी टाल्सटाय । जीसस क्राईस्ट । और एनी बिसेन्ट की तस्वीर लगाई थी । उस दौरान गांधी ईसाई बन गये थे । और लगे हाथ फ्रीमेसन भी बन गये थे । ये राज अभी 2-4 साल से ही खुला है । 1905 में गांधी ने 1 पत्र द्वारा बीसेन्ट से अपनी श्रद्धा व्यक्त की थी । सत्याग्रह और बलिदान गांधी बिसेन्ट से सीखे थे । साम्यवादी लेखक लिओ टाल्स्टोय का भी असर था । गांधी चारों और से ग्लोबलिस्ट पाशविक प्रकृति के गुरुओं से घिर गये थे । सेक्युलरी वायरस गांधी के दिलोदिमाग में ऐसा घुसा दिया था । जिसके कारण वो बुखार चढा कि उस बुखार के कारण ही उसे मार दिया गया । नंगा सत्य के बारे में सुना होगा । लेकिन ये आदमी नंगा झूठ बोलता था । 1 ही बात 5 भाषा की पत्रिका में लिखता था । अंग्रेजी भाषियों के लिए अलग । भारतीय भाषा के लिए अलग । अंग्रेजी में जात पांत और अस्पृष्यता का विरोध । और गुजराती में समर्थन । 1 समय मुसलमान का प्रेम उस हद तक बढ गया कि - अफगानिस्तान के शाह को न्यौता दे दिया कि - आओ भारत पर आक्रमण करो । और भारत को जीत लो । कोई नंग धडंग ही अपने देश पर आकृमण करवा सकता है । गाँधी का + कांग्रेस का + हर सेक्युलर का । पार्टियों का + मीडिया का + सेक्युलर जनता का + अमेरिका का + यूरोप का मुस्लिम प्रेम = युनो का डिपोपुलेशन एजेण्डा नंबर - 21 । यूरोप और अमेरिका में मुस्लिम का सशक्तिकरण हो रहा है । ईसाई और दूसरी कौम घबरा रही है । मिडिल ईस्ट और अफ़्रीका के देशों में । जहाँ कट्टरवाद नहीं था । उन देशों में यहूदियों के ही पाले हुए मुस्लिम ब्रदरहूड को सत्ता पर लाने की कोशिश हो रही है । जो सीधे ही शरिया कानून की बात करता है । इजिप्त को देख लो । आज सेना इन अमरीकी पिठ्ठुओं का सामना कर रही है । यहूदी माफियाओं ने उस प्रजा में ऐसा पागलपन देख लिया कि उनका साङे 6 अरब जनता को मारने के प्लान में उस प्रजा को सुपारी किलर की तरह उपयोग कर रहे हैं । जब आबादी कम हो जायेगी । तो उसे भी मारने में देर कितनी । नाटो और ड्रोन किस काम के ?  
एनी बिसेन्ट के सिखाये हुए बृह्मचर्य के प्रयोग भारतीय दर्शन के नहीं थे । विल पावर बढाने के लिए थे । एक नंगा आदमी नंगी महिलाओं के बीच में सोने पर भी वासना नहीं जगनी चाहिए । नारी तन का आकर्षण और मन की दृणता में मन ही जीतना चाहिए । ये कसरत है - नकली स्पिरिच्युल साधकों की । ये पाशविक प्रयोग थे - काले जादू की तरह । ये प्रयोग नहीं । दिनचर्या थी । विल पावर तो हर रोज चार्ज करना पडता है - शैतानों को । दूसरा उनका दिव्य प्रेम ? वासना पूर्ति के लिए कोई भी चलता है । नर नारी कोई भी । गांधी को गे ( समलैंगिक ) बताने वाली किताब बहुत चर्चा में आई थी । जगत गांधी को नंगा नहीं देख पाया । उस लेखक को झूठा कहा । लेकिन अब सबूत भी सामने आ गये हैं । वो लेखक सही था । लेखक का बताया हुआ गांधी का यहूदी प्रेमी । जो एक बाडी बिल्डर था । वो खुद फोटो के साथ सामने आ गया है । इस प्रेमी युगल के पेम पत्र 7 लाख पाउंड में भारत सरकार ने खरीद लिये हैं । और दिल्ली में प्रदर्शनी भी रखी थी ।
A year after a controversial biography of Mahatma Gandhi claimed he was bisexual and left his wife to live with a German-Jewish bodybuilder, the Indian government has bought a collection of letters between the two men days before they were to be auctioned.
India paid around £700,000 ( 60million rupees ) for the papers, which cover Gandhi's time in South Africa, his return to India and his contentious relationship with his family.

लेखक - Siddharth Bharodiya
M.s.uni
पूरा पढना हो । तो नीचे लिंक है ।
http://www.dailymail.co.uk/news/article-2172967/Indian-government-spends-700-000-buy-letters-prove-national-hero-Gandhi-gay.html 
http://www.youtube.com/watch?v=uRV8PYDIa8I

साभार ये लेख निम्न 2 लिंकों से हैं । इसके किसी भी तथ्य से मेरा सहमत होना आवश्यक नहीं है ।
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https://www.facebook.com/notes/siddharth-bharodiya/%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%87%E0%A4%AE-%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%87%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9B-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%B6%E0%A4%B0%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8B-/225028667650002?ref=notif&notif_t=like