04 सितंबर 2013

ये सोनिया गाँधी हमेशा नहीं रहने वाली

शीर्षक - सोनिया गाँधी हमेशा नहीं रहने वाली हैं । Suresh Chiplunkar
फ़्रेंच लेखक एवं टिप्पणीकार श्री फ़्रेंकोइस गोतिए द्वारा जॉन दयाल को लिखे गए पत्र के कुछ अंश ।
- प्रिय जॉन दयाल ! 1 कुछ समय पहले तुमने हामिद अंसारी और अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर माँग की थी कि आंध्र प्रदेश के तिरुपति देवस्थानम इलाके में ईसाईयों को मुक्त रूप से धार्मिक प्रचार की अनुमति दी जाए ।
जॉन दयाल ! क्या तुम्हें लगता है कि फ़्रांस स्थित ईसाईयों के पवित्र स्थान लूर्ड्स में किसी हिन्दू प्रचारक को धर्म प्रचार की अनुमति मिल सकती है ? शायद तुम्हें पता नहीं होगा कि माँ अमृतानन्दमयी ट्रस्ट को बिना किसी अपराध एवं ढेर सारी समाज सेवा के बावजूद फ़्रांस में एक " निगरानी समूहों " के अन्तर्गत रखा गया है । क्योंकि उसे एक " विधर्मी धार्मिक समूह " माना गया है ।

2 हे जॉन दयाल ! क्या तुम्हें नहीं पता कि भारत में ईसाई धर्म प्रचारकों को कितनी छूट और आज़ादी मिली हुई है ? विदेश से कोई भी ईसाई धर्म प्रचारक भारत आकर चाहे जितने दिन रह सकता है । थोक में ज़मीन खरीद सकता है । प्रार्थना सभाएं आयोजित कर सकता है । अखबारों में धर्म प्रचार के विज्ञापन दे सकता है । प्रिय जॉन दयाल ! कभी इस प्रकार की हरकतें सऊदी अरब या चीन में जाकर कर देखो । तब पता चलेगा कि - तुम भारत नामक स्वर्ग में रहते हो ।
3 हे जॉन दयाल ! तुम लगातार ईसाई समूहों के खिलाफ़ दुष्प्रचार का आरोप संघ परिवार पर मढ़ते हो । क्या तुम्हें पता नहीं है कि " सेमुअल " रेड्डी की वजह से आंध्र प्रदेश की 20% आबादी ईसाई बनाई जा चुकी है । जगन रेड्डी ने अपने भव्य मकान पर एक विशाल क्रॉस लगाया हुआ है । प्रिय जॉन दयाल ! क्या ईसाईयों द्वारा अपने हिन्दू भाईयों को हिन्दुओं से मिलते जुलते नाम रखकर बेवकूफ़ बनाने से तुमने कभी रोका है ? 
4 प्रिय जॉन दयाल ! भारत में ( अधिकारिक रूप से ) ईसाईयों की जनसंख्या सिर्फ़ 3% से 5% के बीच है । जबकि मुझे यह आँकड़ा झूठ ही लगता है । इसके बावजूद भारत में ईसाई संगठन । स्वास्थ्य के क्षेत्र में ।

मीडिया में । शिक्षा क्षेत्र में अच्छी खासी दखल रखते हैं । जॉन दयाल ! तब फ़िर तुम्हें आखिर किस बात की शिकायत होती है ?
अधिक क्या लिखूं मित्र जॉन दयाल ! बस इतना कहना चाहता हूँ कि हिन्दुओं की तरह सहिष्णु बनना सीखो । और भारत की परम्पराओं का सम्मान करना सीखो । एक बात ध्यान में रखो कि - सोनिया गाँधी हमेशा तुम्हारी मदद के लिए यहाँ रहने वाली नहीं हैं ।
तुम्हारा मित्र - फ़्रेंकोइस गोतिए
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सिनेमा के दो टिकट - नई नई शादी के बाद पति और पत्नी जब घर आये । तो उन्हे एक लिफाफा मिला । खोल कर देखा । तो सिनेमा के दो टिकट । लेकिन भेजने वाले का नाम नही लिखा था । पति बोला - यह जरूर मेरे किसी दोस्त ने भेजा होगा l
पत्नी बोली - ना जी ! मेरी सहेली ने भेजी होगी । पति - खैर छोडो । किसी ने भेजा हो । हमें क्या ? फिल्म का वक्त हो गया है । हमें जल्दी चलना चाहिये । 
जब दोनों फिल्म देखकर वापस आये । तो घर का सारा बहुमूल्य सामान
चोरी हो गया था । वही एक लिफाफा मिला । जिसमें लिखा था कि - अब तो पता चल गया होगा कि टिकट किसने भेजा था l
साभार masoom shaan फ़ेसबुक पेज से
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लड़की अपनी सहेलियों से - मुझे तुम्हारी Help चाहिये ।
पहली - यार मैं तो खुद बिजी हूँ ।
दूसरी - यार मम्मी ने घर जल्दी बुलाया है ।
तीसरी - तूने मेरी Help उस दिन की थी क्या ?
चौथी - Sorry Dear  मुझे क्लास जाना है ।
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लड़का अपने दोस्तों से - यार एक पंगा हो गया हैं ।
पहला - बोल भाई ! कितने बन्दे बुलाऊँ ?
दूसरा - काट के रख देंगे सालों को ...नाम बता भाई ।
तीसरा - किसकी इतनी हिम्मत हुई । जो अपने भाई से उलझा हैं । नाम बता भाई । कह के लेंगे ।
चौथा - भाई तू बस बोल करना क्या है । दुनिया गयी तेल लेने । तू बस बोल ।
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