15 सितंबर 2013

इश्क जब बेहिसाब होता है

1990 में Air National Guarde पायलट Bill Miller ने ऑरेगान शुष्क झील में नीचे देखा ।  तो उन्हें श्रीयन्त्र का डिजायन दिखा । जिसकी रेखाएं 13 मील तक फैली थी । हर एक लाइन की चौड़ाई 10 इंच थी । तथा गहराई 3 इंच थी । उस जगह पर मनुष्य निर्मित होने का कोई सबूत नहीं मिला । यह किसी के द्वारा बनाया गया नहीं था । बल्कि प्राकृतिक बना है ।
http://cropcircleconnector.com/ilyes/ilyes9.html
http://www.labyrinthina.com/sriyantra.htm

http://www.youtube.com/watch?feature=player_embedded&v=1mr2G1_UYWY#!
सर्वप्रथम समझते हैं कि Cymatics क्या होता है ? ध्वनि से उत्पन्न तरंगों को मूर्त रूप देना ( making sound visible ) Cymatics Science कहलाता है । उदाहरण के लिए जल से भरे पात्र की दीवार पर चम्मच आदि से चोट करने पर जल में तरंगे प्रत्यक्ष दिखाई पड़ती हैं । परन्तु यदि पात्र खाली हो । तो ध्वनि तो सुनाई पड़ेगी । किन्तु

तरंग देखना संभव नहीं होगा । बस यही Cymatics है । यह प्रयोग रेत के बारीक कणों, जल, पाउडर तथा ग्लिसरीन आदि पर किया जाता है ।
Cymatics Science की आवश्यकता की अनुभूति इसलिए हुई । क्योंकि विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में एक बात तो समान है कि सृष्टि की उत्पति एक " शब्द " से हुई है । 
आधुनिक काल में Hans Jenny ( 1904 ) जिन्हें cymatics का जनक कहा जाता है ने ॐ ध्वनि से प्राप्त तरंगों पर कार्य किया ।
Hans Jenny ने जब ॐ ध्वनि को रेत के बारीक़ कणों पर स्पंदित किया ( resonate om sound in sand particles ) तब उन्हें वृताकार रचनाएँ तथा उसके मध्य कई निर्मित त्रिभुज दिखाई दिए । जो आश्चर्यजनक रूप से श्रीयन्त्र से मेल खाते थे । इसी प्रकार ॐ की अलग अलग आवृति पर उपरोक्त प्रयोग करने पर अलग अलग परन्तु गोलाकार आकृतियाँ प्राप्त होती है । ॐ से उत्पन्न तरंगो से श्रीयन्त्र के ढांचे का निर्माण कैसे होता है ? इसका एक उदाहरण आप निम्न वीडियो में देख सकते हैं ।
http://www.youtube.com/watch?feature=player_embedded&v=s9GBf8y0lY0
इसके पश्चात तो बस जेनी आश्चर्य से भर गये । और उन्होंने संस्कृत के प्रत्येक अक्षर ( 52 अक्षर होते हैं । जैसे अंग्रेजी में 26 हैं ) को इसी प्रकार रेत के बारीक़ कणों पर स्पंदित किया । तब उन्हें उसी अक्षर की रेत कणों द्वारा लिखित छवि प्राप्त हुई ।
https://www.facebook.com/photo.php?fbid=1417283675165056&set=a.1396914357201988.1073741827.1396892713870819&type=1&theater
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वैदिक ग्रंथों में विज्ञान के 3 नए उदाहरण या प्रमाण - आधुनिक समय में ये भ्रांति फैली हुयी है कि विज्ञान के

सभी नियम सिद्धांतों की खोज आधुनिक समय में ही हुयी है । इससे पूर्व इनसे कोई परिचित ही न था । ये पूर्ण रूप से गलत है । वैदिक शास्त्रों व ऋषि प्रणीत ग्रंथों को हम पढ़ते हैं । तो यत्र तत्र विज्ञान के नियम सिद्धांत आदि परिलक्षित होते रहते थे । आधुनिक विज्ञान भी जहाँ पहुँचकर स्तब्ध हो जाता है । निरुत्तर हो जाता है । उससे आगे का मार्ग भी ऋषियों के तत्व विज्ञान दर्शनों अनुभवों से युक्त ग्रंथों में हम देख पाते हैं । इसके अनेकों उदाहरण प्रमाण पूर्व में प्रस्तुत किए जा चुके हैं । जो आश्चर्यचकित कर देते हैं । इसी क्रम में यहाँ 3 नए प्रमाण प्रस्तुत किए जा रहे हैं ।
आधुनिक विज्ञान - किसी भी वस्तु के बड़े बिम्ब को देखने के लिए " मेग्नीफ़ाइंग ग्लास " का प्रयोग किया जाता है । इसके द्वारा वस्तु बड़ी नहीं होती । किन्तु बड़े आकार की दिखाई देती है । वैदिक विज्ञान -
अप्राप्यग्रहणम कायाभ्रपटल स्फटिकान्तरितोलब्धे: । न्याय दर्शनम ।

अर्थात - जिन सूक्ष्म वस्तुओं को तुम अपने नेत्रों से नहीं देख व जान सकते । उन्हें अभ्रक mica  शीशे या क्रिस्टल से बने हुये लेंस द्वारा देखा जा सकता है । वस्तु के आकार में वृद्धि नहीं होती । किन्तु वह दृश्य रूप से बड़ी दिखती है ।
आधुनिक विज्ञान के अनुसार इंद्रधनुष - जब पृथ्वी के वायुमंडल में विद्यमान जल की बूंदों से सूर्य का प्रकाश परावर्तित होता है । तो आकाश में प्रकाश का स्पेक्ट्रम दिखाई देता है । जिसे इंद्रधनुष कहते हैं ।
वैदिक विज्ञान -
सूर्यस्य विविधवर्णा: पवनेन विघट्टिता: करा: साभ्रे । 
वियति धनु: संस्थाना: ये दृश्यन्ते तदिन्द्रधनु: । भरत संहिता 
अर्थात - सूर्य की विभिन्न रंगों की किरणें वायु के कारण छितर कर आकाश में 1 धनुष की भांति प्रतीत होती हैं । जिन्हें इंद्रधनुष कहते हैं ।
आधुनिक विज्ञान - भौतिकी में लचीलापन पदार्थों का गुण है । जिसके कारण पदार्थ विरूप होने के बाद भी वापिस अपने मूल रूप में आ जाते हैं । कहने का मतलब है कि जब किसी लचीले पदार्थ को बाह्य बल के द्वारा विकृत किया जाता है । तो वह पुनः अपने मूल स्वरूप को प्राप्त कर लेता है ।
वैदिक विज्ञान -
ये घना निबिड़ा: अवयव सन्निवेशा: तै: विशिष्टेषु स्पर्शवत्सु द्रव्येषु वर्तमान: स्थितिस्थापक: । स्वाश्रयमन्यथा कभमवनामितं यथावत स्थापयति पूर्ववदृजु: करोति । न्यायकांडली श्रीधराकायाह 
अर्थात - स्थिति स्थापक पदार्थों का ऐसा गुण है । जिसके कारण पदार्थ बाह्य बल के द्वारा विरूप होने के बाद भी आंतरिक बल के प्रयोग से । पुनः अपने वास्तविक स्वरूप को ग्रहण कर लेता है । यहाँ स्थिति स्थापक स्थिति

का मतलब मूल स्वरूप । एवं स्थापक मतलब पुनः लौटना । अंग्रेज़ी में इसे elasticity कहा जाता है ।
आधुनिक समय में धार्मिक लोग भी यह मानने लगे हैं कि धर्म और विज्ञान का भला क्या सम्बन्ध ? ये मान्यता इस्लाम ईसाईयत एवं अन्य पंथों मजहबों आदि के लिए हो सकती है । किन्तु सनातन वैदिक धर्म का सिद्धांत तो सर्वदा ही इसके विपरीत है । अतः अध्यात्म एवं विज्ञान के परस्पर संबंध को शास्त्रादि प्रमाणों द्वारा ही सिद्ध करता हुआ अगला लेख लिखा जाएगा । ॐ जय श्री राम । वैदिक सुधा निधि
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तो भाइयो ! पेश ए खिदमत है - खुजली भजन ।
पायो जी मैंने फोर्ड फाउंडेशन धन पायो ।
चंदा अमोलक दिया मेरे जिंदल । रुपये में बंगला पायो । पायो जी मैंने..
कोटि कोटि टोपियाँ पायी । सारे जग को टोपी पहनायो । पायो जी मैंने..
खर्चे ने खूटे कांग्रेस न लूटे । दिन दिन मूर्ख जुटायो । पायो जी मैंने..
सत्ता की नाव सोनिया सत्गुरु । भर भर वोट कटवायो । पायो जी मैंने..
खुजली के प्रभु स्टील ग्लास नागर । हर अनशन सफल बनायो । पायो जी मैंने फोर्ड फाउंडेशन धन पायो
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दीक्षा राइट टू रिकाल - सेतुसमुद्रम योजना भाजपा द्रमुक गठबंधन NDA द्वारा 2002 में शुरू की गयी थी । लेकिन बहुत सारे कार्यकर्ताओं ने भाजपा को मजबूर कर दिया था कि वे इस योजना को रोकें । इसके कारण भाजपा द्रमुक गठबंधन टूट गया था । और जब भाजपा सत्ता में नहीं रही । तो उसने खुलेआम इस योजना का विरोध करना शुरू कर दिया ।  सेतुसमुद्रम योजना आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं है । ऐसा बहुत से विशेषज्ञ कहते हैं । इसीलिए ऐसी सम्भावना नहीं है कि ये सफलतापूर्वक लागू हो सके । लेकिन अभी तक करोडों रुपये खर्च हो चुके हैं ।
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Narendra Kahar - जी हाँ ! बस यही अंतर है । भाजपा और कांग्रेस की विचारधारा में...भाजपा का मुख्यालय 11 अशोक मार्ग पर है । जिसका साफ मतलब है - भाजपा सम्राट अशोक के अहिंसा के सिद्धांतों पर चलकर राजनीति कर रही है । अर्थात सम्राट अशोक के दिखाए मार्ग का अनुसरण कर रही है ।
कांग्रेस का मुख्यालय है - 24 अकबर रोड । जिसका मतलब है । कांग्रेस मुगलों के रास्ते पर चलकर हिंदुओं का दमन रही है । इसीलिए कांग्रेस ने भारत में " हिंदू आतंकवाद " जैसे शब्द का आविष्कार किया है । यह वही अकबर है । जिसके पूर्वजों ने हमारे भगवान राम का मंदिर तोड़कर बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया था । यह 1 संयोग मात्र नहीं है । दोनों पार्टियों की मूल विचारधारा भी इस तथ्य को प्रमाणित भी कर रही है ।
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दीक्षा राइट टू रिकाल - सेतुसमुद्रम योजना पर अन्याय पूर्वक तरीके से हो रही जन सुनवाई के विरुद्ध जनहित याचिका ख़ारिज कर दी गयी ।
ए.सुब्रमणियम द्वारा
The Hindu . Tamil Nadu News - Petition against public hearings on Sethu project dismissed
CHENNAI, DEC 17. The Madras High Court today dismissed a writ petition against public hearings on the Sethusamudram Shipping Channel Project as premature and directed Collectors of six coastal districts to complete the hearings expeditiously.
www.hindu.com
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निर्भय निरगुण गुण रे गाऊँगा ।
मूल कमल दृढ आसन बांधू । उलटी पवन चढाऊंगा ।
मन ममता को थिर कर लाऊं । पांचो तत्त मिलाऊंगा ।
इंगला पिंगला सुखमन नाडी । तिरवेणी पे ही नहाऊंगा । 
पांच पचीसों पकड़ मंगाऊ । एक ही डोर लगाऊंगा । 
शून्य शिखर पर अनहद बाजे । राग छत्तीस सुनाऊंगा । 
कहत कबीर सुनो भाई साधो । जीत निशान घुराऊंगा ।
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A poor man asked the Buddha - Why am I so poor  ?
The Buddha said - you do not learn to give.
So the poor man said - If I'm not having anything ?
Buddha said - You have a few things . The Face  -. which can give a smile . Mouth - you can praise or comfort others . The Heart - it can open up to others . Eyes - who can look the other with the eyes of goodness . Body - which can be used to help others.
So actually we are not poor at all . poverty of spirit is the real poverty .

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बीबी जैनब अ.स की बारगाह पर हुआ हमला इतने आसानी से हम भूल गए । जैसे कोई सामान्य बात । और बाबरी मस्जिद को नहीं भूल सकते । बीबी जैनब अ.स जो नबी स.अ.व की बेटी की बेटी हैं । और मौला अली अ.स की बेटी हैं । माँ फ़ातेमा तुज़ जेहरा स.अ की बेटी हैं । मौला हसन अ.स मौला हुसैन अ.स की बहन । पूरे इस्लाम दुनिया में यही किरदार अहम हैं । और इस्लाम की बुनियाद ही ये पंज्तन पाक पे कायम है । बाबरी मस्जिद जो 1 बादशाह बाबर ने तामीर की । और वो बादशाह कोई इस्लाम का ठेकेदार या कोई वली या पीर नहीं था । वो सिर्फ अपनी हुकूमत को फैलाने में मशरूफ था । बाबरी जहाँ पे कितने समय से नमाज़ भी अदा नहीं होती थी । और ऐसा कोई इस्लाम में कहा भी नहीं गया कि जहाँ किसी के ईमान को ठेस पहुँचे । वहाँ हम अपनी मर्जी चलायें । ये दोहरा नजरिया क्यों ? क्या हम किसी यजीद का मोहरा तो नहीं बन रहे ? आज दुनियां में यज़ीदियों के हमले इतने बढ़ गए हैं कि हमारे बुज़ुर्गां ने दिन और औलियाओं की बारगाहों का वजूद बचाना मुश्किल हो गया है । और आगे हमारा भी यही वक़्त आने वाला हैं । बात गंभीर है । और इस पे गौर करके हमें सच को समझना होगा । Gulam mustufa Momin
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बात का रुख बदल देते हो चेहरा देखकर । 
हम तो सीधी बात कहते हैं खफा कोई भी हो ।
फिर कहाँ हिसाब पूछा जाता है ।
इश्क जब बेहिसाब होता है ।
किस तरह से मुझसे है तेरी याद को हमदर्दी ।
देखती है मुझे तन्हा तो चली आती है ।
मैं इसे शोहरत कहूँ या अपनी रूसवाई कहूँ ।
मुझसे पहले उस गली में मेरे अफसाने गये ।
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