16 अगस्त 2013

शेम शेम..कुछ तो शरम करो - एजेण्डा नंबर - 21

जब बच्चे चड्डी नहीं पहनने की जिद करते हैं । तो माँ बाप या बङे भाई बहन शेम शेम बोलते हैं । तो बच्चा चड्डी पहन लेता है । बच्चों में इतनी तो शरम होती है । बङे शरम छोड रहे हैं ।
मानवता के दुश्मनों ने दुनिया में " शैमलेस सोसायटी " बनाने की ठानी हुई है । प्रजा को " शेम शेम " बना देना है । इस बच्चे की तरह । आदमी की शरम लिहाज छुडाने के लिए कई तरीके एक साथ काम में लगाये हैं । प्राणी की ही टोली होती है । ऐसा नहीं है । साधनों की भी टोली होती है । मीडिया - आप कोई भी माध्यम देखो । टीवी, सिनेमा, समाचार की साइट खोलते ही दो चार शेम शेम आर्टिकल नजर आ ही जाते हैं । नेताओं की प्रेरणा – क्या नेताओं की धोती इतनी ढीली होती जा रही है । कला के सभी रूप । साहित्य । और सबसे बडा साधन है - धर्म और राजनीति । ये रही सारे साधनों की टोली । बच्चों के रूप में ।

इन बच्चों के संकेतों पर मत जाईये । लेकिन ऐसे ही संकेत मानवता के दुश्मनों ने भी खोज लिए हैं । ये खास संकेत होते हैं । संकेत बता रहे हैं । आपको क्या होना है । ये संकेत हैं । मेसोनिक और थियोसोफिस्ट शैतानों के । हालांकि ये संकेत तो मानवों के जन्म के साथ ही शुरु हो गये थे । शब्द नहीं थे । इशारों में बातें होती थी । फिर गूँगे बहरों को ये अच्छा काम में आया । ये एक भाषा ही है । जो हर देश में अलग अलग है । लेकिन " हेलन किलर " नाम की गूँगी बहरी और अंधी महिला ने थियोसोफिस्टों के आपसी परिचय के लिए इसका 1 खास स्वरूप दिया । दूसरा कोई इसे नहीं समझ सकता । हेलन खुद एक समाज सेवी एक्टिविस्ट थी । उसकी टीचर थियोसोफिस्ट थी । तो खुद भी थियोसोफिस्ट बन गई थी ।

सिर्फ शारीरिक नग्नता की बात नही है । आदमी की हर अभिव्यक्ति से नग्नता टपकती है । बेशर्म होकर भृष्टाचार या चोरी करना नंगापन है । ऐसे काम नंगे लोग करते हैं । जूठे बयान नंगे नेता करते हैं । जनता की हालत और गरीबी का मजाक नंगे प्लानिंग कमीशन वाले करते हैं । धर्म को भी नही छोङा । हर 2-4 महीने में 1 नंगा खङा हो जाता है । और धर्म का 1 टुकडा ले के चलता बनता है । ये टुकङा मेरा । ये धर्म मेरा । इतने भक्त मेरे । और भक्तों की नंगाई को भी क्या कहें ? सब भगवानों के बाप महादेव को छोड विधर्मियों की कबर की भी खाक छानने लगते हैं । जैसे मुँह में लड्डू आ जायेगा । जो अपने धर्म का वफादार नहीं । वो नंगा नहीं । तो क्या है ? ऐसा व्यापक नंगापन क्यों ? और कैसे फैलाया गया । जान लीजिये ।
1847 में हेलेना पेत्रोव्ना नाम की एक 16 साल की रसियन लडकी को रसिया के राजकुमार से प्यार हो गया । उसके दादा राजा के पास नौकरी करते थे । 1 साल प्यार का खेल चला । बचपन से माँ का साया नहीं था । तो ये लङकी विद्रोही और आजाद ख्याल की हो गई थी । 1 साल बाद जब राजकुमार मर गया । तो इधर उधर मुँह मारने लगी । तो उसकी आया ने ताना मारा कि - तुझे तो अब कोई बूढा भी नहीं ले जायेगा । उस लङकी ने अपनी आया को जूठा साबित करने की खातिर 17 साल की आयु में 42 साल के बूढे नाइसफोर ब्लॅवत्स्की से शादी कर ली । 3 महीने में ही अपने पति को छोङकर भाग गई । 1848 -1858 के दौरान उसका जीवन आवारा की तरह बीता । ज्यादातर तिब्बत में 1 लामा के पास रही । आत्मा परमात्मा, और तंत्र मंत्र और काली विध्या सीखती रही ।

जब वो रसिया लौटी । तो अपने पति के पास 1 शर्त पर रहने लगी कि उसका पति यथासंभव उससे दूर ही रहे । अपनी आध्यात्मिक प्रवृत्ति के कारण उसे 1 एस्टोनिया के व्यापारी निकोलस मेयेन्द्रोफ से संबंध हो गया । निकोलस ने अपने 1 दोस्त को मना लिया कि वो अपना घर उनके मिलन स्थान की तरह उपयोग करने दे । हेलेना से अपने पति से तलाक लेकर शादी करने की मांग भी रखी । 1861 में 60 साल का मेत्रोविच यूरोप से लौट आया । हेलना को पहले से ही जानता था । अब इस उमृ में वो हेलना को पाना चाहता था । हेलना 1 साथ तीन 3 पुरुषों को संभालने लगी । प्रेग्नेन्ट हो गई । तो स्कॅन्डल से बचने और बच्चा पैदा करने के लिए वो ओजुर्गेटी चली गई । अपंग बच्चा हुआ । और 5 साल में वो मर गया । इन सालों वो वहीं पर रही ।
घर जाने का रास्ता बंद कर चुकी थी । मेत्रोविच के साथ पेरिस गई । पेरिस में कुछ कर न पाने की वजह से इजिप्त जाने के लिए शिप में बैठे । शिप में हुई दुर्घटना में मेत्रोविच मर गया । ग्रीक सरकार के फंड पर उसे एलेक्जांड्रिया छोङ दिया गया । वहाँ उसके साथी की अंतिम क्रिया करके आगे इजिप्त के केरो पहुँच गई । वहाँ 1 साथी मिल गई । जो अफ़्रीकी गूढ और काली विध्या की जानकार थी । कुछ समय इस जोङी ने साथ में काम किया । उसने सुना कि अमेरिका में अच्छे चांस हैं । वो नकली हिन्दू नाम देकर शिप में बैठ गई । क्योंकि रसियन लोगों को जासूस समझा जाता था । इसलिये अमेरिका जाने में परेशानी खङी हो सकती थी ।
1873 में न्यूयार्क पहुँच गई । सिंगल महिलाओं की होस्टेल में रहकर कपङे की फेक्टरी में काम करने लगी ।
उसकी जिन्दगी में तभी मोङ आया । जब उसने 14 OCT 1874 में हेनरी स्टील ओल्कोट का लेख पढा । वो ओल्कोट के पास पहुँच गई । 10 दिन तक अपनी आध्यात्म की जादुई टेकनीक बताती रही । ओल्कोट आध्यात्मवादी नहीं था । उसे आध्यात्म से कोई घटना घटती है । उसे देखने समझने में रूचि रखता था ।
आत्माओं को बुलाना । जादू । अफ़्रीकन आध्यात्म । बौद्ध आध्यात्म । तरह तरह के प्रयोग करते करते उनके लेख पब्लिश करते रहे । दुनिया भर के धर्मों को नकार दिये । और सबके ऊपर सत्य को रखा । सत्यकीखोज को रखा ।

न्यूयार्क के 1 न्युरोपेथोलोजिस्ट डाक्टर ने आरोप लगाया कि - ये काले जादू करने वाली गेंग फ़्राड है । ग्लोबलिस्टों का ध्यान इस गेंग पर गया । उन लोगों के सारे लेख सारा काम पब्लिश करने में मदद की । पूरे न्यूयार्क शहर में नाम हो गया । हेलेना को आर्थिक सुरक्षा की जरूरत थी । ओल्कोटो नही दे सकता था । उसे पत्नि और 2 बच्चे थे । उसके ग्रुप में बेटनेली था । उसने प्रस्ताव रखा शादी का । april 1875 में शादी कर ली । ओल्कोट को बताया नहीं था । जब उसे पता चला । तो कहा - ये तो पागलपन है । उसने हेलेना को फटकार लगाई - अपने बच्चे की आयु के और कई गुना कम मेन्टल केपिसिटी वाले आदमी से शादी करना मूर्खता है ।
ओल्कोट - नंगे सत्यकीखोज में 1 भटका हुआ वकील । हेलेना - चरित्र से ही नंगी । जादू टोने करने वाली महिला । विलियम, बेन्कर - माफिया का आदमी । जो इन 2 प्यादों की मदद से दुनिया की जनता का दिमाग घुमाने के लिये निकल पडा - मेसोन । इन सबने 1875 में " थियोसोफिकल सोसायटी " की स्थापना की । ये 1 मिरेकल क्लब था । गोपनीयता की पोलिसी बनाई गई । एक दूसरे मेम्बर को पहचानने के लिए सीक्रेट सिम्बल का उपयोग किया । प्रत्येक सदस्य अपने नाम के बाद FTS  ( फैलो थियोसोफिकल सोसायटी ) लिखने लगे ।
स्थापना के बाद " थियोसोफिकल सोसायटी " ने बौद्ध धर्म के स्वेच्छाचार के गूढ़ रहस्य । और प्रकृति के नियमों । और आदमी में अव्यक्त दिव्य शक्तियों की जांच करने में जुट गई । जो नतीजा मिला । जो थ्यौरी बनाई गई । उसके लिए दावा किया गया । ये सब तो गुप्त महात्माओं के निर्देश हैं । माना जाता है कि महात्माओं के सबूत खुद हेलिना के तिब्बत वास के दरम्यान उसके प्रेमी रहे लामा थे । या हेलेना ने खुद लिखे थे । महात्माओं के पत्रों को दिखाकर हेलना ने अपने आपको सही ठहरा दिया । वो जो करती है । सब सही है । इन पत्रों के बारे में । पक्ष में । और विरोध में । मीडिया में काफी चर्चा हुई । Who Wrote the Mahatmas Letters नाम की किताब भी छपी ।    
1878 मे हेलेना रसिया की प्रथम महिला अमेरिका की सिटीजन बनी । ऐसा इसलिए किया गया । ताकि वो रसियन है । वो बात खुल जाती । तो जासूस होने का आरोप लग सकता था । उसी साल हेलेना और ओल्कोट भारत का कल्याण करने के लिए भारत आये । वो कल्याण आज हम भुगत रहे हैं ।
हेलना को भारत में मेसोनिक बेन्कर माफियाओं के इशारे । उनके प्लान के अनुसार काफी समर्थक मिल गये । समर्थकों में प्रमुख था - एलन ओ. हयूम । यहूदियों की मूल संस्था " वर्ल्ड कांग्रेस " की भारत ब्रांच का स्थापक - आल्फ्रेड सिनेट । ध पायोनियर का एडिटर । गोरे और काले अधिकारी वर्ग । और भारत के विभिन्न जाति के धनवान धनपति । महात्माओं के पत्र का नाटक यहाँ भी नहीं थमा । दावा किया गया कि - भारत के 2 साधक कूट हुमी और मोर्य ने " थियोसोफिकल सोसायटी " की रचना में बहुत मदद की है । और उनके पत्र सिनेट और हयूम को दिखाये गये । हस्ताक्षर से पता चल गया कि ये मेडम हेलना ने लिखा है । विवाद होने से पहले बात दब गई ।  
1882 मे सोसायटी का हैड क्वार्टर मद्रास के पास अद्यार में ले जाया गया । 1884 में हेलना और ओल्कोट यूरोप की टूर पर गये । तो अमेरिका में हेलना के लिखे पत्र छापे गये । जिसमें मंदिर के संचालन के लिए नियुक्त रहस्यमय काली पेनल के लिए निर्देश थे । हेलना का भांडा फोङने के लिए उस पत्र को छापा गया था । साईकीकल रिसर्च सोसायटी का रिचर्ड होड्गसन तपास करने के लिए अद्यार पहुंच गया । उसने हेलना और सहयोगियों पर धोखाधङी और ठगी का आरोप लगाते कटु रिपोर्ट जारी किया । बाद में ये रिपोर्ट 100 साल तक विवादित रहा था । हेलना और सोसायटी पर अंधेरा छा गया । विवाद के कारण आखिर ओल्कोट ने 1885 में हेलना को यूरोप भेज दिया । अलग अलग देश में रही । अंत में तबियत खराब होने पर जर्मनी में सेटल हुई । हजार तरह की बीमारी ने घेर लिया । और 1899 अपने घर में ही मर गई ।
थियोसोफिकल सोसायटी के काम की जिम्मेदारी एक्टिविस्ट " एनी वूड बेसेन्ट " ने ले ली । एनी बेसेन्ट का घर ही हैड क्वार्टर बन गया । नई पीढी के उदारमत वादी बुद्धिजीवियों को सोसायटी में जोङने के लिए बहुत मेहनत की । 1907 में ओल्कोट मर गया । तो वो सोसायटी की प्रमुख बन गई ।  
थियोसोफिकल सोसायटी का असली बोध पाठ तो किसी को पता नहीं होता । सीनियर मेंम्बर के सिवा । फिर भी इस बात को जनता के सामने रखा है । 
बृह्माण्ड और मानव के बीच का गुप्त रिश्ता मुख्य तीन बात पर आधारित है ।
1  आखिरी सत्य - एक सर्वव्यापी रूप में । सिद्धांत विचारों से परे है ।
2  कुदरत में सर्वव्यापी चक्र ( सायकल ) का कानून । ( युग )
3  बृह्माण्ड में रहे सभी आत्मा की पहचान । अगर पुनर्जन्म है । तो उसका सफर । चक्रिय और कार्मिक कानून से होती है ।  
ये सारी बातें जनता को उल्लू बनाने के लिए थी । ऐसा ही लगता है । जूठे लोग और सत्य की बातें ?
ये गन्दगी सिर्फ भारत में ही नहीं फैली । दुनियाँ के दूसरे देशों मे भी फैल गई ।
Madame Helena Petrovna Blavatsky, Annie Besant, Alice Bailey, Edgar Casey, Alister Crowley, Benjamin Creme  _ are the founders and perpetrators of today’s New Age Movement, false messiahs, antichrist hoaxes, and, in general, a whole lot of gibberish, deception and distraction. 
ये एक ईसाई की लिखी बात है । उसे एन्टी क्राईस्ट लगा । मुझे हिन्दू विरोधी लगता है । न्यू एज मूवमेन्ट देश विदेश सब जगह फैल गई । हिन्दू के ही युग सतयुग कलयुग और प्रलय का आधार लिया । प्रलय के बाद सतयुग = न्यू एइज, गोल्डन एइज आयेगा । आत्मा और परमात्मा को जानने वाला ही बचेगा । बाकी सबको मरना है । मानसिक रूप से जगत के नागरिकों को मरने के लिए तैयार करना था । और हकीकत में बेंकर माफिया यहूदियों का असली ऐजेण्डा - न्यू वर्ल्ड आर्डर । और उसके लिए डिपोपुलेशन ऐजेण्डा नंबर- 21 का कातिल हथियार चले । तो उस पर किसी का ध्यान ना जाये । और नागरिकों में उसका सामना करने की ताकत ना बचे । जगत के धर्मों को तोङने का उनका सपना भी पूरा होता था । 400 साल से चलाया हुआ सेक्युलिरिज्म भी बङी तीवृता से मजबूत होता था ।
Beware of the New Age Movement
http://israelsmessiah.com/religions/new_age.htm
उनके लोगों का सूत्र है - सत्य सभी धर्मों के ऊपर है । कौन सा सत्य ? इन जूठे और चरित्रहीन लोगों का सत्य ? ऐसे ही 1 सत्य के पुजारी ने भारत देश को बरबाद कर दिया । आबाद होने से पहले । एलन ओ. हयूम के संगत में । कौन से, कितने कांग्रेसी इसमें फंसे होंगे । एक कल्पना का विषय है । क्योंकि इस सोसायटी की स्थापना के 10 साल बाद इस आदमी ने यहूदियों की बहुमुखी संस्था वर्ल्ड कांग्रेस की दुनियां के देशों पर राज्य करने की विंग की 1 शाखा भारत में भी खोल दी थी । और बाद में एनी बीसेन्ट भी तो भारत में हाजिर हो गई थी ।
एनी बीसेन्ट की ऊल जुलुल हरकतों से तंग आकर उसके पति फ्रेन्क बिसेन्ट ने उसे भगा दिया । उसके बेटे की कस्टडी उसके पति को मिली । और बेटी उसे मिली । वो चार्ल्स ब्रेडलेफ नाम के झोला छाप डाक्टर के चक्कर में पङ गई । उस जमाने में बढती आबादी का कोई प्राब्लम नहीं था । पर ये दोनों बर्थ कंट्रोल की मूवमेंट करने लगे । उनकी मूवमेंट से ही वो दोनों समाज के लिए नंगे हो गये थे । ऊपर से डाक्टर साहब सिर्फ 14 वीक ( सप्ताह ) मेडिसिन के क्लास करके 1 महिला का गैर कानूनी आपरेशन कर दिया । उस जुर्म में जेल चले गये । जेल में उसने शरीर, आत्मा और धर्म का चिन्तन करके ड्युअल ( dualism ) थ्यौरी खोज ली । उसकी ड्युअल थ्यौरी कुछ भी हो । लेकिन हमारे सामने उसका परिणाम है - सेक्युलर जनता । और उनका डबल स्टैंडर्ड के रूप में - कहना कुछ । करना कुछ । बिलकुल नंगापन । धर्म की बात नहीं । धर्म की बात नहीं.. करते करते उनकी सुई धर्म पर ही अटक जाती है । करना है हर काम - धर्म आधारित । पर बोलना है सेक्युलरों की जै हो ।  
ग्लोबल माफियाओं ने ब्रिटिश साम्राज्य को खत्म करने के लिए इस मैडम को भारत के क्रांतिकारियों की मदद के लिए भारत भेजा । और 1997 में कांग्रेस की पहली महिला प्रमुख बनाया । और वो सच्चे दिल से अपने ही देश के अंग्रेजों से लङी । हुआ ना डबल स्टैंडर्ड ? डबल भी नहीं - ट्रिपल । असली आजादी के क्रांतिवीरों की अवहेलना करके टटपूंजिए हलकट नकली क्रांतिवीरों को अपने चेले बनाकर सेक्युलरी घुटी पिलाकर उनको बढावा देती रही ।
गांधीवादी मुझे माफ करें । ये कङवा घूँट पिला रहा हूं ।
गांधी जन्म से ही विद्रोही स्वभाव के थे । जब वो लन्दन पढने गये । तो थियोसोफिकल सोसायटी के चक्कर में फंस गये । बेसेन्ट भी उस समय वहाँ पर ही थी । गांधी को गीता पढने के लिए दी गई । गांधी को धर्म में कोई रुचि नहीं थी । लेकिन वो गीता अच्छी लगी । तो पढने लगे । और पूरी जिन्दगी उसका अनुसरण भी किया । केथरिन टिड्रिक का कहना था कि - वो गीता थियोसोफिकल थी । यानी असली गीता नहीं थी । गांधी ने जब जोहंसबर्ग में अपना आफिस खोला । तो दीवाल पर साम्यवादी टाल्सटाय । जीसस क्राईस्ट । और एनी बिसेन्ट की तस्वीर लगाई थी । उस दौरान गांधी ईसाई बन गये थे । और लगे हाथ फ्रीमेसन भी बन गये थे । ये राज अभी 2-4 साल से ही खुला है । 1905 में गांधी ने 1 पत्र द्वारा बीसेन्ट से अपनी श्रद्धा व्यक्त की थी । सत्याग्रह और बलिदान गांधी बिसेन्ट से सीखे थे । साम्यवादी लेखक लिओ टाल्स्टोय का भी असर था । गांधी चारों और से ग्लोबलिस्ट पाशविक प्रकृति के गुरुओं से घिर गये थे । सेक्युलरी वायरस गांधी के दिलोदिमाग में ऐसा घुसा दिया था । जिसके कारण वो बुखार चढा कि उस बुखार के कारण ही उसे मार दिया गया । नंगा सत्य के बारे में सुना होगा । लेकिन ये आदमी नंगा झूठ बोलता था । 1 ही बात 5 भाषा की पत्रिका में लिखता था । अंग्रेजी भाषियों के लिए अलग । भारतीय भाषा के लिए अलग । अंग्रेजी में जात पांत और अस्पृष्यता का विरोध । और गुजराती में समर्थन । 1 समय मुसलमान का प्रेम उस हद तक बढ गया कि - अफगानिस्तान के शाह को न्यौता दे दिया कि - आओ भारत पर आक्रमण करो । और भारत को जीत लो । कोई नंग धडंग ही अपने देश पर आकृमण करवा सकता है । गाँधी का + कांग्रेस का + हर सेक्युलर का । पार्टियों का + मीडिया का + सेक्युलर जनता का + अमेरिका का + यूरोप का मुस्लिम प्रेम = युनो का डिपोपुलेशन एजेण्डा नंबर - 21 । यूरोप और अमेरिका में मुस्लिम का सशक्तिकरण हो रहा है । ईसाई और दूसरी कौम घबरा रही है । मिडिल ईस्ट और अफ़्रीका के देशों में । जहाँ कट्टरवाद नहीं था । उन देशों में यहूदियों के ही पाले हुए मुस्लिम ब्रदरहूड को सत्ता पर लाने की कोशिश हो रही है । जो सीधे ही शरिया कानून की बात करता है । इजिप्त को देख लो । आज सेना इन अमरीकी पिठ्ठुओं का सामना कर रही है । यहूदी माफियाओं ने उस प्रजा में ऐसा पागलपन देख लिया कि उनका साङे 6 अरब जनता को मारने के प्लान में उस प्रजा को सुपारी किलर की तरह उपयोग कर रहे हैं । जब आबादी कम हो जायेगी । तो उसे भी मारने में देर कितनी । नाटो और ड्रोन किस काम के ?  
एनी बिसेन्ट के सिखाये हुए बृह्मचर्य के प्रयोग भारतीय दर्शन के नहीं थे । विल पावर बढाने के लिए थे । एक नंगा आदमी नंगी महिलाओं के बीच में सोने पर भी वासना नहीं जगनी चाहिए । नारी तन का आकर्षण और मन की दृणता में मन ही जीतना चाहिए । ये कसरत है - नकली स्पिरिच्युल साधकों की । ये पाशविक प्रयोग थे - काले जादू की तरह । ये प्रयोग नहीं । दिनचर्या थी । विल पावर तो हर रोज चार्ज करना पडता है - शैतानों को । दूसरा उनका दिव्य प्रेम ? वासना पूर्ति के लिए कोई भी चलता है । नर नारी कोई भी । गांधी को गे ( समलैंगिक ) बताने वाली किताब बहुत चर्चा में आई थी । जगत गांधी को नंगा नहीं देख पाया । उस लेखक को झूठा कहा । लेकिन अब सबूत भी सामने आ गये हैं । वो लेखक सही था । लेखक का बताया हुआ गांधी का यहूदी प्रेमी । जो एक बाडी बिल्डर था । वो खुद फोटो के साथ सामने आ गया है । इस प्रेमी युगल के पेम पत्र 7 लाख पाउंड में भारत सरकार ने खरीद लिये हैं । और दिल्ली में प्रदर्शनी भी रखी थी ।
A year after a controversial biography of Mahatma Gandhi claimed he was bisexual and left his wife to live with a German-Jewish bodybuilder, the Indian government has bought a collection of letters between the two men days before they were to be auctioned.
India paid around £700,000 ( 60million rupees ) for the papers, which cover Gandhi's time in South Africa, his return to India and his contentious relationship with his family.

लेखक - Siddharth Bharodiya
M.s.uni
पूरा पढना हो । तो नीचे लिंक है ।
http://www.dailymail.co.uk/news/article-2172967/Indian-government-spends-700-000-buy-letters-prove-national-hero-Gandhi-gay.html 
http://www.youtube.com/watch?v=uRV8PYDIa8I

साभार ये लेख निम्न 2 लिंकों से हैं । इसके किसी भी तथ्य से मेरा सहमत होना आवश्यक नहीं है ।
https://www.facebook.com/ParamDanav?notif_t=fbpage_fan_invite

https://www.facebook.com/notes/siddharth-bharodiya/%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%87%E0%A4%AE-%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%87%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9B-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%B6%E0%A4%B0%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8B-/225028667650002?ref=notif&notif_t=like
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