28 सितंबर 2012

OH MY GOD..GOD जी चोरी हो गये


क्या आप जानते हैं कि - ईसाईयों द्वारा अपने ईश्वर के लिए प्रयुक्त किया जाने वाला शब्द - GOD  हमारे हिन्दू धर्म से चोरी किया गया है । और GOD शब्द और कुछ नहीं । बल्कि हमारे आराध्य त्रि देव का अंग्रेजी एवं छोटा रूप है । दरअसल बात कुछ ऐसी है कि - जब हमारा सनातन धर्म पूरे विश्व में विजय पताका फहरा रहा था । और हमारे यहाँ रेशमी वस्त्र बनाये एवं पहने जा रहे थे । उस समय तक पश्चिमी और आज के आधुनिक कहे जाने वाले देशों के लोग जंगलों में रहा करते थे ।
जब हमारे हिंदुस्तान के व्यापारियों ने व्यापार के सिलसिले में देशों की सीमाओं को लांघना शुरू किया । तब उन पश्चिमी लोगों को समाज की स्थापना और ईश्वर के बारे में पता चला । भारत के उन्नत समाज और सर्वांगीण विकास को देख कर उनकी आँखें फटी रह गई । खोजबीन करने पर उन्हें ये मालूम चला कि - भारत ( हिन्दुओं ) के इस उन्नत समाज और सर्वागीण विकास का प्रमुख आधार उनका - भगवान पर अटूट श्रद्धा और भक्ति है । ये राज की बात पता चलते ही पश्चिमी देशों के लोगों ने भी हमारे हिंदुस्तान के भगवान को आधार बना कर उन्होंने अपना एक नया ही भगवान खड़ा कर लिया ( जिस प्रकार मुहम्मद ने इस्लाम को खड़ा किया )

इसके लिए उन्होंने जीजस अर्थात ईसामसीह की प्रेरणा भगवान श्रीकृष्ण से ली ( क्योंकि भगवान राम की कापी करने पर उन्हें भी नया रावण और नयी लंका का निर्माण करना पड़ जाता । जो कि काफी दुष्कर कार्य होता ) शायद आपने कभी गौर नहीं किया है कि - ईसामसीह और भगवान कृष्ण में कितनी समानता है ?
1 भगवान कृष्ण की ही तरह ईसामसीह का भी जन्म रात में बताया गया है ।
2 भगवान कृष्ण की ही तरह ईसामसीह भी भेड़ बकरियां चराया करते थे ।
3 भगवान कृष्ण की ही तरह ईसामसीह को भी दूसरी माँ ने पाला ।
4 भगवान कृष्ण की ही तरह ईसामसीह के कथन को भी बाइबल कहा गया ( भगवान कृष्ण के कथन को श्रीमद भगवत गीता कहा गया है )

5 हमारे हिन्दू धर्म की ही तरह बाइबल में भी दुनिया में प्रलय जलमग्न होकर होना बताया गया है ।
अब उन्होंने नया भगवान ? तो बना लिया । लेकिन उन्हें संबोधित करने का तरीका भी उन्हें नहीं आता था । जिस कारण उन्होंने एक बार फिर हमारे हिन्दू धर्म की मुँह ताकना शुरू किया । और यहाँ उन्हें उनका जबाब मिल गया ।
हमारे हिन्दू धर्म में 3 प्रमुख देवता हैं - 1 रचयिता अर्थात - बृह्मा । 2 पालनकर्ता अर्थात - विष्णु । और 3 संहार कर्ता अर्थात - शिव । उन्होंने हमारी इस विचारधारा को पूरी तरह जस के तस कापी कर लिया । और उन्होंने अंग्रेजी में अपने ईश्वर को GOD बुलाना शुरू किया ।
GOD अर्थात -
G - Generetor ( सृष्टि Generate करने वाला अर्थात - रचयिता )
O - Operator ( सृष्टि को Operate करने वाला अर्थात - पालनकर्ता )
D - Destroyer ( सृष्टि को destroy करने वाला अर्थात - संहार कर्ता )

इसलिए इन प्रमाणों से बात एक दम शीशे की तरह साफ है कि - दुनियां में हिन्दू धर्म को छोड़ कर बाकी सारे धर्म या तो चोरी कर बनाये गए हैं । या फिर उनकी सिर्फ मान्यता है । हमारा हिन्दू या सनातन धर्म ही - सभी धर्मों की जननी है । और - अनादि । अनंत । निरंतर है । जय महाकाल । Kumar Satish
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क्या आप जानते हैं । शहीद कौन होता है ? आजकल लोग अपने राष्ट्र पुरषों को शहीद की उपाधि से विभूषित 

करते हैं । जैसे - शहीद भगत सिंह इत्यादि । किन्तु हममें से कितने लोग शहीद का अर्थ जानते हैं ? इस्लामी अरब शब्द कोष में आप " शहीद " का अर्थ पढ़िये । जैसे कि - कुरआन । शहीद का अर्थ होता है - जो मुजाहिद ( पवित्र ? योद्धा ) काफिरों के विरुद्ध युद्ध में मारा जाए वो - शहीद । http://en.wikipedia.org/wiki/Shahid (kuran chapter-3, ayat 169-170) कहलाता है । जिसे मृत्यु के उपरांत इस्लामी स्वर्ग में 72 सुन्दर सुन्दर अप्सराओं का शरीर भोगने को मिलता है । ये स्वर्ग है । या चकला घर ? ये आप ही सोचिये । इस व्याख्या के आधार पर जो लोग " शहीद " हुये हैं । उनका उल्लेख आप नीचे पा सकते हैं ।
9-11 को अमरीका पर आकृमण करने वाले इस्लामी आंतकवादी शहीद हैं । 26-11 को मुंबई में मारे गए आतंकवादी शहीद हैं ( कुरआन के अनुसार ) ओसामा बिन लादेन भी शहीद है ।
इस्लामी साहित्य ये भी कहता है कि - यदि कोई मुजाहिद ( जिहादी सैनिक ) उसके मृत्यु उपरांत सुअर के साथ गाड दिया जाये । तो वह शहीद बनने से वंचित रहता है ।
क्या आप आपके राष्ट्र पुरुषों को इस्लामी चकला घर ( वेश्या घर ) में शहीद बना कर भेजना चाहते हैं ? यदि हाँ ! तो वो उनका घोर अपमान होगा । यदि आप राष्ट्र पुरुषों

का आदर करते हैं । तो इन सभ्य सुसंस्कृत शब्दों का उपयोग करें । शहीद नहीं - हुतात्मा कहिये । शहादत नही - वीरगति कहिये ।
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Love doesn’t ask - who r u ? Love only says - u r mine .
Love doesn’t ask - where r u from ? Love only says - u live in my Heart .
Love doesn’t ask - what to do ? Love only says - u make my Heart beat . 
Love doesn’t ask - why r u far away ? Love only says - u r always with me .
Love doesn’t ask - do you love me ? Love only says - I LOVE YOU .

By Manoj
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बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ ने कई बार स्वयं देश ही नहीं पूरे विश्व की सर्वश्रेस्ट जांच agency से प्रोडक्ट की जांच करवा चुकी है । सभी एजेंसियों ने माना ्कि - पतंजलि प्रोडक्ट सर्वश्रेस्ट और शुद्ध हैं ।
पर ये सरकारी टट्टू agency को पतंजलि के प्रोडक्ट में मिलावट नजर आती है । वैसे अभी तक सरकारी agency ने officilay ऐसा नहीं बोला है । पर मीडिया द्वारा भ्रामक न्यूज़ चलाया जा रहा है कि - पतंजलि के प्रोडक्ट में मिलावट । या हमे हैरानी भी नहीं होगी । अगर सरकार की agency ये बोले कि - पतंजलि के प्रोडक्ट में मिलावट है ।
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हर गलत बात का तगड़ा विरोध करना चाहिये । हम चुप रह जाते हैं । इसलिये ऐसे कुत्तों का मनोबल बढ़ता है । मित्रो ! चुप मत बैठो । यह स्टेटस हर वाल तक पहुँचाने में मदद करो । शेयर करो । टैग करो । यह हमारे सम्मान पर 

चोट है । जिसे हम बिलकुल नहीं सहेंगे ।
अक्षय कुमार की आगामी फिल्म - ओह माय गाड OH MY GOD .. विवादों में घिर गई है । लखनऊ में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में फिल्म पर रोक लगाने के लिए याचिका दाखिल की गई है । याचिका में कहा गया कि - फिल्म - ओह माय गाड OH MY GOD.. के एक दृश्य में अभिनेता परेश रावल को पवित्र गंगा जल में विहस्की मिलाकर आरती की थाली में थूकते दिखाया गया है । फिल्म में एक जगह रावल यह भी कहते हैं कि - एडस जैसी बीमारियां मंदिरों के कारण फैली हैं ।
नास्तिक होना मनुष्य का अधिकार है । पर नास्तिक होने के लिये किसी की भावनाओं का मजाक बनाना कतई सही नहीं ठहराया जा सकता ।.सनातन धर्म आपको छूट देता है कि - आप भगवान को मानें । या न मानें । मंदिर जायें । या न जायें । पर अगर ईश्वर को नहीं मानते । तो आपको यह अधिकार भी नहीं है कि - आप भक्तो के द्वारा किये जा रहे कर्मो को गलत सिद्ध करते फिरें । 

चार्वाक से बढ़कर कोई और नास्तिक नहीं हुआ । दुनियां में । पर उन्होंने भी अपने तर्क इस प्रकार दिए थे ।
1 जो प्रत्यक्ष है । वही प्रमाण है ।
2 आत्मा का देह से पृथक कोई अस्तित्व नहीं है ( चैतन्य विशिष्टः काय - A body with soul is consciousness )
3 मृत्य ही मोक्ष है ( मरणमेव अपवर्गः - Death is salvation )
4 न स्वर्ग है । न अंतिम मोक्ष । और न कोई शरीर के परे आत्मा । न चार वर्णों के कर्म व्यवस्था का कोई फल ही होता है ।
5 उन्होंने ईश्वर के अस्तित्व को इसलिये नकारा । क्योंकि उन्हें इसका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं दिखा ।
चार्वाक का यह कथन कितना तार्किक है कि - मुक्ति चाहे शरीर से हो । या दुख से । पूरी तरह से मरने के बाद ही संभव है । मतलब मृत्यु ही केवल मुक्तिदाता है । चार्वाक ईश्वर की कल्पना को एक अनावश्यक कल्पना मात्र मानते थे । कर्मकांड उनके लिये व्यर्थ उपकृम था । और स्वर्ग नरक पुरोहितों का 

ख्याली पुलाव । परलोक का कोई प्रमाण नहीं है । उनका कहना यही था । मगर इस महान विचारक को पीट पीट कर मार डाला गया । और वह भी युधिष्ठिर जैसे धर्मनिष्ठ और सत्यवादी के सामने । तो क्या हम आज के युग में भी इस फिल्म OH MY GOD के निर्देशक और कलाकारों को पीट पीट कर मार दें ? क्या कहते हैं आप ?
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There's so much more love in the world than there is hate . Our physical eyes don't see it, but it's there . It just needs to be harnessed  - Marianne Williamson 

इनसे महिलायें उत्तेजित हो सकती हैं


यूरोप के 1 मौलवी ने फतवा जारी कर मुस्लिम महिलाओं को ऐसे फलों और सब्जियों को छूने से मना किया है । जो पुरुषों के जननांग का आभास देते हैं । मौलवी ने महिलाओं को यौन विचारों से दूर रहने के तहत यह फतवा जारी किया है । इजिप्ट की 1 न्यूज वेव साईट ने बुधवार को उक्त मौलवी के फतवे का हवाला देते हुये यह जानकारी दी है । मौलवी ने किसी धार्मिक प्रकाशन में लिखे लेख में ऐसी बातें कही हैं ।
उक्त मौलवी का नाम नहीं बताया गया है । उसके अनुसार महिलाओं को केले और ककड़ी के पास भी नहीं जाना चाहिये ।.यदि महिलायें इन खाद्य पदार्थों को खाना चाहें । तो कोई तीसरा व्यक्ति । जो उनका सम्बन्धी पुरुष जैसे - उसका पति । या पिता हो 

। इन वस्तुओं को छोटे छोटे टुकड़ों में काट कर उन्हें दे ।
ऐसा फतवे में कहा है । उक्त मौलवी के अनुसार - केला और ककड़ी पुरुष जननांग की तरह दिखते हैं । और इसलिये महिलायें उत्तेजित हो सकती हैं । या उनके मन में सेक्स का विचार आ सकता है । उक्त मौलवी ने यह भी कहा है कि - महिलाओं को गाजर । तोरई जैसी सब्जियों से भी बचना चाहिये ।
( दैनिक जागरण - 8 दिसंबर 2011 पेज 9 )
यह फतवा दिनांक 30 नवम्बर 2011 को जिस मौलवी ने जारी किया था । उसका नाम - शेख यहरम अली     .. है । और यह फतवा मिस्र के जिस अखबार में छपा है । उसका अरबी में पूरा पेज दिया जा रहा है । ताकि मौलवियों की मानसिकता का अंदाजा लग सके ।
http://www.flickr.com/photos/sandiandsteve/6484765267/
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आधुनिक भारत में अंग्रेजों के समय से जो इतिहास पढाया जाता है । वह चन्द्रगुप्त मौर्य के वंश से आरम्भ होता है । उससे पूर्व के इतिहास को " प्रमाण रहित " कह कर नकार दिया जाता है । हमारे " देशी अंग्रेजों " को यदि सर जान मार्शल प्रमाणित नहीं करते । तो हमारे " बुद्धिजीवियों " को विश्वास ही नहीं होना था  कि - हडप्पा और मोइन जोदडो स्थल ईसा से लगभग 5000 वर्ष पूर्व के समय के हैं । और वहाँ पर ही विश्व की प्रथम सभ्यता ने जन्म लिया था ।
विदेशी इतिहासकारों के उल्लेख -  विश्व की प्राचीनतम् सिन्धु घाटी सभ्यता मोइन जोदडो के बारे में पाये गये उल्लेखों को सुलझाने के प्रयत्न अभी भी चल रहे हैं । जब पुरातत्व शास्त्रियों ने पिछली शताब्दी में मोइन जोदडो स्थल की खुदाई के अवशेषों का निरीक्षण किया था । तो उन्होंने देखा कि वहाँ की गलियों में नर कंकाल पडे थे । कई अस्थि पिंजर चित अवस्था में लेटे थे । और कई अस्थि पिंजरों ने एक दूसरे के हाथ इस तरह पकड रखे थे । मानों किसी विपत्ति नें उन्हें अचानक उस अवस्था में पहुँचा दिया था ।
उन नर कंकालों पर उसी प्रकार की रेडियो ऐक्टिविटी के चिह्न थे । जैसे कि जापानी नगर हिरोशिमा और

नागासाकी के कंकालों पर एटम बम विस्फोट के पश्चात देखे गये थे । मोइन जोदडो स्थल के अवशेषों पर नाईट्रिफिकेशन के जो चिह्न पाये गये थे । उसका कोई स्पष्ट कारण नहीं था । क्योंकि ऐसी अवस्था केवल अणु बम के विस्फोट के पश्चात ही हो सकती है ।
मोइन जोदडो की भौगोलिक स्थिति - मोइन जोदडो सिन्धु नदी के 2 टापुओं पर स्थित है । उसके चारों ओर 2 किमी के क्षेत्र में 3 प्रकार की तबाही देखी जा सकती है । जो मध्य केन्द्र से आरम्भ होकर बाहर की तरफ गोलाकार फैल गयी थी । पुरा्तत्व विशेषज्ञों ने पाया कि - मिट्टी चूने के बर्तनों के अवशेष किसी ऊष्णता के कारण पिघल कर एक दूसरे के साथ जुड गये थे । हजारों की संख्या में वहाँ पर पाये गये ढेरों को पुरातत्व विशेषज्ञों ने काले पत्थरों " ब्लैक स्टोंस " की संज्ञा दी । वैसी दशा किसी ज्वालामुखी से निकलने वाले लावे की राख के सूख जाने के कारण होती है । किन्तु मोइन 

जोदडो स्थल के आसपास कहीं भी कोई ज्वालामुखी की राख जमी हुयी नहीं पाई गयी । 
निष्कर्ष यही हो सकता है कि - किसी कारण अचानक ऊष्णता 2000 डिग्री तक पहुँची । जिसमें चीनी मिट्टी के पके हुये बर्तन भी पिघल गये । अगर ज्वालामुखी नहीं था । तो इस प्रकार की घटना अणु बम के विस्फोट पश्चात ही घटती है ।
महाभारत के आलेख - इतिहास मौन है । परन्तु महाभारत युद्ध में महा संहारक क्षमता वाले अस्त्र शस्त्रों और विमान रथों के साथ 1 एटमिक प्रकार के युद्ध का उल्लेख भी मिलता है । महाभारत में उल्लेख है कि - मय दानव के विमान रथ का परिवृत 12 क्यूबिट था । और उसमें 4 पहिये लगे थे । देव दानवों के इस युद्ध का वर्णन स्वरूप इतना विशाल है । जैसे कि हम आधुनिक अस्त्र शस्त्रों से लैस सैनाओं के मध्य परिकल्पना कर सकते 

हैं । इस युद्ध के वृतान्त से बहुत महत्व शाली जानकारी प्राप्त होती है । केवल संहारक शस्त्रों का ही प्रयोग नहीं । अपितु इन्द्र के वज्र अपने चक्रदार रिफलेक्टर के माध्यम से संहारक रूप में प्रकट होता है । उस अस्त्र को जब दाग़ा गया । तो 1 विशालकाय अग्नि पुंज की तरह उसने अपने लक्ष्य को निगल लिया था । वह विनाश कितना भयावह था । इसका अनुमान महाभारत के निम्न स्पष्ट वर्णन से लगाया जा सकता है
- अत्यन्त शक्तिशाली विमान से 1 शक्ति युक्त अस्त्र प्रक्षेपित किया गया । धुएँ के साथ अत्यन्त चमकदार ज्वाला । जिसकी चमक 10 000 सूर्यों के चमक के बराबर थी । का अत्यन्त भव्य स्तम्भ उठा । वह वज्र के समान अज्ञात अस्त्र साक्षात मृत्यु का भीमकाय दूत था । जिसने वृष्ण और अंधक के समस्त वंश को भस्म करके राख बना दिया । उनके शव इस प्रकार से जल गए थे कि - पहचानने योग्य नहीं थे । उनके बाल और नाखून अलग होकर गिर गए थे । बिना किसी प्रत्यक्ष कारण के बर्तन टूट गए थे । और पक्षी सफेद पड़ चुके थे । कुछ ही घण्टों में समस्त खाद्य पदार्थ संक्रमित होकर विषैले हो गए । उस अग्नि से बचने के लिए योद्धाओं ने स्वयं को अपने अस्त्र शस्त्रों सहित जल धाराओं में डुबा लिया । 
उपरोक्त वर्णन दृश्य रूप में हिरोशिमा और नागासाकी के परमाणु विस्फोट के दृश्य जैसा दृष्टिगत होता है ।

1 अन्य वृतान्त में श्रीकृष्ण अपने प्रतिदून्दी शल्व का आकाश में पीछा करते हैं । उसी समय आकाश में शल्व का विमान " शुभः " अदृश्य हो जाता है । उसको नष्ट करने के विचार से श्रीकृष्ण नें 1 ऐसा अस्त्र छोडा । जो आवाज के माध्यम से शत्रु को खोज कर उसे लक्ष्य कर सकता था । आजकल ऐसे मिसाइल को हीट सीकिंग और साउंड सीकरस कहते हैं । और आधुनिक सेनाओं द्वारा प्रयोग किये जाते हैं ।
राजस्थान से भी…प्राचीन भारत में परमाणु विस्फोट के अन्य और भी अनेक साक्ष्य मिलते हैं । राजस्थान में जोधपुर से पश्चिम दिशा में लगभग 10 मील की दूरी पर 3 वर्ग मील का 1 ऐसा क्षेत्र है । जहाँ पर रेडियो एक्टिव राख की मोटी सतह पाई जाती है । वैज्ञानिकों ने उसके पास 1 प्राचीन नगर को खोद निकाला है । जिसके समस्त भवन और लगभग 5 लाख निवासी आज से लगभग 8 000 से 12 000 साल पूर्व किसी विस्फोट के कारण नष्ट हो गए थे ।
लक्ष्मण रेखा प्रकार की अदृश्य इलेक्ट्रानिक फैंस तो कोठियों में आज कल पालतु जानवरों को सीमित रखने

के लिये प्रयोग की जातीं हैं । अपने आप खुलने और बन्द हो जाने वाले दरवाजे किसी भी माल में जाकर देखे जा सकते हैं । यह सभी चीजे पहले आशचर्य जनक थीं । परन्तु आज 1 आम बात बन चुकी हैं । मन की गति से चलने वाले रावण के पुष्पक विमान का प्रोटो टाईप भी उडान भरने के लिये चीन ने बना लिया है ।
निस्संदेह रामायण तथा महाभारत के ग्रंथकार 2 प्रथक प्रथक ऋषि थे । और आजकल की सेनाओं के साथ उनका कोई सम्बन्ध नहीं था । वह दोनो महा ऋषि थे । और किसी साइंटिफिक फिक्शन के थ्रिलर राइटर नहीं थे । उनके उल्लेखों में समानता इस बात की साक्षी है कि - तथ्य क्या है ? और साहित्यक कल्पना क्या होती है । कल्पना को भी विकसित होने के लिये किसी ठोस धरातल की आवश्यकता होती है ।
हमारे प्राचीन ग्रंथों में वर्णित बृह्मास्त्र, ।आग्नेय अस्त्र जैसे अस्त्र अवश्य ही परमाणु शक्ति से सम्पन्न थे । किन्तु हम स्वयं ही अपने प्राचीन ग्रंथों में वर्णित विवरणों को मिथक मानते हैं । और उनके आख्यान तथा उपाख्यानों को कपोल कल्पना । हमारा ऐसा मानना केवल हमें मिली दूषित शिक्षा का परिणाम है । जो कि अपने धर्म ग्रंथों के प्रति आस्था रखने वाले पूर्वाग्रह से युक्त । पाश्चात्य विद्वानों की देन है । पता नहीं हम कभी इस दूषित शिक्षा से मुक्त होकर अपनी शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षा प्राप्त कर भी पाएँगे या नहीं ?
खुद को भारतीय कहने वालो गर्व करो ।
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German Model, Actress, Singer Claudia Ciesla Announced her Desire to Embrace Sanatan Hindu Dharma - लो जी ! अब जर्मन की ये माडल भी सनातन धर्म की तरफ आकर्षित हो रही है । और इन्होंने भारत का रुख किया है । अपने और अपने परिवार को सनातन धर्म की दीक्षा के लिये । अगर आप भी अपने किसी मुस्लिम मित्र या साथी को हिन्दू बनाना चाहते हैं । तो जल्दी से यहाँ पर सम्पर्क करें । अपना नाम और फ़ोन और जिस मुस्लिम को हिन्दू धर्म में वापिस आना है । उसका नंबर इन बाक्स में डाल दें । हेल्प लाइन जल्दी ही ।
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भारत में गौ हत्या का सत्य-इतिहास - विकृत इतिहास पढ़कर हमारी धारणायें भी बधिर हो जाती हैं । स्वयं के लिए अपमान क्या है ? और सम्मान जनक क्या है ? इसे जानने का विवेक हम खो बैठते हैं । पिछले 35 वर्षों में गाँधी नेहरु का भारत में सीधा शासन रहा । जिसके दौरान हमें असत्य । हिंदु निंदक इतिहास का विष 

पिलाया गया । जो सबसे गंदी गाली इस विकृत इतिहास के माध्यम से हमें गाँधी नेहरु ने दी । वो ये कि - भारतवासी 1 000 वर्ष मुस्लिम शासकों के गुलाम रहे । इस गाली को हमारे देश बंधू पिछले अनेक वर्षों से झेल रहे हैं । जिसका परिणाम ये हुआ कि - हम ऐसी गाली खा खाकर हममें आज आत्म ग्लानि Lack of Self Confidence की भावना उत्पन्न हुई है । अच्छे बुरे की सुध बुध भी खो बैठे हैं । ये हिंदु निंदक नेहरु शासन द्वारा फैलाया गया विष । कैसे हमारी सोचने की शक्ति को नष्ट करता है । इसका 1 जीता जागता उदाहरण हम देखते हैं ।
स्वर्गीय राजीव दीक्षित को कौन नहीं जानता । उनके गौ रक्षा पर अनेक व्याख्यान हुए हैं । इस व्याख्यान में जो जानकारी बताई गयी है । दुर्भाग्य वश वो अर्ध सत्य है । श्री राजीव जी बताते है कि - भारत में गौ हत्या का आरंभ ब्रिटिश शासकों द्वारा शुरू हुआ । उससे पहले संपूर्ण भारत में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध था ।

ब्रिटिश राज आरंभ होने से पहले मुगल या मुस्लिम सत्ता में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध था । यह 1 आश्चर्यजनक विरोधाभास है । यह 1 जीवित इतिहास है कि - भारत में 10 000 से अधिक भव्य मंदिर इस्लामी शासन काल में ध्वस्त किये गये । इस प्रत्येक मंदिर को तोड़ने से पहले । इस्लामी आक्रामक गाय की हत्या करके मंदिर की पवित्रता भंग करते थे । फिर उन पुजारियों की हत्या करके सारे मंदिर को ध्वस्त करके उस वास्तु का रूपांतर मस्जिद में किया जाता था । श्री.राजीव दीक्षित ने जिस ब्रिटिश प्रमाण पत्रों का संदर्भा दिया है । उसमें स्पष्ट लिखा है कि - ब्रिटिश सत्ता भारत में आरंभ होने से पहले गौ हत्या पर संपूर्ण प्रतिबन्ध था ।
यह शत % सत्य है । किन्तु उससे भी बड़ा सत्य यह है कि - भारत में ब्रिटिश सत्ता आने से पूर्व ( इ.स. 1820

)  सारे भारत में से मुस्लिम सत्ता लगभग 150 वर्ष पहले नष्ट हो चुकी थी । ब्रिटिश सेनाओं को भारत पर विजय प्राप्त करने के लिए जितने भी भीषण युद्ध लड़ने पड़े । वह सारे 1 शक्तिशाली हिन्दू साम्राज्य से लड़ने पड़े । यह महत्वपूर्ण बात श्री । राजीव जी कहने में भूल गए । यह पराक्रमी हिन्दू साम्राज्य था । छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापन किया गया - हिन्दवी स्वराज्य । संपूर्ण उत्तर भारत ( इसमें आज का सारा पाकिस्तान और अफगानिस्तान का बहुत बड़ा भाग आता था ) मराठा और सिख जैसे हिन्दू साम्राज्यों की सत्ता में था । इन महा पराक्रमी हिन्दू साम्राज्यों के कारण भारत में अंग्रेजो से पहले समृद्धि और गौ हत्या पर संपूर्ण प्रतिबन्ध था । भारतीयों की इस पराक्रमी इतिहास को हमें स्वाभिमान पूर्वक स्वीकारना चाहिए । इन शक्तिशाली हिन्दू शासन के चलते ही भारत में स्त्रियों को वेश्या बनाना अंग्रेज़ आने से पहले नहीं था ।
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जिस आसुरी इच्छा से इस्लामी आक्रामकों ने - देव । धर्मं । स्त्री । और गौ माता का नाश किया । वहाँ भारत

के इतिहास का सबसे भयानक काला अध्याय है । यदि छत्रपति शिवाजी ने इस्लामी सत्ता को आवाहन न दिया होता ( शिवाजी महाराज की मृत्य के उपरांत मराठा सेनाओ ने 1718 में दिल्ली जीत कर मुगल सत्ता उत्तर भारत से नष्ट कर दी । इतना ही नहीं । इस घटना के 2 वर्ष उपरांत हिन्दू मराठा सेनापति रघुनाथ राव पेशवा ने लाहौर । पेशावर से अटक ( जो अफगानिस्तान का द्वार है ) तक का भारत इस्लामी सत्ता से मुक्त करके लाल किले पर भगवा फहराया ) तो आज भारत अपनी संस्कृति समेत नष्ट हो चुका होता ( कभी ना भुलो 350 वर्ष पुर्व कवि भुषण की पंक्तियां - काशी हु की कला जाती । मथुरा मस्जिद बन जाती । न होते शेर शिवाजी । तो सुन्नत होती सबकी ) शुरवीर हिन्दू सिख महाराजा रंणजीत सिंह ने तो काबुल कंधार पर विजय प्राप्त कर 800 वर्ष की मुस्लिम सत्ता को उखाड फेका ।
यदि ये 2 पराक्रमी हिन्दू सत्ता न होती । तो समस्त भारत में नाम के लिए भी कोई भारतीय / हिन्दू न बचता 

। न कोई गौ माता बचती । इस सत्य का जीता जागता प्रमाण है । कवि भूषण की लिखी हुई शिव बावनी ।
तेज तमा अंस पर । कान्हा जिमि कंस पर । त्यों म्लेंच्छ बंस पर । शेर शिवराज है ।
इसका अर्थ है - जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण कंस पर आरूढ़ होकर उसका वध करते हैं । उसी प्रकार शेर शिवराज सारे मलेच्छ सुल्तानों के वंश का अकेले संहार करते हैं ।
हमें इस ऐतिहासिक सत्य को अब स्वीकारना चाहिये कि - भारत में हिन्दू सत्ता होने के कारण गौ हत्या अंग्रेज आने से पहले भारत में बंद हो चुकी थी । और कसाईयों को गौ रक्षा का प्रमाण पत्र देना अब हमें बंद करना चाहिये ।
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Boy - Tell me a secret that you have never told anyone before..♥
Girl - You wouldn't want to know.♥
Boy - Yeah I do. If you tell me yours, I'll tell you mine. ♥

Girl: - I would rather not..♥ Boy - Please ?...♥ Girl - I LOVE YOU ♥♥
The boy smiled and said - That was mine too.. ♥ Piyuesh
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अगर आपके 1 कमेंट या पोस्ट से 1 साई भक्त मुर्दे की पूजा छोडकर भगवान श्रीकृष्ण । श्री राम की और लौटता है । तो आप पुण्य के भागी हैं ।
Evidence : http://hindurashtra.wordpress.com/2012/08/13/374/
http://hindurashtra.wordpress.com/?s=sai
साई बाबा की मार्केटिंग करने वालों ने या उनके एजेंटों ने या सीधे शब्दो में कहें । तो उनके दलालों ने काफी

कुछ लिख रखा है । साई बाबा की चमत्कारिक काल्पनिक कहानियों व गपोड़ों को लेकर बड़ी बड़ी किताबे रच डाली हैं । स्तुति । मंत्र । चालीसा । आरती । भजन । वृत । कथा । सब कुछ बना डाला । साई को अवतार बनाकर । भगवान बनाकर । और कही कही भगवान से भी बड़ा बना डाला है । किसी भी दलाल ने आज तक ये बताने का श्रम नहीं किया कि - साई किस आधार पर भगवान या भगवान का अवतार है ? जब भगवान का अवतार है । तो हिन्दू धर्म ग्रंथों के आधार पर ही तो तय होगा न कि - अवतार है । या नहीं ? भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कही गयी गीता में श्रीकृष्ण ने अवतार लेने के कारण और कर्मो का वर्णन करते हुये लिखा है कि -
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम । धर्म संस्थापनार्थाय सम्भवामि यूगे यूगे ।

अर्थात - साधू पुरुषों के उद्धार के लिये । पाप कर्म करने वालों का विनाश करने के लिये । और धर्म की स्थापना के लिये । मैं युग युग में प्रकट हुआ करता हूँ ।
श्रीकृष्ण द्वारा कहे गये इस श्लोक के आधार पर देखते हैं कि - साई कितने पानी में हैं ?
1 परित्राणाय साधूनां ( साधु पुरुषो के उद्धार के लिए ) - यदि ये कटोरे वाला साई भगवान का अवतार था । तो इसने कौन से सज्जनों का उद्धार किया था ? जबकि इसके पूरे जीवन काल में ये शिरडी नाम के 50-100 घरो की बाड़ी ( गाँव ) से बाहर भी न निकला था । और इसके मरने के बाद उस गाँव के लगभग आधे लोग भी बेचारे रोग आदि प्रकोपों से पीड़ित होकर मरे थे । यानि विश्व भर के सज्जन तो क्या अपने गाँव के ही सज्जनों का उद्धार नहीं कर पाया था । उस समय ब्रिटिश शासन था । बेचारे बेबस भारतीय अंग्रेज़ों के जूते । कोड़े । डंडे । लातें खाते गए । और साई महाराज शिरडी मे बैठकर छोटे मोटे जादू दिखाते रहे । किसी का दुख दूर नहीं । बल्कि खुद का भी नहीं कर पाये । आधे से 

ज्यादा जीवन रोग ग्रस्त होकर व्यतीत किया । और अंत मे भी बीमारी से ही मरे ।
2 विनाशाय च दुष्कृताम ( दुष्टो के विनाश के लिए ) - साई बाबा के समय में दुष्ट कर्म करने वाले अंग्रेज़ थे । जो भारतीयों का शोषण करते थे । जूतियो के नीचे पीसते थे । दूसरे गौ हत्यारे थे । तीसरे जो किसी न किसी तरह पाप किया करते थे । साई बाबा ने न तो किसी अंग्रेज़ के कंकड़ या पत्थर भी मारा । न ही किसी गौ हत्यारे के चुटकी भी काटी । न ही किसी भी पाप करने वाले को डांटा फटकारा । अरे बाबा तो चमत्कारी थे न । पर अफसोस ! इनके चमत्कारो से 1भी दुष्ट अंग्रेज़ को दस्त न लगे । किसी भी पापी का पेट खराब न हुआ । यानि दुष्टो का विनाश तो दूर की बात । दुष्टो के आस पास भी न फटके ।
3 धर्मसंस्थापनार्थाय ( धर्म की स्थापना के लिए ) - जब साई ने न तो सज्जनों का उद्धार ही किया । और न ही दुष्टो को दंड ही दिया । तो धर्म की स्थापना का तो सवाल ही पैदा नहीं होता । क्योंकि सज्जनों के उद्धार । और दुष्टो के संहार के बिना धर्म स्थापना नहीं हुआ करती । ये आदमी मात्र 1 छोटे से गाँव मे ही जादू टोने दिखाता रहा । पूरे जीवन भर । मस्जिद के खण्डहर में जाने कौन से गड़े मुर्दे को पूजता रहा ।  मतलब इसने भीख माँगने । बाजीगरी दिखाने । निठल्ले बैठकर हिन्दुओं को इस्लाम की ओर ले जाने के अलावा , उन्हें मूर्ख बनाने के अलावा कोई काम नहीं किया । कोई भी धार्मिक । राजनैतिक । या सामाजिक उपलब्धि नहीं ।

जब भगवान अवतार लेते हैं । तो सम्पूर्ण पृथ्वी उनके यश से उनकी गाथाओ से अलंकृत हो जाती है । उनके जीवनकाल मे ही उनका यश शिखर पर होता है । और इस साई को इसके जीवन काल मे शिरडी और आस पास के इलाके के अलावा और कोई जानता ही नहीं था । या यूँ कहें । लगभग 100-200 सालों तक इसे सिर्फ शिरडी क्षेत्र के ही लोग जानते थे । आजकल की जो नयी नस्ल साई राम साई राम करती रहती है । वो अपने माता पिता से पुछे कि - आज से 15-20 वर्ष पहले तक उन्होने साई का नाम भी सुना था क्या ? साई कोई कीट था । पतंग था । या कोई जन्तु । किसी ने भी नहीं सुना था ।
भगवान श्रीकृष्ण के वचनो के आधार पर ये सिद्ध हुआ कि - साई कोई भगवान या अवतार नहीं था । इसे पढ़कर भी जो साई को भगवान या अवतार मानेगा । या ऐसा मानकर साई की पूजा करेगा । वो सीधे सीधे भगवान श्रीकृष्ण का निरादर । और श्रीकृष्ण की वाणी का अपमान कर रहा है । श्रीकृष्ण का निरादर एवं उनकी वाणी के अपमान का मतलब है । सीधे सीधे ईश द्रोह । तो साई भक्तो निर्णय कर लो । तुम्हें श्रीकृष्ण का आश्रय चाहिए । या साई के चोले मे घुसकर अपना पतन की ओर बढ़ोगे । जय जय 

श्री राम ।
जिसमें थोड़ी सी भी अक्ल होगी । उसे समझ मे आएगा कि - ये लेख धार्मिक तौर पर स्पष्ट रूप से सिद्ध कर रहा है कि - साई कोई भगवान या अवतार नहीं था । अगले लेख में सिद्ध करेंगे कि - साई कोई संत या साधु या महापुरुष भी नहीं था । सभी धर्म प्रेमी हिन्दू भाइयो से निवेदन है कि - इस लेख को अपने नाम से कोई भी कहीं भी पोस्ट या कमेंट के रूप में कर सकता है । जय श्री राम
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आप सबसे अधिक किससे प्रेम करते हैं ?


The story behind this picture - For the past 6 years, a German shepherd called Capitán has slept next to the grave of his owner every night at 6pm. His owner, Miguel Guzmán died in 2006. Capitán, the dog, disappeared while the family attended the fueral services. A week later reatives of Guzmán were visiting the cemetery when they were astounded to find the dog next to the owner's grave. The cemetery director says that the dog comes around each night at 6pm, and has done so for the past 6 years !
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Remember to be respectful of others when you are on the internet. Whether you are writing an email or chatting online or writing on someone's Facebook or My Space page, remember to be kind, as you would if you were speaking to them in person - Be Polite Online
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Srimad Bhagwad Gita Simplified - Why do you worry without cause ? Whom do you fear without reason ? Who can kill you ? The soul is neither born, nor does it die.

Whatever happened, happened for the good . whatever is happening, is happening for the good .whatever will happen, will also happen for the good only. You need not have any regrets for the past.  You need not worry for the future .
The present is happening..What did you lose that you cry about ? What did you bring with you, which you think you have lost ? What did you produce, which you think got destroyed ? You did not bring anything, whatever you have, you received from here. Whatever you have given, you have given only here.

Whatever you took, you took from God. Whatever you gave, you gave to Him.
You came empty handed, you will leave empty handed. What is yours today, belonged to someone else yesterday, and will belong to someone else the day after tomorrow. You are mistakenly enjoying the thought that this is yours. It is this false happiness that is the cause of your sorrows. Change is the law of the universe. What you think of as death,is indeed life. In one instance you can be a millionaire, and in the other instance you can be steeped in poverty. 
Yours and mine, big & small erase these ideas from your mind.Then everything is yours and you 

belong to everyone.This body is not yours,neither are you of the body.The body is made of fire, water, air, earth andether, and will disappear into these elements.
But the soul is permanent - so who are you ? Dedicate your being to God.
He is the one to be ultimately relied upon. Those who know of his support are foreverfree from fear, worry and sorrow. Whatever you do, do it as a dedication to God. This will bring you the tremendous experience of joy and life-freedom forever.
पार्थ ! तुम व्यर्थ चिंता क्यों करते हो ? तुम बिन कारण से क्यों डरते हो ? कौन तुम्हें मार सकता है ? आत्मा ना पैदा होती है । और ना मरती है । जो कुछ भी हुआ । अच्छे के लिये हुआ । 

जो कुछ हो रहा है । अच्छे के लिये हो रहा है । जो भी होगा । केवल अच्छे के लिये । इसके अलावा कुछ नहीं होगा । तुम अतीत के लिए कोई पछतावा मत करो । तुम्हे भविष्य के लिए चिंता करने की भी जरूरत नहीं ।
वर्तमान चल रहा है । तुमने क्या खोया । जिसके लिए तुम रो रहे हो ? तुम क्या अपने साथ लाये थे । जो तुमको लगता है कि - तुमने खो दिया है ? तुमने क्या बनाया है कि - तुमको लगता है कि मिटा । कौन तबाह ? तुम कुछ भी । तुम जो भी हो । वो आपको यहाँ से प्राप्त हुआ है । आप साथ नहीं लाये । आपको जो भी दिया है । आप केवल यहाँ देखते है ।

आपने जो भी ले लिया । भगवान से लिया । जो भी तुम्हें दिया । तुम्हें उसने दिया । खाली हाथ आये । और खाली हाथ चले । जो आज तुम्हारा है । कल और किसी का था । परसों किसी और का होगा । इसलिये जो कुछ भी तुम करते हो । उसे भगवान के अर्पण करते चलो ।
तुम गलत सोचते हो कि - ये सब तुम्हारा है । जिसका तुम आनंद ले रहे हो । यह झूठी खुशी है जो कि अपने

दुख का कारण है । परिवर्तन बृह्मांड का नियम है । जो तुम्हें मृत्यु लगती है । वास्तव में वही जीवन है ।
1 पल में तुम 1 धनवान हो सकते हो । और अन्य उदाहरण में तुम गरीबी में डूब सकते हो ।
तेरा और मेरा । इन छोटी छोटी बातों को अपने दिमाग से मिटा दो । फिर सब कुछ तुम्हारा है । और तुम सबके । न यह शरीर तुम्हारा है ।और न तुम शरीर के । यह - पृथ्वी । आकाश । जल । वायु । और अग्नि से बना है । और अंत में इन्ही तत्वों में यह गायब हो जाएगा । लेकिन आत्मा स्थायी है - तो तुम कौन हो ? अपने आपको परमेश्वर को समर्पित करते चलो । वह पर अंततः होना एक है । जहाँ लोग - भय । चिंता और दुख से हमेशा के लिए मुक्त हैं । तुम जो भी करो । वह भगवान के लिए 1 समर्पण के रूप में करो । यह तुमको अपार ख़ुशी और मोह माया से बंधन से मुक्त जीवन देगा ।
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FOODS FOR THYROID HEALTH - Foods like seaweeds, coconut, spirulina ,codliver oil and various types of seafood, and foods that are grown in iodine-rich soil are useful for maintaining a fair level of iodine in the body. This ensures that iodine is available for extraction from the blood, stomach lining and the salivary glands whenever the need arises
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भगवान को भोग लगाने से पहले - क्या आप ऐसी मिठाई भगवान को अर्पण करोगे । जो शाकाहारी न हो । श्रीकृष्ण हर गौ को अपनी माता समझते थे । अपना बच्चा समझते थे । गौ में 33 कोटि देवता निवास करते हैं । जहाँ भगवान का निवास हो । ऐसी गौ माता । बैल । बछड़ा । इनकी आंत का प्रयोग करके ये चाँदी का वर्क बनता है । क्या हम हमारे ही बच्चो की माँ की आंत के प्रयोग से बना कोई भी मिष्ठान खा सकते है ? तो हमारे भगवान कैसे खायें ? क्या चांदी के वर्क वाली मिठाई ही स्वादिष्ट होती है ? अगर आप शुद्ध शाकाहारी हैं । तो कृपया ऐसी मिठाई को त्यागे । जिस पर चांदी का वर्क लिपटा है । अगर आप शाकाहारी हैं । तो अपने भगवान को भी रहने दें । कुछ लोग होते हैं । जो चांदी के वर्क की मिठाई को अपना HIGH STATUS समझते हैं । पर ये गलत है । कोई भी मिठाई चांदी वर्क लगाने से उच्च नहीं होती । मिठाई अगर शुद्ध हो । तो वो उच्च प्रति की मानी जाती है ।

और भगवान भी उसी को स्वीकार करते हैं । शाकाहार 1 उत्तम आहार है ।
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Just as God created the sun  the earth  the moon  the electricity  the atmosphere in the previous cycles . so has He done in the present and so will He do in the future  - RIG VEDA 10: 190
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दोस्तो ! याद रखना क्रांतिकारी मंगल पांडे को । जिसने आजादी की पहली गोली गौ माता की रक्षा के लिए चलाई थी । और अंग्रेज़ मेजर हयूसन को उड़ा दिया था । और फिर उनको फांसी हुई । हमारे क्रांतिवीर गौ माता के रक्षा के लिए फांसी पर चढ़े हैं । और आप गौ माता की रक्षा के लिए इस विदेशी कंपनी nestle से समान खरीदना बंद नहीं कर सकते ? याद रखो । ये वही विदेशी कंपनी nestle है । जो अपनी चाकलेट kitkat मे गाय के बछड़े के 

मांस का रस मिलती है । मैगी खाने वालों को चेतावनी - गाय का मांस बेचने वाली इस कंपनी की मैगी खाना छोड़ दो । नहीं तो खुद को हिन्दू कहना छोड़ दो । और पूरे ही मुल्ला बन जाओ । अगर हम maggi खरीदते हैं । और ये तर्क देते हैं कि - ये शाकाहारी है । non veg वाली नहीं । तो ये न भूलें कि इसमें भी हमारा ही भुगतान किया गया धन काम लिया गया है ।
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कभी कभी हमारे जीवन में संघर्ष ही वो चीज होती है । जिसकी हमें सचमुच आवश्यकता होती है । यदि हम बिना किसी struggle के सब कुछ पाने लगे । तो हम भी 1 अपंग के सामान हो जायेंगे । बिना परिश्रम और संघर्ष के हम कभी उतने मजबूत नहीं बन

सकते । जितना हमारी क्षमता है । इसलिए जीवन में आने वाले कठिन पलों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखिये । वो आपको कुछ ऐसा सिखा जायंगे । जो आपकी ज़िन्दगी की उड़ान को possible बना पायेंगे ।
1 बार 1 आदमी को अपने garden में टहलते हुए किसी टहनी से लटकता हुआ 1 तितली का कोकून दिखाई पड़ा । अब हर रोज़ वो आदमी उसे देखने लगा । और 1 दिन उसने notice किया कि - उस कोकून में 1 छोटा सा छेद बन गया है । उस दिन वो वहीं बैठ गया । और घंटो उसे देखता रहा । उसने देखा कि - तितली उस खोल से बाहर निकलने की बहुत कोशिश कर रही है । पर बहुत देर तक प्रयास करने के बाद भी वो उस छेद से नहीं निकल पायी । और फिर वो बिलकुल शांत हो गयी । मानो उसने हार मान ली हो ।
इसलिए उस आदमी ने निश्चय किया कि - वो उस तितली की मदद करेगा । उसने 1 कैंची उठायी । और

कोकून की opening को इतना बड़ा कर दिया कि - वो तितली आसानी से बाहर निकल सके । और यही हुआ । तितली बिना किसी और संघर्ष के आसानी से बाहर निकल आई । पर उसका शरीर सूजा हुआ था । और पंख सूखे हुए थे ।
वो आदमी तितली को ये सोच कर देखता रहा कि - वो किसी भी वक़्त अपने पंख फैला कर उड़ने लगेगी । पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ । इसके उलट बेचारी तितली कभी उड़ ही नहीं पाई । और उसे अपनी बाकी की ज़िन्दगी इधर उधर घिसटते हुए बितानी पड़ी ।
वो आदमी अपनी दया और जल्दबाजी में ये नहीं समझ पाया कि - दरअसल कोकून से निकलने की प्रक्रिया को प्रकृति ने इतना कठिन इसलिए बनाया है । ताकि ऐसा करने से तितली के शरीर में मौजूद तरल उसके पंखों में पहुँच सकें । और वो छेद से बाहर निकलते ही उड़ सके ।
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success is not the key to happiness but happiness is the key to success
प्रसन्न रहना ही सफल जीवन का राज़ है । ईश्वर ने मनुष्य को बहुत सारी खूबियाँ और अच्छाईयां दी हैं । मनुष्य वो प्राणी है । जिसके अन्दर सोचने समझने की अपार क्षमता है । जो जीवन को बस यूँ ही जीना या व्यर्थ करना नहीं चाहता । हर व्यक्ति के अन्दर 1 बहुत ही प्रबल इच्छा होती है - सफल होने की । कुछ कर

दिखाने की । और अपनी 1 पहचान पाने की । कुछ लोग अपनी इस इच्छा को दिन पर दिन बढ़ाते हैं । और कुछ लोग समाज या परिश्रम के डर से इसे दबा देते हैं । पर अपने आपसे पूछ कर देखिये कि - कौन ऐसा जीवन जीना नहीं चाहता । जिसमे लोग आपसे प्रेम करें । और आपको पहचानें । सफलता के कई सारे कारण होते हैं । जैसे - दृण निश्चय । मेहनत करना । सपने देखना । और उन्हें पूर्ण करने की दिशा में कार्य करना । सच्चाई । ईमानदारी । जोखिम उठाने की क्षमता इत्यादि ।
पर सफलता का 1 ऐसा कारक भी है । जिसे हम अक्सर नज़रंदाज़ कर देते हैं । और वो है - स्वयं से प्रेम करना । अपने आपसे प्रेम करना । और अपना आदर करना । सफल व्यक्तियों का 1 बहुत ही प्रबल गुण होता है ।
कभी आराम से बैठ कर सोचिये  - आप सबसे अधिक किससे प्रेम करते हैं ? whom do you love most ? ये बात अगर आप किसी से पूछें । तो आम तौर पर जवाब आयेगा my parents  my children  my spouse etc etc जितने लोग । उतने जवाब । अगर आप गहराई से सोचें । तो इस प्रश्न का आपको 1 ऐसा उत्तर मिलेगा । जिसे आप मुश्किल से ही accept कर पायेंगे । और वो जवाब है - अपने

आपसे । जी हाँ ! इस दुनिया में सबसे अधिक प्रेम आप स्वयं से ही करते हैं । अगर देखा जाये । तो हर छोटे से छोटा औए बड़े से बड़ा काम हम अपनी ख़ुशी के लिए ही तो करते है ? चाहे वो विवाह के बंधन में बंधना हो । कोई नौकरी करना हो । माँ बनना हो । किसी की मदद करना हो । किसी को दुखी करना हो । कुछ भी । हाँ ! अंतर सिर्फ ख़ुशी पाने के स्रोत में होता है । कुछ को दूसरों को ख़ुशी देकर सुख मिलता है । और कुछ को दूसरों के कष्ट से । महात्मा गाँधी । मदर टेरेसा । और दुनिया के कई समाज सुधारक । क्या इन्होनें अपनी ख़ुशी के बारे में नहीं सोचा ? निःसंदेह सोचा । ये वे लोग थे । जिन्हें दूसरों को प्रसन्न देख कर ख़ुशी मिलती थी । कुछ लोग स्वयं से प्रेम करने को अनुचित समझते हैं । क्योंकि लोगों के मन में अक्सर ये धारणा रहती है कि - जो व्यक्ति स्वयं से प्रेम करता है । वो selfish होता है । और दूसरों से प्रेम कर ही नहीं सकता । तो इसका उत्तर ये है कि - अपने आपसे प्रेम करना कभी ग़लत हो

ही नहीं सकता । क्योंकि जो व्यक्ति अपने आपसे प्रेम नहीं करता । वो किसी और से सच्चा प्रेम कर ही नहीं सकता । जो अपने आपसे संतुष्ट नहीं । वो किसी और को संतुष्ट कैसे रख सकता है ?
unless you fill yourself up first you will have nothing to give to anybody
अपने आपसे प्रेम करने का अर्थ है - स्वयं को निखारना । अपने अन्दर की अच्छाईयों को खोजना । अपने लिए सम्मान प्राप्त करना । अपना self statement positive रखना । अपने आपको प्रेरित करते रहना । और अपने साथ हुई हर अच्छी बुरी घटना की जिम्मेदारी खुद पर लेना । ये हमेशा याद रखिये कि - आप दूसरों को प्रेम और सम्मान तभी बाँट पाएंगे । जब आपके पास वो वस्तु प्रचुर मात्र में

होगी ।.स्वयं से प्रेम करना उतना ही स्वाभाविक है । जिंतना कि सांस लेना । Bible में कहा भी गया है कि - हमें दूसरों से भी उतना ही प्रेम करना चाहिये । जितना हम स्वयं से करते हैं । परन्तु कभी कभी हम अपने आपसे प्रेम करना भूल जाते हैं । मशहूर psychologist Sigmund Freud ने मनुष्य के अन्दर 2 प्रकार की instinct का ज़िक्र किया है - 1 constructive 2  distructive. कुछ लोग अपनी भावनाओं का प्रदर्शन constructive तरीके से करते हैं । उन लोगों को अच्छे कार्य करके प्रसन्नता मिलती है । और कुछ लोगों को विनाश करके और दूसरों को तकलीफ पहुंचा कर । अगर आप कोई भी distructive कार्य कर रहे हैं । अपने आपको उदास बनाये हुए हैं । और अपने जीवन से निराश हैं । तो आप स्वयं से प्रेम नहीं करते । जो व्यक्ति अपने आपसे प्रेम नहीं करता । वो दूसरों को तो प्रेम दे ही नहीं सकता । क्योंकि किसी भी भाव को जब तक आप अपने ऊपर अजमा कर नहीं देखेंगे । उसका स्वाद खुद नहीं चखेंगे । तब तक दूसरों के सामने उसे बेहतर बना कर कैसे पेश करेंगे । स्वयं से प्रेम करने का अर्थ " मैं " से नहीं है

। बल्कि इसका अर्थ है । अपनी अच्छाइयों को पहचान कर उसे बाहर निकालना । और सही अर्थ में अपने आपको grow करना । मनो चिकित्सा में भी अपने जीवन से निराश और depressed patients के उपचार के लिए उन्हें अपने जीवन का उद्देश्य ढूँढ़ने के लिए । अर्थ हीनता को दूर करने के लिए कहा जाता है । ज़रा सोचिये कि - वो कौन सी मनःस्थिति होती होगी । जिसमें मनुष्य आत्म हत्या करने की ठान लेता है ? ऐसी स्थिति केवल और केवल तभी उत्पन्न होती है । जब मनुष्य का स्वयं से कोई लगाव नहीं रह जाता । वह किसी वजह से अपने आपसे घृणा करने लगता है । और अपने आपको दंड देता है । तो सोचिये कि - अपने आपसे प्रेम करना कितना ज़रूरी है । क्योंकि जिस दिन आप स्वयं से प्रेम करना छोड़ देंगे । उस दिन आपके जीवन का अस्तित्व भी नहीं रहेगा । क्योंकि it is impossible that one should love god but not love oneself क्योंकि अपने जीवन की शुरुआत भी आपसे ही है । और अंत भी आपसे । इसलिए ईश्वर से हमेशा प्रार्थना करनी चाहिए कि - वो हमें ऐसे कार्य करने की शक्ति दे । जिससे हम स्वयं का आदर कर पाएं । कहा भी गया है कि - हमको मन की शक्ति देना । मन विजय करें । दूसरों के जय से पहले । खुद को जय करें ।
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कुछ कड़वा बोलने से पहले याद रखें - भला बुरा कहने के बाद कुछ भी करके अपने शब्द वापस नहीं लिए जा सकते । हाँ ! आप उस व्यक्ति से जाकर क्षमा ज़रूर मांग सकते हैं । और मांगनी भी चाहिए । पर human

nature कुछ ऐसा होता है कि - कुछ भी कर लीजिये । इंसान कहीं ना कहीं hurt हो ही जाता है । जब आप किसी को बुरा कहते हैं । तो वह उसे कष्ट पहुँचाने के लिए होता है । पर बाद में वो आप ही को अधिक कष्ट देता है । खुद को कष्ट देने से क्या लाभ ? इससे अच्छा तो है कि - चुप रहा जाये ।
1 बार 1 किसान ने अपने पडोसी को भला बुरा कह दिया । पर जब बाद में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ । तो वह 1 संत के पास गया । उसने संत से अपने शब्द वापस लेने का उपाय पूछा ।
संत ने किसान से कहा - तुम खूब सारे पंख इकठ्ठा कर लो । और उन्हें शहर के बीचो बीच जाकर रख दो । किसान ने ऐसा ही किया । और फिर संत के पास पहुँच गया ।

तब संत ने कहा - अब जाओ । और उन पंखों को इकठ्ठा करके वापस ले आओ ।
किसान वापस गया । पर तब तक सारे पंख हवा से इधर उधर उड़ चुके थे । और किसान खाली हाथ संत के पास पहुँचा । तब संत ने उससे कहा - ठीक ऐसा ही तुम्हारे द्वारा कहे गए शब्दों के साथ होता है । तुम आसानी से इन्हें अपने मुख से निकाल तो सकते हो । पर चाह कर भी वापस नहीं ले सकते । इस कहानी से क्या सीख मिलती है ?
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New version of -  हर 1 फ़्रेंड जरूरी होता है ।
चाय को जैसे गरम पीना होता है । वैसे हर 1 फ़्रेंड कमीना होता है ।
कोई साला madam से शिकायत लगाये । कोई साला  homework की notebook चुराये । 

कोई जो  तुम्हारा lunch खा जाये । कोई जो gf / bf के सामने बैंड बजाये । 
जैसे हर 1 नाग जहरीला होता है । वैसे हर 1 फ़्रेंड कमीना होता है ।
What say Guys - रिश्ता वही । सोच नयी । Dedicated to all my Stupid N Craziest Frnds..
Piyuesh
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It is not the question of whose mistake it is in a relationship; it is a question of whose life ! You cannot get your life right by convincing the world that it is wrong . You can neither get your life right by blaming others . It does not matter who is right or who is wrong . What really matters is that you got to get your life right . So  YouTurn instead of expecting the world to turn . Instead of accepting yourself as you are and expecting the world to change, accept the world as it is and you start changing; atleast change your approach towards the world . Let life be beautiful " because of the world " Also let life be beautiful " inspite of the world - Spirited Butterfly