18 नवंबर 2012

पहले मैं पिता था पर अब बादल हूँ ?


जीवन और मृत्यु की वास्तविकता क्या है ? इस संबंध में मि0 कीथ के विचार जो उन्होने अपनी पुस्तक “ Science The Universe And God में व्यक्त किए हैं । में उन्होंने कहा कि - सच /वास्तविकता यह है कि हम इस Universe के 1 हिस्से हैं । लाखों अरबों एटम । जिससे हम बने ? ये Atom  तब किसी और कृम/तरीके में थे । हमारे  वर्तमान अस्तित्व में किसी और तरह के कृम में हैं ? पर हैं - Atom ही से बने ? Object बस्तु का अंतर है । पहले  इन्ही एटमों से कोई अन्य Object बना था । जैसे पेड़ । चट्टान । धातु इत्यादि । अब इनसे हम बने हैं । हो सकता है ? कि हम जिस जमीन /चट्टान पर खड़े हैं /रहते हैं ।  पहले कभी इन्हीं एटमों से बनी हो । बाद में उनमे से कुछ एटमों से हम लोग बन गए ? हो सकता है कि उससे भी पहले बे ही एटम हवा में तैर रहे हों । बादल के रूप में । जब  तापकृम और बायु दाब अधिक रहा हो । तो कभी ये ही Atom  दैत्याकार तारे । नीहारिकाओं आदि के रूप में रहे होंगे । और जब तापकृम । दवाव आदि हद से ज्यादा बढ़ गया होगा । तो ये ही एटम इन तारों की मृत्यु भी बने होंगे । अर्थात तारे टूट बिखर  गए होंगे । यह जानना कितना रोमांचक है कि जिन एटमों से हम बने हैं । बे  हमारे जन्म से पूर्व न जाने

कितने रूपों में समाहित रहे होंगे । लगता है कि - हम मरते है । पर मरते नहीं । केवल एटमों की रिशफ़्लिंग है । यह जानना कितना अच्छा लगता है । जैसा कि दुनियाँ के ज्यादा से ज्यादा वैज्ञानिक इस पर अपनी सहमति रखते है कि जिस क्षण इस UNIVERSE की उत्पत्ति हुई । ठीक उस क्षण से पहले तक यह सम्पूर्ण यूनीवर्स / बृह्मांड केवल 1 एटम के अंदर समाहित था - ATOM । हाँ यदि कुछ और था । तो केवल ENERGY । आपस में जुड़ी हुई । उस समय कोई अन्य Atom नहीं था । था तो बस 1 केवल 1 - Atom ।
जैसे जैसे 1 मात्र एटम/ऊर्जा विस्तृत होती गयी । और ठंडी होती गयी । तो इसका स्थान इतना लंबा हो  गया कि प्रकाश को भी 1 छोर से दूसरे छोर तक जाने में बिलियन प्रकाश वर्ष लग जाए । फिर अरबों खरबों गुना सभी Atom जुडते गए । और इनका संबंध आपस में होता गया । होता गया । इस तरह से  हम सभी प्राणी ( चेतन ) ही नहीं । सभी जड़  बस्तुएँ 1 रहस्यमय ढंग से आपस में जुड़ी हैं । और इस प्रकार हम इस UNIVERSE के 1 अभिन्न अंग हैं । आखिर हम सब क्या हैं ? हम सब रिसाइकिल्ड एटमों का 1 समूह मात्र हैं । जो इस समय 1 विशेष रूप में इस तरह के कृम में प्रवंधित ( मेनेज्ड ) हैं  कि हम 1 चेतन एंटिटी के रूप/अस्तित्व में हैं । अब विचारणीय है कि - फिर मृत्यु किसकी होती है ? किसी की नहीं । केवल एटमों के समूहों का रूप बदलता

रहता है । क्योंकि एटमों की कभी मृत्यु नहीं होती है । इसी तरह पानी कभी समाप्त नहीं होता । केवल रूप बदलता रहता है । पानी अगर नदी / तालाब  में है । तो पानी । समुद्र में पहुंचा । तो पानी । वाष्पीकरण हुआ । तो बादल । फ्रिज में रख दिया गया । तो बर्फ । दूध में मिला दिया गया - तो दूध ? गीली मिट्टी में मिला दिया गया -  तो कीचड़ ? इंजेक्शन के लिए शीशी में भर दिया गया - तो डिस्ट्रिल्ड वाटर ? हो गया आदि आदि । किसी रूप में हमे स्व चेतना होती है । और किसी में नहीं ।  जब हम  मरेंगे । तो हमारे शरीर के एटम 1 बार फिर इसी UNIVERSE  में रिसाइकिल  होंगे । और हम किसी अन्य Object बस्तु के रूप में हो जाएँगे । हो सकता है कि भविष्य में हम बादल बनकर अपने बेटे या नाती या पोती के ही आँगन या बाग में पानी के रूप में बरसें । तब हम और हमारे ये बच्चे क्या यह जान पाएंगे कि हम पिता पुत्र या बाबा नाती /नातिन हैं ? नहीं । पर सच /वास्तविकता यही है कि पहले मैं पिता था । अब बादल हूँ ? बस रूप  बदल गए हैं । यही 1 तरह की अमरता है ?
http://myviews-krishnagopal.blogspot.in/2012/08/blog-post_9.html
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इस लेख के लेखक भारत सरकार के उच्च पद से रिटायर्ड ( 64 ) हैं । मैंने ये लेख सत्यकीखोज के पाठकों के चिंतन मनन व प्रश्नों के हेतु साझा किया है । आप चाहें । तो टिप्पणी द्वारा इस लेख में उठे प्रश्नों के उत्तर भी दे सकते हैं । या फ़िर ( मूल ) प्रश्न निकाल कर मुझसे उत्तर पूछ भी सकते हैं । इन सभी के सरल सहज प्रयोगात्मक स्तर पर उत्तर मेरे पास हैं ।
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