18 नवंबर 2012

आप कहेंगे फिर मच्छर और अंग्रेजों को कैसे भगायें ?


मच्छर भगाने के लिए आप अक्सर घर में अलग अलग दवाएं इस्तेमाल करते हैं ! कोई तो liquid form में होती हैं ! और कोई कोई coil के रूप में । और कोई छोटी टिकिया के रूप में । और all out  good night  baygon hit जैसे अलग अलग नामो से बिकती हैं । इन सबमें जो कैमिकल इस्तेमाल किया जाता है । वो D एथलीन है । मेलफो क्वीन है । और फोस्टीन है । ये 3 खतरनाक कैमिकल हैं । और ये यूरोप में 56 देशों में पिछले 20-20 साल बैन हैं । और हम लोग घर में छोटे छोटे बच्चों के ऊपर ये लगाकर छोड़ देते हैं !  2-3 महीने का बच्चा सो रहा होता है ! और साथ में ये जहर जल रहा होता है । TV विज्ञापनो ने आम आदमी का दिमाग पूरा खराब कर दिया है ! वैज्ञानिकों का कहना है - ये मच्छर मारने वाली दवाए कई कोई बार तो आदमी को ही मार देती हैं । इनमें से निकलने वाली सुगंध में धीमा जहर है । जो धीरे धीरे शरीर में जाता रहता है । और कई बार आपने भी 

महसूस किया होगा । इसे सुघने से गले में हल्की हल्की जलन होने लगती है । ये जो 3 खतरनाक कैमिकल D एथलीन है । मेलफो क्वीन है । और फोस्टीन है । इन पर कंट्रोल विदेशी कंपनियों का है । जो आयात कर यहाँ लाकर बेच रहे हैं । और कुछ स्वदेशी कंपनियां भी इनके साथ इस व्यपार में शामिल हैं । तो आपसे निवेदन है - कभी भी इसका इस्तेमाल न करें ।
आप कहेंगे - फिर मच्छर कैसे भगायें ?
सबसे आसान उपाय है । आप मच्छरदानी का प्रयोग करें । सस्ती है । स्वदेशी है । पूर्व से पश्चिम । उत्तर से दक्षिण । सब जगह उपलब्ध है । और आजकल तो अलग अलग तरह की मिल रही है । 1 गोल प्रकार की है । 1 ऊपर ओढ़ कर सोने जैसी भी है । और इससे भी 1 बढ़िया उपाय है । नीम का तेल बाजार से ले आए । और उसको 

दीपक में डालकर बत्ती बनाकर जला दें । जब तक दीपक जलेगा । 1 भी मच्छर आसपास नहीं फड़केगा ।  40 -50 रुपए लीटर नीम का तेल मिल जाता है । और 2 से 3 महीने चल जाता है । 1 और काम आप कर सकते हैं । गाय के गोबर से बनी धूप या अगरबत्ती लें । उसको जलायें । सब मच्छर भाग जायेंगे । आजकल काफी गौ शाला वाले गोबर से बनी धूप अगरबत्ती आदि बना रहें हैं । आसानी से आपको उपलब्ध हो जायेगी । और आप अगर ये अगरबत्ती आदि खरीदेंगे । तो पैसा किसी न किसी गौ शाला को जाएगा । गौ शाला को पैसा जाएगा । तो गौ माता की रक्षा होगी । गौ माता की रक्षा होगी । तो भारत माता की रक्षा होगी । वो दूसरे जहर खरीदेंगे । तो 1 तो आपका - पैसा बर्बाद । और दूसरा आपका - अनमोल शरीर । पूरी post पढ़ी बहुत बहुत धन्यवाद । यहाँ जरूर click करे । वन्देमातरम !
http://www.youtube.com/watch?v=YU7YKw1c3v8&feature=plcp
http://www.facebook.com/photo.php?fbid=490892277618454&set=at.137060829668269.14827.100000930577658.1762562085&type=1&theater

क्या जर्मनी की तरह भारत में भी क्रिकेट पर प्रतिबंध लगना चाहिए ? जर्मनी के तनाशाह एडोल्फ हिटलर ने 

1937 में जर्मनी में क्रिकेट पर प्रतिबंध लगा दिया था ? क्रिकेट खेल में सबसे अधिक समय बर्बाद होता है । क्रिकेट मैचों के दौरान पूरा भारत देश काम धाम भूलकर क्रिकेट में मग्न हो जाता है । क्रिकेट खेल में ज्यादा समय बर्बाद होता है । भारत की युवा पीढ़ियों पर क्रिकेट का नशा इस कदर छाया है कि - उसके आगे सभी काम ठप ।
Do you know why Adolf Hitler banned cricket in Germany ? In 1937 Adolf Hitler was watching a Cricket match that went on and on. Adolf Hitler kept asking when it would be over, and his minster told him it would continue the next day for the entire day and well into the evening. Adolf Hitler said - By the time this stupid game is over, I could have conquered three countries.
आज जर्मनी दुनिया का सबसे धनी व औद्योगिकीकृत देश है । जर्मनी समूह 8 के सदस्य है । 8 का समूह । समूह 8 ( Group of Eight - G8 ) 1 अन्तर्राष्ट्रीय मंच है । इस मंच की स्थापना फ्रांस द्वारा 1975 में समूह 6 के

नाम से विश्व के 6 सबसे धनी राष्ट्रों की सरकारों के साथ मिलकर की थी । यह राष्ट्र थे - फ़्रांस । जर्मनी । इटली । जापान । ब्रिटेन । और संयुक्त राज्य अमेरिका । 1976 में इसमें कनाडा को शामिल कर लिया गया । और मंच का नाम बदलकर समूह 7 कर दिया गया । 1997 में इसमें रूस भी शामिल हो गया । और मंच का नाम समूह 8 हो गया । विश्व का कोई भी विकसित राष्ट्र क्रिकेट नहीं खेलता । अमेरिका । जापान । रुस । चीन । फ्रांस ।जर्मनी इत्यादि तमाम विकसित राष्ट्रों ने क्रिकेट को कभी नहीं अपनाया । इसका सीधा सा कारण यही है कि - इस खेल में सबसे अधिक समय लगता है । और आज के प्रतिस्पर्धा के युग में कोई भी देश अपना ज्यादा समय महज खेल देखने पर व्यय करने को राजी नहीं है । आज इस क्रिकेट की वजह से भारत की उत्पादक क्षमता आधी से भी कम बनी हुई है । देश की हालत यह है कि - भृष्टाचार और महंगाई की मार के बीच जनता पिस रही 

है । और कीमतें आसमान छू रहीं हैं । कांग्रेस घोटालों की सरकार के कई मंत्री घोटालों में फंसे हुए है । जिन्होंने देश की भोली भाली जनता का रुपया लूटकर अपनी अपनी तिजोरियां भरने का काम किया है । आजाद भारत देश में अंग्रेजों के खेल क्रिकेट खेलने की प्रासंगिकता क्या है ? भारत देश में अंग्रेजो के खेल क्रिकेट को खेलने वाले क्या हम इतनी जल्दी भूल गए कि - देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त करने के लिए लाखों हिंदुस्तानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी । जेल की यातनाएं झेलीं । तब कहीं करीब 64 साल पहले 15 AUG 1947 को बड़ी मुश्किल से अंग्रेजों को यहाँ से भगाया जा सका ? भारत के महान नागरिको को 250 साल तक अपमानित करके लूटने वाले अंग्रेजों के खेल क्रिकेट को हम अपने राष्ट्रीय खेल हाकी के समक्ष वरीयता नहीं देनी चाहिए । भारत देश का राष्ट्रीय खेल हाकी है । न कि क्रिकेट । इसलिए हमें महत्त्व हाकी को देना है । और बढ़ावा भी हाकी को ही देना है ।
अंग्रेजों के खेल क्रिकेट ने भारत देश का बेड़ा गर्क कर दिया है । आजाद भारत में अंग्रेजों के खेल क्रिकेट को खेलने और TV में देखने से पहले जरा आप सोचिये । फिर निर्णय करें । हम भारतीय को राष्ट्र खेल हाकी खेलना चाहिए । क्रिकेट विदेशी गुलामी का प्रतीक खेल है । क्रिकेट सिर्फ वही देश खेलते हैं । जो कभी न कभी ब्रिटेन के 

गुलाम रहे हैं । यदि अंग्रेज के पूर्व गुलाम राष्ट्रों को छोड़ दें । तो दुनिया का कौन सा स्वतंत्र राष्ट्र है । जहाँ क्रिकेट का बोलबाला है ? यह हमारे इतिहास की विडम्बना है कि - सचिन । महेंद्र सिंह धोनी । विराट कोहली । युवराज सिंह । हरभजन सिंह के जन्म दिवस पर आजाद भारत देश भर में केक काटे जाते हैं । लेकिन - मंगल पांडे । चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह के जन्म दिनों की तारीखें हमारी युवा पीढ़ी को याद नहीं हैं । आज यदि हम स्वतंत्र हवा में सांस ले पा रहे हैं । तो यह उन अनेक वीर भारत वासियों की बदौलत है । जिन्होंने अपने वतन को अंग्रेजों के चंगुल से आजाद करने के लिए अपनी जान तक की बाजी लगा दी थी । आजा़दी के मतवालों और शहीदों को सलाम । उनकी कुर्बानी ने हमें आजा़दी की सांस मुहैय्या कराईं । लेकिन हिंदुस्तांन के आजा़द होने के तकरीबन 65 साल बाद भी अंग्रेजो के खेल क्रिकेट को खेलने और TV में देखने को मिल जाए । तो आम भारतीय के साथ साथ उन शहीदों की आत्मा तक शर्मिंदा हो जाएगी । जिन्होंने अपनी जिंदगी देश की आन बान और शान पर कुर्बान कर दी थी ।
भारत देश की आज़ादी से पहले भारत में अंग्रेजों के बंगलों के मुख्य द्वार और बाउण्ड्री वाल पर लिखा होता था - इण्डियन एण्ड डॉग्स आर नाट एलाउड  While reading history we often read - Indians and Dogs Not Allowed here मतलब यह - हिन्दुस्तानी और कुत्तों का प्रवेश वर्जित है । तो क्या समझा जाए कि - अंग्रेजों की राय में भारतीय आदमी और कुत्ते 1 समान होते थे । आखिर वे क्यों नहीं भेद करते थे । 1835 में थामस मैकाले ने बहुत बढ़िया ढंग से ब्रिटिश उपनिवेशिक साम्राज्यवाद के उद्देशों को स्पष्ट किया - हमें 1 ऐसे वर्ग को बनाने की भरसक कोशिश करना चाहिए । जो हमारे और जिन पर हम शासन करते हैं । उन लाखों लोगों के बीच दुभाषिया हो सके । 1 वर्ग । जो खून और रंग में भारतीय हो । परंतु स्वाद में । राय में । भाषा । और बुद्धिमानी में । अंग्रेज हो । Lord Macaulay - let us create a class of people, Indians in their origin and blood but English in their tastes and manners भारत में जो लोग अंग्रेजो के खेल क्रिकेट को खेलते हैं । और TV में देखते हैं ।  वे भारतीय लार्ड मैकाले अंग्रेज की कल्पना हैं ।  मैकाले ने 12 OCT 1836 को अपने पिता को लिखे पत्र में कहा - आगामी 100 साल बाद भारत के लोग । रूप और रंग में तो भारतीय दिखेंगे । किन्तु वाणी । विचार और व्यवहार में अंग्रेज हो जायेंगे । हम हिन्दुस्तानियों की गुलामी की मानसिकता ही है । जो अपने पूर्व ब्रिटिश मालिकों के खेल क्रिकेट को अपने सीने से लगाये हुए हैं । भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है । तो क्रिकेट के भुत से छुटकारा पाना ही होगा । अँग्रेज चले गए । लार्ड मैकाले भी चले गए । लेकिन हमारे देश में अंग्रेज मानसिकता के अवैध बीजारोपण की फसल आज भी बखूबी लहलहा रही है । मैकाले प्रणीत शिक्षा पद्वति के ढ़ांचे में पले बढ़े ये काले अंग्रेज ? सदैव अंग्रेजो के खेल क्रिकेट खेलना और TV में देखना अपनी शान समझते हैं । क्रिकेट ने दूसरे अन्य बड़े बड़े खेलों को निगल लिया । चियर गर्ल्स के नाम पर क्रिकेट में सरेआम अश्लीलता परोसी जाने लगी । वैश्विक स्तर पर क्रिकेट खिलाड़ियों की बोली - किसी वस्तु । सामान । मकान या पशु की भांति लगाई जाने लगी । बड़ी बड़ी शख्सियतों को ब्राण्ड एम्बेसडर बनाकर और जोशीले विज्ञापन की चकाचौंध में फंसाकर क्रिकेट को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने की कोई भी कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी गई । क्रिकेट का रोमांच जन जन में इतनी चतुराई से भरा गया कि - 1 परीक्षार्थी भी अपनी परीक्षा को दांव पर लगाकर क्रिकेट देखने लगा । अंग्रेजो के खेल क्रिकेट ने भारत देश का बेड़ागर्क कर दिया है । अंग्रेजो के खेल - क्रिकेट हटाओ । देश बचाओ । जागो भारतीय जागो । जय हिन्द । जय भारत । वन्दे मातरम ।
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