18 नवंबर 2012

कुछ धर्मों में 2 दुकानें पर हिन्दू धर्म में तीसरी दुकान भी है - मोक्ष की


कर्म फल क्या है ? What is past life’s work’s result हम सबको बचपन में 1 घुट्टी पिलाई जाती है । ताकि जन्म के समय स्वास्थ्य सब तरह से अच्छा रहे । लेकिन इसके साथ ही 1 घुट्टी और पिलाई जाती है । पिलाई जाती रही है । वो यह है कि अच्छे काम ( पुण्य ) करोगे । तो स्वर्ग जाओगे । बुरे काम करोगे । तो नरक जाओगे । और अगर स्वर्ग नरक के चक्कर से बचना हो । तो मोक्ष पाने की तैयारी  करो । दुनियाँ के कुछ धर्मों में 2 दुकानें ही हैं - स्वर्ग और नरक । हिन्दू धर्म में तो 1 तीसरी दुकान भी है । वह है - मोक्ष की । अगर नरक के कष्टों से बचना है । तो मोक्ष की कामना करो । और हमारी दुकान में आओ । हम जो जो बताते जाये । बही करते जाओ । पंडितजी । पुजारी । और प्रवचन कर्ता कहते हैं कि - हम आपकी सीट स्वर्ग में हमेशा हमेशा  के लिए सुरक्षित  करा देंगे । लेकिन  मन में यह डर भी लिए रहते है कि इतना धन खर्च करके भी नहीं मिली मोक्ष ( पंडितजी कोई गारंटी कार्ड तो देते नहीं है ) फिर भी लोभ इतना है कि - शायद मिल ही जाये ? क्योंकि हम सब पैदा होने के समय से यही सब कुछ  देखते आ रहे हैं । हम अपने जीवन में अच्छा या बुरा । जो कुछ भी होता देखते रहे हैं । उस समय हमको बताया जाता रहा है कि - यह जो भी गड़बड़ हुआ । या हो रहा है । जैसे कि किसी का बच्चा मर गया । किसी स्त्री के लड़कियां ही लड़कियां हुईं । या हो रही हैं । लड़का नहीं । किसी का पति युवावस्था में ही मर गया । कोई बच्चा फेल हो गया । किसी  की  नौकरी छुट गई आदि आदि ।  तो कहा जाता है कि ये पूर्व जन्म के बुरे कर्मों का फल हैं । और अगर बहू सेवा करने वाली अच्छी है । तो सास को लोग कहेंगे कि पूर्व जन्म के अच्छे कर्मों का फल है । लड़का DM हो गया । तो बाप और माँ को कहा जाएगा कि पिछ्ले जन्म में गंगाजी में जौ बोये होंगे । तभी लड़का DM हो गया । हम अपने चारों ओर यही सुनते चले आए है । तो हमें भी लगता है कि - ये सब सही ही कह रहे हैं ? कर्मों का ही फल है । पूर्व जन्म में जो अपराध किए होंगे । उनके ही दंड भोगने  पड़ रहे हैं ।
केवल यही नहीं । इस तरह की हजारों कहानियाँ ? धर्म ग्रन्थों में भी लिखी गयी है । गढ़ दी गयी हैं ? उनको सुन सुनकर भी हमारे सोचने समझने की शक्ति /बुद्धि ही जाती रही है । परंतु क्या कोई यह दाबे के साथ कह सकता है कि - ये सब पिछले जन्मों का ही फल है ? क्या कोई प्रमाण है ? यह कोई नहीं देखता है कि ये सब इसी जन्म के

कर्मों के फल हैं । बच्चा मन लगाकर पढ़ा ही नहीं । तो फेल हो गया । पति ने  ट्रेफिक नियमों का पालन नहीं किया । तो एक्सीडेंट हुआ । और मर गया । लड़के ने कोचिंग मन लगाकर पढ़ी ।  दिन रात 1 कर दिये । तो कलक्टर हो गया । बहू के घर वालों अर्थात माँ बाप ने अच्छे संस्कार बचपन से ही दिये थे । अतः बहू सास की सेवा करती है । लड़का या लड़की का होना । भाग्य का नहीं । बल्कि बायोलोजी की XX और YY प्रोमोजोंस की THEORY के अनुसार लड़का लड़की होते हैं । हमारा अज्ञान ही हमसे कहलाता है कि - यह सब पूर्व जन्म के कर्मों का फल है । बचपन में बेटे ने पैन पेंसिल कापी किताबें चुराईं थी । तब माँ बहुत खुश होती थी कि बच्चा अच्छा करता है । चलो  खरीदने  नहीं पड़ेंगे । वही बड़ा होकर बड़ी चोरी करने लगा । जेल गया । तो आँसू लिए माँ कहती है कि - पिछले जन्म के फल भोग रही हूँ । इस जन्म को नहीं देखती है ।
हम सबको यह बताया जाता रहा है कि हमारे जीवन में जो बुरा समय आए । या आ रहे हैं । बे सब हमारे पूर्व जन्म के कर्मों का ही फल है । इसलिए जो पूर्व जन्म को । भाग्य को । और पूर्व जन्म के कर्मों के फल के अनुसार ही इस जन्म में सुख और दुख मिलने/होने की बात मानते हैं । बे किसी या किन्ही कार्य के परिणाम को पूर्व जन्म के कर्मों को ही दोष देते हैं । चाहे उन्होंने इस जन्म में कितनी ही ईमानदारी से और लगन से काम किया/किए हों । ऐसे लोग कहते हैं कि - इस जन्म में ईमानदारी से काम तो किया है । लेकिन पूर्व जन्म में जो बुरे कर्म/पाप किए थे । उनका फल भी तो मिलेगा ही । इसीलिए इस कार्य में सफलता नहीं मिली । बे यह समझने की कोशिश नहीं करते हैं कि - 10 प्रतियोगियों में केवल 1 ही तो FIRST POSITION  पर आ सकता है । बाकी अपनी कुशलता के अनुसार ही तो अपना स्थान  बना पाएंगे ? ऐसे लोगों में से कुछ ऐसे भी हैं । जो सोचते ही नहीं । बल्कि कहते भी है कि हम इस जन्म में जो अच्छे कर्म कर लेंगे । तो अगले जन्म में अच्छा ही अच्छा ही मिलेगा । इसलिए बे अच्छे कार्य करते हैं । इसलिए नहीं कि अच्छे कार्यों का अच्छा फल इसी जन्म में मिलेगा । बे यह भूल जाते हैं कि कोई 

किसी अच्छे या बुरे काम  के पूर्ण होने में बहुत से लोगों का रोल हिस्सेदारी होती है । जैसे कि किसी लङके के MBA में फेल होने में  अकेले उस लड़के का ही हाथ नहीं है । बल्कि लड़के के साथ - माँ । बाप । कोच । घर का  बाताबरण । उस लड़के के साथी कैसे हैं ? आदि आदि । तो फिर उस अकेले लड़के के पूर्व जन्म के फल का क्या अर्थ ? 
तो हमें पूर्व जन्म के कर्म फल के हिसाब किताब लगाने  की बजाय । मोक्ष पाने के चक्कर में पड़ने की बजाय । अपने स्वभाव को अच्छा बनाने में । बच्चों को अच्छे संस्कार देने में ।  दूसरों के अबगुण देखने के बजाय अपने अबगुण देखने चाहिए । अच्छा यही होगा कि पिछले जन्म जिसे हम देख नहीं सकते हैं ? को देखने की बजाय ? इसी जन्म को देखें । इसी में सुख है । इसी में मन की शांति है । गीता में भी कहा गया है - कर्म करो । फल की इच्छा मत करो । क्योंकि कर्म करना । सुख प्रदान करता है । जबकि फल की इच्छा दुख प्रदान करता है । तो फिर पूर्व जन्म के कर्मों के  बारे में खाम खां दिमाग क्यों खराब करें ? क्योंकि जो कर्म हम कर चुके है । उनको  बदल पाना संभव नहीं है ? अगला जीवन और पिछला जीवन किसने देखा ? बस इसी जन्म को सुधारो । अच्छा करो । वह काम करो । जिसके करने पर आपका ही मन न धिक्कारे । तो आप भय रहित जिएंगे । और आप काल्पनिक नरक की ? काल्पनिक यातनाओं ? से भी बचेंगे ।
मोक्ष क्यों पाना चाहते हैं - सब लोग ?  इसलिए कि जहाँ आकांक्षा /इच्छा है । वहीं दुख है । अतः फल और मोक्ष की इच्छा /आकांक्षा न करें । हमें अपनी आदत ही बना लेनी चाहिए । अच्छे कर्मों को करने की । बस सुख ही सुख ही होगा । हमारी ज़िंदगी में ।
यहाँ प्रश्न यह उठता है कि - भाग्यशाली कौन है ? और दुर्भाग्य शाली कौन है ? 1 तरफ तो यह कहा जाता है कि - बड़े भाग मानुष तन पावा । अर्थात पिछले जन्म के कर्मों के फलस्वरूप यह मनुष्य जन्म मिला । अगर मान भी लें कि ऐसा हो सकता है । लेकिन उस मामले में क्या कहेंगे कि जिसने पिछले जन्म में अच्छे कार्य करके मनुष्य योनि ( स्त्री या पुरुष की ) पा ली । परंतु वह व्यक्ति ( बच्चा । लड़का या लड़की ) जन्म लेते ही/जन्म लेने

के कुछ दिनों । महीनों । वर्षों के बाद  मर जाता है । और वह यह समझने योग्य भी नहीं हो पाता है कि - अच्छे बुरे कर्म क्या हैं ? जीवन । मृत्यु । और मोक्ष क्या है ? और मर जाता है । जन्म लिया मनुष्य योनि में । क्योंकि वह बच्चा भाग्यशाली था ?? और कुछ ही दिन । माह । वर्ष जिंदा रहने के बाद बोरबेल में गिरकर मर जाता है ।  क्या केवल इसलिए कि वह दुर्भाग्यशाली था ? इतने कम समय में उसने ऐसा क्या कर दिया कि - वह भाग्यशाली से दुर्भाग्यशाली हो गया ? उसको बचाने के लिए माँ । बाप । पड़ोसियों । सेना के जवानों । सरकार सभी ने हर संभव कोशिश की । लेकिन निकला । तो मरा हुआ । क्यों ? क्या पाप कर लिए थे । इतनी छोटी सी उमृ में ?  उसके माँ बाप के आँखों का तारा चला गया । उनकी रो रोकर जान निकली जा रही है । लेकिन ईश्वर को तरस नहीं आ रहा है । क्योंकि ईश्वर  बड़ा ही दयालु और न्याय प्रिय है । यहाँ क्या कोई बताएगा कि - 1 उस बोरबेल में गिरे बच्चे ने कुछ ही समय में कौन कौन से पाप कर लिए थे ?
2 ज्ञानी लोग कहते आए हैं कि - बड़े भाग मानुष तन पावा । तो वह बच्चा जो " भाग्यशाली " होने का गोल्ड मैडल लेकर पैदा हुआ । तो ऐसा क्या हुआ कि वह " दुर्भाग्यशाली " होने  का मैडल पा गया ?
3 मैं मेरे जीवन में घटित बात बताता हूँ । मेरे 2 बेटियों के बाद बेटा हुआ । होने के अगले दिन टिटनिस हो गयी । इलाज चला । 8 दिन बाद मर गया । विचारणीय है कि - बड़े भाग उसने मानुष तन पाया । चलो मान लिया । लेकिन 1 दिन में ही वह या मैं दुर्भाग्यशाली कैसे हो गया ? या 1 दिन में ही उसने ऐसे क्या पाप कर डाले ? जो उसे मर जाना पड़ा ? 8 दिन के जीवन में न तो उसने पाप किए । न पुण्य  कार्य किए । तो उसको स्वर्ग या नर्क किस आधार पर मिला होगा ? अगर मोक्ष मिली ? तो इसका मतलब हुआ कि जितने भी शिशु जन्म के कुछ समय बाद मर जाते है । उन सबको मोक्ष मिल जाती है ?
4 अब चूंकि वह मोक्ष के लिए विना प्रयास किए ही मर गया । और कहा गया है कि विना गुरु विना  प्रयास । विना कामना के । विना पुण्य कार्य किए " मोक्ष " मिल ही नहीं सकता है । और ये सब कार्य करने से पहले ही वह  बच्चा मर गया । तो इसका अर्थ हुआ कि वह बच्चा 84 00 000 योनियों में हमेशा ही जीवन मृत्यु के चक्कर में फंसा रहेगा । जबकि उसका कोई दोष नहीं ?
मेरा इतना और केवल इतना निवेदन है कि - मैं किसी की धार्मिक । आध्यात्मिक भावनाओं को बिलकुल ठेस नहीं पहुंचाना चाहता हूँ । मेरे विचार से कृपया कुछ क्षण रुककर इस पर मनन करें कि इस जीवन के पार भी क्या कोई जीवन है ? शायद ? कोई जीवन नहीं है ? जो कुछ है । बस यही जीवन है ? जो कुछ होना था । हुआ ? जो कुछ होना है । वह होगा ? होकर रहेगा । इसमें किसी का न कोई हस्तक्षेप था ? न हो सकेगा । हस्त रेखाये दिखाकर । किसी विशेष धातु की अंगूठी पहनकर । कर्मकांड करके । नदियों में पैसे फेंककर । गंगा स्नान करके । आप  " होनी  " को बदल/टाल नहीं  सकते हैं ?  हाँ  हम ये सब करके अपना कीमती समय जरूर बर्बाद कर सकते हैं । कर रहे हैं ।
क्योंकि हमे वर्तमान में जीना चाहिए । हमें न तो भूत की चिंता करनी चाहिए । न भविष्य की ? हमें " चिंतन " करना चाहिए । न कि चिंता ? जो कुछ है । वो वर्तमान है । आगे - तू जाने ना । पीछे भी - तू जाने ना । जो कुछ भी है । बस यही 1 पल है ।  इसको तू गंवाना ना ।
बस 1 बात जो सबसे महत्वपूर्ण है । वो यह कि मोक्ष की चिंता किए विना हमें अच्छे कार्य करने चाहिए । दूसरों की मदद करनी चाहिए । प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भी किसी को दुख नहीं पहुंचाना चाहिए । ये सब कुछ किसी दबाव में नहीं । मोक्ष प्राप्ति के उद्देश्य से नहीं । बल्कि जीवन की  नैतिकता के आधार पर करना चाहिए । यही सबसे बड़ा कर्म है ? यही सबसे बड़ा धर्म है ?? यह मत सोचो कि ईश्वर ने हमें किसी विशेष उद्देश्य से भेजा है ? बल्कि यह सोचो कि हमारा उद्देश्य हम खुद बनाएँ कि हम किसी और के जीवन को अच्छा बनाने में क्या क्या मदद कर सकते  हैं ? अगर हमें ईश्वर ने किसी विशेष उद्देश्य से भेजा होता । तो बोरबेल में गिरकर मर जाने वाला बच्चा मर नहीं जाता ? क्योंकि इतने कम समय में उसने तो यह भी नहीं जाना कि " उद्देश्य " का मतलब क्या होता है ? बिना उद्देश्य पूरा किए ही ईश्वर ने उसे क्यों " अपने पास " बुला लिया ? हमें तो बस यह करना चाहिए कि विना किसी इनाम की इच्छा के । बल्कि ईमानदारी । सच्चाई । अहिंसा । प्रेम की भावना से । दूसरों की सेवा  करें  ( सब ही या इनमें से जो भी आपके लिए संभव हो ) रास्ता पकड़  ले । और चलते  जाएँ ।  चलते  जाएँ । अपने से ये पूछे विना कि - मैं ये करूँ । या न करूँ ?  कभी सोचा है कि - क्या आपका दिल जो हमेशा 1 पल भी रुके विना लगातार जन्म से लेकर अब तक पूरे शरीर को खून और ऑक्सीज़न पहुंचाता रहता है । कभी आपसे पूछता है कि मैं अपना काम करता रहूँ । या नहीं ? उसने इस नेक काम करने के लिए जो वह  विना पूछे करता रहता है । वह यह  पूछने  के लिए 1 बार 1 क्षण के लिए भी रुक गया । तो क्या आपने सोचा है कि क्या आप या हम ज़िंदा भी रह पाएंगे ? नहीं । हम ये पूछ भी नहीं पाएंगे कि - यार ! मेरे दिल तूने धड़कना क्यों बंद कर दिया । जीवन का उद्देश्य कभी भी  " बुरा " तो हो ही नहीं सकता है ।
http://myviews-krishnagopal.blogspot.in/2012/08/blog-post_9.html
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इस लेख के लेखक भारत सरकार के उच्च पद से रिटायर्ड ( 64 ) हैं । मैंने ये लेख सत्यकीखोज के पाठकों के चिंतन मनन व प्रश्नों के हेतु साझा किया है । आप चाहें । तो टिप्पणी द्वारा इस लेख में उठे प्रश्नों के उत्तर भी दे सकते हैं । या फ़िर ( मूल ) प्रश्न निकाल कर मुझसे उत्तर पूछ भी सकते हैं । इन सभी के सरल सहज प्रयोगात्मक स्तर पर उत्तर मेरे पास हैं ।
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