28 सितंबर 2012

इनसे महिलायें उत्तेजित हो सकती हैं


यूरोप के 1 मौलवी ने फतवा जारी कर मुस्लिम महिलाओं को ऐसे फलों और सब्जियों को छूने से मना किया है । जो पुरुषों के जननांग का आभास देते हैं । मौलवी ने महिलाओं को यौन विचारों से दूर रहने के तहत यह फतवा जारी किया है । इजिप्ट की 1 न्यूज वेव साईट ने बुधवार को उक्त मौलवी के फतवे का हवाला देते हुये यह जानकारी दी है । मौलवी ने किसी धार्मिक प्रकाशन में लिखे लेख में ऐसी बातें कही हैं ।
उक्त मौलवी का नाम नहीं बताया गया है । उसके अनुसार महिलाओं को केले और ककड़ी के पास भी नहीं जाना चाहिये ।.यदि महिलायें इन खाद्य पदार्थों को खाना चाहें । तो कोई तीसरा व्यक्ति । जो उनका सम्बन्धी पुरुष जैसे - उसका पति । या पिता हो 

। इन वस्तुओं को छोटे छोटे टुकड़ों में काट कर उन्हें दे ।
ऐसा फतवे में कहा है । उक्त मौलवी के अनुसार - केला और ककड़ी पुरुष जननांग की तरह दिखते हैं । और इसलिये महिलायें उत्तेजित हो सकती हैं । या उनके मन में सेक्स का विचार आ सकता है । उक्त मौलवी ने यह भी कहा है कि - महिलाओं को गाजर । तोरई जैसी सब्जियों से भी बचना चाहिये ।
( दैनिक जागरण - 8 दिसंबर 2011 पेज 9 )
यह फतवा दिनांक 30 नवम्बर 2011 को जिस मौलवी ने जारी किया था । उसका नाम - शेख यहरम अली     .. है । और यह फतवा मिस्र के जिस अखबार में छपा है । उसका अरबी में पूरा पेज दिया जा रहा है । ताकि मौलवियों की मानसिकता का अंदाजा लग सके ।
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आधुनिक भारत में अंग्रेजों के समय से जो इतिहास पढाया जाता है । वह चन्द्रगुप्त मौर्य के वंश से आरम्भ होता है । उससे पूर्व के इतिहास को " प्रमाण रहित " कह कर नकार दिया जाता है । हमारे " देशी अंग्रेजों " को यदि सर जान मार्शल प्रमाणित नहीं करते । तो हमारे " बुद्धिजीवियों " को विश्वास ही नहीं होना था  कि - हडप्पा और मोइन जोदडो स्थल ईसा से लगभग 5000 वर्ष पूर्व के समय के हैं । और वहाँ पर ही विश्व की प्रथम सभ्यता ने जन्म लिया था ।
विदेशी इतिहासकारों के उल्लेख -  विश्व की प्राचीनतम् सिन्धु घाटी सभ्यता मोइन जोदडो के बारे में पाये गये उल्लेखों को सुलझाने के प्रयत्न अभी भी चल रहे हैं । जब पुरातत्व शास्त्रियों ने पिछली शताब्दी में मोइन जोदडो स्थल की खुदाई के अवशेषों का निरीक्षण किया था । तो उन्होंने देखा कि वहाँ की गलियों में नर कंकाल पडे थे । कई अस्थि पिंजर चित अवस्था में लेटे थे । और कई अस्थि पिंजरों ने एक दूसरे के हाथ इस तरह पकड रखे थे । मानों किसी विपत्ति नें उन्हें अचानक उस अवस्था में पहुँचा दिया था ।
उन नर कंकालों पर उसी प्रकार की रेडियो ऐक्टिविटी के चिह्न थे । जैसे कि जापानी नगर हिरोशिमा और

नागासाकी के कंकालों पर एटम बम विस्फोट के पश्चात देखे गये थे । मोइन जोदडो स्थल के अवशेषों पर नाईट्रिफिकेशन के जो चिह्न पाये गये थे । उसका कोई स्पष्ट कारण नहीं था । क्योंकि ऐसी अवस्था केवल अणु बम के विस्फोट के पश्चात ही हो सकती है ।
मोइन जोदडो की भौगोलिक स्थिति - मोइन जोदडो सिन्धु नदी के 2 टापुओं पर स्थित है । उसके चारों ओर 2 किमी के क्षेत्र में 3 प्रकार की तबाही देखी जा सकती है । जो मध्य केन्द्र से आरम्भ होकर बाहर की तरफ गोलाकार फैल गयी थी । पुरा्तत्व विशेषज्ञों ने पाया कि - मिट्टी चूने के बर्तनों के अवशेष किसी ऊष्णता के कारण पिघल कर एक दूसरे के साथ जुड गये थे । हजारों की संख्या में वहाँ पर पाये गये ढेरों को पुरातत्व विशेषज्ञों ने काले पत्थरों " ब्लैक स्टोंस " की संज्ञा दी । वैसी दशा किसी ज्वालामुखी से निकलने वाले लावे की राख के सूख जाने के कारण होती है । किन्तु मोइन 

जोदडो स्थल के आसपास कहीं भी कोई ज्वालामुखी की राख जमी हुयी नहीं पाई गयी । 
निष्कर्ष यही हो सकता है कि - किसी कारण अचानक ऊष्णता 2000 डिग्री तक पहुँची । जिसमें चीनी मिट्टी के पके हुये बर्तन भी पिघल गये । अगर ज्वालामुखी नहीं था । तो इस प्रकार की घटना अणु बम के विस्फोट पश्चात ही घटती है ।
महाभारत के आलेख - इतिहास मौन है । परन्तु महाभारत युद्ध में महा संहारक क्षमता वाले अस्त्र शस्त्रों और विमान रथों के साथ 1 एटमिक प्रकार के युद्ध का उल्लेख भी मिलता है । महाभारत में उल्लेख है कि - मय दानव के विमान रथ का परिवृत 12 क्यूबिट था । और उसमें 4 पहिये लगे थे । देव दानवों के इस युद्ध का वर्णन स्वरूप इतना विशाल है । जैसे कि हम आधुनिक अस्त्र शस्त्रों से लैस सैनाओं के मध्य परिकल्पना कर सकते 

हैं । इस युद्ध के वृतान्त से बहुत महत्व शाली जानकारी प्राप्त होती है । केवल संहारक शस्त्रों का ही प्रयोग नहीं । अपितु इन्द्र के वज्र अपने चक्रदार रिफलेक्टर के माध्यम से संहारक रूप में प्रकट होता है । उस अस्त्र को जब दाग़ा गया । तो 1 विशालकाय अग्नि पुंज की तरह उसने अपने लक्ष्य को निगल लिया था । वह विनाश कितना भयावह था । इसका अनुमान महाभारत के निम्न स्पष्ट वर्णन से लगाया जा सकता है
- अत्यन्त शक्तिशाली विमान से 1 शक्ति युक्त अस्त्र प्रक्षेपित किया गया । धुएँ के साथ अत्यन्त चमकदार ज्वाला । जिसकी चमक 10 000 सूर्यों के चमक के बराबर थी । का अत्यन्त भव्य स्तम्भ उठा । वह वज्र के समान अज्ञात अस्त्र साक्षात मृत्यु का भीमकाय दूत था । जिसने वृष्ण और अंधक के समस्त वंश को भस्म करके राख बना दिया । उनके शव इस प्रकार से जल गए थे कि - पहचानने योग्य नहीं थे । उनके बाल और नाखून अलग होकर गिर गए थे । बिना किसी प्रत्यक्ष कारण के बर्तन टूट गए थे । और पक्षी सफेद पड़ चुके थे । कुछ ही घण्टों में समस्त खाद्य पदार्थ संक्रमित होकर विषैले हो गए । उस अग्नि से बचने के लिए योद्धाओं ने स्वयं को अपने अस्त्र शस्त्रों सहित जल धाराओं में डुबा लिया । 
उपरोक्त वर्णन दृश्य रूप में हिरोशिमा और नागासाकी के परमाणु विस्फोट के दृश्य जैसा दृष्टिगत होता है ।

1 अन्य वृतान्त में श्रीकृष्ण अपने प्रतिदून्दी शल्व का आकाश में पीछा करते हैं । उसी समय आकाश में शल्व का विमान " शुभः " अदृश्य हो जाता है । उसको नष्ट करने के विचार से श्रीकृष्ण नें 1 ऐसा अस्त्र छोडा । जो आवाज के माध्यम से शत्रु को खोज कर उसे लक्ष्य कर सकता था । आजकल ऐसे मिसाइल को हीट सीकिंग और साउंड सीकरस कहते हैं । और आधुनिक सेनाओं द्वारा प्रयोग किये जाते हैं ।
राजस्थान से भी…प्राचीन भारत में परमाणु विस्फोट के अन्य और भी अनेक साक्ष्य मिलते हैं । राजस्थान में जोधपुर से पश्चिम दिशा में लगभग 10 मील की दूरी पर 3 वर्ग मील का 1 ऐसा क्षेत्र है । जहाँ पर रेडियो एक्टिव राख की मोटी सतह पाई जाती है । वैज्ञानिकों ने उसके पास 1 प्राचीन नगर को खोद निकाला है । जिसके समस्त भवन और लगभग 5 लाख निवासी आज से लगभग 8 000 से 12 000 साल पूर्व किसी विस्फोट के कारण नष्ट हो गए थे ।
लक्ष्मण रेखा प्रकार की अदृश्य इलेक्ट्रानिक फैंस तो कोठियों में आज कल पालतु जानवरों को सीमित रखने

के लिये प्रयोग की जातीं हैं । अपने आप खुलने और बन्द हो जाने वाले दरवाजे किसी भी माल में जाकर देखे जा सकते हैं । यह सभी चीजे पहले आशचर्य जनक थीं । परन्तु आज 1 आम बात बन चुकी हैं । मन की गति से चलने वाले रावण के पुष्पक विमान का प्रोटो टाईप भी उडान भरने के लिये चीन ने बना लिया है ।
निस्संदेह रामायण तथा महाभारत के ग्रंथकार 2 प्रथक प्रथक ऋषि थे । और आजकल की सेनाओं के साथ उनका कोई सम्बन्ध नहीं था । वह दोनो महा ऋषि थे । और किसी साइंटिफिक फिक्शन के थ्रिलर राइटर नहीं थे । उनके उल्लेखों में समानता इस बात की साक्षी है कि - तथ्य क्या है ? और साहित्यक कल्पना क्या होती है । कल्पना को भी विकसित होने के लिये किसी ठोस धरातल की आवश्यकता होती है ।
हमारे प्राचीन ग्रंथों में वर्णित बृह्मास्त्र, ।आग्नेय अस्त्र जैसे अस्त्र अवश्य ही परमाणु शक्ति से सम्पन्न थे । किन्तु हम स्वयं ही अपने प्राचीन ग्रंथों में वर्णित विवरणों को मिथक मानते हैं । और उनके आख्यान तथा उपाख्यानों को कपोल कल्पना । हमारा ऐसा मानना केवल हमें मिली दूषित शिक्षा का परिणाम है । जो कि अपने धर्म ग्रंथों के प्रति आस्था रखने वाले पूर्वाग्रह से युक्त । पाश्चात्य विद्वानों की देन है । पता नहीं हम कभी इस दूषित शिक्षा से मुक्त होकर अपनी शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षा प्राप्त कर भी पाएँगे या नहीं ?
खुद को भारतीय कहने वालो गर्व करो ।
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German Model, Actress, Singer Claudia Ciesla Announced her Desire to Embrace Sanatan Hindu Dharma - लो जी ! अब जर्मन की ये माडल भी सनातन धर्म की तरफ आकर्षित हो रही है । और इन्होंने भारत का रुख किया है । अपने और अपने परिवार को सनातन धर्म की दीक्षा के लिये । अगर आप भी अपने किसी मुस्लिम मित्र या साथी को हिन्दू बनाना चाहते हैं । तो जल्दी से यहाँ पर सम्पर्क करें । अपना नाम और फ़ोन और जिस मुस्लिम को हिन्दू धर्म में वापिस आना है । उसका नंबर इन बाक्स में डाल दें । हेल्प लाइन जल्दी ही ।
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भारत में गौ हत्या का सत्य-इतिहास - विकृत इतिहास पढ़कर हमारी धारणायें भी बधिर हो जाती हैं । स्वयं के लिए अपमान क्या है ? और सम्मान जनक क्या है ? इसे जानने का विवेक हम खो बैठते हैं । पिछले 35 वर्षों में गाँधी नेहरु का भारत में सीधा शासन रहा । जिसके दौरान हमें असत्य । हिंदु निंदक इतिहास का विष 

पिलाया गया । जो सबसे गंदी गाली इस विकृत इतिहास के माध्यम से हमें गाँधी नेहरु ने दी । वो ये कि - भारतवासी 1 000 वर्ष मुस्लिम शासकों के गुलाम रहे । इस गाली को हमारे देश बंधू पिछले अनेक वर्षों से झेल रहे हैं । जिसका परिणाम ये हुआ कि - हम ऐसी गाली खा खाकर हममें आज आत्म ग्लानि Lack of Self Confidence की भावना उत्पन्न हुई है । अच्छे बुरे की सुध बुध भी खो बैठे हैं । ये हिंदु निंदक नेहरु शासन द्वारा फैलाया गया विष । कैसे हमारी सोचने की शक्ति को नष्ट करता है । इसका 1 जीता जागता उदाहरण हम देखते हैं ।
स्वर्गीय राजीव दीक्षित को कौन नहीं जानता । उनके गौ रक्षा पर अनेक व्याख्यान हुए हैं । इस व्याख्यान में जो जानकारी बताई गयी है । दुर्भाग्य वश वो अर्ध सत्य है । श्री राजीव जी बताते है कि - भारत में गौ हत्या का आरंभ ब्रिटिश शासकों द्वारा शुरू हुआ । उससे पहले संपूर्ण भारत में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध था ।

ब्रिटिश राज आरंभ होने से पहले मुगल या मुस्लिम सत्ता में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध था । यह 1 आश्चर्यजनक विरोधाभास है । यह 1 जीवित इतिहास है कि - भारत में 10 000 से अधिक भव्य मंदिर इस्लामी शासन काल में ध्वस्त किये गये । इस प्रत्येक मंदिर को तोड़ने से पहले । इस्लामी आक्रामक गाय की हत्या करके मंदिर की पवित्रता भंग करते थे । फिर उन पुजारियों की हत्या करके सारे मंदिर को ध्वस्त करके उस वास्तु का रूपांतर मस्जिद में किया जाता था । श्री.राजीव दीक्षित ने जिस ब्रिटिश प्रमाण पत्रों का संदर्भा दिया है । उसमें स्पष्ट लिखा है कि - ब्रिटिश सत्ता भारत में आरंभ होने से पहले गौ हत्या पर संपूर्ण प्रतिबन्ध था ।
यह शत % सत्य है । किन्तु उससे भी बड़ा सत्य यह है कि - भारत में ब्रिटिश सत्ता आने से पूर्व ( इ.स. 1820

)  सारे भारत में से मुस्लिम सत्ता लगभग 150 वर्ष पहले नष्ट हो चुकी थी । ब्रिटिश सेनाओं को भारत पर विजय प्राप्त करने के लिए जितने भी भीषण युद्ध लड़ने पड़े । वह सारे 1 शक्तिशाली हिन्दू साम्राज्य से लड़ने पड़े । यह महत्वपूर्ण बात श्री । राजीव जी कहने में भूल गए । यह पराक्रमी हिन्दू साम्राज्य था । छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापन किया गया - हिन्दवी स्वराज्य । संपूर्ण उत्तर भारत ( इसमें आज का सारा पाकिस्तान और अफगानिस्तान का बहुत बड़ा भाग आता था ) मराठा और सिख जैसे हिन्दू साम्राज्यों की सत्ता में था । इन महा पराक्रमी हिन्दू साम्राज्यों के कारण भारत में अंग्रेजो से पहले समृद्धि और गौ हत्या पर संपूर्ण प्रतिबन्ध था । भारतीयों की इस पराक्रमी इतिहास को हमें स्वाभिमान पूर्वक स्वीकारना चाहिए । इन शक्तिशाली हिन्दू शासन के चलते ही भारत में स्त्रियों को वेश्या बनाना अंग्रेज़ आने से पहले नहीं था ।
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जिस आसुरी इच्छा से इस्लामी आक्रामकों ने - देव । धर्मं । स्त्री । और गौ माता का नाश किया । वहाँ भारत

के इतिहास का सबसे भयानक काला अध्याय है । यदि छत्रपति शिवाजी ने इस्लामी सत्ता को आवाहन न दिया होता ( शिवाजी महाराज की मृत्य के उपरांत मराठा सेनाओ ने 1718 में दिल्ली जीत कर मुगल सत्ता उत्तर भारत से नष्ट कर दी । इतना ही नहीं । इस घटना के 2 वर्ष उपरांत हिन्दू मराठा सेनापति रघुनाथ राव पेशवा ने लाहौर । पेशावर से अटक ( जो अफगानिस्तान का द्वार है ) तक का भारत इस्लामी सत्ता से मुक्त करके लाल किले पर भगवा फहराया ) तो आज भारत अपनी संस्कृति समेत नष्ट हो चुका होता ( कभी ना भुलो 350 वर्ष पुर्व कवि भुषण की पंक्तियां - काशी हु की कला जाती । मथुरा मस्जिद बन जाती । न होते शेर शिवाजी । तो सुन्नत होती सबकी ) शुरवीर हिन्दू सिख महाराजा रंणजीत सिंह ने तो काबुल कंधार पर विजय प्राप्त कर 800 वर्ष की मुस्लिम सत्ता को उखाड फेका ।
यदि ये 2 पराक्रमी हिन्दू सत्ता न होती । तो समस्त भारत में नाम के लिए भी कोई भारतीय / हिन्दू न बचता 

। न कोई गौ माता बचती । इस सत्य का जीता जागता प्रमाण है । कवि भूषण की लिखी हुई शिव बावनी ।
तेज तमा अंस पर । कान्हा जिमि कंस पर । त्यों म्लेंच्छ बंस पर । शेर शिवराज है ।
इसका अर्थ है - जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण कंस पर आरूढ़ होकर उसका वध करते हैं । उसी प्रकार शेर शिवराज सारे मलेच्छ सुल्तानों के वंश का अकेले संहार करते हैं ।
हमें इस ऐतिहासिक सत्य को अब स्वीकारना चाहिये कि - भारत में हिन्दू सत्ता होने के कारण गौ हत्या अंग्रेज आने से पहले भारत में बंद हो चुकी थी । और कसाईयों को गौ रक्षा का प्रमाण पत्र देना अब हमें बंद करना चाहिये ।
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Boy - Tell me a secret that you have never told anyone before..♥
Girl - You wouldn't want to know.♥
Boy - Yeah I do. If you tell me yours, I'll tell you mine. ♥

Girl: - I would rather not..♥ Boy - Please ?...♥ Girl - I LOVE YOU ♥♥
The boy smiled and said - That was mine too.. ♥ Piyuesh
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अगर आपके 1 कमेंट या पोस्ट से 1 साई भक्त मुर्दे की पूजा छोडकर भगवान श्रीकृष्ण । श्री राम की और लौटता है । तो आप पुण्य के भागी हैं ।
Evidence : http://hindurashtra.wordpress.com/2012/08/13/374/
http://hindurashtra.wordpress.com/?s=sai
साई बाबा की मार्केटिंग करने वालों ने या उनके एजेंटों ने या सीधे शब्दो में कहें । तो उनके दलालों ने काफी

कुछ लिख रखा है । साई बाबा की चमत्कारिक काल्पनिक कहानियों व गपोड़ों को लेकर बड़ी बड़ी किताबे रच डाली हैं । स्तुति । मंत्र । चालीसा । आरती । भजन । वृत । कथा । सब कुछ बना डाला । साई को अवतार बनाकर । भगवान बनाकर । और कही कही भगवान से भी बड़ा बना डाला है । किसी भी दलाल ने आज तक ये बताने का श्रम नहीं किया कि - साई किस आधार पर भगवान या भगवान का अवतार है ? जब भगवान का अवतार है । तो हिन्दू धर्म ग्रंथों के आधार पर ही तो तय होगा न कि - अवतार है । या नहीं ? भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कही गयी गीता में श्रीकृष्ण ने अवतार लेने के कारण और कर्मो का वर्णन करते हुये लिखा है कि -
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम । धर्म संस्थापनार्थाय सम्भवामि यूगे यूगे ।

अर्थात - साधू पुरुषों के उद्धार के लिये । पाप कर्म करने वालों का विनाश करने के लिये । और धर्म की स्थापना के लिये । मैं युग युग में प्रकट हुआ करता हूँ ।
श्रीकृष्ण द्वारा कहे गये इस श्लोक के आधार पर देखते हैं कि - साई कितने पानी में हैं ?
1 परित्राणाय साधूनां ( साधु पुरुषो के उद्धार के लिए ) - यदि ये कटोरे वाला साई भगवान का अवतार था । तो इसने कौन से सज्जनों का उद्धार किया था ? जबकि इसके पूरे जीवन काल में ये शिरडी नाम के 50-100 घरो की बाड़ी ( गाँव ) से बाहर भी न निकला था । और इसके मरने के बाद उस गाँव के लगभग आधे लोग भी बेचारे रोग आदि प्रकोपों से पीड़ित होकर मरे थे । यानि विश्व भर के सज्जन तो क्या अपने गाँव के ही सज्जनों का उद्धार नहीं कर पाया था । उस समय ब्रिटिश शासन था । बेचारे बेबस भारतीय अंग्रेज़ों के जूते । कोड़े । डंडे । लातें खाते गए । और साई महाराज शिरडी मे बैठकर छोटे मोटे जादू दिखाते रहे । किसी का दुख दूर नहीं । बल्कि खुद का भी नहीं कर पाये । आधे से 

ज्यादा जीवन रोग ग्रस्त होकर व्यतीत किया । और अंत मे भी बीमारी से ही मरे ।
2 विनाशाय च दुष्कृताम ( दुष्टो के विनाश के लिए ) - साई बाबा के समय में दुष्ट कर्म करने वाले अंग्रेज़ थे । जो भारतीयों का शोषण करते थे । जूतियो के नीचे पीसते थे । दूसरे गौ हत्यारे थे । तीसरे जो किसी न किसी तरह पाप किया करते थे । साई बाबा ने न तो किसी अंग्रेज़ के कंकड़ या पत्थर भी मारा । न ही किसी गौ हत्यारे के चुटकी भी काटी । न ही किसी भी पाप करने वाले को डांटा फटकारा । अरे बाबा तो चमत्कारी थे न । पर अफसोस ! इनके चमत्कारो से 1भी दुष्ट अंग्रेज़ को दस्त न लगे । किसी भी पापी का पेट खराब न हुआ । यानि दुष्टो का विनाश तो दूर की बात । दुष्टो के आस पास भी न फटके ।
3 धर्मसंस्थापनार्थाय ( धर्म की स्थापना के लिए ) - जब साई ने न तो सज्जनों का उद्धार ही किया । और न ही दुष्टो को दंड ही दिया । तो धर्म की स्थापना का तो सवाल ही पैदा नहीं होता । क्योंकि सज्जनों के उद्धार । और दुष्टो के संहार के बिना धर्म स्थापना नहीं हुआ करती । ये आदमी मात्र 1 छोटे से गाँव मे ही जादू टोने दिखाता रहा । पूरे जीवन भर । मस्जिद के खण्डहर में जाने कौन से गड़े मुर्दे को पूजता रहा ।  मतलब इसने भीख माँगने । बाजीगरी दिखाने । निठल्ले बैठकर हिन्दुओं को इस्लाम की ओर ले जाने के अलावा , उन्हें मूर्ख बनाने के अलावा कोई काम नहीं किया । कोई भी धार्मिक । राजनैतिक । या सामाजिक उपलब्धि नहीं ।

जब भगवान अवतार लेते हैं । तो सम्पूर्ण पृथ्वी उनके यश से उनकी गाथाओ से अलंकृत हो जाती है । उनके जीवनकाल मे ही उनका यश शिखर पर होता है । और इस साई को इसके जीवन काल मे शिरडी और आस पास के इलाके के अलावा और कोई जानता ही नहीं था । या यूँ कहें । लगभग 100-200 सालों तक इसे सिर्फ शिरडी क्षेत्र के ही लोग जानते थे । आजकल की जो नयी नस्ल साई राम साई राम करती रहती है । वो अपने माता पिता से पुछे कि - आज से 15-20 वर्ष पहले तक उन्होने साई का नाम भी सुना था क्या ? साई कोई कीट था । पतंग था । या कोई जन्तु । किसी ने भी नहीं सुना था ।
भगवान श्रीकृष्ण के वचनो के आधार पर ये सिद्ध हुआ कि - साई कोई भगवान या अवतार नहीं था । इसे पढ़कर भी जो साई को भगवान या अवतार मानेगा । या ऐसा मानकर साई की पूजा करेगा । वो सीधे सीधे भगवान श्रीकृष्ण का निरादर । और श्रीकृष्ण की वाणी का अपमान कर रहा है । श्रीकृष्ण का निरादर एवं उनकी वाणी के अपमान का मतलब है । सीधे सीधे ईश द्रोह । तो साई भक्तो निर्णय कर लो । तुम्हें श्रीकृष्ण का आश्रय चाहिए । या साई के चोले मे घुसकर अपना पतन की ओर बढ़ोगे । जय जय 

श्री राम ।
जिसमें थोड़ी सी भी अक्ल होगी । उसे समझ मे आएगा कि - ये लेख धार्मिक तौर पर स्पष्ट रूप से सिद्ध कर रहा है कि - साई कोई भगवान या अवतार नहीं था । अगले लेख में सिद्ध करेंगे कि - साई कोई संत या साधु या महापुरुष भी नहीं था । सभी धर्म प्रेमी हिन्दू भाइयो से निवेदन है कि - इस लेख को अपने नाम से कोई भी कहीं भी पोस्ट या कमेंट के रूप में कर सकता है । जय श्री राम
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