18 सितंबर 2012

बच्चे पैदा नहीं किये जाते बनाये जाते हैं


एक बार एक आदमी अपने छोटे से बालक के साथ एक घने जंगल से जा रहा था । तभी रास्ते में उस बालक को प्यास लगी । और उसे पानी पिलाने उसका पिता उसे एक नदी पर ले गया । नदी पर पानी पीते पीते अचानक वो बालक पानी में गिर गया । और डूबने से उसके प्राण निकल गए । वो आदमी बड़ा दुखी हुआ । और उसने सोचा कि - इस घने जंगल में इस बालक की अंतिम क्रिया किस प्रकार करूँ । तभी उसका रोना सुनकर एक गिद्ध । सियार और नदी से एक कछुआ वहाँ आ गए । और उस आदमी से सहानुभूति व्यक्त करने लगे । आदमी की परेशानी जान कर सब अपनी अपनी सलाह देने लगे ।
सियार ने लार टपकाते हुए कहा - ऐसा करो । इस बालक के शरीर को इस जंगल में ही किसी चट्टान के ऊपर छोड़ जाओ । धरती माता इसका उद्धार कर देगी ।
तभी गिद्ध अपनी ख़ुशी छुपाते हुए बोला - नहीं धरती पर तो इसको जानवर खा जाएँगे । ऐसा करो । इसे किसी वृक्ष के ऊपर डाल दो । ताकि सूरज की गर्मी से इसकी अंतिम गति अच्छी हो जाएगी । 
उन दोनों की बाते सुनकर कछुआ भी अपनी भूख को छुपाते हुआ बोला - नहीं ! आप इन दोनों की बातों में मत आओ । इस बालक की जान पानी में गई है । इसलिए आप इसे नदी में ही बहा दो ।
और इसके बाद तीनो अपने अपने कहे अनुसार उस आदमी पर जोर डालने लगे । तब उस आदमी ने अपने

विवेक का सहारा लिया । और उन तीनों से कहा - तुम तीनों की सहानुभूति भरी सलाह में मुझे तुम्हारे स्वार्थ की गंध आ रही है । सियार चाहता है कि - मैं इस बालक के शरीर को ऐसे ही जमीन पर छोड़ दूँ  । ताकि ये उसे आराम से खा सके । और गिद्ध तुम किसी पेड़ पर इस बालक के शरीर को इसलिए रखने की सलाह दे रहे हो । ताकि इस सियार और कछुआ से बच कर आराम से तुम दावत उड़ा सको । और कछुआ तुम नदी के अन्दर रहते हो । इसलिए नदी में अपनी दावत का इंतजाम कर रहे हो । तुम्हें सलाह देने के लिए धन्यवाद । लेकिन मैं इस बालक के शरीर को अग्नि को समर्पित करूँगा । ना कि

तुम्हारा भोजन बनने दूंगा । यह सुन कर वो तीनों अपना सा मुँह लेकर वहाँ से चले गए ।
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हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए । इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए ।
आज यह दीवार परदों की तरह हिलने लगी । शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए ।
हर सड़क पर हर गली में हर नगर हर गाँव में । हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए ।
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं । सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए ।
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही । हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए ।
- दुष्यन्त कुमार

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डा अधिया कहते हैं - The difference between Phobia and fear is that Fear is realistic and Phobia is unrealistic fear. For example, a person can naturally fear Tiger or a Cobra but if some one has terrible fear of Cockroach or a Lizard than it is Phobia. There can be a phobia of Lift, Escalator, Aeroplane, Height, Water etc.
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वही है जिन्दा । जिसकी प्यास जिन्दा है । श्वास लेने का नाम ही जिंदगी नहीं ।
जिन्दा वही है । जिसका विश्वास जिन्दा है ।
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मैं तो अकेला ही चला था । जानिबे मंजिल मगर । लोग साथ आते गए । और कारवा बनता गया ।
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अर्नोल्ड एच ग्लासगो कहतें हैं - फुटबाल कि तरह ज़िन्दगी में भी आप तब तक आगे नहीं बढ़ सकते । जब तक आपको अपने लक्ष्य का पता ना हो ।
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सैमुअल जानसन कहते हैं - परिश्रम और योग्यता से लगभग हर काम संभव हैं । महान काम शक्ति से नही लगन से होतें हैं ।
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अपने सपनों और भविष्य दृष्टि की कद्र करें । क्योंकि वे आपकी आत्मा के शिशु हैं । आपकी चरम उपलब्धियो के ब्लू प्रिंट - नेपोलियन हिल ।
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जीवन में संघर्ष के बिना कुछ हासिल नही होता । किसी कवि ने कहा हैं -
समर में घाव खाता है । उसी का मान होता है । छिपी उस वेदना में । अमर वरदान होता हैं । 

सृजन में चोट खाता है । छेनी और हथौङी से । वही पाषाण कही मंदिर में । भगवान होता हैं ।.
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Heaven and earth belong to us. Yes, they belong to us; we possess them, but inside us. Why should they belong to us outside, materially ? What would we do with all those seas, forests, mountains and stars ? Imagine a very rich man who owns gardens full of all that is most beautiful - flowers , trees , birds , springs , fountains . But business requires him to race around the world, and he spends his
time in planes or in office meetings. He never has time to go for a walk in his gardens, and if he does happen to walk through them, he is so absorbed by his affairs hesees nothing. But there is a

poet who comes there every day. Heis very poor, but he finds every happiness in the song of thebirds, in the fountains and in the colour and scent of the flowers, and he writes wonderful poems. So, who do the gardens belong to ? To the poet. And what about the other man, the owner ? He just pays the taxes .
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अभिमन्यु ने माँ के पेट से ही शिक्षा ली थी । बच्चे वास्तव में पैदा नहीं किये जाते । बनाये जाते हैं । आप जिस रंग का । जिस गुण का । जिस संस्कार का । जिस विशेषता का । बच्चा चाहें । पैदा कर सकती हैं । आज इस चीज का विज्ञान काफी उन्नत हैं । आपको ( पति पत्नी को ) रिलेक्स अवस्था में बैठना है । 10 गहरी साँसे लेनी हैं । और आप जब उनींदी अवस्था में पहुँचें । तब आपको जिस तरह का बच्चा चाहिये । ( गुण । संस्कार । 

सौंदर्य आदि ) उस तरह के गुणों वाला बच्चा आपके आंगन में खेल रहा हैं । ऐसा विजुलायिज करना है । 100% भरोसा रखिये । क्योंकि जों आप विजुलायिज पूरी श्रद्धा से एल्फा अवस्था में करते हैं । वह आपके जीवन में हकीकत बन कर आना ही है ।
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डा अधिया कहते हैं  - Obesity is the biggest health problem in the effluent society. It is said that half of the Americans are obese. Obesity is the wrong programming of mind. Actually our body is the manifestation of our mind. Most of the weight reduction strategy

is imposing certain behavior and habits without touching the mind programming. That is the reason why people bounce back when he/she stops using that strategy. My son Nimish is the example of this mind reprogramming. He was 115 kg and 44” size waist at the age of 18 years. Now he is 85 kg with 34” waist size. He is maintaining that for last 6 years. He has written a book on it - My 10 inch Journey
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The sun rises and celebrates . The sky embraces and celebrates .  Winds blow and celebrate . Rivers flow and celebrate . Birds sing and celebrate . Peacocks dance and celebrate . Trees flower and celebrate . Buds blossom and celebrate .  We smile and serve Meditate and celebrate ~ Sri Sri Ravi Shankar

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You have been given the highest blessing, the most precious knowledge on this planet. You are the Divine Self; you are part of the Self. Walk with that confidence. It is not arrogance. It is, again, Love.
तुम्हे सर्वोच्च आशीर्वाद दिया गया है । इस गृह का सबसे अनमोल ज्ञान दिया गया है । तुम दिव्य हो । तुम परमात्मा का हिस्सा हो । विश्वास के साथ बढ़ो ।  यह अहंकार नहीं है । यह पुनः प्रेम है  - श्री रवि शंकर
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Focus चीजों को संभव बनाता है । जब आप भी अपने goal पर focused रहते हैं । तो मार्ग में आने वाली बाधाएं जल कर ख़ाक हो जाती हैं । आपका रास्ता साफ़ हो जाता है । और आप अपना goal achieve कर पाते हैं ।  Focus आपको सिर्फ यह नहीं बताता कि - करना क्या है ? यह भी बताता है कि - क्या नहीं करना है ? Focus आपको आपके goal से बांधता ही नहीं । आपको बेकार की चीजों में बंधने से बचाता भी है - Dr.Lal
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