01 सितंबर 2012

तू मेरे साथ साथ आसमान में चल


Men are terrified of a woman's depth of love and the energy that moves as a woman's sexuality and emotions… And, at the same time, men want nothing more in this life than to merge completely with a woman's devotional love and wild energy.. Only as a man outgrows his fear can he handle a woman's tremendous love-energy without running… And only such a man is worthy of your devotional offering in a committed intimacy  - David Deida
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एक हिंदू लड़की 6 बच्चे । और सभी को हिन्दुओं के खिलाफ खड़ा करना । यही तो आजकल इस्लाम धर्म वाले लोग कर रहे हैं । अल्लाह उन्हें यही करने की तो शिक्षा देता है । अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें । देखें फ़ोटो ।
http://epaper.hindisaamana.com/
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We all suffer the uncertainty of being hurt by the life that surrounds us, and we all have a changing ring of safety beyond which we are likely to hurt other living things in the guise of self-defense…How often we imagine things are dangerous when they are only doing what comes naturally...This is too much like the dance we do with strangers and loved ones alike…How often we murder parts of ourselves by not letting

things advance or come close...How often we let fear and the swat rule our emotional lives...How often we kill or chase away everything that moves…I think of Francis of Assisi, who held so still the birds landed on his branchlike arms, and we wonder why we are so lonely when we won't let anything full of life come near…If we could only see the bee, or the bird, or our enemy as a brief living center like ourselves, we could let them go on their way without pulling us into opposition  - Mark Nepo
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Give us peace when we're torn…Mend us up when we break …This flesh can be wounded and shaky… When there's much too much travel…For one heart to take
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Love is native to our being…When you are in love with a man or a woman, the love you feel does not come from him or her; it is the love flowing from your own heart that you feel…Your partner is simply giving you an excuse to love - Anonymous 
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♥ तू मेरे साथ साथ आसमान के आगे चल । तुझे पुकारता है तेरा आने वाला कल ।

♥ नयी हैं मंजिलें नये हैं रास्ते । नया नया सफ़र है तेरे वास्ते । नयी नयी है जिन्दगी ।
♥ तू मेरे साथ साथ आसमान के आगे चल । तुझे पुकारता है तेरा आने वाला कल ।
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1992 - Harshad Mehta Scam was worth Rs 5000 Crores.
1994 - Sugar Import Scam was worth Rs 650 Crores.
1995 - Preferential Allotment Scam was worth Rs 5000 Crores.
1995 - Yugoslav Dinar scam was worth Rs 400 Crores.

1995 - Meghalay Forest Scam was worth Rs 300Crores.
1996 - Fertilisers Import Scam was worth 1300 Crores.
1997 - Sukhram telecom Scam was worth Rs 400 Crores.
1997 - Lavalin Power project Scam was worth Rs 374 Crores.
1997 - Bihar Land Scam was worth 1200 Crores
1997 - C R Bhansali stock scam was worth Rs 1200 Crores.
1998 - Teak Plantation Scam was worth rs 8000 Crores.
2001 - UTI Scam was Rs 4800 Crores.
2001 - Dinesh Dalmia Stock Scam was worth Rs 596 Crores.
2001 - Ketan Parekh security scam was worth Rs 1250 Crores.
2002 - Sanjay Agarwal Home Trade Scam was worth Rs 600 Crores.

2003 - Telgi Stamp paper Scam was worth Rs 172 Crores.
2005 - IPO Demat Scam was worth Rs 146 Crores.
2005 - Bihar food relief Scam was worth 17 crores.
2005 - Scorpene submarine Scam was worth Rs 18,978 crores.
2006 - Punjab’s city centre project scam
2006 - Taj Corridor Scam was worth 175 Crores.
2008 - Pune Billionaire Hasan Ali tax default scam was worth Rs 50,000 crores.
2008 - Satyam Scam was worth Rs 10.000 Crores.

2008 - Army Ration Pilferage Scam was worth Rs 5000 crores.
2008 - 2G Spectrum Scam was worth Rs 60.000 Crores.
2008 - State Bank of Saurashtra Scam was worth Rs 95 crores.
2008 - Illegal money in Swiss Bank is worth Rs 71,00,000 Crores.
2009 - Jharkhand Medical equipment scam was worth Rs 130 Crores.
2009 - Rice export scam was worth Rs 2500 crores.
2009 - Orissa Mine scam was worth Rs 7000 crores.
2009 - Madhu Koda scam was worthRs 4000 crores.
2010 - IPL fraud involving swine called Lalit Modi option was worth?

2010 - Commonwealth Games loot is worth?
2011 -
2012 -
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कांग्रेस ने 6-7 साल पहले एक सर्वे कराया कि पता करो कि देश में सही में ग़रीबों की संख्या कितनी हैं ? क्योंकि पहले कोई कहता था कि 25 करोड़ हैं । कोई कहता था कि 35 करोड़ हैं । कोई कहता था कि 37 करोड़ हैं । तो सर्वे कराया । सर्वे के लिये अर्जुन सेन गुप्ता को कहा गया । अर्जुन सेन गुप्ता भारत के बहुत बड़े अर्थशास्त्री हैं । और इंदिरा गांधी के समय से भारत सरकार के आर्थिक सलाहकार रहे हैं । तो उन्होने 3-4 साल की मेहनत के बाद संसद में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की ।
रिपोर्ट कहती है - देश की कुल आबादी 115 करोड़ । और 115 करोड़ में से 84 करोड़ लोग ऐसे हैं । जो एक दिन में 20 रुपये भी खर्च नहीं कर पाते । और 84 करोड़ में से 50 करोड़ लोग ऐसे हैं । जो एक दिन में 10 रुपये भी खर्च

नहीं कर पाते । और 15 करोड़ ऐसे हैं । 5 रुपये भी रोज के नहीं खर्च कर पाते । और 5 करोड़ ऐसे है । 50 पैसे भी रोज के नहीं खर्च कर पाते ।
इसी रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि - भारत में 25 करोड़ परिवार हैं । 11 करोड़ परिवारों ( लगभग 50 करोड़ लोग ) के लिए संडास की कोई व्यवस्था नहीं है । इन परिवारों की माताओं बहनों को खुले में शौंच के लिए जाना पड़ता है । इन्हीं 11 करोड़ परिवारों में हर एक व्यक्ति के पास पहनने के लिए 5-5 मी कपड़ा भी नहीं है ।
हमारे देश में 5.76 लाख गाँव हैं । इनमें 2.75 लाख गाँव ऐसे हैं । जहां पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं है । इन गाँव में हमारी माताओं बहनों को पीने का एक बाल्टी पानी लेने के लिए 5- 10 किमी तक जाना पड़ता है ।
ये हमारे देश भारत की नंगी वास्तविकता । जब वो रिपोर्ट आई । तो सबके रंग उड़ गये कि आखिर 64 मे हमने 

किया क्या ?  इतनी ग़रीबी इतनी बदहाली ।
इस गरीबी का कारण लगभग सभी नेताओं ने बढ़ती हुई जनसंख्या को बताया । जबकि असलियत ये है कि जनसंख्या से गरीबी का कोई संबंध नहीं है ।
1947 में हमारी जनसंख्या 34 करोड़ थी । और अब 115 करोड़ है । हमारी जनसंख्या लगभग 3.5 गुना बढ़ी । तो गरीबी बेरोजगारी भी इसी अनुपात में बढ़नी चाहिए थी । रिजर्व बैंक के आंकड़े कहते हैं कि 1947 में गरीबों की संख्या 4 करोड़ थी । अब आंकड़े बताते हैं कि गरीबों की संख्या है - 84 करोड़ । मतलब जनसंख्या बढ़ी - 3.5 गुना । और गरीबी बढ़ी - 21 गुना । तो गरीबी और जनसंख्या का क्या संबंध ?
1947 में बेरोजगार 2 करोड़ थे । लेकिन आज 20 करोड़ हैं । मतलब जनसंख्या बढ़ी - 3.5 गुना । और बेरोजगारी 

बढ़ी - 10 गुना । तो बेरोजगारी और जनसंख्या का क्या संबंध ?
सबसे अजीब बात है । 1952 में नेहरु ने संसद मे कहा - एक पंच वर्षीय योजना लागू हो गई । तो सारी ग़रीबी मिट जायेगी । तो 1952 में पहली पंच वर्षीय योजना बनाई गई । लेकिन 5 साल बाद देखा गया कि ग़रीबी उलटा और बढ़ गई ।
1957 मे फ़िर बोले - एक और पंच वर्षीय योजना बन गई । तो ग़रीबी खत्म । 1963 आ गया । ग़रीबी नहीं मिटी । फ़िर पंच वर्षीय योजना बनाई । फ़िर ग़रीबी नहीं मिटी । फ़िर 1968 मे बनाई । फ़िर 1972 में । ऐसे करते करते आज 2012 तक कुल 11 पंच वर्षीय योजनायें बन चुकी हैं ।
सरकार के अनुसार एक पंच वर्षीय योजना में लगभग 10 लाख करोड़ का खर्च आता है । तो 11 पंच वर्षीय योजना का खर्च हुआ - 110 लाख करोड़ । अब आप एक मिनट के लिये आप मान लो कि ये खानदानी लूटेरे एक भी पंच वर्षीय योजना ना बनाते । और 110 लाख करोड़ ग़रीबो को नकद ही बांट दिया 

होता । तो एक एक व्यक्ति को 1.5 लाख रुपये । और अगर औसतन 5 लोगों का परिवार माना जाए । तो एक परिवार को (1.5*5) 7.5 लाख रुपये मिल जाते । और सारी ग़रीबी खत्म हो जाती ।
ये 110 लाख करोड़ आपके और हमारे टैक्स का पैसा था । जो ग़रीबों पर तो लगा नहीं । लेकिन सोनिया गांधी विश्व की चौथी अमीर बन गयी । Pratik Sadedar
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I wish I can Kiss u every night before I go to sleep  ♥ ♥ ♥
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