13 अगस्त 2012

आपने खुदा को देखा है ?


आप सब नाम के ही हिंन्दू रह गये हो । आपको गाय के - मांस । खून । हड्डियों । और उनकी अंतड़ियो से बने उत्पाद बेचे जा रहे हैं । और आपको पता भी नहीं चल रहा । स्व. राजीव दीक्षित के एक व्याख्यान के इस वीडियो को अवश्य देखें । तथा इसे अधिक से अधिक शेयर करें । ताकि सभी हिंदू इसे देखें । और इसका लाभ प्राप्त कर सकें ।
वीडियो - http://goo.gl/2I339
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इस शरीर में सबसे बङा चोर । सबसे बड़ा दुश्मन मन है । इसको जीतने की । वश में करने की युक्ति । किसी 

के पास नहीं है । बाहरी क्रियाओं से । पूजा पाठ करने से । तीर्थ वृत करने से । यह मन वश में नहीं होता है । यह चोर और दुश्मन किसका है ? सुरत का । यह बाहरी क्रियाओं से जीता नहीं जा सकता है । यह सहस्र दल कवंल से सुरत के साथ नीचे उतारा गया । इधर लग गया ।  अपने लिए बखेड़ा खड़ा कर लिया । और शब्द छूट गया ।
यह मन दुश्मन भोगों का गुलाम हो गया । और भोग इन्द्रियों के गुलाम बन गये । अब तो महात्मा मिलें । और युक्ति बतायें । हम उनके रास्ते पर चलें । तब यह धीरे धीरे काबू किया जा सकता है । गुरू वचनों की चाबुक से । और भजन से । यह वश में होता है । यह भी अपने आनन्द को छोड़ चुका है । उसी को खोजता है । पर वह आनन्द इसे बाहर कहीं नहीं मिलता ।

जब तक यह धुन से नहीं लगेगा । चुप नहीं होगा । धुन सुनकर यह मस्त होता है । तब चुप होता है ।
सन्तों महात्माओं ने आकर जीवों को समझाया । रास्ता बताया । और कहा - थोड़ा अभ्यास करो । साधन भजन करो । मन को रोको । उसको साथ लेकर सुरत के घाट पर बैठो । जब यह सुरत के घाट पर बैठेगा । और बैठते बैठते इसकी इच्छा उधर जाने के लिए जागेगी । धुन को पकड़ेगा । तब यह इन्द्रियों के घाट पर नहीं जाऐगा ।
बुल्ला साहब थे । खेत में काम कर रहे थे । उनसे किसी ने पूछा - आपने खुदा को देखा है ? तो उन्होंने जवाब दिया - हाँ देखा है । उस व्यक्ति ने पूछा - आपने कैसे पाया ? तो उन्होंने एक

पौधा उखाड़ा । इधर से लेकर उधर लगा दिया । और कहा - बस इतनी देर में ही खुदा को पा लिया । तो ध्यान जो मन आस्था और विश्वास इस दुनियां की तरफ लगा है । उसे इधर से उखाड़ कर उधर लगा दो । लेकिन तुमको किसी से पूछना होगा । तुम किसी से पूछोगे ही नहीं । तो कैसे तुम्हारा काम बनेगा । नामी के पास कैसे पहुंचोगे ? जब नाम को सुनोगे । उसमें लय होगे । तभी तो नामी के पास पहुंचोगे । लय का मतलब होता है । शब्द को पकड़ना । उसके पास पहुँचना । शब्द तुम्हें नामी के पास पहुंचा देगा ।
लोग कहते हैं - परमात्मा निराकार है । पर परमात्मा कभी न तो निराकार था । और न है । वो हमेशा साकार रहा । साकार रहेगा । तुम्हारी दृष्टि बन्द हो गई । इसलिए तुम कहते हो - वह निराकार है । अगर वह - तीसरी आँख । ज्ञान चक्षु । दिव्य दृष्टि खुल जाये । तो वह परमात्मा साकार है । ये भौतिक आँखें बन्द हो जायें । तो यह दुनियां तुम्हारे लिए निराकार है । आंख ठीक हो जायें । तो ये साकार है ।
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