08 अप्रैल 2012

जे कृष्णमूर्ति एण्ड जे के रोलिंग

जे कृष्णमूर्ति या जिद्दू कृष्णमूर्ति का जन्म 12 may 1895 को तमिलनाडु में हुआ था । और इनकी मृत्यु 17 feb 1986 को हुयी । जे कृष्णमूर्ति दार्शनिक तथा आध्यात्मिक विषयों के बेहद कुशल एवं परिपक्व लेखक थे । इन्होंने प्रवचन कर्ता के रूप में बेहद ख्याति प्राप्त थी । जे कृष्णमूर्ति मानसिक क्रान्ति । बुद्धि की प्रकृति । ध्यान । और समाज में सकारात्मक परिवर्तन किस प्रकार लाया जा सकता है ? इन विषयों आदि के बहुत ही गहरे विशेषज्ञ थे ।
जे कृष्णमूर्ति का जन्म तमिलनाडु के एक छोटे से नगर में निर्धन ब्राह्मण परिवार में हुआ था । इनके पिता जिद्दू नारायनिया ब्रिटिश प्रशासन में सरकारी कर्मचारी थे । जब कृष्णमूर्ति केवल 10 साल के थे । तभी इनकी माँ संजीवामा का निधन हो गया । बचपन से ही इनमें कुछ असाधारणता थी । थियोसोफ़िकल सोसाइटी के सदस्य पहले ही किसी विश्व गुरु के आगमन की भविष्यवाणी कर 


चुके थे । श्रीमती एनी बेसेंट और थियोसोफ़िकल सोसाइटी के प्रमुखों को जे कृष्णमूर्ति में वह विशिष्ट लक्षण दिखाई दिये । जो कि एक विश्वगुरु में होते हैं । एनी बेसेंट ने जे कृष्णमूर्ति की किशोरावस्था में ही उन्हें गोद ले लिया । और उनकी परवरिश पूर्णतया धर्म और आध्यात्म से ओत प्रोत वातावरण में हुई ।
थियोसोफ़िकल सोसाइटी के प्रमुख को लगा कि - जे कृष्णमूर्ति जैसे व्यक्तित्व का धनी ही विश्व का शिक्षक बन सकता है । एनी बेसेंट ने भी इस विचार का समर्थन किया । और जिद्दू कृष्णमूर्ति को वे अपने छोटे भाई की तरह मानने लगीं । 1912 में उन्हें शिक्षा के लिए इंगलैण्ड भेजा गया । और 1921 तक वे वहाँ रहे । इसके बाद विभिन्न देशों में थियोसोफ़िकल पर भाषण देने का कृम चलता रहा । जे कृष्णमूर्ति ने सदैव  इस बात पर बल दिया कि प्रत्येक मनुष्य को मानसिक क्रान्ति की आवश्यकता है । और उनका यह भी मत था कि इस तरह की क्रान्ति किन्हीं बाह्य कारक से सम्भव नहीं है । चाहे वह धार्मिक राजनैतिक या सामाजिक किसी भी प्रकार की हो ।
1927 में एनी बेसेंट ने उन्हें विश्व गुरु घोषित किया । किन्तु 2 वर्ष बाद ही कृष्णमूर्ति ने थियोसोफ़िकल विचार

धारा से नाता तोड़कर अपने नये दृष्टिकोण का प्रतिपादन आरम्भ कर दिया । अब उन्होंने अपने स्वतंत्र विचार देने शुरू कर दिये । उनका कहना था कि - व्यक्तित्व के पूर्ण रूपान्तरण से ही विश्व से संघर्ष और पीड़ा को मिटाया जा सकता है । हम अन्दर से अतीत का बोझ और भविष्य का भय हटा दें । और अपने मस्तिष्क को मुक्त रखें । उन्होंने - Order of the star को भंग करते हुए कहा कि - अब से कृपा करके याद रखें कि मेरा कोई शिष्य नहीं हैं ? क्योंकि गुरु तो सच को दबाते हैं । सच तो स्वयं तुम्हारे भीतर है । सच को ढूँढने के लिए मनुष्य को सभी बंधनों से स्वतंत्र होना आवश्यक है ।
कृष्णमूर्ति ने बड़ी ही फुर्ती और जीवटता से लगातार दुनिया के अनेकों भागों में भृमण किया । और लोगों को शिक्षा दी । और लोगों से शिक्षा ली । उन्होंने पूरा जीवन एक शिक्षक और छात्र की तरह बिताया । मनुष्य के सर्वप्रथम मनुष्य होने से ही मुक्ति की शुरुआत होती है । किंतु आज का मानव हिन्दू । बौद्ध । ईसाई । मुस्लिम । अमेरिकी । या अरबी है । उन्होंने कहा था कि - संसार विनाश की राह पर आ चुका है । और इसका हल तथाकथित धार्मिकों और राजनीतिज्ञों के पास नहीं है ।
जिद्दू कृष्णमूर्ति की इस नई विचार धारा की ओर समाज का बौद्धिक वर्ग आकृष्ट हुआ । और लोग पथ प्रदर्शन के लिए उनके पास आने लगे थे । उन्होंने अपने जीवन काल में अनेक शिक्षा संस्थाओं की स्थापना की । जिनमें दक्षिण भारत का ऋषि वैली स्कूल विशेष उल्लेखनीय है । भारत के इस महान व्यक्तित्व की 91 वर्ष की आयु में 17 feb 1986 में मृत्यु हो गई ।
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जे के रोलिंग en J. K  Rowling Joanne Rowling जोन रोलिंग उर्फ़ Joanne Kathleen Rowling जोन कैथलीन रोलिंग आज के ज़माने की सबसे मशहूर लेखिकाओं में से एक हैं । अंग्रेज़ी भाषा में लिखे उनके उपन्यास कृम हैरी पॉटर  21वीं सदी का शायद सबसे मशहूर उपन्यास है ।
जे के रोलिंग ने मिथक और कल्पना की एक नयी और अनोखी दुनिया बनायी है । जिसका मुख्य पात्र हैरी पॉटर है । ये दुनिया जादू और चमत्कार से भरी पड़ी है । हैरी पॉटर ख़ुद एक अनाथ जादूगर है । और वो तन्त्र मन्त्र और जादू टोने के विद्यालय हॉग्वार्टस जाता है । कहानी हैरी की एक आतंकवादी और शैतानी जादूगर वोल्डेमॉर्ट से दुश्मनी के बीच घूमती रहती है । इस सिलसिले में कुल 7 उपन्यास हैं ।
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 साभार - गूगल ।
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