11 मार्च 2012

चिंताहरण

नाम रूप दुइ ईस उपाधी । अकथ अनादि सुसामुझि साधी ।
देखिअहिं रूप नाम आधीना । रूप ज्ञान नहिं नाम बिहीना । ?
रूप बिशेष नाम बिनु जानें । करतल गत न परहिं पहिचानें । 
नाम रूप गति अकथ कहानी । समुझत सुखद न परति बखानी । 
नाम जीह जपि जागहिं जोगी । बिरति बिरंचि प्रपंच बियोगी । 
बृह्म सुखहि अनुभवहि अनूपा । अकथ अनामय नाम न रूपा ।
साधक नाम जपहि लय लाए । होहि सिद्ध अनिमादिक पाए ।
चहू चतुर कहु नाम अधारा । ज्ञानी प्रभुहि बिशेषि पिआरा ।
चहु जुग चहु श्रुति नाम प्रभाऊ । कलि बिशेषि नहिं आन उपाऊ । ?
मोरें मत बड़ नामु दुहू तें । किए जेहिं जुग निज बस निज बूतें । ?    यह कौन सा नाम है
ब्यापक एक बृह्म अबिनाशी । सत चेतन घन आंनद रासी ।
निरगुन ते एहि भांति बड़ । नाम प्रभाउ अपार । कहंउ नामु बड़ राम ते । निज बिचार अनुसार । ?
नाम सप्रेम जपत अनयासा । भगत होहिं मुद मंगल बासा ।
राम एक तापस तिय तारी । नाम कोटि खल कुमति सुधारी ।   नाम की ताकत
नाम गरीब अनेक नेवाजे । लोक बेद बर बिरिद बिराजे ।    नाम की ताकत
नामु लेत भव सिंधु सुखाहीं । करहु बिचारु सुजन मन माहीं ।
फिरत सनेह मगन सुख अपने । नाम प्रसाद सोच नहिं सपने ।
बृह्म राम ते नामु बड़ बर दायक बर दानि । रामचरित सत कोटि मह लिय महेश जिय जानि ।       
नाम प्रसाद शंभु अबिनाशी । साजु अमंगल मंगल रासी । 
नारद जानेउ नाम प्रतापू । जग प्रिय हरि हरि हर प्रिय आपू । 
ध्रुव सगलानि जपेउ हरि नांऊ । पायउ अचल अनूपम ठांऊ । 
कहौं कहाँ लगि नाम बड़ाई । रामु न सकहिं नाम गुन गाई । ??
चहुं जुग तीनि काल तिहु लोका । भए नाम जपि जीव बिसोका । 
नाम कामतरु काल कराला । सुमिरत समन सकल जग जाला । 
डा. संजय चिंताहरण आश्रम से दीक्षा प्राप्ति के बाद लौटकर । इसका विवरण अलग से लेख में प्रकाशित होगा । आपका बहुत बहुत आभार संजय जी ।
एक टिप्पणी भेजें