05 जनवरी 2012

भूत प्रेतों का रहस्यमय संसार

दिल ना उम्मीद तो नहीं नाकाम ही तो है ।  लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है ।
हर ज़र्रा चमकता है अनवार ऐ इलाही से । हर साँस ये कहती है हम हैं तो ख़ुदा भी है ।
सुन लीजिये फुरसत है फिर क्या हो खुदा जाने । कब से हैं मेरे दिल में बेताब कुछ अफ़साने । जोश मलीहाबादी
हमारे शौक़ कि ये इन्तिहा थी । क़दम रखा कि मंज़िल रास्ता थी । जावेद अख्तर
ढूँढता फ़िरता हूँ ऐ इकबाल अपने आपको । आप ही गोया मुसाफ़िर आप ही मंजिल हूँ मैं ।
मुहतसिब एक तस्वीह दो के दानों पे ये  गिनता रहा । किसने पी किसने ना पी किन किन के आगे जाम था । किसी राह रो एक को ये खबर ना होगी । कि इंसान तन्हा भी इक कारवां है । ( निजाम रामपुरी )


इक लफ़्ज ए मुहव्वत का अदना सा फ़साना है । सिमटे तो दिल ए आशिक फ़ैले तो जमाना है ।
ये किसका तसुव्वर है ये किसका फ़साना है । जो अश्क है आँखों में तस्वीह का दाना है ।
हम इश्क के मारों का इतना ही फ़साना है । रोने को नहीं कोई हँसने को जमाना है ।
वो और वफ़ा दुश्मन मानेंगे न माना है । सब दिल की शरारत है आँखों का बहाना है ।
क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क ने जाना है । हम खाक नशीनों की ठोकर में जमाना है ।
वो हुस्न ओ जमाल उनका ये इश्क ओ शबाब अपना । जीने की तमन्ना है मरने का जमाना है ।
या वो था खफ़ा हमसे या हम थे खफ़ा उनसे । कल उनका जमाना था आज अपना जमाना है ।

आँखों के तबस्सुम में आहों के तरन्नुम में ।  मासूम मुहव्वत का मासूम फ़साना है ।
आँखों में नमी सी है चुप चुप से वो बैठे हैं । नाजुक सी निगाहों में नाजुक सा फ़साना है ।
है इश्क ए जुनून पेशा हाँ इश्क ए जुनून पेशा । आज इक सितमगर को हँस हँस के रुलाना है ।
ये इश्क नहीं आसां इतना तो समझ ले । इक आग का दरिया है और डूबकर जाना है ।
आँसू तो बहुत से हैं आखों में जिगर लेकिन । बिंध जाये सो मोती है रह जाये सो दाना है ।
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कुछ तथ्य और ख्यालात -
- In the attitude of silence the soul finds the path in a clearer light, and what is elusive and deceptive 


resolves itself into crystal clearness - Mahatma Gandhi
- Who am I ? When I find out I will tell you .
- अक्सर समझदार व्यक्ति तर्क देते हैं कि - जब तक कारण समाप्त नही होता । असर भी ख़तम नही होगा ।
- शायरी आसान समझ सब गधे करने लगे । कुछ समझ न आया तो वाह वाह करने लगे ।
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भूत प्रेतों की दुनियाँ - भूत प्रेत मृत व्यक्तियों का आभास रूप होते हैं । जो अक्सर मृत व्यक्तियों जैसे ही दीखते हैं । गरुड़ पुराण में भूत प्रेतों के बारे में विस्तार से बताया गया है । श्री मदभागवत पुराण में भी धुंधकारी नाम के प्रेत का वर्णन कथा के आरम्भ में ही है । भूत प्रेत अक्सर उन्हीं स्थानों में दीखते हैं । जिस स्थान से मृत इंसान का अपने जीवन में सम्बन्ध रहा हो । भूत प्रेतों के वास को भुतहा स्थान भूतिया या प्रेतवासा कहा जाता है ।
संसार के लोग भूत प्रेत के अस्तित्व में भले ही यकीन करते हों । या न करते हों । किन्तु ज्यादातर लोगों की भूत प्रेतों में गहरी रुचि होती हैं ।
मरे हुए जानवरों के भूत बन जाने के विवरण भी समय समय पर प्रकाश में आये है । मृत इंसानों द्वारा पशु शरीर के रूप में भूत प्रेत स्थिति में दिखाई देने की बातें भी सामने आयी हैं । भूत प्रेतों से जुङी घटनाओं पर बनी फिल्में तथा TV कार्यक्रम भी बङे स्तर पर लोकप्रिय होते हैं ।
ऐसा माना जाता है कि भूत प्रेतों के शरीर धुंधले । कोहरे के समान । आभासी । और वायु से बने होते हैं । यानी वे

शरीर रहित होते हैं । 2005 के Gallup poll  से पता चलता है - 32% अमेरिकी लोग भूत प्रेतों में विश्वास करते हैं । भूत प्रेत की धारणा मनुष्य जितनी ही पुरानी है । विश्व की ज्यादातर संस्कृतियों के धार्मिक विवरण में भूत प्रेतों का जिक्र मिलता है । अनेकों देशों की संस्कृति में भूत प्रेतों का मुख्य स्थान है । भूत प्रेतों से सम्बंधित कथा कहानियाँ तथा अन्य बहुत सी सामग्री पाई जाती हैं । इतिहास गवाह है कि लोगों का शुरू से ही भूत प्रेतों में बेहद विश्वास रहा है ।
हिन्दू धर्म में - प्रेत योनि । इस्लाम में - जिन्नात आदि का वर्णन होना भूत प्रेतों के अस्तित्व को बताता हैं ।
पितृ पक्ष में हिन्दू लोग अपने पितरों को तर्पण करते हैं । इसका अर्थ है कि पितरों का अस्तित्व आत्मा अथवा भूत प्रेत के रूप में होता है । यह बहुत प्राचीन समय से मान्यता है ।
- फीनिक्स ग्रीक गाथा का एक बेहद  सुंदर व चिर युवा पौराणिक पक्षी है । जो अपनी ही राख से पुनर्जीवित हो उठता है ।
भूत प्रेत का अपसारण अर्थात एक्सॉसिज़्म प्राचीन लैटिन शब्द exorcismus ग्रीक शब्द exorkizein  शपथ देकर बांधना । किसी ऐसे व्यक्ति अथवा स्थान से भूतों या अन्य आत्मिक तत्त्वों को निकालने की प्रथा है । जिसके बारे में विश्वास किया जाता है कि भूत ने उसे शपथ दिलाकर अपने वश में कर लिया है । यह प्रथा अत्यन्त प्राचीन है । तथा अनेक संस्कृतियों की मान्यताओं का अंग रही है ।
यीशु - ईसाई धर्म में भूत प्रेत के उपचार की क्रिया में यीशु की शक्ति का प्रयोग कर किया जाता है । अथवा जीसस 


के नाम पर किया जाता है । उनकी धारणा में यह तथ्य निहित है कि यीशु ने अपने नाम पर अपने अनुयायियों को, दुष्ट आत्माओं को दूर भगाने का आदेश दिया है ।
Matthew 10:1,Matthew 10:8;Mark 6:7;Luke 9:1;10:17;Mark 16:17
- पिशाच उसे कहते है । जो जीवित प्राणियों के जीवन सार खाकर जीवित रहते हैं । आमतौर पर उनका खून पीकर । हालांकि विशिष्ट रूप से इनका वर्णन मरे हुए किन्तु अलौकिक रूप से अनुप्राणित जीवों के रूप में किया गया । कुछ अप्रचलित परम्पराएं विश्वास करती थीं कि पिशाच ( रक्त चूषक ) जीवित लोग थे ।
- मसान 1 प्रकार का श्मशानवासी प्रेत है । मसान का अन्य नाम तोला है । यह बालकों तथा अविवाहितों का असन्तुष्ट मृत आत्मा होता है । मसान का साधारण अर्थ श्मशान भूमि में भटकने वाला प्रेत है । ये लोक विश्वास अनुसार मनुष्यों को हानि नहीं पहुँचाते । तथा इनकी स्थिति अस्थायी होती है । कुछ समय के बाद इनका जन्मान्तर हो जाता है । तथा ये नया जन्म ले लेते हैं । यह कहा जाता है कि कभी कभी ये दूसरे भूतों के समाज से निष्कासित हो जंगलों व एकान्त प्रदेश में भालू या वन्य पशु के रूप में भटकते फिरते हैं
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