10 नवंबर 2011

पुनर्जन्म के कुछ उदाहरण

प्राचीन काल से ही हमारे गृंथो में पुनर्जन्मवाद के सूत्र मिलते हैं । किन्तु आज जिस अर्थ में पुनर्जन्म की जो घटनाएं हमें देखने सुनने को मिलती हैं । हमारे गृंथों में उस प्रकार की घटनाओं का चित्रण नहीं मिलता । पुनर्जन्म की अवस्था में व्यक्ति को पूर्व जन्म की कई बातें याद रहती हैं । किसी अबोध बालक या किसी युवती द्वारा अपने पूर्व जन्म की बातें बताने के जो वृतांत पढने सुनने में आते हैं । कुछ ऐसे ही उदहारण मैं यहां प्रस्तुत कर रहा हूं ।
1 पूर्वजन्म की कहानी - उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर में एक विशाल ताप विधुत परियोजना है । वहीं कार्यरत एक कर्मचारी का 4 वर्षीय पुत्र दिन में जब साइरन की आवाज सुनता है । तो एकदम बेचैन हो जाता है । और बाहर की ओर निकल पडता है । जब उसे कई दिन ऐसा करते देखा गया । तो उसकी मां ने उससे पूछा कि - आखिर तू कहां चल देता हैं ?
उसने अस्पष्ट सी भाषा में जो कुछ बताया । उससे उसके परिवार वाले हतप्रभ रह गए । उसके कहने का तात्पर्य था - लंच का समय हो गया है । घर पर मेरी पत्नी और दोनों बच्चे मेरे साथ खाना खाने के लिये बैठे मेरी राह देख रहे होंगे ।  4 वर्ष का वह बालक स्थान तो भलीभांति नहीं बता पाया । लेकिन वह ज्यों ज्यों बडा होता गया । त्यों त्यों परिवार के विषय में और अधिक चिंताएं प्रकट करता गया । 6 वर्ष तक उसकी यह स्थिति हो गई कि वह घर छोडकर निकल जाता था । पूर्व जन्म में उसकी मृत्यु कैसे हुई ? यह उसे स्पष्ट याद नहीं रह गया था । इस द्वंद्वात्मक स्थिति में उसका मानसिक विकास अवरूद्ध होने लगा था । तभी उस क्षेत्र के एक प्रख्यात तांत्रिक ने किन्हीं विशिष्ट उपायों से उसे पूर्व जीवन का विस्मरण कराया । तब कहीं जाकर वह सहज जीवन जी सका ।
2 पूर्वजन्म की कहानी - 9 वर्ष पूर्व छत्तीसगढ के रायगढ जिले के समीप के एक गांव का 10-11 वर्ष का एक बालक किसी दूसरे गांव में पढता था । एक दिन जब वह स्कूल से आ रहा था । तो अचानक उसे पूर्व जन्म की कुछ स्मृतियाँ हो आईं । और वह उन दोनों गांवों के बीच में ही अपने सहपाठियों को यह कहकर कि - अब मैं यहां से नहीं जाऊंगा । समाधि में बैठ गया । तबसे वह आज तक उस स्थान पर समाधिस्थ है । और पता नहीं । कब तक समाधिस्थ रहेगा । दूर दूर से उसे देखने के लिये प्रतिदिन बहुत से लोग आते जाते रहते हैं । जिंदल फ़ैक्टरी के मालिक ने उसके लिए वहां चबूतरा भी बना दिया है । कभी कभी वहां मेला सा भी लगता है ।
3 पूर्वजन्म की कहानी - यह घटना अंबाला के श्रीकृष्ण स्वरूप जी के साथ की है । जो एक व्यवसायी हैं । एक दिन दिल्ली आते समय उनकी कार एक ट्रक से जा टकराई थी । कार का हाल इतना बुरा हो गया कि आरी से काट काटकर उन्हें निकाला गया था । तब तक उनकी सांसें हल्की हल्की चल रहीं थी । बीच में एक ऐसा समय आया । जब इलेक्ट्रो कार्डियो ग्राम में ह्रदय की धडकनों की स्थिति बताने वाला पर्दा सीधी सपाट रेखा देने लगा था । यह

स्थिति लगभग 4 से 5 मिनट तक रही । और फ़िर सामान्य हो गई । लगभग 6 महीने इन्टेंसिव केयर यूनिट में रहने के बाद जब वह पूर्ण स्वस्थ होकर घर वापस आए । तब उनके आचार विचार में आश्चर्यजनक परिवर्तन आ चुके थे । पहले की शराबखोरी । रासरंग । पार्टियों में आना जाना सब छूट गया । वे देर देर तक कमरे में चुपचाप ध्यानमग्न बैठे रहने लगे । उनके परिवार के सदस्य उनके अंदर आए इस परिवर्तन से हैरान थे । बाद में उन्होंने अपने धनिष्ठ मित्रों को यह रहस्य बताया कि दुर्घटना के पश्चात उन्होंने अनुभव कर लिया कि मृत्यु क्या होती है । उन्होंने अपना अनुभव इस प्रकार बताया - अचानक उनकी देह । उनका अस्तित्व । किसी अंधकार में खो गया है । जहां से निकलने में उन्हें बहुत अधिक छटपटाहट और वेदना हो रही है । अचानक उन्हें ऐसा लगा कि जैसे कोई उन्हें अपनी बांह के स्पर्श से किसी खुले स्थान पर तैराकर ले गया हो । सामने उन्होंने नीली आभा देखी । और नीली आभा से परे हटकर उन्हें एक विचित्र और काली आकृति दिखाई दी । जिसने अपनी मुख मुद्रा को अमरीकी आदिवासी की तरह रंगों और पंखों से सजा रखा था । वह हाथ में भाला तानकर अनजानी और अस्पष्ट सी भाषा में कुछ कह रही थे । और धमका रही थी । या वापस भेजने के संकेत दे रही थी । इसी अवस्था में उन्हें अपनी वायु के समान हल्की देह में पुन: एकदम से गुरूत्वाकर्षण का आभास हुआ । और अचानक वे जीवित हो उठे ।
4 पूर्व जन्म की कहानी - यह कथा उत्तर प्रदेश के जिला सुल्तानपुर के कादीपुर क्षेत्र की है । एक सामान्य ईश्वर भक्त गृहस्थ था । वह पेशे से कृषक था । और उसका एक भरापूरा परिवार था । उसकी एक दिन लगभग 60 वर्ष की आयु में सामान्य रूप से मृत्यु हो गई । सामान्य घटना समझकर परिवार वालों ने अन्त्येष्टि का प्रबन्ध किया । और थोडी दूर स्थित शमशान ले चले । श्मशान स्थल पहुंचकर जब तक लकडी आदि का प्रबंध हो । तब तक शव को एक वृक्ष के नीचे रखकर सगे संबंधी भी विश्राम करने बैठ गए । अचानक वृद्ध के सबसे छोटे पुत्र की निगाह अपने मृत पिता के चेहरे की ओर गई । जिस पर मक्खियां आ रही थीं । उसने उन्हें अपने गमछे से शोक विहवल हो हवा करते हुए पाया कि उसके पिता के होंठ कुछ फ़डक रहे हैं । उसे सहसा अपने आंखों पर विश्वास नहीं हुआ । उनका फ़डकना जारी ही रहा । फ़िर उनके पलकों में भी गति आना आरंभ हो गई । यह देखकर उसने अपने बडे भाइयों को आवाज दी । यह एक असामान्य घटना थी । सभी लोग उसके पास चले गए । तभी किसी रिश्तेदार ने उनके बंधन खोल देने की सलाह दी । ऐसा करने के कुछ देर बार उनके पूरे शरीर में हलचल प्रारंभ हो गई । और लगभग आधे घंटे बाद वह वृद्ध यों उठ बैठा । जैसे उसे कुछ हुआ ही नहीं हो । उसने बताया कि जिस क्षण उसकी मृत्यु हुई । उसी क्षण उसने अपने शरीर से निकलकर और सूक्ष्म शरीर के पास पाया । वह सभी लोगों को भलीभांति देख सुन रहा था । जो उसकी मृत्यु पर शोक कर रहे थे । उसे अपने सभी संबंधी प्रिय तो लग रहे थे । लेकिन अपने इस नए शरीर से वह इतना प्रसन्न था कि उसे किसी के प्रति मोह ममता नहीं रह गई । उसे वहीं खडे

खडे सामने प्रकाश का अनंत पुंज दिखाई दे रहा था । और ऐसी शीतलता अनुभव हो रही थी । जैसी उसने पूरे जीवन में अनुभव नहीं की थी । वह अपने शरीर में लौटना भी नहीं चाह रहा था । उसे ऐसी इच्छा हो रही थी कि वह ऊपर उडता चला जाए । इसी आनंद में उसे अचेतनावस्था आ गई । तभी उसे ध्वनि सुनाई दी कि उसका बहनोई कह रहा है कि इनकी रस्सियां तो ढीली कर दो । और तब भान हुआ कि वह पुन: अपनी देह में वापस आ गया है । उसे लगा जैसे उसका कुछ भाग शेष रह गया हो । और ईश्वर ने उसे पुन: धरती पर भेज दिया हो ।
5 पूर्व जन्म की कहानी -  सीतामढी । बिहार के शिवहर जिले के महुअरिया गांव में 4 वर्षीय आयुष को अपनी पूर्वजन्म की सभी बाते बखूबी याद हैं । उसकी बातों को सुनकर परिजन ही नहीं । बल्कि पूरा इलाका हैरत में है । उदय चंद द्विवेदी को द्वितीय पुत्र आयुष बीते एक सप्ताह से पूर्व जन्म की बातों को धडल्ले से बखान कर रहा है । उसकी मां सुमन देवी बताती है कि पत्र पत्रिकाओं में पढा था कि कुछ लोगों को पूर्व जन्म की बातें याद रहती हैं । परन्तु अब उनके माथे पर ही यह पड गया । वे किसी अनहोनी की आशंका व्यक्त करते हुए कहते हैं कि जो भी हो रहा है । वह उनके परिवार के लिए अच्छा नहीं है ।
इधर 4 वर्षीय आयुष ने बताया कि पूर्व जन्म में उसका नाम उज्जैन सिंह था । तथा उसकी पत्नी का नाम बेबी सिंह और माता वीणा देवी थी । वे 3 भाई थे । जिनका नाम धीरज । नीरज व धर्मेन्द्र था । उसका दिल्ली के एलमाल चौक के रोड नं - 4 में भव्य आवास है । तथा चांदनी चौक की गली नं - 5 में भी एक मकान है । जहां उसके बडे भाई नीरज सिंह रहते हैं । उसके पास दो मारूति कार । एक लाइसेंसी बंदूक । तथा एक पिस्टल । एवं कई मोबाईल फ़ोन थे । उसकी तीन बहनें थीं । और ससुराल बिहार के औरंगाबाद जिले में थी । आयुष का दावा है कि उसकी शादी का जोडा आज भी उसकी अलमारी में सजाकर रखा हुआ है । सोने वाले कमरे में उसका और उसकी पत्नी बेबी सिंह का संयुक्त फ़ोटो टंगा हुआ है । आयुष का कहना है कि वह पूर्व जन्म में भवन निर्माण विभाग में ठेकेदारी का कार्य करता था । और सरकारी भवन बनवाता था । उसका कहना है कि उसने बाबा रामदेव का योग भी त्रिकुट गांव में सीखा था । जो आज भी याद है । 4 वर्ष की उमृ में ही आयुष अच्छी तरह से योग भी कर लेता है । वह कहता है कि एक बार उसका एक्सीडेन्ट हो गया था । जिसमें वह बुरी तरह घायल हो गया था । 21 सितंबर 2006 की सुबह उसे सांप ने काट लिया । जिसके बाद परिजनों ने इलाज कराया । और वह बेहोश हो गया । जिसके बाद उसे कुछ भी याद नहीं है । आयुष की माँ सुमन देवी का कहना है कि यदि आयुष का कहना सत्य है । तो इसकी मौत सांप के काटने से हुई है । और 21 सितंबर 2006 के दोपहर में ही आयुष का जन्म हुआ था । हालांकि उसके बताये गये जगह का सत्यापन कराया जा रहा है । ( दैनिक भास्कर )
6 पूर्व जन्म की कहानी - जय निरंजन के अनुसार - करीब 1990 के आसपास की बात है । मैं कक्षा 7 में पढता था । मेरे गांव महरहा में डाँ. राकेश शुक्ला के 4 वर्षीय बेटे भीम ने अपने माता पिता से यह कहना शुरू कर दिया कि उसका नाम भीम नहीं है । और न ही यह उसका घर है । उसके द्वारा रोज रोज ऐसा कहने पर एक दिन उन्होंने पूछा कि - बेटा ! तुम्हारा नाम भीम नहीं है । तो क्या है ? और तुम्हारा घर यहां नहीं है । तो कहां है ? इस पर भीम ने जो उत्तर दिया । उससे डाँ. शुक्ला आश्चर्यचकित रह गए । उसने जबाब दिया कि - उसका असली नाम सुक्खू है । वह जाति का चमार है । एवं उसका घर बिन्दकी के पास मुरादपुर गांव में है । उसके परिवार में पत्नी एवं दो बच्चे हैं । बडे बेटे का नाम उसने मानचंद भी बताया । आगे उसने यह भी बताया कि वह खेती किसानी करता था । एक बार खेतों पर सिंचाई करते समय उसके चचेरे भाइयों से विवाद हो गया । जिस पर उसके चचेरे भाइयों ने उसे फ़ावडे से काटकर मार डाला था । भीम ने अपने पिता डाँ. राकेश शुक्ला से अपनी पूर्वजन्म की पत्नी और बच्चों से मिलने की इच्छा भी जतायी । मुरादपुर । महरहा से 3-4 किलोमीटर की दूरी पर ही है । इसलिए डाँ. शुक्ला ने एक दिन उस गांव में जाकर लोगों से सुक्खू चमार और उसके परिजनों के बारे में पूछताछ की । तो उन्हें भीम द्वारा बतायी गयी सारी जानकारी सही मिली । डाँ. शुक्ला के मुरादपुर से लौटने के बाद एक दिन सुक्खू चमार की पत्नी अपने दोनों बच्चों तथा कुछ अन्य परिजनों के साथ डाँ. शुक्ला के घर भीम को देखने आयी । यहां पर भीम ने अपने पूर्व जन्म के सभी परिजनों को पहचाना । एवं उन्हें उनके नाम से संबोधित भी किया । पत्नी के द्वारा पैर छूने एवं रोने पर उसने उसे ढाढस भी बंधाया । और उसके सिर पर हाथ फ़ेरा । जब वे लोग भीम से घर चलने के लिए बोले । तो वह सहर्ष तैयार हो गया । लेकिन डाँ. शुकला एवं उनकी पत्नी ने उसे नहीं जाने दिया । इस घटना के बाद भीम अक्सर अपनी पूर्व पत्नी एवं बच्चों से मिलने की बात करता रहता था । इससे डाँ. शुक्ला काफ़ी परेशान भी हुए । बाद में उन्होने भीम की पूर्वजन्म की स्मृति को समाप्त करने के लिए किसी तांत्रिक की सहायता ली । जिसके बाद में भीम की पूर्वजन्म की स्मृति समाप्त हो गयी । वर्तमान में भीम शुक्ला बी.टेक कर रहा है ।
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राजीव जी ! पिछला लेख - पुनर्जन्म विचार काफ़ी बडा हो जाने के कारण कुछ और उदाहरण जो मै देना चाहता था । वो इस मेल के जरिय लिख रहा हूँ । अब अगला मेल आपसे कुछ प्रश्नों के उत्तर हेतु ही लिखूंगा । एक बात तो बतायें जरा - सन्तजनों का आपके आवास पर आवागमन होना । बात कुछ समझ नहीं आयी । आप अपने बारे में तो पहले ही बहुत कुछ बता चुके हैं । तो ये गुत्थी भी सुलझा दीजिये । धन्यवाद । राजू ।
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एकमत या विचारधारा के सन्त आपस में अक्सर मिलते रहते हैं । एक दूसरे के स्थानों पर आना जाना भी होता रहता है । गत 9 वर्ष से मैं अद्वैत सन्तों के सम्पर्क में हूँ । इससे पूर्व द्वैत वालों के सम्पर्क में रहा । इन सभी का ही एक दूसरे के यहाँ आना जाना होता रहता है । लोग सतसंग का आयोजन कराते हैं । अथवा विभिन्न कार्यकृमों में भी सन्त एकत्र होते हैं । खोजयुक्त और अच्छे विषय पर जानकारी युक्त लेख हेतु आपका धन्यवाद ।
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