01 नवंबर 2011

अरे भक्त ! मैं तुझसे ज्यादा परेशान हूँ ।

बहुत दिन हो गये बातें करते करते । आईये आज आपकी भगवान से सीधी मुलाकात करा ही दूँ । हर कोई बस यही तो चाहता है । अच्छा बुरा । वह जैसा भी चाहता है । वैसा ही हो । उसके मनोनुकूल हो । प्रतिकूल बातों । प्रतिकूल लोगों । प्रतिकूल परिस्थितियों से । वह चिङता है । हरेक कोई अगर उसका बस चलता हो । तो दूसरे सभी को फ़्री का नौकर बना ले । और बिना कुछ सेलरी दिये । उससे अपने गुणगान की भी चाहना करे । गौर से अपना आत्मनिरीक्षण करिये । बच्चे से लेकर बूढे तक की । सिर्फ़ यही ख्वाहिश तो है । एज यू लाइक इट । यानी जैसा प्रभु तुम चाहो । कोई नहीं चाहता । बल्कि जैसा मैं चाहूँ । बस यही सबका दुख है । दर्द है । इसी को मिलते जुलते भाव में देहाती बोली में - गरीब की लुगाई । पूरे गाँव की भौजाई..कहा जाता है । यानी हम जैसा चाहे । दूसरों से मजा लें । व्यवहार करें । चलेगा । पर हम VIP हैं । बल्कि VVIP  हैं । हमारे साथ सब कुछ शाही होना चाहिये । हम खास हैं । दूसरे सब कूङा कबाङ ही हैं ।
मैंने अखिल सृष्टि में यही खेल देखा है । क्योंकि बहुत ऊँचाई तक अहम मूल जागृत रहता है । कोई भी लोक लोकान्तर हों । मनी और पावर का ही खेल है । पद और सत्ता का ही खेल है । मुझे बङी हँसी आती है । किसी जादुई तरीके से आप भगवान से मिल भी जाओ । एकदम सामने । और आप कहो - प्रभु मैं बङा परेशान हूँ । तब भगवान एक रूखा सा जबाब देंगे - परेशान हो । तो मैं क्या करूँ । सभी परेशान हैं । फ़िर तुम में ऐसा क्या खास है । जो तुम्हारे लिये कुछ खास किया जाये ।
बात भगवान की है । पहले तो आप यही नहीं जानते । भगवान कौन है । कैसा है ? सबने अपने अपने धर्म चित्रों अनुसार एक काल्पनिक छवि बना रखी है ।  ऐसा होगा । वैसा होगा । क्योंकि देखा किसी ने नहीं है । बस दादा 


परदादा से सुनते आये हैं । और उन्होंने भी कौन सा देखा था । उन्होंने अपने दादा परदादा से सुना भर था । इसलिये यहीं पर तमाम झोलझाल पैदा हो जाती है कि भगवान आखिर कौन है ? कैसा है ? एक है । या बहुत से हैं । किसका भगवान बङा है ? या किस धर्म की बात ऊँची हैं । सदियों से यही झमेला नहीं निबट पाया है । पर सबका एक एक काल्पनिक भगवान अवश्य है । नास्तिक का भी है ।
भगवान मन में सोचेगा - तू तो कुछ खास परेशान नहीं है । मैं तुझसे ज्यादा परेशान हूँ । पूरे प्रशासन की तमाम जिम्मेवारी है । मेरे पास । तब बता । मैं किससे अपना दुख कहूँ ।
यह सच है । भगवान आपसे ज्यादा परेशान है । वह जानता है । मेरे जैसे जाने कितने भगवान हैं । वह भी अपनी गृहस्थी चला रहा है । अस्तित्व और पहचान की जंग में वह भी शामिल है । कुछ समय बाद उसका भी रिटायरमेंट होगा । जितनी टेंशन आपको है । उससे कई गुना ज्यादा भगवान को है ।
जिन्दगी के उदाहरण में यह बात बहुत सरलता से समझी जा सकती है । आपके मामूली से आफ़िसियल काम अटके हैं । किसी बाबू से फ़ाइल पास करानी हैं । किसी DM साहब से एप्लीकेशन पर संस्तुति करानी हैं । किसी यूनिवर्सिटी से सिर्फ़ रिजल्ट निकालने जैसा काम ही कराना है । सोचिये जरा जरा सी मामूली सी बातें लगती हैं । पर इन्हीं मामूली बातों में । जो आपकी क्षमता रेंज में हैं । जो अधिकार में हैं । आप लट्टू की तरह घूम जाते हो । तमाम विषम परिस्थितियाँ उत्पन्न होती है । माउंट एवरेस्ट पर चढने जैसा । बल्कि वो ज्यादा सरल है । प्रभु मैं बङा परेशान हूँ । अरे ! मैं तुझसे ज्यादा परेशान हूँ ।
मैं अक्सर गैस बुक कराने । बिजली की कम्पलेंट के लिये फ़ोन करता हूँ । मामूली सी बात है । सिर्फ़ एक फ़ोन

काल ही तो करनी है । उसका पूरा भुगतान करते हैं । वो हमसे कमा रहे हैं । फ़िर भी देखिये क्या होता है ।
गैस - नम्बर डायल किया - उपभोक्ता अभी व्यस्त है । बात नहीं हो सकती । कृपया दोबारा डायल करें । मेरे जैसे तमाम लोग डायलिंग कर रहे हैं । अतः नम्बर फ़्री नहीं होने वाला । इसलिये उसी स्थिति में लगातार डायल करना है । कब लाइन फ़ी मिले । अक्सर कई कोशिश के बाद बात होती है ।
- नमस्कार ! अजन्ता गैस सर्विस । कहिये मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ ।
मुझे अभ्यास हो चला है । मैं प्रत्युत्तर में कोई नमस्कार नहीं करता । बल्कि उसकी बात ही नहीं सुनता । सीधे सीधे भावहीनता से अपना कनेक्शन नम्बर बताता हूँ । वह सुनते सुनते ही की बोर्ड पर नम्बर दबाता है । और प्राप्त ब्यौरे के अनुसार कनेक्शन स्वामी का नाम सही बुकिंग हेतु क्लियर करता है । मैं यस कहता हूँ । और वह मुझे बुकिंग नम्बर दे देता है । यकीन करिये । इतना काम होने पर ही मुझे लगता है । बहुत बङा काम हो गया ।

क्योंकि बुकिंग का समय निर्धारित है । लगभग 11 to 3 बजे । चूक हो गयी । तो गयी गाङी । अगले दिन तक ।
आपको ये परेशानियाँ मालूम ही होंगी । अतः डिटेल में नहीं जाता । अभी भी बहुत टेंशन बाकी है । गैस आने में देरी हो सकती है । डिलीवरी मैन सिलेंडर में से गैस चुरा ही लेगा । कहीं लीक तो नहीं । चैक करना है । फ़िर चूल्हे से सावधानी से अटैच करना है ।
उदाहरण बोगस लग सकता है । पर मेरी दृष्टि में नहीं है । फ़ुल भुगतान देने पर । नियम के अंतर्गत कार्य । सिर्फ़ महीने भर का इंतजाम । फ़िर भी देखिये । कितना टेंशन युक्त है । कितने साधन परिश्रम सावधानी से संभव हो पाया । एक मामूली काम में क्या क्या करना पङा । फ़ोन न होता । तो ऐजेंसी पर जाना होता ।
यही हाल बिजली का है । शिकायत कर्ता सिर्फ़ मैं ही नहीं हूँ । बहुत हैं । सभी परेशान ही है । कुछ प्रयास के बाद बात होती है । शिकायत कैसे होती है । पता है । अतः उसकी औपचारिक बातें सुनता ही नहीं । यहाँ भी सीधा कनेक्शन नम्बर । कनेकशन धारक का नाम । कौन सा एरिया । कब से नहीं आ रही । आपका ही फ़ेस नहीं आ रहा । या सबका ही नहीं आ रहा । पहले भी कम्पलेंट की क्या ? ये फ़ोन नम्बर आपका ही है । कोई दूसरा भी नम्बर दें । जो किसी कारणवश ये न मिलने पर दूसरे पर बात हो सके । एक लम्बा इंटरव्यू सा हो जायेगा । तब वह आपको 12 डिजिट का कम्पलेंट नम्बर देगा । देगी । जिसको शिकायत पूरी होने तक संभालकर रखना है । जैसे ही हमारी कोई टीम फ़्री होगी । आपके यहाँ भेज दी जायेगी । टोरंट पावर को काल करने के लिये धन्यवाद । आपने अंजली सिन्हा से बात की । शुभ दिन ।
उफ़ ! बहुत बङा काम हो गया । पर असली काम तो अभी हुआ ही नहीं । शुरू भी नहीं हुआ । कई टीमें 24 घण्टे कार्य करती हैं । और कभी कभी रात को 1-2 बजे शिकायत दूर करने आ पाती है । तब नम्बर आता है । फ़ोन पर काल आती है । हम यहाँ गाङी लिये खङे हैं । लोकेशन बताने के लिये आईये । है ना मुश्किल । क्या अब उनसे कह सकते हैं । हम बहुत परेशान हैं । वे कहेंगे - हम आपसे ज्यादा परेशान है । बताईये फ़िर क्या हो ? भगवान जी ! मैं बङा परेशान हूँ । अरे भक्त ! मैं तुझसे ज्यादा परेशान हूँ ।


आपने टीवी में अक्सर एक दृश्य देखा होगा । मन्त्री प्रधानमन्त्री जैसे लोग कभी कभी पदयात्रा जैसे आयोजन करते हैं । तब इन्ही भक्त स्टायल के अशिक्षित ग्रामीण टायप लोग सोचते हैं । बस एक बार प्रधानमन्त्री बात सुन लें । खङे खङे काम हो जायेगा । एक बार किसी टाटा बिरला सेठ से बात हो जाय । दर्शन हो जाये । सब बिगङी बन जायेगी । वह खुद को बहुत चतुर समझता है । वैसे दीन हीन बनता है । अनपढ गंवार बनता है । पर इस मामले में बहुत चतुर है । सयाना है । दुखङा रो देगा । पाँव पकङ लेगा । और वारे न्यारे हो जायेंगे ।
और ऐसा सयाना कोई एक नहीं है । हजारों हैं । लाखों हैं । करोङों हैं । अथाह भीङ है । ऐसे लोगों की । प्रधानमन्त्री गुजरते हैं । भीङ लपकती हैं । हाथों में प्रार्थना पत्र है - माई बाप माई बाप । एकाध का नम्बर आ जाता है । प्रधानमन्त्री को मालूम है - क्या कहेगा ? वास्तव में वो सुनते ही नहीं है । उसकी बात खत्म होने पर इसी के लिये तैनात अधिकारी को - ये काम होना चाहिये । जैसे निश्चित शब्द कहकर एप्लीकेशन थमा देते हैं । अधिकारी के हाथों में प्रार्थना पत्रों का बंडल ही बन गया है । जिसे उसे खूब पता है कि रद्दी की टोकरी में ही जाना है ।
बेचारा प्रधानमन्त्री क्या कर सकता है ? सिस्टम का काम सिस्टम ही करेगा । फ़ाइलों का पेट नहीं भरेगा । जब तक उन्हें डकार नहीं आयेगी । कोई प्रधानमन्त्री कुछ नहीं कर सकता । वह किसी छोटे बाबू का काम है । तो वही करेगा । उसी की कलम से । उसी के हस्ताक्षर से बात बनेगी । प्रधानमन्त्री का हस्ताक्षर नहीं चलेगा । प्रधानमन्त्री जी ! मैं बङा परेशान हूँ । अरे नागरिक जी ! मैं तुझसे ज्यादा परेशान हूँ ।
प्रधानमन्त्री किससे कहे । वाकई वह आपसे ज्यादा परेशान है । वह भी इस विलक्षण सिस्टम के अधीन आता है । प्रधानमन्त्री को आपसे ज्यादा टेंशन है । पर जाने क्यों हर बात में हम एक चमत्कार की उम्मीद रखते हैं । जबकि हरेक सफ़ल शख्सियत या उच्च भक्त का इतिहास गवाह है । उन्होंने जो भी हासिल किया ।  कङी मेहनत और संघर्ष से हासिल किया । भले ही कोई राजा हो । उसका बच्चा कितना ही प्यारा क्यों न हो । वह उसे सफ़ल राजा नहीं बना सकता । जब तक वह भी सिस्टम के कङे परीक्षण से गुजरकर उस पर खरा नहीं उतरता । इस जगह पर

सभी अकेले हैं । और सामने है । कठिन चुनौतियों से भरा सिस्टम । बङे से बङा भगवान भी इस सिस्टम को नहीं बदल सकता । उसमें तिनका भर कोई छेङछाङ नहीं कर सकता ।
इसलिये हरेक को अपने स्तर पर यह युद्ध लङना ही होगा । जिस राज्य सत्ता पद को वह चाहता है ।
और इसलिये भगवान तक पहुँचना ही आसान नहीं है । भगवान तक पहुँचते पहुँचते बहुत कुछ तुम्हारे अन्दर घटित हो जायेगा । बहुत अनुभव बहुत उतार चढाव से तुम गुजर चुके होगे । बहुत संभव है । किसी भगवान से मिलने की इच्छा ही खत्म हो जाये । क्योंकि तब तक आपको पता चल ही जायेगा । भगवान भी इस तन्त्र का एक हिस्सा मात्र है । इस मार्ग को जानने से तुम खुद ही भगवान बन सकते हो ।
जब भी व्यक्ति गम्भीर रूप से कोर्ट कचहरी । रोग । कारावास आदि विभिन्न परिस्थितियों से लम्बे समय तक गुजरता है । तव वह वकील डाक्टर जेलर आदि की सभी खूबियों ज्ञान को बखूबी जान जाता है । एक तरह से ये खुद हो जाता है । कहावत है । पुराना मरीज आधा डाक्टर हो जाता है । बल्कि उससे भी अधिक । क्योंकि डाक्टर सिर्फ़ पढाई के आधार पर इलाज कर रहा है । पर वह इलाज स्वयँ उसके अन्दर घट रहा है । डाक्टर की ही तरह उसे दवाईयाँ । तय खुराक । परहेज आदि सब कुछ याद हो गया । तब वास्तविकता के करीव वह डाक्टर से अधिक है । गौर से समझिये । यही नियम समान रूप से हर जगह हर स्थिति में काम कर रहा है । आप जिसको भी प्राप्त करना चाहते हैं । वही हो जाते हैं । बस परिणाम भाव और मेहनत पर निर्भर करेगा ।  तब कोई भगवान क्या करेगा । उसकी अपनी ही परेशानी बहुत हैं । जो करना है । आपको खुद करना है । और ध्यान रहे । ये युद्ध अकेले ही लङना होता है । यहाँ न कोई माता पिता । न भाई बहन । न पति पत्नी । कोई भी कैसा भी तो नहीं हैं । एक चुनौती देता सख्त सिस्टम है । जिसको एक भाव में क्रूर भी कह सकते हैं । तब जबकि आप कमजोर हैं ।
मैंने बहुत बार कहा । जीवन सिर्फ़ एक पाठशाला है । जिसमें पढकर आपको पद योग्यता अपने बूते पर आगे हेतु हासिल करनी है । अदृश्य आंतरिक सत्ता में जो भी घटित होता है । उसका प्रतीक रूप यहाँ सब कुछ मौजूद हैं । स्वर्ग की बात करो । इसी धरती पर स्वर्ग के वैभव मौजूद हैं । लोग भोग भी रहे हैं । बस अस्थायी हैं । सिर्फ़ 50-70

साल का स्वर्ग । पुण्य सतकर्म ज्ञान के मिश्रण से असली स्वर्ग प्राप्त हो जाये । वह 500 हजार सालों का होगा । और ऊँची स्थिति प्राप्त कर लो । वह 500  लाख साल की होगी । जैसा और जितना प्राप्त कर सकते हो । वह सब आप पर निर्भर है ।
प्रतीक रूप नरक भी यहाँ है । 50-70 साल का नरक । तमाम लोग जीते जी भोग भी रहे हैं । पाप कर्म संचय कर लो । हजारों लाखों साल का असली प्राप्त हो जायेगा । पशुवत जीवन गुजार दो । उसका प्रतीक पशुवत जीते लोग भी मौजूद हैं । साढे 12 लाख साल की 84 कर्मनुसार जितनी भोग में आये । मिल जायेगी ।
यह सब एक सिस्टम ही तो है । और सिस्टम कोई रियायत नहीं करता । कभी नहीं करता । सिस्टम इतना क्रूर है कि न्यायाधीश की कुर्सी पर बैठी माँ गम्भीर अपराध के आरोपी अपने ही पुत्र को मौत की सजा सुनाने पर विवश है । कोई रियायत तभी हासिल होगी । जब वह नियम अनुसार उसका पात्र होगा । देखिये । जब इंसानी कानून की सख्ती का ये हाल है । फ़िर अलौकिक सत्ता कितनी सख्त होगी । जिसके आदेश पर सूरज चाँद तारे और महाशक्तियाँ भयभीत हुयी कार्य करती हैं । तब आप किससे आशा करते हैं । आप दुखी हो । तो इस भाव में वे सब आपसे ज्यादा दुखी हैं । इसलिये झूठी दिलासा की कहानियों पर मत जाईये । और युद्ध करिये । युद्ध ।
अन्तवन्त इमे देहा नित्यस्योक्ताः शरीरिणः । अनाशिनोऽप्रमेयस्य तस्माद्युध्यस्व भारत । 2-18
यह देह तो । मरणशील है । लेकिन । शरीर में बैठने वाला । अन्तहीन । कहा जाता है । इस आत्मा का । न तो अन्त है । और न ही इसका । कोई मेल है । इसलिये । युद्ध करो । हे भारत !
जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च । तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि । 2-27

क्योंकि । जिसने । जन्म लिया है । उसका । मरना निश्चित है । मरने वाले का । जन्म भी । तय है । जिसके बारे में । कुछ किया नहीं । जा सकता । उसके बारे में । तुम्हें । शोक नहीं । करना चाहिये ।
अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि भारत । अव्यक्तनिधनान्येव तत्र का परिदेवना । 2-28
हे भारत ! जीव शुरू में अव्यक्त । मध्य में व्यक्त । और मृत्यु के बाद फिर अव्यक्त हो जाते हैं । इसमें दुखी होने की क्या बात है ।
आश्चर्यवत्पश्यति कश्चिदेन- माश्चर्यवद्वदति तथैव चान्यः ।आश्चर्यवच्चैनमन्यः शृणोति श्रुत्वाप्येनं वेद न चैव कश्चित । 2-29
कोई इसे आश्चर्य से देखता है । कोई इसके बारे में आश्चर्य से बताता है । और कोई इसके बारे में आश्चर्यचित होकर सुनता है । लेकिन सुनने के बाद भी कोई इसे नहीं जानता ।
त्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन । निर्द्वन्द्वो नित्यसत्त्वस्थो निर्योगक्षेम आत्मवान । 2-45
वेदों में 3 गुणों का वखान है । तुम इन तीनों 3 गुणों का त्याग करो । हे अर्जुन ! द्वन्दता और भेदों से मुक्त हो । सत में खुद को स्थिर करो । लाभ और रक्षा की चिंता छोड़ो । और खुद में स्थित हो ।
श्रोतव्यस्य श्रुयदा ते मोहकलिलं बुद्धिर्व्यतितरिष्यति । तदा गन्तासि निर्वेदं तस्य च । 2-52
जब तुम्हारी बुद्धि । अन्धकार से ऊपर । उठ जायेगी । तब क्या सुन चुके हो । और क्या सुनने वाला है । उसमें तुम्हें । कोई मतलब नहीं रहेगा ।
आप सबके अंतर में विराजमान सर्वात्मा प्रभु आत्मदेव को मेरा सादर प्रणाम ।
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