20 नवंबर 2011

अष्टावक्र गीता वाणी ध्वनि स्वरूप - 30

जनक उवाच -  कथं ज्ञानमवाप्नोति कथं मुक्तिर्भविष्यति । वैराग्य च कथं प्राप्तमेतद ब्रूहि मम प्रभो । 1-1
वयोवृद्ध राजा जनक बालक अष्टावक्र से पूछते हैं - हे प्रभु ! ज्ञान की प्राप्ति कैसे होती है ? मुक्ति कैसे प्राप्त होती है ? वैराग्य कैसे प्राप्त किया जाता है ? ये सब मुझे बतायें । 1
अष्टावक्र उवाच - मुक्तिमिच्छसि चेत्तात विषयान विषवत्त्यज । क्षमार्जवदयातोष सत्यं पीयूषवद्भज । 1-2
अष्टावक्र बोले - यदि आप मुक्ति चाहते हैं । तो अपने मन से विषयों ( वस्तुओं के उपभोग की इच्छा ) को विष की तरह त्याग दीजिये । क्षमा । सरलता । दया । संतोष तथा सत्य का अमृत की तरह सेवन कीजिये । 2
न पृथ्वी न जलं नाग्निर्न वायुर्द्यौर्न वा भवान । एषां साक्षिणमात्मानं चिद्रूपं विद्धि मुक्तये । 1-3
आप न पृथ्वी हैं । न जल । न अग्नि । न वायु । अथवा । आकाश ही हैं । मुक्ति के लिये । इन तत्त्वों के । साक्षी । चैतन्यरूप । आत्मा को जानिये । 3
यदि देहं पृथक् कृत्य चिति विश्राम्य तिष्ठसि । अधुनैव सुखी शान्तो बन्धमुक्तो भविष्यसि । 1-4
यदि आप । स्वयं को । इस शरीर से । अलग करके । चेतना में । विश्राम करें । तो तत्काल ही । सुख । शांति । और बंधन मुक्त । अवस्था को । प्राप्त होंगे । 4
न त्वं विप्रादिको वर्ण: नाश्रमी नाक्षगोचर: । असङगोऽसि निराकारो विश्वसाक्षी सुखी भव । 1-5
आप ब्राह्मण आदि । सभी जातियों । अथवा बृह्मचर्य आदि । सभी आश्रमों । से परे हैं । तथा आँखों से । दिखाई न पड़ने वाले हैं । आप निर्लिप्त । निराकार । और इस विश्व के । साक्षी हैं । ऐसा जान कर । सुखी हो जाएँ । 5
धर्माधर्मौ सुखं दुखं मानसानि न ते विभो । न कर्तासि न भोक्तासि मुक्त एवासि सर्वदा । 1-6
धर्म । अधर्म । सुख । दुःख । मस्तिष्क से । जुड़ें हैं । सर्व व्यापक । आपसे नहीं । न आप । करने वाले हैं । और न । भोगने वाले हैं । आप सदा । मुक्त ही हैं । 6
अष्टावक्र त्रेता युग के महान आत्मज्ञानी सन्त हुये । जिन्होंने जनक को कुछ ही क्षणों में आत्म साक्षात्कार कराया । आप भी  इस दुर्लभ गूढ रहस्य को इस वाणी द्वारा आसानी से जान सकते हैं । इस वाणी को सुनने के लिये नीचे बने नीले रंग के प्लेयर के प्ले > निशान पर क्लिक करें । और लगभग 3-4 सेकेंड का इंतजार करें । गीता वाणी सुनने में आपके इंटरनेट कनेक्शन की स्पीड पर उसकी स्पष्टता निर्भर है । और कम्प्यूटर के स्पीकर की ध्वनि क्षमता पर भी । प्रत्येक वाणी 1 घण्टे से भी अधिक की है । इस प्लेयर में आटोमेटिक ही वाल्यूम 50% यानी आधा होता है । जिसे वाल्यूम लाइन पर क्लिक करके बढा सकते हैं । इस वाणी को आप डाउनलोड भी कर सकते हैं । इसके लिये प्लेयर के अन्त में स्पीकर के निशान के आगे एक कङी का निशान या लेटे हुये  8 जैसे निशान पर क्लिक करेंगे । तो इसकी लिंक बेवसाइट खुल जायेगी । वहाँ डाउनलोड आप्शन पर क्लिक करके आप इस वाणी को अपने कम्प्यूटर में डाउनलोड कर सकते हैं । ये वाणी न सिर्फ़ आपके दिमाग में अब तक घूमते रहे कई प्रश्नों का उत्तर देगी । बल्कि एक  मुक्तता का अहसास भी करायेगी । और तब हर कोई अपने को बेहद हल्का और आनन्द युक्त महसूस करेगा ।
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