20 नवंबर 2011

अष्टावक्र गीता वाणी ध्वनि स्वरूप - 28

देहाभिमानपाशेन चिरं बद्धोऽसि पुत्रक । बोधोऽहं ज्ञानखंगेन तन्निष्कृत्य सुखी भव । 1-14
हे पुत्र ! बहुत समय से । आप - मैं शरीर हूँ । इस भाव बंधन से । बंधे हैं । स्वयं को । अनुभव कर । ज्ञान रूपी तलवार से । इस बंधन को । काटकर सुखी हो जाएँ । 14
निःसंगो निष्क्रियोऽसि त्वं स्वप्रकाशो निरंजनः । अयमेव हि ते बन्धः समाधिमनुतिष्ठति । 1-15
आप । असंग । अक्रिय । स्वयं प्रकाशवान । तथा सर्वथा । दोषमुक्त हैं । आपका ध्यान द्वारा । मस्तिष्क को । शांत रखने का । प्रयत्न ही बंधन है । 15
त्वया व्याप्तमिदं विश्वं त्वयि प्रोतं यथार्थतः । शुद्धबुद्धस्वरुपस्त्वं मा गमः क्षुद्रचित्तताम । 1-16
यह विश्व । तुम्हारे द्वारा । व्याप्त किया । हुआ है । वास्तव में । तुमने इसे । व्याप्त किया हुआ है । तुम शुद्ध और । ज्ञानस्वरुप हो । छोटेपन की । भावना से गृस्त मत हो । 16
निरपेक्षो निर्विकारो निर्भरः शीतलाशयः । अगाधबुद्धिरक्षुब्धो भव चिन्मात्रवासन: । 1-17
आप । इच्छा रहित । विकार रहित । घन ( ठोस )  शीतलता के धाम । अगाध बुद्धिमान हैं । शांत होकर । केवल । चैतन्य की इच्छा वाले । हो जाइये । 17
साकारमनृतं विद्धि निराकारं तु निश्चलं । एतत्तत्त्वोपदेशेन न पुनर्भवसंभव: । 1-18
आकार को । असत्य जानकर । निराकार को ही । चिर स्थायी । मानिये । इस तत्त्व को । समझ लेने के बाद । पुनः जन्म लेना । संभव नहीं है । 18
यथैवादर्शमध्यस्थे रूपेऽन्तः परितस्तु सः । तथैवाऽस्मिन् शरीरेऽन्तः परितः परमेश्वरः । 1-19जिस प्रकार । दर्पण में । प्रतिबिंबित रूप । उसके अन्दर भी है । और बाहर भी । उसी प्रकार । परमात्मा । इस शरीर के । भीतर भी । निवास करता है । और उसके बाहर भी । 19
एकं सर्वगतं व्योम बहिरन्तर्यथा घटे । नित्यं निरन्तरं बृह्म सर्वभूतगणे तथा । 1-20
जिस प्रकार । एक ही आकाश । पात्र के भीतर । और बाहर । व्याप्त है । उसी प्रकार । शाश्वत और । सतत परमात्मा । समस्त प्राणियों में । विद्यमान है । 20
अष्टावक्र त्रेता युग के महान आत्मज्ञानी सन्त हुये । जिन्होंने जनक को कुछ ही क्षणों में आत्म साक्षात्कार कराया । आप भी  इस दुर्लभ गूढ रहस्य को इस वाणी द्वारा आसानी से जान सकते हैं । इस वाणी को सुनने के लिये नीचे बने नीले रंग के प्लेयर के प्ले > निशान पर क्लिक करें । और लगभग 3-4 सेकेंड का इंतजार करें । गीता वाणी सुनने में आपके इंटरनेट कनेक्शन की स्पीड पर उसकी स्पष्टता निर्भर है । और कम्प्यूटर के स्पीकर की ध्वनि क्षमता पर भी । प्रत्येक वाणी 1 घण्टे से भी अधिक की है । इस प्लेयर में आटोमेटिक ही वाल्यूम 50% यानी आधा होता है । जिसे वाल्यूम लाइन पर क्लिक करके बढा सकते हैं । इस वाणी को आप डाउनलोड भी कर सकते हैं । इसके लिये प्लेयर के अन्त में स्पीकर के निशान के आगे एक कङी का निशान या लेटे हुये  8 जैसे निशान पर क्लिक करेंगे । तो इसकी लिंक बेवसाइट खुल जायेगी । वहाँ डाउनलोड आप्शन पर क्लिक करके आप इस वाणी को अपने कम्प्यूटर में डाउनलोड कर सकते हैं । ये वाणी न सिर्फ़ आपके दिमाग में अब तक घूमते रहे कई प्रश्नों का उत्तर देगी । बल्कि एक  मुक्तता का अहसास भी करायेगी । और तब हर कोई अपने को बेहद हल्का और आनन्द युक्त महसूस करेगा ।

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