20 नवंबर 2011

अष्टावक्र गीता वाणी ध्वनि स्वरूप - 27

जनक उवाच - अहो निरंजनः शान्तो बोधोऽहं प्रकृतेः परः । एतावन्तमहं कालं मोहेनैव विडंबितः । 2-1
जनक बोले - आश्चर्य । मैं निष्कलंक । शांत । प्रकृति से परे । ज्ञान स्वरुप हूँ । इतने समय तक मैं मोह से संतप्त किया गया । 1
यथा प्रकाशयाम्येको देहमेनं तथा जगत । अतो मम जगत्सर्वमथवा न च किंचन । 2-2
जिस प्रकार । मैं इस शरीर को । प्रकाशित करता हूँ । उसी प्रकार । इस विश्व को भी । अतः मैं । यह समस्त विश्व ही हूँ । अथवा कुछ भी नहीं । 2
स शरीरमहो विश्वं परित्यज्य मयाधुना । कुतश्चित कौशलाद एव परमात्मा विलोक्यते । 2-3
अब शरीर सहित । इस विश्व को । त्याग कर । किसी कौशल द्वारा ही । मेरे द्वारा । परमात्मा का दर्शन किया जाता है । 3
यथा न तोयतो भिन्नास्तरंगाः फेनबुदबुदाः । आत्मनो न तथा भिन्नं विश्वमात्मविनिर्गतम । 2-4
जिस प्रकार । पानी लहर । फेन और बुलबुलों से । पृथक नहीं है । उसी प्रकार । आत्मा भी । स्वयं से निकले । इस विश्व से अलग नहीं है । 4
तन्तुमात्रो भवेद एव पटो यद्वद विचारितः । आत्मतन्मात्रमेवेदं तद्वद विश्वं विचारितम । 2-5
जिस प्रकार । विचार करने पर । वस्त्र तंतु ( धागा ) मात्र ही । ज्ञात होता है । उसी प्रकार । यह समस्त विश्व । आत्मा मात्र ही है । 5
यथैवेक्षुरसे क्लृप्ता तेन व्याप्तैव शर्करा । तथा विश्वं मयि क्लृप्तं मया व्याप्तं निरन्तरम । 2-6
जिस प्रकार । गन्ने के रस से बनी शक्कर । उससे ही व्याप्त होती है । उसी प्रकार । यह विश्व । मुझसे ही बना है । और निरंतर । मुझसे ही व्याप्त है । 6
आत्मज्ञानाज्जगद भाति आत्मज्ञानान्न भासते । रज्वज्ञानादहिर्भाति तज्ज्ञानाद भासते न हि । 2-7
आत्मा । अज्ञानवश ही । विश्व के रूप में । दिखाई देती है । आत्म ज्ञान होने पर । यह विश्व । दिखाई नहीं देता । रस्सी अज्ञानवश । सर्प जैसी । दिखाई देती है । रस्सी का ज्ञान हो जाने पर । सर्प दिखाई नहीं देता है  । 7
अष्टावक्र त्रेता युग के महान आत्मज्ञानी सन्त हुये । जिन्होंने जनक को कुछ ही क्षणों में आत्म साक्षात्कार कराया । आप भी  इस दुर्लभ गूढ रहस्य को इस वाणी द्वारा आसानी से जान सकते हैं । इस वाणी को सुनने के लिये नीचे बने नीले रंग के प्लेयर के प्ले > निशान पर क्लिक करें । और लगभग 3-4 सेकेंड का इंतजार करें । गीता वाणी सुनने में आपके इंटरनेट कनेक्शन की स्पीड पर उसकी स्पष्टता निर्भर है । और कम्प्यूटर के स्पीकर की ध्वनि क्षमता पर भी । प्रत्येक वाणी 1 घण्टे से भी अधिक की है । इस प्लेयर में आटोमेटिक ही वाल्यूम 50% यानी आधा होता है । जिसे वाल्यूम लाइन पर क्लिक करके बढा सकते हैं । इस वाणी को आप डाउनलोड भी कर सकते हैं । इसके लिये प्लेयर के अन्त में स्पीकर के निशान के आगे एक कङी का निशान या लेटे हुये  8 जैसे निशान पर क्लिक करेंगे । तो इसकी लिंक बेवसाइट खुल जायेगी । वहाँ डाउनलोड आप्शन पर क्लिक करके आप इस वाणी को अपने कम्प्यूटर में डाउनलोड कर सकते हैं । ये वाणी न सिर्फ़ आपके दिमाग में अब तक घूमते रहे कई प्रश्नों का उत्तर देगी । बल्कि एक  मुक्तता का अहसास भी करायेगी । और तब हर कोई अपने को बेहद हल्का और आनन्द युक्त महसूस करेगा ।

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