15 जुलाई 2011

लेकिन अफ़सोस वो मुझे भूल गयी ।

वाह..राजीव राजा ! तुम बहुत अच्छे आदमी हो । अरे जब अंकल बढिया आदमी है । तो भतीजा तो 4 कदम आगे ही होगा ।
ससुरे लोग कहते है कि - धर्मेन्द्र और हेमा मालिनी की जोङी शानदार है । मैं कहता हूँ कि जोङी हो तो " विनोद त्रिपाठी और राजीव कुमार " जैसी । अंकल शेर है । तो भतीजा बब्बर शेर है ।
अरे राजा ! तेरी और मेरी । हम दोनो की जोङी है - जोङी न. 1
लेकिन भईया ! साला जमाना बहुत खराब है । मैं 1 बार बस से कही जा रहा था । भीड बहुत थी । इसलिये सीट नहीं मिली । मैं

खडा था । कुछ और लोग भी खडे थे ।
मेरे बिल्कुल सामने 1 औरत थी । उसकी पीठ मेरी तरफ़ थी । लेकिन उसकी पीठ मेरी तरफ़ होते हुये भी मुझे लगा कि - मैंने इसे कहीं देखा है ।
मैंने अपना मुँह उसके कान के नजदीक लाकर धीरे से पूछा - मैंने आपको कहीं देखा है ।
वो औरत तुरन्त पलटी । और अपना चेहरा दूर करके । मेरी तरफ़ थोडी देर के लिये गौर से देखा ।
और बोली - चल हट ठरकी ।
मैंने कहा - हैं ।
बस जब रूकी । तब सब अपने अपने रास्ते चल पङे ।
लेकिन मैं सोचता रहा कि - मैंने उस औरत को कहाँ देखा है ? उसकी चाल ढाल कुछ पहचानी हुई सी लग रही थी । तब याद आया कि - ये तो मेरे पडोसी के दूर के साले की पत्नी थी । जिसे मैं

सिर्फ़ 1 बार मिला था । किसी की शादी में । मैंने तो उसे याद रखा । अपने दिल में । लेकिन अफ़सोस वो मुझे भूल गयी लेकिन राजीव राजा ! वादा करो । तुम मेरा साथ मत छोडना ।
इस बात पर मुझे 1 बात और याद आ गयी । किसी आदमी की नयी नयी शादी हुई । शादी के 1 दिन बाद ही उसकी पत्नी भाग गयी । आदमी को भी शक हो गया कि - काम खराब हो गया ।
वो आदमी सोचों में डूबा रहा कि - अब क्या करूँ ? उसके मन में विचार आया कि पुलिस के पास जाऊँ । लेकिन उसने सोचा । ऐसे अकेले पुलिस के पास जाना शायद ठीक न होगा । पहले ससुराल जाता हूँ । जिनकी लङकी भागी है । पहले उनको तो खबर करुँ ।

वो अपने ससुराल पहुँचा । बाहर उसके साले का सबसे छोटा बेटा पप्पू आम चूस रहा था । वो आदमी जाकर पप्पु को बोला - बेटा ! मैं तेरा फ़ूफ़ा...।
पप्पू चुपचाप बैठा आम चूसता रहा ।
वो आदमी थोडा हैरानी से फ़िर बोला - मैं तेरा फ़ूफ़ा हूँ । मुझे नहीं पहचाना । मैं ये कहने आया था कि - तेरी बुआ किसी के साथ भाग गयी ।
पप्पू ने उस आदमी की तरफ़ देखा । और फ़िर से चुपचाप बैठकर आम चूसने लगा । वो आदमी थोडा गुस्से से बोला - अबे मुझे पहचान । मैं तेरा फ़ूफ़ा हूँ । और तेरी बुआ किसी के साथ भाग गयी है ।
तब पप्पू ने भी थोडा सा गुस्से में करारा जवाब देते हुये कहा - तू कहाँ से फ़ूफ़ा है । असली फ़ूफ़ा तो अब वो है । जिसके साथ भाग गयी ।
अब 1 बात और याद आ गयी । 1 आदमी अकेला किसी की शादी में गया । जैसे अक्सर टुच्चे लोग करते हैं । उसने भी वैसा ही किया । मुफ़्त का माल था । इसलिये पहले तो ढेर सारे गरम गरम पकोङे खा गया । उसके बाद एक साथ कई गिलास कोल्ड ड्रिंक के पी गया ।
फ़िर वो ही हुआ । जो होना था । उसका गला बैठ गया । अब आवाज मर मर कर निकल रही थी । बहुत धीरे बोला जा रहा था ।
खैर.. श्रीमान जी अपने घर आ गये । रात के 11 बजे हुए थे । पत्नी ने जब पूछा । तो उसने बहुत धीरे धीरे थोङा जोर लगाते हुये अपनी प्राब्लम बता दी ।
पत्नी ने कहा - जाओ किसी डाक्टर के पास चले जाओ । दवा ले आओ ।
तब वो आदमी थोङा मुश्किल से बहुत धीरे से बोल पाया - डाक्टर की क्लीनिक तो अब तक बन्द हो चुकी होगी । किसी डाक्टर के घर ही चला जाता हूँ ।
इतना कहकर वो नजदीक ही किसी डाक्टर के घर की तरफ़ चल दिया । डाक्टर के घर पहुँच कर उसने दरवाजे की घन्टी बजाई । दरवाजा डाक्टर की पत्नी ने खोला ।
तब उस आदमी ने बहुत ही धीरे से बोला - क्या ...डाक्टर...साहब... घर...पर... हैं ।
तब डाक्टर की पत्नी ने पहले बाँये देखा । फ़िर दाँये देखा । और कहा - नहीं डाक्टर साहब कहीं गये हुये हैं । आ जाओ ।
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प्रस्तुतकर्ता - श्री विनोद त्रिपाठी जी । प्रोफ़ेसर । भोपाल । मध्य प्रदेश । ई मेल से । त्रिपाठी जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।
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