11 जुलाई 2011

बन्नो तेरा बन्ना लाख का - स्वागतम सुप्रिया जी ।

5 july 2011 को मेरे सगे भान्जे इंजीनियर मयंक का शुभ विवाह संपन्न हुआ । मयंक एक उच्च कंपनी में उच्च वेतनमान पर कार्य करते हैं । 









मयंक अपने आफ़िस में । विवाह से पहले ।

         
                                                    सुप्रिया जी विवाह से पहले ।

वधू सुप्रिया कुलश्रेष्ठ जी भी मेरी नजर में आदर्श ही हैं । इनके माता पिता दोनों ही नहीं हैं । इस बात पर भी हमारे परिवार का झुकाव एकदम सुप्रिया जी की तरफ़ हुआ । सुप्रिया जी के सिर्फ़ एक भाई और एक बहन हैं । 



चल दिये दूल्हे राजा । पीछे कहाँ देख रहो भाई । आगे देखो । अब बहुत बङी जिम्मेदारी आने वाली है ।


अभी तो बहुत खुश हो बच्चू । अब आपको आलू प्याज का भाव पता रहेगा । शादी वो लड्डू जो खाये सो पछताये । जो ना खाये सो पछताये ।


महज 25 वर्ष की ( आज की तारीख में ) आयु में मयंक 3 बङे प्रोजेक्ट पर सफ़लता पूर्वक कार्य कर चुके हैं । और उन्हें आत्मनिर्भर हुये लगभग 7 साल हो चुके हैं ।


इस विवाह की खासियत ये थी । जिस हेतु मैंने खास तौर पर इसका जिक्र किया । ये पूर्णतः दहेज रहित विवाह था । हालांकि मयंक चाहते । तो मोटा दहेज प्राप्त कर सकते थे ।


वधू सुप्रिया कुलश्रेष्ठ जी भी मेरी नजर में आदर्श ही हैं । इनके माता पिता दोनों ही नहीं हैं । इस बात पर भी हमारे परिवार का झुकाव एकदम सुप्रिया जी की तरफ़ हुआ । सुप्रिया जी के सिर्फ़ एक भाई और एक बहन हैं । 


इस विवाह की एक और खासियत ये थी कि वर वधू ने शादी का पूरा खर्च अपनी अपनी अर्जित कमाई से ही किया । वधू ने अपनी तरफ़ का । वर ने अपनी तरफ़ का ।


ये वधू के पैर में गुदगुदी क्यों कर रहीं हैं । यह मेरी समझ में नहीं आया । ये कौन सी रस्म है भाई ?
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