11 मई 2011

हर गलती का दन्ड निश्चित ही मिलता है ।

नमस्ते राजीव जी ! मैं आपका गुमनाम पाठक । दिल्ली से । जो अकसर आपका ब्लाग रात के 12 बजे के बाद ही पढता है । आज मैं गुमनामी खतम कर रहा हूँ । मैं भी आज आपको अपना पूरा परिचय देना चाहता हूँ । और अगर हो सका । तो शायद आपसे मिलने कभी आगरा भी आ जाऊँ ।
मेरा नाम पप्पू पाण्डे है । मैं दिल्ली में अपने परिवार के साथ रहता हूँ । मैं दिल्ली से थोडा दूर 1 प्राईवेट नौकरी करता हूँ । मैं आज आपसे अपनी तरफ़ से कोई सवाल नहीं पूछ्ना चाहता ।
आपके 1 पिछ्ले लेख " ये छिपकली जब इन्सान थी " में आपने लिखा था कि - लेख अब बडा होता जा रहा है । इसलिये कुछ बातें अगली बार अगले लेख में लिखेंगे ।

तो राजीव जी मेरी बिनती भी है । और जिग्यासा भी कि उस लेख में जो बातें अधूरी रह गयी थी । आप उन्हें आज नये लेख द्वारा पूरा करें । जैसे - दायाँ पैर कटी गाय का प्रसंग । महाभारत युद्ध में । रण्क्षेत्र में टिटहरी चिडिया के बच्चे कैसे बचे ? आपके द्वारा पाले गये जानवर.. हिरण । खरगोश और 3 कुत्तों के बारे में । जिन्दगी के पहले 13 साल की आयु तक आपके द्वारा हुई नादानी में हुई 3 हत्या 2 मेंढक और 1 गिलहरी और उनका फ़ल । जो इसी जन्म में आपको मिला ।
इन सब घटनाओं का मानव जीवन से क्या सम्बन्ध है । इसके आध्यात्मिक पहलू क्या हैं ? हमारी मामूली सी गलती क्या परिणाम देती है ? आप इन सभी के सभी प्रश्नों का विस्तार सहित उत्तर अपने आने वाले लेख में देने की कोशिश करें । मुझे बेसब्री से आपके लेख का इन्तजार रहेगा ।
मैं आज अपनी फ़ोटो भी भेज रहा हूँ । जिसमें मैं..मेरी पत्नी और बेटी है । ये भी बताये कि आपने कहा था कि आपके अब अगले भोग जनम हैं ही नहीं । ये कैसे ? और ये भी बतायें कि आपको हँसदीक्षा लिये हुये 8 साल हो चुके । तो क्या अब आपको परमहँस दीक्षा मिल गयी है । या मिलने वाली है । दिल्ली से.. पप्पु पाण्डे ।
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महाभारत युद्ध में । रण्क्षेत्र में टिटहरी चिडिया के बच्चे कैसे बचे ?
- यह बङा रोचक ऐतहासिक धार्मिक और प्रेरणादायी सच्चा और महत्वपूर्ण प्रसंग है । महाभारत युद्ध की घोषणा हो चुकी थी । { अभी विस्तार से बचने हेतु थोङी देर के लिये मान ही लें  कि पशु पंछी भी ऐसी बातों का न सिर्फ़ अहसास करते हैं । उन्हें बहुत कुछ पता भी होता है । } चिङिया युद्ध  को लेकर बहुत चिंतित थी । उसके अंडे ठीक युद्धभूमि में थे । और बङे हो जाने से शिफ़्ट नहीं हो सकते थे । अतः वह बेहद दुख में डूबने लगी । यहीं उसकी फ़रियाद कबूल हो गयी । यह भी पूरा अलग ही और बङा मामला है ।
युद्ध  के समय एक बङा गज घंटा हाथी के गले से टूटकर इस तरह अंडो पर गिरा कि पूरे युद्ध में मजबूत कवच का काम करता रहा । पूरे युद्ध में हजारों योद्धा रथ हाथी घोङे उसके ऊपर से गुजरे । पर अंडे सेफ़ रहे । युद्ध के  बाद एक मुनि उधर से गुजर रहे थे । उन्होंने तब तक निकल आये बच्चों की चहचहाहट सुनकर उन्हें बचा लिया ।


नादानी में हुई 3 हत्या 2 मेंढक और 1 गिलहरी - कक्षा 9 में मैंने साइंस बायोलोजी ली थी । जिसमें पहले बङी कक्षा द्वारा डिसेक्सन द्वारा बाद में रासायनिक लेप लगी बची हुयी हड्डियों  को टीचर कक्षा में बाँट देता था । और उनके नाम पूछता था । इसी उद्देश्य हेतु मैंने कूँये के एक मेंढक को ऊपर से ईंट मार मार कर मार डाला । बाद में बाल्टी से निकालकर उसे उबाला । और हड्डियाँ निकाली । दूसरा ऐसा ही मेंढक  प्रोग्राम मैंने दोस्तों हेतु स्टायल में आकर किया ।
गिलहरी - कंजङ जाति के कुछ लोग जब मैं नदी पर गया हुआ था । अचानक आकर गुलेल से गिलहरियों को मारने लगे । गिलहरियाँ उन्हें देखते ही चीं चीं करके भागने लगी । पर सामान्य बच्चों से उन्हें  डर नहीं लगता था । और बाद में कंजङों ने एक पैनी पत्ती से उनकी पूँछ  काटकर बाकी शरीर नदीं में फ़ेंक दिया । मेरे साथी ने बताया ।  पूँछ से ब्रुश बनाया जाता है । मुझे भी लालच आ गया । और मैंने दीवाल के  छेद में बैठी गिलहरी को मार डाला । फ़िर उन लोगों की ही तरह मैंने उसकी  पूँछ काटने की बेहद कोशिश की । पर ये काम मुझसे न हुआ । अन्त में मैंने उस गिलहरी को ऐसे ही दफ़ना दिया । मैंने उसे एक आलमारी में छुपा दिया था । और रोज देखता था । इन हत्याओं को याद करके मैं बेहद रोता था । पर जो होना था । हो चुका था । इसका मुझे भयंकर दन्ड मिला । हर गलती का दन्ड निश्चित ही मिलता है ।
अब अगले भोग जनम हैं ही नहीं - सच्चे योग में किसी भी साधक को अपनी स्थिति पता होती है । वाल्मीक नारद घट जोनी । निज निज मुखन कही निज होनी । ये अनुभव की बात अधिक है । बजाये बताने के  ।
क्या अब आपको परमहँस दीक्षा मिल गयी है - जमाना गुजर गया । ये सब स्पष्ट बताया नहीं जाता । समझने की कोशिश करें ।
 इसके आध्यात्मिक पहलू - इंसान के द्वारा जो भी होता है । अच्छा या बुरा । उसका फ़ल हर सूरत में भोगना होता है । इसलिये एक एक कदम सोच समझकर उठाना चाहिये । शेष फ़िर कभी । धन्यवाद ।
 नोट - की बोर्ड में कुछ प्राब्लम आ गयी है । अतः सभी उत्तरों में बिलम्ब हो सकता है ।
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