07 जनवरी 2011

भाई भीम । तुम क्या खाते थे ??


Rajesh Kumar 'Nachiketa' । पोस्ट  तो विचारे बन्दरों का कितना भला होगा ??  पर । एक बात भीम द्वारा हाथी ऊपर फेंकने के सन्दर्भ में । पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत है । जिसकी व्याख्या के सन्दर्भ में आता है कि किसी गुरुत्वा विभव से । एक नियत वेग से । अगर किसी भी पिंड को गुरुत्वबल के विपरीत फेंका जाए । तो वो उस गुरुत्वाकर्षण के क्षेत्र से बाहर चला जाता है । और उस पर वापस गुरुत्वबल काम नहीं करता है । पृथ्वी के भार और गुरुत्वाकर्षण के नियतांक को जानते हुए गणना की जाए । तो पता चलता है कि पृथ्वी के लिए । ये वेग है 11.2 किमी । घंटा है । मतलब । अगर भीम ने हाथी को इससे ज्यादा वेग से फेंका हो । तो वो कभी वापस नहीं लौटेगा । जो कि संभव है । हुआ होगा ? अन्य बातों की जानकारी के लिए धन्यवाद ।
*** राजेश जी । अपने जीवन में इस तरह के प्रसंगो वाली चर्चा से मेरा खूब वास्ता रहा है । दरअसल हम किसी बात को सोचते समय उस पर ठीक से विचार  नहीं करते । इस सम्बन्ध  में जो सबसे मजेदार बात मुझे लगी । किसी ने कहा था कि हनुमान जी की क्षमता उडकर प्रथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकल जाने की थी । इसके बाद वे मुक्त अंतरिक्ष में उडते रहते थे । अगर ऐसा होता भी । तो बात एकदम सटीक ही थी । पर ऐसा था नहीं ? आपको पता होगा । जब हनुमान जी लंका पहुंचे थे । और सीताजी ने उनसे पूछा कि तुम इतना बडा सागर कैसे लांघकर आये ? तब हनुमान जी ने कहा ।.. प्रभु मुद्रिका मेलि मुख मांही । जलधि लांघ गयो अचरज नाहीं ? आज भी लोग समझते हैं कि राम द्वारा दी गयी अंगूठी का ये कमाल था ??  पर हम ये भूल जाते हैं कि अंगूठी से कोई जा सकता  था । तो फ़िर सागर तट पर कौन जायेगा ? और कैसे जायेगा ? इस बात पर वानर सेना द्वारा घंटो विचार विमर्श की क्या आवश्यकता थी ? और यदि अंगूठी वाली बात हजम भी कर ली जाय । तो अंगूठी तो वह सीताजी को दे आये थे । फ़िर वापस  किस तरह आये ? दरअसल हनुमान जी के पास योग की खीचरी  ( जीभ को उलटकर ब्रह्मरन्ध्र तक पहुँचाकर स्थिर करने के अभ्यास से मिलती हैं । ) मुद्रिका थी । 5 मुद्रिका हंस की हैं । और 5 परमहंस की होती हैं । इसके अतिरिक्त हनुमान जी पर आठ सिद्धियां । और नौ निधियां अलग थी ।
अब जैसा कि आपने भीम के बारे में बात की है । कहा जाता है कि भीम में दस हजार हाथियों का बल था । ये भी कहा जाता है कि भीम कहीं मटरगश्ती करने जाते थे । तो एक मन चबैना चबाने के लिये कंधे पर लटका लेते थे ? अगर आपने आल्हा सुनी होगी । तो उसमे कई जगह आता है ।..ऐसा चमचा था । महोबे में । जा में नौ मन दार ( दाल ) समाय ?? अब सोचिये नौ मन दाल परोसने वाला चमचा कोई आदमी कैसे उठाता होगा ?? इस पर विचार करते हुये । हम एक तथ्य पर सोचते हैं कि आजकल शक्ति मापने के लिये हार्स पावर ( यानी घोडों की शक्ति ) का इस्तेमाल बाइक से लेकर ऐरोप्लेन के इंजन तक किया जाता है । लेकिन आप पुराण में पावर की तुलना के लिये हाथी पावर का ही इस्तेमाल पायेंगे । वहां घोडे का इस्तेमाल कहीं नहीं हुआ । जबकि उस वक्त भी घोडे होते थे । मैंने कई बार इस पर विचार किया । हाथी । घोडे की तुलना में शारीरिक रूप से निश्चय ही पावरफ़ुल होता है । लेकिन घोडे  जितना और लगातार दौड नहीं सकता ।..यहां एक बात सोचने की है । हाथी में अगर शक्ति होती है । तो उसका विशालकाय शरीर भी होता है । एक शेर ओर एक घोडा । अगर किसी तरह हाथी जितने शक्ति वाले हों जायें । तो भी वे अपने शरीर से एक मोटे पेड को नहीं गिरा पायेंगे । जिस तरह हाथी गिरा देता है । तो अगर भीम में दस हजार हाथियों का बल था । तो उसके शरीर का  माप क्या रहा होगा ?? क्योंकि जितनी अधिक शक्ति ? उसके अनुसार शरीर की कुछ तो विशालता होनी ही चाहिये । अब आप एक हाथी का शरीर देखते हुये ।  दस हजार हाथी की शक्ति वाले भीम के शरीर की कल्पना करें ??
अब यहीं पर प्रसंगवश आपको एक बात और बताता हूं । कंस के द्वारा भेजा गया राक्षस उत्कच । जो किसी मुनि के शाप से अशरीरी हो गया था । उसने बालक कृष्ण को छकडा गिराकर मार देने की कोशिश की ।
छकडा बालक कृष्ण के पालने के इतने ऊपर गिरकर जमीन में धंस गया कि नन्हें कृष्ण का पैर छकडे को छूने लगा । उन्होंने पैर की उंगली से छकडे में धक्का मारा । और छकडा चक्रवाती रूपी उत्कच राक्षस को आसमान में ले गया । और फ़िर गिराकर मार दिया । सवाल ये है कि बालक कृष्ण के पैर ने कौन से बल का यूज किया था ?? क्योंकि भीम का हाथी को फ़ेंकना । और कृष्ण का उत्कच को फ़ेंकने में एक ही बल था ?? जिसको योगबल कहते हैं ।  और जिसमें शरीर के आकार या आहार से कोई लेना देना नहीं होता । बल्कि ये संसार को क्रियाशील रखने वाली महाशक्ति कुन्डलिनी के योग से होता है । जिसका स्थान हमारे शरीर में नाभि से नीचे । और रीढ की हड्डी के कूल्हे की हड्डी से मिलने के स्थन पर हैं । तो वास्तव में भीम द्वारा हाथी को उछाल देना कोई बडी बात नहीं थी । और  मैं आपसे सहमत हूं कि उसका अंतरिक्ष में चले जाना भी कोई बडी बात नहीं थी । पर उस लेख में मैंने विस्तार से बचने के लिये अधिक जिक्र न करते हुये बात  खत्म कर दी थी । वास्तव में महाभारत और रामायण जैसे युद्ध मानवीय शक्ति से न लडकर योग और मायावी शक्तियों द्वारा लडे गये थे ।
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