24 दिसंबर 2010

तेरी सत्ता के बिना । हिले न पत्ता । खिले न एक हू फ़ूल ।

लेखकीय-- मुंबई के । श्री विजय तिवारी जी ने । कुछ बेहद सार्थक प्रश्न उठाये हैं । यदि आपको लगता है कि आपके पास इन प्रश्नों का जबाब है । तो comment के रूप में दे सकते हैं । )
*** VIJAY ) Jai gurudev ki.. Rajeev ji ( जय गुरुदेव की । तिवारी जी । ) dhanywad mere sawalon ka jawab dene ke liye. ( आपका भी धन्यवाद । मेरे गुरु का आदेश है । तुम दूसरों के जितने भी काम आ सकते हो । आओ । क्योंकि सबके अन्दर वही एक परमात्मा ही है । परहित सरस धर्म नहीं भाई । पर पीडा सम नहीं अधिकाई । ..क्योंकि..बडे भाग मानुस तन पावा । सुर दुर्लभ सद ग्रन्थन गावा । ..और..साधन धाम मोक्ष कर द्वारा । पाय न जेहि परलोक संवारा.. ?? ) Rajeev ji insaan bhedbhav kyun karta hai. ( कुछ ग्यानियों ने इस दुनियां के सिस्टम को जंगलराज कहा है । ) Kyun woh kisi ko dutkarta hai. ( मामूली आदमी भी गरूर में अन्धे हो रहे हैं । इसीलिये अभी के सच्चे संत कह रहे हैं कि कलियुग समय से पहले ही भन्ना उठा । ( अभी कलियुग के सिर्फ़ 5000 वर्ष हुये हैं । और 17000 बाकी है । चारों तरफ़ फ़ैली त्राहि त्राहि से सत्ता ने कलियुग को यहीं समाप्त करने का फ़ैसला लिया है । ) Jaise jahan main kaam karta hun ( CENT.. RAY.. COMPANY ( प्राइवेसी के मद्देनजर मैंने नाम को अस्पष्ट कर दिया गया है । ) wahan hamara jo supervisor hai woh marathi hai ( पर वो भूल गया है । असल में तो वो पहले इंसान है । ) toh woh pahle sabhi marathiyo ko kaam par lagata hai ( शायद इसी को कहा गया है । अंधा बांटे रेवडी । फ़िर फ़िर अपने को देय । ) agar jagah bache toh baaki kisi aur ko. ( इस कर्म से उसके लिये कहीं जगह ही नहीं बचेगी । ) nahi toh hame ghar vapas bhej deta hai. ( आगे के समय में भगवान उसको वापस बार बार 84 में भेजेगा बिकाज उसने एक इंसान की तरह व्यवहार न करके पशुओं की तरह व्यवहार किया । ) Kyun koi apni shaqti ka galat istemaal karta hai ? kyun raajeev ji ? ( हर पावर का भी एक नशा होता है । वह उसी में धुत है । ) kya use ishwar ka bhay nahi lagta ? ( आज का इंसान ईश्वर का भी अपने फ़ायदे के लिये ही इस्तेमाल या याद करता है । ) insaan khud ko sudharta kyun nahi ? ( ये बहुत बडा प्रश्न है । जिसकी तरफ़ बहुत कम लोगों का ध्यान जाता है । ) woh kyun yeh bhool jata hai ki woh sirf is janam me marathi ya marwadi ya bhaiya. ( बिलकुल सही बात है । और अगले जन्मों में तो 84 में उसे गधा । घोडा । कुत्ता । बिल्ली जैसे पशु आदि बनना होगा । और आप जैसों की हाय अलग से झेलनी होगी । ) Jis bhi cast me paida hua ho sirf isi janam ke liye hai. ( और वो भी बहुत थोडे समय के लिये । मनुष्य के जीवन को इसीलिये क्षणभंगुर या पानी का बुलबुला बताया गया है । ) Parmatma ke yahan toh koi jaat nahi wahan toh sab ek hai ( एक नूर ते सब जग उपज्या । कौन भले कौन मंदे । ) toh kyun insaan sirf aaj ka sochta hai ? ( क्योंकि इंसान अग्यात नशे में चूर है । झूठे सुख से सुखी है । मानत है मन मोद । जगत चबैना काल का । कछू मुख में कछू गोद । ) woh apne aane wale kal ki kyun nahi sochta.? ( कुछ ही लोग सोचते हैं । अगर सभी सोचने लगें । तो क्या बात है । ) Kyun koi dusaro ko satata hai kyun ? ( लोग सोचते हैं कि रावण कंस आदि राक्षस कोई अलग राक्षस जाति के थे । पर वे इंसानों में ही थे । और स्वभाव से राक्षस थे । ) Rajeev ji jawab ki prateeksha rahegi. Jai jai gurudev ki. ( ई मेल से । )
अब मेरी बात --- तिवारी जी के इस पूरे ई मेल में मैंने हिंट ( हिंदी में ) दिये हैं । पर वो उत्तर नहीं है । आईये आगे बात करते हैं । दरअसल आपके सभी प्रश्नों में कोई ऐसी हाय हाय वाली बात नहीं है । ये जगत व्यवहार है । जो हमेशा से ही चला आ रहा है । ( अगर ऐसा नहीं होगा । तो या तो जगत समाप्त हो जायेगा । या बेहद नीरस हो जायेगा । ) भले ही इसमें अच्छे बुरे का अनुपात कम ज्यादा होता रहा हो । बुरा ना मानें । तिवारी जी । आज आप अपनी परिस्थिति की वजह से ऐसा सोच रहे हैं । जैसा कि आप सुपरवाइजर के लिये कह रहें हैं । अगर उसकी जगह आप होते तो आप भी वही करते । भले ही अभी आपको लग रहा होगा कि आप नहीं करते ? आज जो आपका आज है । वो आपके बीते कल से निर्मित हुआ है । बुरा जो देखन मैं चलया । बुरा ना मिलया कोय । जब दिल खोजा आपना । मुझसे बुरा न कोय । ये किसी मामूली आदमी के वचन नहीं । बल्कि संतवाणी है । जरा सोचिये । अगर आपकी बात मान ली जाय । तो इससे यह सिद्ध हो जायेगा कि यहां कोई सत्ता ( ईश्वरीय ) नहीं है । और अन्याय का बोलबाला है । पर नहीं । यहां वो सत्ता है । कि...तेरी सत्ता के बिना । हिले न पत्ता । खिले न एक हू फ़ूल । हे मंगल मूल ।
जलचर जीव बसे जल मांहि । तिनको जल में भोजन देय । वनचर जीव बसे वन मांहि । तिनको वन में भोजन देय । थलचर जीव बसे थल मांहि । तिनको थल में भोजन देय । नभचर जीव बसे नभ मांहि । उनको भी तो भोजन देय । ..अरे..ऐसे प्रभु को भोग लगाना । लोगन राम खिलौना जाना ..?? और ये परमात्मा की केन्द्र सत्ता है । जिसमें भक्ति से भाग्य आदि बनता है । त्रिलोक की सत्ता कर्मफ़ल पर आधारित है । यानी जैसा किया । वैसा प्राप्त होगा । और आप यकीन मानें । दोनों ही सत्ताओं का बेहद कडा नियम है । कि तौल में चीनी के एक दाने के बराबर हेरफ़ेर नहीं हो सकता । चींटी जैसे तुच्छ जीव का यहां पूरा पूरा हिसाब रहता है । फ़िर आप सोच सकते हैं कि इतना सख्त राज्य है । तो खुशहाली होनी चाहिये ? आप अपना पिछले कर्मफ़ल का प्रारब्ध ( भाग्य ) लेकर आये हैं । आगे का आपको अभी बनाना है । अब जैसा भी आप ले के आये हैं । उसको हर हालत में भोगना ही है । इसलिये ये कर्मयोनि है । इसलिये ये कर्मक्षेत्र है । इसलिये हे अर्जुन.. युद्ध कर । निरन्तर युद्ध कर । तभी विजय प्राप्त होगी । अब मैं आपको यही सलाह दे सकता हूं कि..कोई ना काहू सुख दुख कर दाता । निज कर कर्म भोग सब भ्राता । इसलिये ..बीती ताहि विसारि दे । आगे की सुधि लेय । भक्ति स्वतंत्र सकल सुख खानी । बिनु सतसंग ना पावहि प्राणी । अगर आपके पास भक्ति का असली नाम होता । तब तो बात ही कुछ और थी ? लेकिन तब तक आप खाली समय में परमात्मा का चिंतन निरन्तर करे । विश्वास रखें । वह सिर्फ़ भाव का भूखा है । आप भाव से उससे प्रार्थना करेंगे । तो वो हर बात सुनेगा । जा पर कृपा राम की होई । तापर कृपा करे सब कोई । निज अनुभव तोहे कहहुं खगेशा । बिनु हरि भजन न मिटे कलेशा । और अंत में ..जय जय श्री गुरुदेव । प्रभु आपकी सुनें । और अपनी शरण में लें ।

18 दिसंबर 2010

चलो एंजाय करते हैं ।


roop_kaur पोस्ट " पर ठगे जाने वाले अन्धे हैं क्या ? " पर ।
rajeev ji, agar hum surat shabad yog ki sadhna lagataar mean daily karne lag jayen to agar humein kisi aise ghar mein kabhi rukna padhe jaise ye upper wala case tha and humko pata na ho ki wahan kya hai ya nahi to kya wahan rukna dangerous hai?
पहले तो सच्चे गुरु की शरण में आते ही ऐसी बातें कि हम किसी डेंजरस जोन में फ़ंस जांय । होता ही नहीं है । यदि हो भी जाय । तो जिस नाम ( को ) के अधीन बडी बडी महा शक्तियां सिर झुकाती हैं । वहाँ बेचारे भूत प्रेत क्या करेंगे ? रामायण में है । नाम परम लघु जासु वश विधि हरि हर सुर सर्व । मदमत्त गजराज को अंकुश कर ले खर्व । ~
rajeev ji, jaisa aapne bataya ki surat shabad yog amrit wele mein karna chahiye to kya us time room mein andhera rakhna chahiye ya koi light jala leni chahiye. (
हल्का अंधेरा होना उत्तम है । फ़्रेश मूड में नयी बहू की तरह मेल फ़ीमेल दोनों मौसम के अनुसार एक चादर या शाल से अपना पूरा चेहरा और नाभि तक का हिस्सा उससे ढक लें । मच्छर भी डिस्टर्ब नहीं कर पाते । है ना इजी ।
and please batayein exactly amrit vela kitne se kitne baje tak hota hai.
सुबह के 4 बजे से 6 बजे तक । हमारे अधिकांश साधक सुबह 4 से 8 तक ध्यान पर खुशी खुशी बैठते हैं । और उन्हें समय का पता तक नहीं चलता । हैं । चार घन्टे हो गये । कमाल है भाई ।
rajeev ji, agar humein ya kisi ko bhi surat shabad yog ki sadhna karte hue 10 saal se upper ho jayein to kya ( jaisa apne pehle bhi bataya tha ki time ki piche ja kar beeta hua incident bhi dekh sakte hain ) so is tarah aane wala time bhi dekh sakte hain.
जी हाँ ! लेकिन कोई कोई स्टूडेंट एक क्लास दस साल में रो पीटकर पास कर पाता है । और कोई होनहार बहुत तेजी से सीखता है । यह उसके ऊपर निर्भर करता है । गुरु को आज्ञाकारी समर्पित समझदार लगन शील शिष्य ही प्रिय होता है । उसी पर उनकी भरपूर कृपा होती है । 
 it means dheere dheere sadhna se hamari drishti trikaal drishti ho jati hai.is tarah to hum apna pichla janam bhi dekh sakte hain
पिछले जन्म का रिकार्ड तीसरी बाडी कारण शरीर में होते है । तीसरे शरीर में प्रवेश के लिये काफ़ी साधना मेहनत और गुरु्कृपा की आवश्यकता होती है । मैंने न्यूज में देखा । एक लेडी किसी चैनल पर बिना किसी साधना के पिछला जन्म दिखा देती है । सोचो यदि ऐसा होता । तो भीष्म पितामह जैसी दिव्य आत्माओं की क्या वैल्यू है ? जो बेहद ज्ञानी होने पर भी 100 जन्म तक देख पाते हैं । और उनका 106 वां जन्म जानने के लिये योगीराज कृष्ण को ध्यान करना पडता है ।
and dusre ka future bhi dekh sakte hai and kya kisi ke mann ki baat bhi jaan sakte hain ?
कुछ भी असंभव नहीं । सब कुछ संभव है । पर उद्देश्य भलाई ही होना चाहिये । अन्यथा नियम के विरुद्ध जाने पर अंत में साधक राक्षस योनि में जाता है ।  
rajeev ji, previous article mein aapne likha tha ki sab yoniyan jyoti par hi banti hain to ye jyoti kya hai 
ज्योति एज दीपक ज्योति । पर इसका असली स्वरूप अक्षर होता है । जैसे कुम्हार के चाक पर चढी मिट्टी से अलग अलग तरह के बर्तन बन जाते है । चाक तो बस गोल गोल घूमता ही रहता है । 
 aapne ye bhi likha tha ki wo jyoti aatma nahi hai to fir aatma ka real sawroop kya hai. please is bare mein zaroor batayein
आप कितनी ही बार कहें । बिना हमारी दीक्षा । बिना उचित साधना के । इस रहस्य को मैं किसी कीमत पर नहीं बता सकता । लेकिन शर्त पूरी हो जाने पर सरलता से इसको खुद जाना जा सकता है । सो आय म वेरी सारी ।
and main sochti hu ki har aatma apne real sawroop ko bhul jati hai
यह सच है । और इसीलिये जीव अलग अलग स्थितियों में असहाय सा भटकता है । 
janam lete waqt and dheere dheere apne ko physical body hi samjhane lag jati hai. jis kaaran usko raag dvesh utpan hota hai nahi to asal mein to ye duniya aatma ke liye musafir khana hai and ye physical body 1 kiraye ka ghar(haan wo baat alag hai ki ye maanav body bahut important hai)
ये योगमाया देवी के कारण होता हैं । जिन्हें मैं प्यार से मायावती कहता हूँ । 
rajeev ji, hum janam lete waqt grabh( pregnancy ke kis period mein enter karte hai
सामान्य स्थिति में चार महीने पूरे होने पर ।
ya hamare garbh mein jaane se hi aurat (shaddishuda and sexually active lady) pregnant hoti hai.
औरत पुरुष के वीर्य और स्वयं के अंडे के योनि में जुडते ही । बाद में उसके गर्भाशय में जाकर ठहर जाने से प्रेगनेंट हो जाती है । लेकिन तब वो सिर्फ़ पिंडी जीव होता है । जीवात्मा नहीं ।
 kyun ki koi kehta hai ki garbh ke pehle second mein aatma ( janam lene wali ) enter kar jati hai
कभी नहीं ।
and koi kehta hai ki meeting point ke time enter karti hai.is ke bare mein bhi batayein
संभोग क्रिया करने वाले सभी मेल फ़ीमेल जानते हैं । क्लायमेक्स पर पुरुष के शिश्न से वीर्य तीन झटकों में निकलता है । पहली बार सतगुण युक्त वीर्य । 2 रज एन्ड तीसरा झटका तम । इन पार्ट में कौन सा वीर्य अंडे से मिला है । उसी आधार पर संतान गुण वाली पैदा होती है । लेकिन सामान्य से हटकर अकाल मौत मरे री बोर्न इंसान के आंकडे और शोध रिजल्ट बताते हैं । कि आत्मा पहले महीने से लेकर नौंवे महीने तक किसी भी टाइम गर्भ में शिफ़्ट हो सकती है । या की जाती है । ऐसा विशेष स्थिति में होता है । जिसको टेम्पररी अटैचमेंट भी कह सकते हैं । इसके विपरीत साधु संत और दिव्य आत्मायें । अवतार जब शरीर धारण करते हैं । तो वो एक सेकेंड के लिये भी गर्भवास में नही जाते । प्रसव के बाद जब बाडी योनि से बाहर आ जाती है । तब वे उसमें शिफ़्ट करते हैं । इसलिये गर्भ में पल रहे जीव को पिंड ( शरीर ) कहते हैं । जीवात्मा नहीं । )
 and janam lene se pehle kya aatma ko pata hota hai thoda time pehle ki main kahan (kis ghar mein and kis aurat ke) janam lene ja raha hun ya ja rahi hun.
आमतौर पर पता नहीं होता । मृत्यु के बाद और जन्म होते समय मूर्छा ( बेहोशी ) जैसी स्थिति होती है । हां एकदम मृत्यु से ठीक पहले । गर्भ में । और जन्म हो जाने के बाद । कुछ क्षणों तक खुद के अनेकों जीवन चक्र की रील घूमती है । जिस पर माया परदा डाल देती है । लेकिन गर्भ में जीवात्मा हो जाने के बाद । वह अपने बहुत जन्मों को जानता है । और गर्भ में ही चिंतन करता है कि मैंने अपने असंख्य जन्म विषय वासना में गंवा दिये । और फ़िर से गर्भ में कष्ट भोग रहा हूं । इस जन्म में भक्ति और ग्यान द्वारा खुद का उद्धार अवश्य करूंगा । लेकिन जय हो मायावती की । कुछ ही दिनों में कहने लगता है । हाय माम । हाय डैड । हाय डार्लिंग । चलो एंजाय करते हैं ।
 rajev ji, ye jo maanav janam hai iske 2 main parts hain man and woman lekin hijda bhi hota hai to us aatma ne aisa kaunsa paap kiya hota hai previously jo usko hijda ke roop mein janam milta hai?
अब यहां बहुत से लिंग होने पर भी कटाकर हिजडा बन जाते हैं । बहुत सी लेडी इंजेक्शन आदि से पुरुष बन रही हैं । औरत औरत से सेक्स करती है । आदमी आदमी से सेक्स कर रहा है । ये दोनों ही जानवरों को भी नहीं छोड रहे । इनकी मति क्यों मारी गयी है ? आप पहले इसका उत्तर दें । वास्तव में संभोग के दौरान बहुत फ़ीमेल सोचती हैं कि इसको ( मेल ) बहुत मजा आ रहा है । मैं भी इसके मजे को अनुभव कर पाती । जबकि एकदम अपोजिट मेल सोचता है कि हार्ड वर्क मैं कर रहा हूं । ये फ़ुल्ली एंजाय कर रही है । ये भावना उनमें फ़ीड हो जाती हैं । इस तरह वे दोनों ही कनफ़्यूज्ड हो जाते हैं । तब भगवान को भी मौज आ जाती है । यार तू दोनों मजे एक साथ लेकर देख । इसीलिये हिजडे के लिंग योनि ब्रेस्ट शेव आदि सभी एक साथ होते है । इसी को रामायण में कहा है । जाकी रही भावना जैसी । हरि मूरत देखी तिन तैसी । )
 in the end rajeev ji, main ye baat waise hi puch rahi hun bura mat maaniyega is time aapki age kya hai (agar aap batana chahen to
 40 year । पन्द्रह तक बेहद पढाकू । इसी उमर तक बहुत अध्ययन कर लिया । सोलह में बहुत बडी ट्रेजिडी । इसके बाद जीवन संघर्ष के साथ ही कुछ कुछ साधना भी । 17 to 33 विभिन्न ज्ञान । द्वैत साधना । जीवन के उतार चडाव । 33 से अब तक । महाराज जी की शरण में । आत्म ज्ञान के विभिन्न पहलू पता चलने के बाद जीवन से नीरसता । )
 mujhe aapke answers ka besabri se intezaar rahega.bye. ( मेनी मेनी थैंक्स । 

17 दिसंबर 2010

डर के मारे कोई जाने को तैयार ही नहीं होता ।

roop_kaur पोस्ट " पर ठगे जाने वाले अन्धे हैं क्या ? " पर ।
rajeev ji ye shaitaan ya devil ka astitav hai kya?( तमोगुण वाली बडी शक्तियां ही शैतान या डेविल हैं । इसी तरह की साधना करने वाले भोग ऐश की इच्छा रखकर दुष्ट भाव को त्यागे बिना साधना में सफ़लता प्राप्त कर लेते हैं । वो रावण आदि जैसे शैतान बन जाते हैं । इनके मेन गुरु शुक्राचार्य हैं । जिस प्रकार एक आदमी बहुत धन कमाकर सज्जनता से लोगों को सुख पहुंचा सकता है । उसी प्रकार दुष्ट बिना वजह के दुख भी पहुंचाते हैं । ) rajeev ji, hum gharon mein dekhte hain ki agar maa baap aastik hain to bacche naastik hain.( अपने कर्म संस्कार योग के कारण । रावण और कंस दोनों के ही पिता बेहद सज्जन और धर्मात्मा थे । ) agar maa baap naastik hain to koi baccha aastik paida ho jata hai.to kya wo sirf karm sanjog se 1 dusre ke rishtedaar bante hain present life mein. ( यह एक प्रकार से पिछले जन्म का लेन देन होता है । जिसका जहां जितना दाना पानी होता है । वह उतने ही समय तक टिक पाता है । पति पत्नी तक चाहे पास या दूर रहें । वह आपस में सम्भोग आदि या अन्य सुख दुख एक दूसरे को उतना ही दे सकते हैं । जितना कर्म में लिखा हैं । उदाहरण राम सीता धनी और पावरफ़ुल होने के बाबजूद पूरे जीवन दुखी रहे । उनके जीवन में पति पत्नी की तरह साथ रहने का सुख भी नहीं था । ) aapne kaha tha ki aad shakti ( अष्टांगी कन्या देवी में सबसे पावरफ़ुल है । )brahma,vishnu and mahesh ki maa hai. to kya devi shakti devtaon se badkar hai means more powerful. ( अन्य देवियां कुछ छोटी और कुछ बडी होती हैं । किसी आत्मा ने साधना में क्या और कैसी कमाई की । उसी हिसाब से उसे पद प्रतिष्ठा और पावर मिलती है । यही इंसान के जीवन में होता है । ) rajeev ji, kya suksham body light year ki speed se chalti hai jaise abhi 1 pal mein india to dusre pal america bhi ho sakti hai? ( सूक्ष्म बाडी या दिव्य शरीर अनेक प्रकार के होते हैं । एज ए कार या प्लेन । किसी की स्पीड कम किसी की बहुत ज्यादा होती है । उदाहरण । एक प्रेत की स्पीड कम । अप्सरा की उससे ज्यादा । देवता की उससे भी ज्यादा । संत की उससे भी ज्यादा । यहां एक विशेष बात ये है । कि हरेक दिव्य आत्मा भी अपने अधिकार क्षेत्र के अनुसार ही लोकों में भृमण हेतु जा सकती हैं । सभी लोकों में नहीं । मीन जहां का पासपोर्ट वीजा उसके पास हो । ) and suna hai ki paap punya ka bhi byaaz lagta hai.is it true? ( अनजाने में हुये का हजार गुना । जाने में किये का लाख गुना । अर्थ पर भी यदि कोई भावावेश में या गलती से हत्या कर दे । तो उसे आजीवन कारावास और खूब जानबूझ कर करे । तो फ़ांसी होती है । क्राइमर की मर्सी अपील में प्रेसीड्डेंट इसी प्वाइंट के बेस पर फ़ैसला करते हैं । ) kuch log ye bhi kehte hain ki seperate narak nahi hai. yahan (earth) ka accha bura kiya yahin par bhogna padhta hai. ( दोनों सत्य हैं । यहां भी भोगना पडता है । और सेपरेट नरक भी है । कुछ लोग तो खुलेआम पाप और बुरे कर्म करते हैं । फ़िर भी उनका जीवन मौज में कटता है । ऐसे कई उदाहरण हैं । इन्हीं को देखकर बहुत लोग कहते हैं । आजकल कलियुग में भगवान भी पापियों की ज्यादा सुनता हैं । लेकिन जैसे ही इनका पुन्य क्षय होता है । इनकी सजा शुरू हो जाती है । फ़िर वो इसी जीवन में हो जाय या आफ़्टर डैथ नरक के रूप में । ) shiv yog wale baba kehte the ki hum log (souls)is 5 element ke brahmand mein 5 element ka physical body le kar isko anubhav karne hi aate hain. ( जो जितना और जैसा जानता है । वैसी ही बात करता है । यहां एक बात और है । उस वक्त वो किस प्वाइंट पर बोल रहा है ? वो क्या कह रहा है । और आप उसको क्या समझ पा रहे हैं । इसमें बहुत बडा अंतर हो सकता है । मैं इन TV बाबाओं को कभी कभार किसी के साथ बातचीत आदि में बैठे होने पर उसके द्वारा ही TV आन करने पर ही देखता सुनता हूं । और आप लोगों की बातचीत से जानता हूं । निजी तौर पर मैं इन्हें कभी नहीं देखता । ) rajeev ji, jo baki ke brahmands hain kya 5 se kam ya zada elements ke hain. ( मेरी जानकारी के अनुसार 32 तत्व हैं । उदाहरण स्वर्ग । स्वर्ग ऐसे तत्वों का बना है । कि वहां के पेडों के पत्ते नहीं गिरते । फ़ूल कभी नहीं कुम्हलाते । पानी खराब नहीं होता । इसी तरह स्वर्ग मिलने वाली आत्माओं को मेल फ़ीमेल दोनों यंग एज @ 18 year जैसा शरीर मिल जाता है । जो वहां रहने तक वैसा ही सदा रहता है । लेकिन इन्हें कितने टाइम तक के लिये ये मिला है । ये शुरू से ही पता होता है । इनके हाथ में दिव्य फ़ूलों का एक गजरा टायप फ़िट होता है । जो लास्ट टायम आने पर आटोमेटिक कुम्हलाने लगता है । टाइम पूरा होते ही इन्हें नीचे गिरा दिया जाता है । बहुत ऊंचे आकाश में इंसान जिसको तारा टूटना कहते हैं । वो इन्हीं आत्माओं को समय पूरा होने पर गिराया जाता है । इसलिये स्वर्ग प्राप्त करने वाले देवता और अन्य आत्मायें स्वर्ग मिल जाने के बाद भी दुखी रहते हैं कि समय हो जाने पर उनको भी फ़ेंक दिया जायेगा । रामायण में लिखा है । एहि तन कर फ़ल विषय न भाई । स्वर्ग ऊ स्व अल्प अंत दुखदाई । ) and kya baki brahmands apne brahmand se bade ya small bhi hain. ( बडे । बहुत बडे । और छोटे सब तरह के हैं । ) and kya apni earth is poore universe mein bilkul centre mein hai ( नहीं ) to agar universes aur bhi hain to kya hamara universe kis sathaan par hai unke muqable. ( आपने मेले आदि में बच्चों का वो झूला देखा होगा । जिसमें लकडी आदि के घोडे एक राउंड में घूमते है । अगर वो झूला लगातार घूम रहा हो । तो बताईये उनमें से कोई एक घोडा किस स्थान पर है ? ) rajeev ji, jaise divya sadhna mein ya surat shabad sadhna mein suksham body universe ke alag places par ja kar waapas aa jati hai ( जी हां । ) ya is brahmand se nikal kar kisi aur brahmnad mein bhi chali jati hai and fir waapas aa jati hai. ( ऐसा भी होता है । पर डर के मारे कोई जाने को तैयार ही नहीं होता । तब मैं क्या करूं ? ) it means wahan tak to modern science ka supre rocket bhi nahi pahunch sakta. ( एक बृह्माण्ड से दूसरे बृह्माण्ड में जाने के लिये ब्लेकहोल जैसे स्थानों को पार करना होता है । ब्लेकहोल कृतिम ऊर्जा चाहे कितनी ही ज्यादा क्यों न हो । उसको सोखकर नष्ट कर देता है । पांच सौ वाट का बल्ब एक गहरे काले रंग से चिकनाई युक्त एज गीला काजल एज आयली पेंट कमरे में लगायें । वो प्रकाश को सोख लेगा । जबकि वाइट पेंट रूम को जगमग कर देगा । इसीलिये बेग्यानिक दूसरी प्रथ्वी नहीं खोज पायेंगे । जिन प्लेनेट पर वो जा सकते हैं । मून । मार्स आदि । यहां सूक्ष्म जीवन है । अतः उन्हें कोई और कभी नहीं मिलेगा । अदर प्लेनेट पर रहने का सपना देखना भी ख्याली पुलाव से अधिक नहीं है । ) rajeev ji, jesus ne param atama ko point of light kaha tha to kya atma bhi point of light hi hai? ( जिन लोगों को जीसस के अंतिम समय के बारे में पता है । उन्हें मालूम है । जीसस ने कहा था । कि मैं जो खुद को सन आफ़ गाड कहता था । यह मेरी गलतफ़हमी थी । तर्क बुद्धि वाले आधुनिक सोच वाले ईसाइयों ने जीसस के जीवन पर रिसर्च किया । और तमाम चौंकाने वाली बातें संसार को बताईं । लेकिन ये सच है । जीसस को कुन्डलिनी ग्यान था । वे एक अच्छे साधु थे । और उन्होंने भारत के किसी संत से ग्यान लिया था । क्रास पर लटकाने के बाद । जीसस अपने शिष्यों की सहायता से भागकर चुपचाप इंडिया आये । और अपने जख्मों का जडी बूटी से इलाज कराया । फ़िर अपने देश गये । इसी में लोगों ने नमक मिर्च लगाकर मर गये कि जिंदा हो गये । जैसी झूठी कहानियां बना दी और ऐसा सिर्फ़ जीसस के साथ नहीं किसी भी मशहूर हस्ती के साथ हुआ । भगवान राम कृष्ण जैसों को झूठी कहानियों के उस्तादों ने नहीं छोडा । ) and ye aatma and param atma dono Anaadi hain kya in do ke ilawa aur kuch bhi Anaadi nahi? ( अर्थ पर 75% वाटर है । इसका सोर्स आनली समुद्र ही है । यहीं से पानी भाप । बरसात । बादल । बर्फ़ आदि के रूप में रूप बदलता हुआ सभी जगह डिस्ट्रीब्यूट होता है । और नदी नालों हमारे घर आदि सभी जगह होता हुआ वापस टाइम आने पर समुद्र में चला जाता है । लेकिन समुद्र एक ही है । समुद्र से एक बूंद निकालिये । उसके गुण और पूरे समुद्र जल के गुण समान ही होंगे । लेकिन समुद्र वाली पावर एक बूंद में नहीं होगी । कुछ कुछ ऐसा ही खेल है ? आप दस लाख आइना ( मिरर ) जमीन पर दिन में लगायें । तो उनमें दस लाख सूर्य नजर आयेंगे । और उन मिरर से हल्की सी लाइट भी रिफ़लेक्ट होगी । अब सूर्य एक है या दस लाख ? आइने के सूर्य और रियल सूर्य में फ़र्क हरेक कोई समझ सकता है । कुछ कुछ ऐसा ही खेल है ? केवल परमात्मा ही अनादि है । और आत्मा उससे अलग नहीं है ।..शेष प्रश्नो के उत्तर अगले लेख में ।

पर ठगे जाने वाले अन्धे हैं क्या ?

roop_kaur पोस्ट " इंसान अपना प्रारब्ध ( भाग्य ) लेकर पैदा होता है । " पर ।
thanks rajeev ji, aapne mere questions ke answers diye.( धन्यवाद । तो आपको है । जिन्होंने मुझे इतने प्रश्न दिये । इससे बहुत ( आर्टीकल पढने वालों का ) लोगों का आत्मग्यान जिग्यासा सम्बन्धी लाभ होगा । अभी तो मैं संक्षिप्त में आपके उत्तर दे रहा हूं । पर फ़्यूचर में इन्हीं प्रश्नों पर बेस्ड कुछ लेख लिखूंगा । ऐसी संभावना है । ) rajeev ji maine aksar suna hai kabhi kabhi log dukhi haalat mein bolte hain ki 'na maaya mili na raam' iska matlab kya hai. ( असमंजस की स्थिति । न दुनियां का ही मजा ले पाय । न ही भक्ति कर सके । दो नाव का सवार । दुविधा ( कनफ़्यूजन ) में दोनों गये । माया मिली न राम । ) 1 baar kisi naastik ne mere samne kisi aastik ko mazak kiya tha ki 'bhagat jagat ko thagat' iska matlab kya hai. ( साधारण बात है । ठगने वाले भगत की संख्या ही ज्यादा है । पर ठगे जाने वाले अन्धे हैं क्या ? ) aur rajeev ji kabir ji and farid ji dono ko bahut uttam sant mana jata hai ( कबीर और फ़रीद में बहुत बडा अंतर था । कबीर मुक्त आत्मा हैं । वो सतलोक से जीवों को हर युग में मुक्त कराने आते हैं । जबकि फ़रीद ने इस ग्यान की साधना की थी । मेरी जानकारी के अनुसार कबीर तो पहले से थे ही । लेकिन रैदास जी और उनकी शिष्या मीरा जी ने अंत तक का ग्यान प्राप्त किया था । रामकृष्ण परमहंस और उनके शिष्य विवेकानन्द जी ने भी इस लक्ष्य को प्राप्त कर लिया था । बाकी संत अपने गुरु और साधना के अनुसार ऊंचाई पर तो पहुंचे । परन्तु अंत तक नहीं । ध्यान दें । मैंने कहा । जितना मैं जानता हूं । ) lekin kabir ji kehte hain ki 'mera raam to mere bahut nazdeek hai itna nazdeek koi nahi' ( जाहिर है कि उनका घर ही वही है । वे तो सिर्फ़ टूर पर आते हैं । ) but farid ji kehte the ki 'mere rabb tu mujhe kab darshan dega mere to naina taras gaye tere deedar ko' is par aap roshni daaliye.( जबकि फ़रीद अपने घर से बिछुडे और घर का एड्रेस भूल चुके थे । इसलिये ऐसा कहते थे । दूसरी बात स्थिति की होती है । 10th में पढने वाला कहता है कि मैं 10th में पढ रहा हूं । और B.A वाला कहता है कि मैं ग्रेजुएट हूं ।10th वाला अपने आपको ग्रेजुएट नहीं कह सकता ना । ) and ye sufism kya hota hai means sufi log. ( सूफ़ी । संत या फ़कीर एक ही बात है । ये लोग आत्मग्यानी होते हैं । एक परमात्मा के ही उपासक होते हैं । ये जगत प्रपंच के रहस्य को जानते हैं । ये देवी देवता ईश्वर आदि की पूजा नहीं करते । उल्टे देवी देवता आदि महा आत्माएं इनके दर्शन और सेवा करके खुद को धन्य समझते हैं । ) rajeev ji meri padosan ko 1 aurat milne ayi thi wo waise to professor hai. lekin spiritilism mein bhi interest rakhti hai uska kehna tha ki is physical body mein 7 suksham bodies aur hain(uske according yog ya dhyaan mein dheere dheere un saat suksham bodies ya un 7 avasthaon ko jaana ya experience kiya jata hai) ye 7 suksham avastayein kya hain?. ( मेरे हिसाब से तो छह हैं । छह तो बहुत दूर । तीन तक को जानने वाले बहुत कम हो पाते हैं । मैंने कहा । मरना पडता है । और मरने को बहुत कम ही तैयार होते हैं । ) and rajeev ji, jaise apne samjhaya tha ki 84 yoniyan sirf earth par hain ( जी हां । ) to kya is itne bade universe mein baki yoniyan jinko bahut log nahi jante unki ginti to countless hogi means asankhya.( बाकी योनियां तो गिनी चुनी ही हैं । हजारों कहा जाय । तो भी ज्यादा है । ) and kya universe bhi countless hain? ( ऐसा नहीं है । पर अनगिनत अवश्य है । प्रथ्वी के एक एक इंच टुकडे का हिसाब अदृश्य सत्ता के पास रहता है । इसी तरह यूनिवर्स के हर छोटे से छोटे हिस्से का हिसाब उसके पास रहता है । पर मनुष्य आदि के लिये तो काउन्टलैस ही है । ) and brahmkumaris ne kaha tha ki aatma apne asli shudh roop mein 1 andaakaar jyoti jaisi hoti hai jisko dekha nahi ja sakta. ( ये दोनों ही बातें एकदम गलत है । ज्योति पर सभी योनियों के शरीर बनते हैं । पर वह आत्मा नहीं होती । अगर आत्मा को देखा नहीं जा सकता । तो फ़िर किसने उन्हें बताया कि वो अण्डाकार होती है ? वैसे आत्मा का अण्डाकार होना मनगढन्त बात है । असली बात कुछ और है । ) to kya moksh mein aatma saare suksham bodies ko bhi chor deti hai means utaar deti hai and apne very real form mein aa jati hai. ( किसी हद तक सच है । पर अक्सर लोग सुनी पढी बात करते हैं । उससे क्या फ़ायदा होगा ? कबीर ने कहा है । कहन सुनन की बात नहीं । देखा देखी बात । दुल्हा (परमात्मा ) दुल्हन ( आत्मा ) मिल गये फ़ीकी पडी बारात । ) and rajeev ji ye raaj yog jo hai kya ye surat shabad yog hi raaj yog hi hai. ( एक ही बात होती है । पर आजकल तो राजयोग जाने किस किसको बता देते हैं । यहां राज का अर्थ मिस्ट्री है । हमारे यहां गुरु को महाराज जी कहते हैं । यानी महा रहस्य को जानने वाले । ) rajeev ji shiv yog wale baba keh rahe the ki 2012 mein hamari earth fourth dimension(mandal) mein enter hone ja rahi hai. wo isko pralay ki bajayee 1 badi chanage keh rahe the. ( वो ऐसा क्यों कह रहे । मुझे नहीं पता । पर ये आंशिक प्रलय होगी । 4 D के बारे में बात करना । हंसी खेल नहीं होता । बडा चेंज होने जा रहा है । ये सत्य है । पर 4 D किस एंगल से कहा । मेरी समझ से बाहर है । ) rajeev ji ye mandal kya hote hain(zara khul kar batayein ( किसी भी एक सत्ता से जुडे लोक को मंडल कहते हैं । जैसे प्रथ्वी का मंडल । स्वर्ग का मंडल । ब्रह्म आदि लोकों का मंडल आदि । ) rajeev ji, ye jo words hain jaise waheguru, ( अक्षर रूपी गुरु । सूक्ष्म । ) alla-hoo ( लाइट या नूर ) inka matlab kya hai means inke arth kya hain. and sanatan ( लगातार । ) aur shaashvat ( जिसमें कोई चेंज न हो । परमात्मा । ) ke arth bhi batayein. meri padosan ne 1 baar mujhe ye bhi kaha tha ki 'tu jo itne sawaal puchti hai ye bhi teri pichli kamaii ho sakti hai shayad tu pichle janam mein bhi koi sadhna karti rahi ho, ( हो सकता है । ) jis kaaran tujhe dobara maanav janam mila' (to kya agar maine pichle janam mein bhi aatm gyaan ki sadhna ki hui hai to kya main exactly 84 mein se nahi ayi. ( ये जरूरी नहीं आत्मग्यान की ही साधना की हो । अक्सर अप्सरा आदि को भी शाप के कारण ये मलमूत्र का शरीर ज्वाइन करना होता है । बहुत रहस्य का खेल है ये । ) kya ye possible hai? ( बीती ताहि बिसार दे । आगे की सुध लेय । इन बातों से क्या फ़ायदा होगा । सिवाय टेंशन के । हम अभी क्या हैं । यह इम्पोर्टेंट है । हरेक जीव कभी न कभी प्रभु भक्ति करता रहा है । ) rajeev ji maine 1 baar apni padosan ke ghar 1 puaran article padha tha ki 'ram krishan param hans' jo the unhone 1 hi jeevan mein advait and dwait ki sadhna ki (wo mahakaali devi ke bhi upasak the) kuch batayein.( यह सच है । मैंने पहले भी कहा था । अक्सर पहले इंसान साधारण पूजा पाठ करता है । फ़िर उसे द्वैत का गुरु मिलता है । इसके बाद सतगुरु । तुलसीदास को भी पहले द्वैत गुरु और बाद में सतगुरु मिले थे । रामकृष्ण जी पिछले जन्म के साधक थे । महाकाली की बची साधना पूरी करने के बाद उन्हें तोतापुरी नामक संत मिले । जिन्होंने उन्हें आत्मग्यान दिया । यही तोतापुरी अद्वैतानन्द जी के भी गुरु थे । जिनके आश्रम आनन्दपुर ग्वालियर और नंगली साहिब मेरठ और दिल्ली आदि में बने हैं । अद्वैतानन्द जी और इनके शिष्य स्वरूपानन्द जी काफ़ी पहले शरीर त्याग चुके हैं । ) aur ye jo bade osho the means pehle wale (rajneesh ji) inke bare mein kuch batayein. ( हिंदी और अंग्रेजी में ओशो टायप करके गूगल में सर्च करें । बहुत मैटर मिल जायेगा । ) and rajeev ji log kehte hain ki jo aaj kal bahut famous aashram hain bade bade in ke pass bahut paisa and property hai, ( ये सच है । ) inke pass beshumaar dhan aata kahan se hai, log jo daan inko dete hai us se?. ( कुछ दान से । कुछ 80 G के खेल से । जिसमें ब्लेक मनी वाइट हो जाता है । ) rajeev ji kehte hain ki aatma ka vaastvik sawroop 'sat-chit-anand' it means 'sat' ka arth jo sat hai sada rehne wala sat hai, 'chit' ka arth chetanaya hai and 'anand' ka arth aise sukh se hai(jaise kushi ka opposite word gum hai and sukh ka opposite dukh hai but 'anand' ka opposite nahi hai) jiska opposite nahi hai? ( आत्मा की एक स्थिति सच्चिदानन्द भी है । पर बात इतनी ही नहीं । इससे भी बहुत आगे जाती है । ) maine 1 article mein padha tha ki 'bhagwat geeta' aisi uttam pustak ki jisko padh lene(means padh kar theek se samajh lene) ke baad jeevan mein kuch aur vishesh jan na baki nahi rehta. is it true? ( यह लगभग सत्य ही है । लेकिन जैसा कि आपने खुद ही लिख दिया । जीवन में । न कि आत्मग्यान में । सभी वेद पुराण गीता रामायण और धार्मिक ग्रन्थ पूरा ग्यान ( थ्योरी ) बताने के बाद असहाय भाव से कहते हैं । नेति नेति । यानी जितनी हमारी सामर्थ्य थी । हमने बताया । लेकिन वास्तविकता और असली अनुभव के लिये तुम्हें किसी पहुंचे हुये संत या सच्चे गुरु सतगुरु के पास जाना ही होगा । गीता में भी श्रीकृष्ण ने कहा । अर्जुन । जो मैंने कहा । उसको जानने के लिये तू समय ( यानी प्रजेंट टाइम ) के सतगुरु की शरण में जा । उनको दण्डवत प्रणाम कर । वही तुझे सत्य का अनुभव करा सकते हैं । )

15 दिसंबर 2010

इंसान अपना प्रारब्ध ( भाग्य ) लेकर पैदा होता है ।


 पोस्ट " तो जैसे सोने पर सुहागा । " पर ।
rajeev ji, jaise dwait sadhna bhog to deti hai. lekin agar koi person sirf surat shabad yog ki hi sadhna kare to kya uske vartmaan(present life) ke baki abhaav bhi khatam ho jaate hain.
( इंसान अपना प्रारब्ध ( भाग्य ) लेकर पैदा होता है । और अच्छा या बुरा । वो हर हालत में उसको भोगना ही पडता है । कोई भी साधना केवल हिम्मत और सहारा ही दे पाती है । और आगे उसका भविष्य अच्छा कर देती है । लेकिन साधना करते ही कोई हर प्रकार के सुखों से मालामाल हो जायेगा । यदि कोई ऐसा कहता है । तो वो सफ़ेद झूठ वोलता है । उल्टे साधना में कठिनाई और कई प्रकार के कष्ट सहने होते हैं । ) jaise agar kisi ko paise ki problem ho ya kisi job and business etc ki. ( ये सब पहले के कर्मों का फ़ल के रूप में तैयार हो चुका भाग्य होता है । आज जो बीज बोया है । उसका पेड बनने में समय लगेगा कि नहीं । एक स्त्री भी 9 महीने में बच्चा पैदा कर पाती है । और बच्चा पैदा होने तक क्या क्या सहना होता है । ये सभी जानते हैं । )and kya surat shabad yog ki sadhna se gharelu kalesh(ladai zhagda) jaise mere aur meri saas ke beech aksar ho jata hai.kya aisi problems bhi theek ho jaati hain. ( हां । भक्ति करने से कलेश मिट जाते हैं । इसमें कोई शक नहीं । ) 1 baat aur rajeev ji, aam taur par hum sunte hain ki kisi ko kisi ki nazar lag gayi.is nazar lagne ki reality kya hai please bataein.( किसी किसी के भाव में ज्यादा पावर होती है । दरअसल इसका उत्तर थोडा बडा है । जो फ़िर कभी । ) and surat shabad sadhna karne se kya hum jo buri souls hain bhoot pret etc us se bhi bache rehte hain. ( निश्चय ही । कोई पास भी नहीं फ़टक सकता । ) aur kya baki jo kuch bhi hai kya wo sab kuch all over life dheere dheere hamare anukool ho jati hai means circumstances. ( निश्चय ही । वरना फ़िर परमात्मा की शरण में कौन जायेगा । ) and agar hum surat shabad yog ke sadhak ban jayein to kya agar hamara koi nuksaan karna chahe(kisi kism ka bhi physically,financially,insult,jadu tona etc etc)to kya hamara 100% bachav hota hai and jo bura karne wale hain un logon ka kya hota hai.please in sab baaton par roshni daalein.thanx. ( सच्चे इंसान का कोई कुछ नहीं बिगाड सकता । लेकिन बुरे काम का बुरा फ़ल । आज नहीं तो निश्चय कल । जादू टोना का कोई असर नहीं होगा । )
 पोस्ट " तो जैसे सोने पर सुहागा । " पर ।

rajeev ji, kabhi kabhi hamein life mein kuch log aise mil jate hain jo dusron ki life mein interfere(dakhalandaazi)karte hain.jinko hum milna nahi chahte fir bhi milna padhta hai.ye aisa kyun hota hai.( किसी के साथ जो भी हो रहा है । वास्तव में वही उसका जिम्मेदार है । लेकिन उस समय वह अपनी की हुयी करनी भूल जाता है । दूध में जामन डालोगे । दही बन जायेगा । नीबू डालोगे । पनीर बन जायेगा । ) lekin aise dushat log jab humein akela ya mazboor samajh kar hamare saath manmaani karne ki koshish karte hain to iska kya upaay hai.( द्रोपदी तो भरी सभा में नंगी की जा रही थी । उसने जो उपाय किया । वही उपाय है । ) kyun kai baar hum kisi ka physically muqabla nahi kar paate ya socially hum normal hote hain.to aise abhimaani logon se kaise bacha jaye.kabhi kabhi to aise logon par bahut gussa ata hai(mann mein)lekin kar kuch nahi paate.( जब आप सबसे बडे थानेदार के साथ रहने लगते हैं । तो सभी गुंडे अपने आप भाग जाते हैं । ) apke articles mein maine dwait sadhna ki tantra mantra sadhnaon mein kisi ko maaran ya ucchatan jaisi category bhi hoti hai. lekin mujhe inka bilkul gyaan nahi and jadu tona ke chakkar mein main fasna nahi chahti.1 shabad sidhi bhi hoti hai kehte hain ki uska agar 40 din tak kisi dushman ke prati paath ya jap kiya jaye to us dushat se bachav hota hai kya ye sach hai. nahi to fir aur kya upaay hai. ( आप इन चक्करों को छोडकर सहज सरल भक्ति पर ही ध्यान दे । वही आपके सब अरमान पूरे कर देगी । ) in the end agar ya koi fir surat shabad yog ki diksha le kar uski sadhna karne lag jaye and us dushat and abhimaani aadmi ko ignore kar prabhu ke aasre rehne lag jaye to kya hum us dushat aadmi se bache rehte hain and aise logon ka aage ja kar kya hota hai jo apne physical bal par ya social status ya richness ke bal par dusron ko tang karte hain ya unki life mein interfere karte hain. ( वही जो दुर्योधन एन्ड फ़ेमिली का हुआ था । कोई खास प्राब्लम हो तो उसका हल किया जा सकता है । मगर पता चलना चाहिये । ) mujhe aapke next article ka bahut besabri se intezaar rahega.
 पोस्ट " तो जैसे सोने पर सुहागा । " पर ।

rajeev ji, 1 aur zaroori baat ye jo rog(bimari) aati hai kya ye kisi pichle paap karm ka result hai. ( जी हां । लेकिन ये इसी जन्म का भी हो सकता है । ) maine aksar dekha hai (apni hi rishtedaariyon mein) log rog ya bimaari aane par agar doctory ilaaz se theek na ho payen to pooja paath ka sahara lete hain(jo jaisa kar sakta hai apni apni manobhavna se)to kuch log to kuch time baad theek ho jaate hain lekin kuch log lamba time tak bimari ya rog mein fase rehte hain. iska kya reason hai. ( रोग इलाज से ठीक हो जाता है । पर भोग का इलाज केवल भोगना या असली भक्ति ही है । ) and ye jo surat shabad yog ki sadhna hai kya is se koi purani bimari ya rog bhi khatam ho jata hai jiska ilaaz medicines se na ho pa raha ho.please is baare mein khul kar batayein. ( जी हां । शारीरिक बीमारियां ठीक हो जाती है । जैसे किडनी फ़ेल होने वाली हो । ठीक हो सकती है । पर फ़ूट चुकी आंख ठीक नहीं होगी । ऐसा ही अन्य बीमारी के वारे में कहा जा सकता है । मीन्स वो ठीक होने लायक हैं या नहीं । )
roop_kaur पोस्ट " तो जैसे सोने पर सुहागा । " पर ।

rajeev ji, maine suna hai ki seva ka bhi bahut mahatavya hai. jaise koi kehta hai ki old parents ki seva karo, koi kehta hai ki handicapped logon ki seva karo, koi kehta hai anaath children ki seva ya poor people ki seva etc etc.( महत्व होता है । पर इंसान को हरेक कार्य समय और परिस्थिति के अनुसार करना चाहिये । असली कार्य अपना उद्धार करना ही है । जैसे स्कूल में पढने वाले स्टूडेंट को पढाई से ही अधिक मतलब रखना चाहिये । ) kuch log jinko main personaly jaanti hun. meri padosan jo jaat sikh parivar se hai(main sikh khatri pariwaar se hun) uske rishtedaar farming ka kaam karte hai. unka 1 rishtedaar zamindaar hai. us aadmi ne apni fingers mein rings bahut pehni hui hai.gale mein mala bahut pehen rakhi hai. bedroom mein bahut alag alag dharmik pictures hain. sara din agarbati dhoop etc karta rehta hai. uski apni car mein bhi dhoop agarbati hoti hai and car mein bhi dharmik photos bhari padhi hain. lekin us aadmi ke pariwaar wale kehte hain ki ye aadmi ko humne kabhi paath karte nahi dekha kabhi haath mein maala tak nahi dekhi. main sirf 1 baar mili thi wo keh raha tha ki mujhe apne bacche se pyaar nahi(uska 1 hi beta hai jo late paida hua hai yani budhape mein) duniya se pyaar nahi, main to pashuon(animals like cows) ki sewa karna chahta hun.( इसी को कहा गया है । रहिमन तेरे देश में भांति भांति के लोग । ) aur rajeev ji uska jo beta hai wo naastik haiwo kehta hai ki main aish karna chahta hun. us aadmi ke bete ne ghar mein bahut dogs paal rakhen hain. aur un dogs se itna pyaar hai ki main hairaan reh gayi. jaise wo uske pariwaar ke log ho. baki us pariwaar ka naam to nahi likh sakti kyun ki kisi ka personally naam lena theek nahi. but us aadmi ka maine kisi third person se suna tha ki backgroung criminal type hai and uska character bhi theek nahi lekin wo alag alag kism ke sadhu baba type logon ke pass bahut ghumta rehta hai. aap kripa karke ye bhi bataayie ki teerath ka bhi koi fayda hai ya nahi.( सारे तीरथ आपके अंदर ही हैं । इन्हीं में जाने से असली फ़ायदा होता है । ) ya ye log jo roz mandir and gurudwara jaate hai. iska kya fayda hai.( कुछ लोग देखा देखी । कुछ टाइम पास करने । कुछ परम्परा के कारन जाते है । अच्छे भाव से जाने पर विचार शुद्ध होते हैं । इससे ज्यादा फ़ायदा नहीं होता । ) waise main bhi daily gurudwara jaati hun. ( किसी सच्चे गुरु के द्वार जाना असली गुरुद्वारा जाना होता है । )

 पोस्ट " तो जैसे सोने पर सुहागा । " पर ।

rajeev ji, main apki tarah gyaani to nahi hun( परमात्मा से प्रेम करने और सच्चे गुरु की शरण में जाने पर आप भी ग्यानी हो सकती हैं । इसमें कोई शक नहीं है । ) lekin aapki kahi baaton ko apni samajh anusaar thoda bahut samjhane ki koshish zaroor karti hun.( आपको मेरी बातें कठिन लगती हैं क्या ? ) is time to ye sirf 1 koshish hi hai. 1 baat jo maine puchni thi ki jaisa aapne kaha ki prakirti to aad hai means jiski kabhi na kabhi shuruaat hui ho. paramatma Anaadi hai means jo sada sada se hi hai and hameshaa hi rahega. ye jo aatma hai ye paramatma ka ansh hai to it means ye bhi Anaadi hai. so,this is clear.( आत्मा भी अनादि ही है । पर इसको शार्ट में समझाना असंभव है । एक किताब लिखनी होगी ।

after 10 year साधना इसको देख सकते हैं ।

बेनामी पोस्ट " ग्यान के चार मार्ग.. " पर ।
ham aur gayaan pana chahate hani {ranjeetsngh76@gmail.com}
 भाई लोगो । आप इस प्रकार के प्रश्न कर देते हो । जिसका मतलब ही पल्ले न पडे । अगर आप लिखा हुआ आत्मग्यान पढना चाहते हो । तो वो मेरे 10 ब्लाग्स में भरपूर लिखा हुआ है । अगर आप प्रक्टीकली उसको अनुभव करना चाहते हैं । तो महाराज जी से 0 9639892934 पर बात करें ।

roop_kaur पोस्ट " तो जैसे सोने पर सुहागा । " पर ।

rajeev ji, jaise 1 aadmi ke andar alag alag manobhav hote hain. ya keh lijiye alag alag aadtein to kya 1 person ke andar sirf pichle 1 janam ke sanskaron ke kaaran aadtein hoti hain ya pichle anek janamon ke kaarn.
( अनेक जन्मों के संस्कार स्वभाव पर हावी रहते हैं । )
and ye kaal purush jo hain sirf inke bare mein kuch batayein(jitna bata saken)
( काल पुरुष महान तपस्वी है । माया इसी की पत्नी है । इसी का राज तीन लोक में चलता है । )

paramatma aur kaal purush ka farq batayein.
( परमात्मा तो सबका मालिक है ही । कालपुरुष से उसकी कोई तुलना नहीं । निरंजन उर्फ़ कालपुरुष सतपुरुष का पांचवा अंश है । वैसे इन बातों के चक्कर में न पडकर शुद्ध परमात्मा की भक्ति में ध्यान लगायें । उसी से भला होता है । वही सबका सच्चा साथी है । )
and kya kaal purush bahut badi hasti hone ke bawjood 1 aatma hi hai in reality? ( यही सच है । )

rajeev ji,jab bhi main koi sawaal karti hun (religious)to meri padosan kehti hai ki sawaal bhi har koi nahi kar sakta.according to her wo kehti hai ki sawaal bhi wo hi karta ho jo bahut jigyasu ho ya is maarg par chalne ki iccha rakhta ho. kya ye sahi hai ki har koi gehraai wale question nahi kar sakta?

( एकदम सच है । कोई कोई ही भक्ति । प्रभु या आत्मचिंतन के बारे में सोच पाता है । बाकी जगत अग्यान की नींद में सोया वासनाओं के स्वपन देख रहा है । झूठे सुख से सुखी है । मानत है मन मोद । जगत चबैना काल का । कछु मुख में । कछु गोद । हैरत है । खबर नहीं पल की । तू बात करे कल की । ये जानते हुये भी काल कब झपट्टा मार दे । इंसान अपने उद्धार का कोई उपाय नहीं सोचता । )


rajeev ji, ye daswan dwaar(tenth door) ke bare mein kuch khul kar batayein
( ये आंखो से ऊपर होता है । और गुरु द्वारा बताये अभ्यास करने से मिलता है । )
and agar aatma 10th door se nikal jaye to wo 84 mein nahi padhti ( निश्चय ही । ) and us door se nikalne wali aatma apni marzi se janam le sakti hai jab tak ki poori tarah mukt na ho jaye.
( नहीं ले सकती । जब तक पूरे संस्कार नहीं कट जाते । )
aur agar jab tak janam na lena chahe tab tak atma kya karti hai(10th door se nikalne wali).
( एक आनन्दमय लोक में रहती है । वहां से आने का । और जन्म लेने का किसी का मन नहीं होता । स्वर्ग आदि उसके सामने बेहद फ़ीके है । )
paramatma se sakshatkaar hona kise kehte hain.
( मम दर्शन फ़ल परम अनूपा । पाय जीव जव सहज सरूपा । सनमुख होय जीव मोहे जबहीं । कोटि जनम अघ नासों तबहीं । इसका वर्णन असंभव है बिकाज वह गूंगे का गुढ है । )
ye yoniyaan 84 lakh hi kyun hain kam ya zada kyun nahi ( अब कोई न कोई गिनती तो बननी ही थी । )

 and kya ye universe ke jo aur lok hain(jinke bare mein pehle bhi baat ho chuki hai) jinmein devta,apsara,yaksha and aur suksham antriksh jeev aate hain kya ye bhi 84 lakh ke andar hi aate hain in counting.
 ( नहीं । ये अलग हैं । 84 में सिर्फ़ धरती के जीव आदि आते हैं । )


rajeev ji, ye shraap and vardaan kya hote hain.
( विभिन्न साधु जो अपनी पावर से किसी का भला करते हैं या दन्ड देते हैं । वही शाप या वरदान कहलाता है । ) aam aadmi ki to kahi baat sach hoti nahi
( क्योंकि उसका खजाना लुट चुका है । तभी तो वह आम आदमी है । खास नहीं । )
sirf maha purushon ki kahi baat hi sach nikalti hai. ( क्योंकि उनके पास ताकत होती है । ) aaj kal tv jo baba type logon se bhare padhe hain kya ye sab asli hain
( नहीं । इनमें ज्यादातर टीचर और गिने चुने लेक्चरर हैं । )
 kyun ki tv famous baba to itne over busy ho jaate hain to ye sadhna kab karte honge and kai baba to abhi jawaan hi hain.
( धर्म आजकल सबसे ज्यादा प्राफ़िट का बिजनेस बन गया है । इसलिये । बिग्यान के टीचर लाखों होते हैं । पर बेग्यानिक बहुत कम होते हैं । )
 maine suna hai ki totall baba logon mein se 80% to fake ya fraud hi hain.
( सही सुना है । पर 80 % नहीं 95 % शेष 5 % ही असली होते हैं । जो आमतौर पर फ़ेमस नहीं होते । उनके शरीर छोडने के बाद ही दुनियां को उनकी महानता का पता चलता है । )
dusri baat rajeev ji, agar kisi paapi aadmi(beshaq wo rich ho)ke ghar abhimaani and nalayak aulad paida ho jaye to future mein us parivaar ya vansh ka kya haal hoga beshaq present time mein wahan sab theek thaak halaat hi nazar aa rahe ho.

( सबके कर्म और भाग्य के अनुसार होता है । इसलिये कोई एक बात निश्चित कहना मुश्किल है । वैसे इस समय किसी के लिये भी इसकी चिंता ही बेकार है । क्योकि 2012 to 17 जगह जगह ज्वालामुखी फ़टकर जहरीली गैस जमीन से निकलेगी और इस प्रलय में अर्थ की 70 % आवादी खत्म हो जायेगी । 2020 तक प्रथ्वी नये स्वरूप में होगी । शेष बचे धर्मात्मा आगे की व्यवस्था देखेगें । वैसे अभी कलियुग के 5000 वर्ष ही हुये है और 17000 बाकी है । पर सत्ता ने किसी कारणवश कलियुग को लगभग 2030 तक यहीं समाप्त करते हुये सतयुग शुरू करने का फ़ैसला किया है । मैनें लगभग 5 month पहले जहरीली गैस से प्रलय की बात प्रलय पोस्ट में लिखी । पर अब अमेरिकी बैग्यानिक भी ऐसा कहने लगे । )

rajeev ji, jo hum prarthana ya ardaas ya binti karte hain paramatma ko ya koi kisi devi devta ko karta hai ya kuch log apne ishatt ko to kya ye ardaas ya binti ya prarthana wahan tak pahunch jati hai.

( जी हां । लेकिन ये बात देवी देवता पर कम परमात्मा पर ज्यादा सटीक बैठती है । इसीलिये कहा जाता है कि वह चींटी की भी पगध्वनि ( चलने की आवाज ) सुनता है । इसके दो फ़ेमस उदाहरण है । द्रोपदी चीरहरण और क्रोकोडायल द्वारा हाथी को पकड लेना । लेकिन ये तभी होता है । जब आस वास दुविधा सब खोई । सुरति एक कमलदल होई । मतलब हरेक सहारा छोडकर सिर्फ़ परमात्मा से आस रखना । ध्यान रहे । परमात्मा खुद कभी कुछ नहीं करता । वह किसी बन्दे को सहायता के लिये माध्यम बनाकर भेज देता है । )
 and surat shabad yog karne wale sadhak ko koi problem (kisi bhi kism ki) aa jaye life mein to kya agar wo prabhu se binti kare to kya uski pukaar pahunch jayegi prabhu ke pass and us problem ka samadhaan bhi ho jayega ?
( वास्तव में यदि हमें सच्चे संत या गुरु के पास पहुंच जांय । और पूरे श्रद्धा भाव रखें । तो उसी समय हमारे तमाम कलेश कट जाते है । एक घडी आधी घडी आधी हू पुन आध ( यानी 6 मिनट ) तुलसी संगत साधु की कटे कोटि ( करोढों ) अपराध । कोई भी साधना सच्चे गुरु से ही संभव है । गुरु अपने शिष्य पर भाले के वार के समान आये संकट को सुई चुभने में बदल देते हैं । )
r
rajeev ji,waise maine 1 saath bahut se sawaal puch liye hain.iske liye main maafi maangti hun.main samajh sakti hun ki apka apna personal time bhi bahut important hai.lekin main jigyasa vash puch baithi.agar kahin aap ko zara si bhi dikkat ayi ho to main really baar baar maafi maangti hun.aap to sadhak hain to mujh jaisi sansari aurat ko maaf kar dein agar mere se koi galti hui ho to.

( कोई बात नहीं । आप तो फ़िर भी जिग्यासावश और सही प्रश्न पूछ रहीं है । कुछ लोग तो साधुओं को बेमतलब ही ऊटपटांग बात कर तंग करते हैं । )

rajeev ji, apke 1 article mein ye likha hua tha ki in mahabharat bhisham pitama ko apne pichle 100 janam yaad the and sri krishan unko unke 106 janam tak le gaye the to kya bisham ji lagataar maanav janam le rahe the
( भीष्म पितामह साधारण इंसान न होकर आठ वसुओं ( एक प्रकार का देवता ) में से एक थे । इन देवताओं को कभी कभी किसी खास काम से प्रथ्वी पर भेजा जाता है । जैसे यमराज विदुर के रूप में आये थे । लगातार मनुष्य जन्म किसी का नहीं होता । लेकिन कर्मों का डाटा सिर्फ़ मनुष्य जन्म का ही रखा जाता है । 84 यानी भोग योनियों का नहीं । )

and krishan ji ne arjun se kaha tha ki 'mujhe tere pichle bahut se janam pata hain jinko tu khud nahi jaanta' to kya arjun bhi pichle kuch time se lagataar maanav janam le raha tha.

( जबसे ये सृष्टि की शुरूआत हुयी है । हरेक आत्मा मनुष्य के रूप में ही करोडो जन्म ले चुकी है । योगेश्वर होने के कारण श्रीकृष्ण को उनका ग्यान था । इसका ये मतलब नहीं था कि अर्जुन लगातार मनुष्य जन्म ले रहा था । बाद में अर्जुन आदि पांडवो ने ये ग्यान लिया और आल्हा ऊदल के रूप में जन्म लिया । लेकिन ये बात श्रीकृष्ण नहीं मैं कह रहा हूं । अकार्डिंग टू संत । )
 kya yug sirf 4 hi hote hain stayug,treta,dwapar and kalyug. ( जी हां ) is 4 number ka kya hisaab hai. कोई खास हिसाब नहीं एक सिस्टम बनाया गया है । )
in 4 yugon ko mila kar 1 mahayug banta hai.
( जी हां । आपकी जानकारी आम आदमी से अधिक है । )
 to kya ab is kalyug ke baad satyug ayega
( वो भी 30-40 साल के बाद ही । अकार्डिंग टू संत । ) tab haalaat kaise honge. ( सतगुण प्रधान । धार्मिक और अलौकिक ग्यान जानने वालों की भरमार होती है । सतयुग में । )
 kalyug to main dekh hi rahi hun. dwapar ki kahani mahabharat hai,treta ki ramayan lekin mujhe satyug ke bare mein kuch nahi pata tab ki koi baat batayein.
( सत्यवादी हरिश्चन्द्र विश्वामित्र आदि सतयुग में हुये थे । सतयुग में धर्म के चारों पैर सलामत होते हैं । )
rajeev ji,kya is poore universe earth 1 hi hai(i mean jaisi hamari earth aisa milta julta jeeavan)jisko karm bhoomi ya mrityu lok kaha ja sake ya aur bhi ho sakte hain jahan maanav baste ho.
( असंख्य है । मिलता जुलता जीवन नहीं सेम ऐसा ही जीवन है । )

rajeev ji maine apni padosan se suna tha (sirf suna tha)shayad koi baglamukhi devi bhi hoti hai and uski sadhna mushkil hai kyun ki usko poore vidhi vidhaan se karna chahiye nahi to sadhak ko bahut haani ho sakti hai. lekin ye sadhna devi sadhna hai and 10 mahavidha mein iska 8th sathaan hai.and is devi ko pitambara devi bhi kehte hai kyun ki iska sadhak sadhana kaal mein yellow colour ki cheezon ko mahatavya diya jata hai.and ye bhi suna tha ki is devi ki shakti be-hadh hai.

( आपने सही सुना । किसी भी देवी की साधना बेहद कठिन और गुरु के बगैर असंभव है । आम आदमी और ग्रहस्थ के लिये इस तरह की साधनाएं कर पाना असंभव ही है । परमात्मा की भक्ति सबसे सरल और ताकत देने वाली है । उससे बडा कोई नहीं है । )
And rajeev ji ye Mahakaal kisko kehte hain iske bare mein bhi khil kar bataien.
( बृह्म आदि मंडलो का कलेंडर महाकाल सिस्टम पर बेस होता है । जैसे प्रथ्वी का एक साल । इन्द्र का एक दिन होता है । )
And rajeev ji,shiv yog wale baba tv par keh rahe the ki kuch siddh to aise hain ki wo samadhi mein beete hue time mein ja kar beeti hui incidents ko bhi dekh aate hain.unhone example di thi ki kuch siddh to samadhi mein 5000 saal pehle jo mahabharat mein Geeta updesha tha jo arjun ko mila tha krishan ji se usko samadhi mein dekha bilkul exact jo accurate scene tha and jo hamein aajkal geeta padhne ko milti hai ye exact wo wording nahi hai(meaning beshaq wo hi hai).

( ये सभी बात सच है । एन्ड after 10 year साधना इसको देख सकते हैं । )
rajeev ji maine bhi apni padosan se le kar 2 baar geeta padhi hai jo hindi mein translate hai.

13 दिसंबर 2010

तो जैसे सोने पर सुहागा ।


rajeev ji, main ab filmon ki fan nahi rahi. time milne par tv par aastha channel hi dekhti hun. kuch khaas programme hain jo main dekhti hun. 1. brahmkumaris inka kehna hai ki 3 cheezen Anaadi hain paramatma, aatma and prakirti.
वैसे ये बडा अदभुत खेल है । आरम्भ में केवल परमात्मा ही था । प्रकृति जो नारी स्वरूपा है । परमात्मा से ही प्रकट हुयी है । और उसके अधीन या दासी है । ये नारी रूपी प्रकृति चेतन रूपी पुरुष से निरन्तर भोग कर रही है । लेकिन चेतन निर्लिप्त रहता है ।
inka ye bhi kehna hai ki aatma paramatma ka ansh hai aatma paramatma nahi hai.
ये लोग त्राटक साधना करवाते हैं । उसको भी ठीक से नहीं जानते । त्राटक बहुत ही मामूली साधना होती है । आप समझ सकती है । कि तब ये आत्मा परमात्मा के बारे में क्या बता पायेंगे ।
2. shiv yog inka kehna hai ki shiv hi anant paramatma hain ?
पहली बात शिव और शंकर जी दो अलग बात हैं । परमात्मा नाम और गुण सबसे परे यानी अलग है । हालांकि शिव योग बहुत ऊंची बात है । पर जिस तरह लोग TV पर बात कर देते हैं । उससे आम लोगों को ऐसा भृम हो जाता है । मानों साधना करना कोई testy sweet खाना हो । हालत खराब हो जाती है ।
and aatma hi paramatma hai ye aatma ko divine being kehte hain,
किसी हद तक सच है । पर वो सच बहुत अलग हटकर है ।
ye kehte hain ki aap log aatma ho physical body nahi ho
अभी तो दोनों ही हो । अगर बाडी नही है । तो फ़िर हम किसमें रहते हैं ?
ye physical body aapki hai aap khud being of light ho.
ये एकदम सच है । अगर वापस प्राप्त हो जाय तो ।
and ye shri vidhya ya maha vidha par bahut zor dete hain means devi poojan par.
ये इच्छाशक्ति होती है । यही योगमाया या महामाया है । ये संतो की दासी होती है । द्वैत में इसका ही बोलबाला है । पर अद्वैत में इसका महत्व नहीं होता । )
3. osho inke programme par aaj kal osho shailendra ji aa rahe hain ye kehte hain ki aatma hi satya hai physical body to likea cloth hai (according to Geeta)
इसमें क्या रहस्य की बात है ? आज कोई इंसान है । आगे 84 में चूहा बिल्ली पशु पक्षी आदि बनेगा । इसी को लाइक ए क्लाथ कहा है । ये तो सभी जानते हैं ।
and inka kehna hai ki 'aad sach' means beginning means from very beginning
ओशो के बाद इस मंडल में कोई भी अच्छा ग्यानी तक नही हुआ । ये ॐ को सतनाम बताते हैं । और इनके यहां तीन सतगुरु है ?  ॐ बाडी को कहते है । वास्तव में ये ओशो की गूढ बातों का क्या अर्थ है । उसको भी ठीक से नहीं जानते ।
inke anusaar ye shuruaat kabhi hui hi nahi ye aad ko nahi anaad ko maante hain.
ऐसा कैसे हो सकता है ? जो चीज आज है । उसकी कभी न कभी शुरूआत अवश्य हुयी थी । आदि ( शुरूआत ) सृष्टि है । अनादि परमात्मा है । )
4. deepak bhai desai (jainism) ye kehte hain ki 'aatma so parmatma' koi seprate paramatma nhai hai  नही हैं । तो फ़िर सत्ता किसकी चल रही हैं ?
aatma hi sab kuch hai iske total karm khatam hone par isko moksh milta hai.
यह सच है । परन्तु कुछ अलग तरह से । क्योंकि बंधन और मोक्ष मन के धर्म हैं । आत्मा के नहीं ।
inke anusaar moksh mein kisi bahut ucch place par jagah mil jati hai jahan aatma chetan roop ho kar rest karti hai.
मोक्ष मुक्ति को कहते हैं । मुक्ति और मुक्त में बहुत अंतर है । ये में पहले ही आपको बता चुका । ये सब किताबें पढकर बोलते हैं । प्रक्टीकल का अनुभव इनके पास नहीं है । असली बात कुछ और ही है । जो बहुत हटकर है । आप कबीर को पढें । जो समझ में न आये मुझसे पूछना । कबीर की । अनुराग सागर । मूल्य 100 रु० किताब पढें । आपको बहुत से उत्तर मिल जायेंगे ।
5. gurbaani katha vichaar inka kehna hai ki hum sab log human beings hain(yahan par physical body par hi zor diya gaya hai) hamare andar jo aatma hai wo rabb ki jot hai
ज्योति यानी अक्षर पर ही सभी योनियों के शरीर बनते हैं । जो कोई जैसा सोचता है । वैसा ही हो जाता है । मैंने आपसे कहा । असली ग्यान बहुत ही दुर्लभ है । जो कभी कभी ही प्रगट होता है ।
in ke according hum khud aatma nahi hain hum physical body hai aatma hum se seperate hai). ( ये बात खिचडी टायप की है । रांग है । अतः इसका ans नहीं बन सकता । please in sab questions ke bare mein kuch jaankaari dein please mujhe appke articles ka intezaar rahega.

rajeev ji, aap apni us 6 months wali durlabh sidhi ke bare mein likhen.
समय और मूड होने पर मैं कोशिश करूंगा ।
main aapse sahmat hun ki meri situation ke hisaab se mere liye (agar maine karni ho to) aatm gyaan ki sadhna hi theek rahegi.
ये साधना भी द्वैत की सभी साधनाओं के ऊपर है ।
but main sirf jigyasa vash jaanna chahti hi special secrets ke bare mein kyun ki main apni saari life saas bahu ke zaghde mein waste nahi karna chahti. mere vichaar se bilkul kuch na jaanne se kuch na kuch jannna behtar hai.
मनुष्य जीवन का असली लक्ष्य यही है ।
aap beshaq apni marzi se hi lekin durlabh secret sadhnas ke bare mein time to time article likhte rahen.
लोगों को इस ग्यान का फ़ायदा हो । इसके लिये मैं अधिक से अधिक जानकारी देने की कोशिश करता हूं । ) chahe wo aapke personal experience ho ya kisi aur sadhakon ke.
मैं आपसे सहमत हूं । पर साधना के नियम अनुसार सारी बात संकेत में ही कही जाती है ।
rajeev ji kya sachmuch apsara hoti hain ya yakshini jinka aapke articles mein jikar aya hai.
द्वैत की साधना में तो यही सब ज्यादा होता है । इसी में वाममार्गी साधना भोग प्रधान होती है । जिसका लालच तो बहुत होता है । परन्तु अंत लाखों साल का नरक होता है । अप्सरा यक्षिणी दोनों होती है । जो हंस ग्यान में भी मिलती है ।
and univesre mein kya sachmuch pret lok, andhere lok, suksham lok etc hain.
ये तो होते ही हैं । इनके अलावा भी बहुत कुछ होता है । ये सबसे बडे जादूगर का खेल जो है । )

rajeev ji, ye prasun ji kaun hain jinka jikar apki pret stories mein aya hai.
जैसा कि मैंने ऊपर भी कहा है । प्रत्येक साधक और उसकी साधना गुप्त होती है । आम लोगों को अलौकिक ग्यान से परिचित कराने के लिये । और जिन बातों से इंसान का फ़ायदा होता है । केवल उतनी ही बात बताने का नियम है । इसका उलंघन करने पर पूरी साधना ही नष्ट हो जाती है । वास्तव में किसी भी सच्चे साधक के घरवाले और उसकी बीबी या पति को भी पता नहीं चल पाता कि वो क्या चीज है ? लेकिन इस स्कूल के क्लासफ़ेलो एक दूसरे के बारे में कुछ कुछ जान जाते हैं ।
aur ye ghost stories jo apke articles mein hain kya ye pure haqeeqat hai.
 हकीकत इससे भी बढकर होती है । जो साधना करने पर पता चलती है । अगर पूरी बातें ज्यों की त्यों लिखी जाय । तो कोई भी दीवाना हो सकता है ।
 aur ye jo universe hai jismein countless stars hain kya is universe mein aur bhi itne kism ki duniya hai jisko jaanna kalpana se door hai.
 इतनी चित्र विचित्र सृष्टि है । कि साधक को लगता है । भाड में जाय दुनियादारी । बस योग करो । इसी में मजा आता है । उस आनन्द के सामने दुनियां की हर चीज फ़ीकी हो जाती है ।
 maine science mein padha tha in school ki kuch stars to itne bade hain ki hamare sun se bhi thousand gunnaa bade and countless stars ki 1 galaxy hai and galaxies bhi coutless hain.
ये सच है । सूर्य आदि अनेकों हैं ।
kya ye univesre endless hai jisko antheen kaha jaye.
ये सच नहीं है । क्योंकि मनुष्य की बाडी और यूनिवर्स की शेप सेम है । पर ये किस तरह से है । इसको जानना मामूली बात नहीं है । हां मनुष्य के लिये ये एन्डलेस के समान ही है ।
mere hisaab se modern science in baaton ke bare mein zada nahi bata sakti. kyun ki modern science humko means hamari physical body ko man made materials dwara sukh araam pahuncha sakti hai is se zada uski hadh nahi.
ये बिग्यान जो भी है उसी बिग्यान से आता है । पर अभी ये चींटी के बराबर भी नहीं है । )

rajeev ji, surat shabad yog advait ki sadhna hai, kya ye moksha and bhog dono deti hai.
इसका पहला स्टेप हंस है । हंस क्वालीफ़ाई कर लेने पर सुरति शब्द योग शुरू होता है । इसलिये कह सकते हैं कि इसमें भोग और मोक्ष दोनों ही हैं । जब तक कोई अपनी इच्छाओं का भोग नहीं कर लेता । हंस से आगे नहीं बढ सकता । इच्छा काया इच्छा माया इच्छा जगत बनाया । इच्छा पार गये जो उनका पार न पाया ।
kyun ki dwait ki sadhna bhog deti hai moksh nahi. adwait ki sadhna and dwait ki sadhna dono ko 1 hi jeevan mein kiya ja sakta hai.
साधना द्वैत से शुरू होकर अद्वैत पर समाप्त होती है । हंस द्वैत से ही शुरू होता है । अतः जाहिर है कि इसको पास कर लें । तो एक ही जीवन में दोनों को कर स्कते हैं ।
adwait ki sadhna ke saath dwait ki koi bhi satvik sadhna. aapki nazar mein
इसी हंस से सब मिल जाता है । एक हि साधे सब सधे । सब साधे सब जाय । रहिमन सींचो मूल को फ़ूले फ़ले अघाय । इसी के लिये कहा है ।
is time poora satguru kaun hai is waqt kyun ki poora satguru 1 time mein 1 hi hota hai.  आप पहले गुरु को तो जान लें । सतगुरु बहुत बडी बात है । मैंने पहले ही कहा । रहस्य किसी सीमा तक ही बताये जा स्कते हैं । surat shabad yog ke kya kuch niyam(rules) bhi hain.
खासतौर पर नानवेज खाने से हानि होती है । बाकी कोई भी नियम नहीं है । जरूरी नही आप वाथ लेकर ही अभ्यास या नाम कमाई करें ।
 isko 1 din mein kitna time karna chahiye 1 hour ya 2 hour.
जो साधक सुबह 15 मिनट से शुरूआत करके 3 घंटे बैठने का अभ्यास कर लेते हैं । उन्हें बहुत जल्दी सफ़लता मिलती है । इसके अलावा रात को लेटकर ( सोने से पहले ) ध्यान करने से भी बहुत लाभ होता है । जितना करते हैं । उसी रेशियो में फ़ायदा होता है ।
aur kya surat shabad yog ki diksha lene ke baad agar iski sadhna shuru kar di jaye to jab tak moksh nahi mil jata to kya tab tak maanav janam hi milta rahega.
निश्चय ही । और भी बहुत कुछ मिलता है ।
jo log dwait ki sadhna karte hain kya unko dobara maanav jeevan nahi milta.
ये लोग देवता अप्सरा यक्ष स्वर्ग आदि भोगों को प्राप्त करते हैं । ये कुन्डलिनी वाला योग होता है । इसमें मनुष्य जन्म नहीं होता ।
jo log sadharan ghareku pooja paath karte hain pori sharadha se kya unko maanav jeevan dobara mil sakta hai.
मिलता है । मगर 84 भोगने के बाद । साधारण पूजा से अगला ही जन्म मनुष्य का हो जाय । ऐसा नहीं होता । अगर ऐसा होता । तो मनुष्य शरीर की क्या वैल्यू होती । जिसके लिये देवता भी तरसते हैं ।
agar kisi insaan ki koi desire adhuri reh gayi ho jis par wo bahut mohit ho kya uska agla janam kya hoga.
जन्म मरन अपनी इच्छा से होता । तो लोग पता नहीं क्या क्या करते ? बहुत चकरघिन्नी वाला खेल है ये । )

rajeev ji, maine suna hai ki daan punya ka bahut mahtavya hai.
जो भी दान किया जाता है । वो आगे के लिये खेत में बीज बोने के समान है । इच्छा रखकर दान करने से हजार गुना । बिना इच्छा रखे दान करने से अगले जन्मों में लाख गुना होकर मिलता है । यही नियम पाप करने के फ़ल पर लागू होता है ।
koi kehta hai ki paise ka daan karo
तो आगे पैसा मिलेगा
ya khaane pine ki cheezon ka
तो आगे खाने पीने की चीजों का भंडार मिलेगा ।
ya vidhya daan ( ये भी ठीक है ।
ya ang(body part)daan karo.
ये बकबास है । ब्लड । वो भी जरूरी होने पर दान करना ठीक होता है । या मरने के बाद बाडी का दान कर दो । शरीर बहुत कीमती है । साधना में स्वस्थ शरीर का बहुत ही महत्व है ।
 kya daan ka mahtavya hai. samaaj mein koi agar rich lekin sundar nahi hai, agar koi sundar hai to rich nahi hai, koi rich hai to physically fit nahi hai etc etc
सब अपने कर्म फ़ल अनुसार मिलता है ।
and ye bhi suna hai ki bikhari ko daan dena chahiye ya nahi.
हरगिज नहीं । दान हमेशा जरूरतमन्द को दें । मन्दिर । धनी बाबाओं आदि को किया दान बेकार जाता है । ) western countries mein purush balwaan hain and ladies sundar lekin wahan nastikta bahut hai
वो लोग भोगवादी स्वभाव के अधिक हैं । पाप कर लो फ़िर कनफ़ेस कर लो । वाहियात झूठी तसल्ली देते हैं खुद को ।
 and yahan bhi nastik jo hain wo dusron ko bhi naastik banane mein lage hain.
दुनियां में सब तरह के लोग होते हैं ।
meri soch jo badali hai kya ye bhi kisi pichle janam ke karm ka result hai
निश्चय ही ।
and mujhko jo sundar physical body mili hai ye kisi pichle janam ke punya ke kaaran hai
निश्चय ही । विचारों के अनुसार शरीर और फ़ेस बनता है ।
ya family breed ke kaaran kyun ki mere nanihaal ki baki auratein bhi sundar hain jaise meri mother, mausi, cousin sisiters etc.
फ़ैमिली ब्रीड आदि भी कर्म फ़ल से ही हो जाती है ।
 hum logon ke pariwaar 1947 mein pakistan ke punjab ke sargodha district se yahan india mein aye the. surat shabad yog ki practice mein kya daan punya ka bhi koi fayda hai. agar ye dono kiya jayen to.
तो जैसे सोने पर सुहागा । 

12 दिसंबर 2010

जानबूझ कर गढे में मूरख भी नहीं गिरता ।

roop_kaur पोस्ट " मैं तो केवल निमित्त ( माध्यम ) हूं । यह सब उसी की ... " पर । 1 aur bahut zaroori baat rajeev ji, ye baat jo main kehne ja rahi hun, ye mera personal experience hai. mere parivaar mein ya aur jitne bhi sikh parivaar jinse mere milna julna hai ya tha. unmein se kafi log kattar vichaar wale hain. ( देखिये सभी धर्म जातियों में कट्टर और सीधे लोग आपको मिलेंगे । हिंदू मुसलमान सिख ईसाई कोई भी इससे बचा नहीं है । लेकिन यह चीज आपको वहां बहुत कम मिलेगी । जहां सभी जाति धर्म के लोग किसी भी कारणवश एक साथ रहते हैं । वहां एक दूसरे की अच्छाई बुराई हमारे अन्दर आटोमेटिक बदलाव कर देती है । जैसे दिल्ली मुम्बई अमेरिका आदि में कोई भी अपनी कट्टरता चलाना चाहे । नहीं चलेगी । लेकिन जहां एक ही जाति का बाहुल्य या गढ होता है । वहां ऐसा देखने को मिलता ही है । मेरी समझ में ये नही आता कि लोग जब ये मानते हैं कि सबका मालिक एक है । परमपिता एक ही है । तो वो अपनी संतान को ऊंचा नीचा बना के भेदभाव क्यों करेगा ?
means ki wo apne sikh dharam ke ilawa baki sab dharamo ko bekaar ya bura ya nicha maante hain. ( ऐसा जटिल संस्कारों के कारन होता है । लेकिन ये बात सिर्फ़ सिखों में ही हो । ऐसा नहीं है । सभी जाति के लोग अक्सर अपने धर्म को ऊंचा और दूसरों को नीचा मानते हैं । जबकि ये भारी अग्यानता ही है । अगर वो बारीकी से अपने धर्मग्रन्थों का अध्ययन करें । तो सभी में एक ही बात पर जोर दिया है । आत्मा और परमात्मा को जानना । प्रभु की भक्ति द्वारा अपना उद्धार करना ही मनुष्य जीवन का असली लक्ष्य है । yahan tak ki jab main b.a kar rahi thi in modi college patiala tab mujhe 1 hindu ladke se pyaar ho gaya tha lekin mere parents ne saaf mana kar diya kyun ki ladka hindu tha and fir meri shaadi hamari hi biradari mein kisi se kar di. ( आपके फ़ादर ने एकदम सही कदम उठाया । मेरा अनुभव है । किशोरावस्था के प्रेमविवाह 95% असफ़ल होते है । लडकपन का प्यार । प्यार कम अन्दर उमडती वासना की चाहत अधिक होती है । लडकियां कोमल ह्रदय की होने के कारन वास्तव में दिल आत्मा से पहले प्यार को चाहती हैं । लेकिन अधिकतर लडकों की ख्वाहिश सिर्फ़ उनके शरीर से खेलने की ही होती है । दूसरे अंतरजातीय विवाह में अक्सर लडके लडकी का समाज उनको स्वीकार नहीं कर पाता । इस तरह जिंदगी दूसरे मूल्यों में बेमजा हो जाती है । आप हिंदू समाज या उसके स्त्री पुरुषों को बहुत अच्छा मानती है । तो ये आपकी भारी भूल है । कपडों के भीतर सभी नंगे और एक से ही होते हैं । इसलिये इंसान को रंगबिरंगे कपडों के आकर्षण पर न जाकर गुणों को देखना चाहिये । अपने समाज में विवाह करने से कुछ ऊंच नीच होने पर समाज का दवाव और सहयोग मिलता ही है । ) lekin yahan main point ye hai ki jo maine jyadatar sikh log ya sardar log dekhe hain wo gurudwara to jate hain sikhon wala paath bhi karte hain. lekin baatein hamesha hi dusri karte hain and unke pass gyaan jaisi koi cheez bilkul hi nahi hai.( ऐसा सिर्फ़ सिखों में ही नहीं । हर धर्म में होता है । इंसान जाति या धर्म से नही बल्कि अपने स्वभाव और गुणों से अच्छा बुरा होता है । ) haan jo normally young boys hain aaj kal sardaron ke wo baal to fashion ke taur par katwa rahe hain, lekin kehte hain hum sikh hain kisi aur dharam ya baat ko nahi maanege. ( मेरी दोस्ती कई सरदार लडकों से रही । जिनमें हैप्पी से मेरा एक बार सतसंग हुआ । तो वो रोने लगा । और बोला । आपने एक दोस्त होकर जो बताया । वो हमारे बुजुर्गों ने भी कभी नहीं बताया । आप जितना सिख गुरुओं के बारे में और धर्म के बारे में जानते हैं । उतना हमारे बुजुर्ग भी नहीं जानते । वे सिर्फ़ पैसा कमाने और मौजमस्ती की ही बात ज्यादा करते हैं । ) kuch time pehle maine kisi se surat shabad yog ke bare mein discus karna chaha (kyun ki wo aadmi gurudwara jata hai and roz gutka saheb ka paath bhi karta hai) वास्तव में गुरुग्रन्थ साहिब में सुरति शव्द योग का ही गुणगान है । पर सुरति शव्द योग दुर्लभ और गूढ ग्यान होने के कारण लोग इसको ठीक से समझ नहीं पाते । इसमें उनका कोई दोष नही है । श्री गुरु ग्रन्थ साहिब का संकलन 5वें guru श्री अर्जुन देव ने किया । गुरु ग्रन्थ साहिब का पहला प्रकाश 16 aug 1604 को हरिमंदिर साहिब अमृतसर में हुआ । पंथ की बुजुर्ग शख्सियत बाबा बुढ्ढाजी को पहला ग्रन्थी नियुक्त किया गया । मगर 1705 में दमदमा साहिब में दशमेश पिता गुरुगोविंद सिंह ने गुरु तेगबहादुर के 116 शबद जोडकर इसको पूर्ण किया । गुरुग्रन्थ साहिब में सिख गुरुओं के ही उपदेश नहीं हैं । 30 hindu और muslim भक्तों की vani भी है । Jaydev और Parmanand जैसे ब्राह्मण की वाणी है । Kabeer । Ravidas । Namdev । सैण । सघना । छीवा । धन्ना की vani भी है । 5 वक्त नमाज पढने वाले shekh Farid के श्लोक भी गुरुग्रंथ साहिब में हैं । गुरु श्री अर्जुन देव और नानक जी सुरति शव्द योग का ही उपदेश करते थे । सिखों में और भी पहुंचे संत हुये है । to wo to bhadak gaya and mujhe faaltu lecture dene laga and kehta tha ki 'ye sab main nahi janta, aap kya keh rahi hai, hamare sikh gurus ne idhar udhar kahin jaane se humko band kiya hai, ( ऐसा किसी सच्चे संत ने हरगिज नहीं कहा । चाहे वो किसी भी जाति में हुआ हो । ) sab bakwaas hai, hamare guruon ne kaha hai ki hum ko kuch bannna chahiye, hum yahan kuch bann ne aye hain'( इंसान अनादि काल से बनने और ज्यादा बनने की चाह में ही अपना सब कुछ खो बैठा । सोचो परमात्मा के पुत्र को कुछ भी बनने की जरूरत है । राजा के बेटे को धन कमाने की क्या आवश्यकता है ? ) to rajeev ji us time mere ko bada ajeeb laga kyun ki wo baat to sikh dharam ki kar raha tha lekin us time usne sharab pi rakhi thi (ye mere maayke ki baat hai, us time dinner time tha and wo hamara rishtedaar tha) शराब का आदी कभी समझदारी या ग्यान की बात नहीं कर पायेगा । इसमें कोई शक नहीं । ) and uski baatein sun kar main to chup kar gayi and uski bahut hi moti patni garv se aur ful gayi. rajeev ji main kisi ke khilaaf nahi bol rahi, mujhe sikh dharam bahut pyara hai kyun ki mera present janam is dharam mein hua hai, lekin ye baatein jo maine likhi hain ye mera personal anubhav hai.( आपने और लोगों की तुलना में जिंदगी को ईमानदारी से देखने और जानने की कोशिश की । जो बहुत बडी बात है । ) and 1 baat mujhe ab acchi nahi lagti (pehle college time mein maine is baat par bhi dhyaan nahi diya tha) wo ye ki aam taur par punjabi logon mein abhimaan bahut hai,( ये बात मेरे भी अनुभव में आयी । लेकिन दूसरे तरह से । मेरे विचार से वे जीवन को मौज मजे से जीना अधिक पसन्द करते हैं । खाओ पीओ मस्त रहो । एंजाय करो zor zor se bolna mazak mein bhi 1 dusre ko gaali dena( ye sab gents mein hota hai ladies mein nahi) lekin ab ye sab bhi mujhe acha nahi lagta. baar baar ye kehna ki sansar mein ya is earth par punjabi logon se behtar ya aaj kal ke sikh samaaj se behtar koi nahi mujhe hairaan karta hai. ( हर आदमी अपनी मर्जी से जीता है । हमें अपने कल्याण के बारे में अधिक सोचना चाहिये । ये दुनियां ऐसे ही चलती आयी है । बडे बडे लोगों ने इसको सुधारने का जतन किया । पर न ये सुधरी । न कभी सुधरेगी । kyun ki jo aatma ke rahasya ko nahi samajh pa raha ho main usko uttam nahi maanti (ab meri ye soch hai, kafi pehle meri aisi soch nahi thi) is baare mein zaroor kuch likhen, mujhe aapke kal ke articles ka besabri se intezaar rahega. मैडम आत्मग्यान दुर्लभ होता है । ये करोडों जन्मों के पुन्य के बाद प्रभु की कृपा से हासिल होता है । आप ही सोचिये । सिखों में कितने महान महान संत हुये हैं । और सभी सिख उनको मानते हैं । उनकी वानी का पाठ करते हैं । लेकिन कितने सिख नानक जी और गुरु अर्जुन देव के समान हो पाते हैं । यही हाल दूसरे धर्मों का है । इसलिये मुझे उनमें कोई दोष नजर नहीं आता । जानबूझ कर गढे में मूरख भी नहीं गिरता ।
roop_kaur पोस्ट " मैं तो केवल निमित्त ( माध्यम ) हूं । यह सब उसी की ... " पर । rajeev ji, main jis parivaar se hun. maaayke wale aur sasural wale dono families mein non-veg khaya jata hai. ( इसका फ़ल हजारों साल का नरक होता है । इसमें कोई शक नहीं । किसी भी धर्मग्रन्थ या धर्मगुरु ने जीवहत्या को पाप बताया है । बाद में मांसाहार के शौकीनों ने धर्म पुस्तकों में मिलाबट करके बातों को तोड मरोड कर लिखा । पशुबलि का अर्थ । अपने अन्दर की पशुता की बलि देना । नरबलि का अर्थ जीवभाव या अहम की बलि देना । संस्कृत भाषा में कुछ चीजों के नाम मास ( उडद ) मांस ( वहां लिखे फ़ल आदि का गूदा ) है । हम सब्जियां खाते हैं यानी उनकी हत्या करते हैं । लेकिन हम सब्जियों को दुबारा जन्म दे सकते हैं । परन्तु हम किसी जीव को खाते हैं । तो उसको जन्म नहीं दे सकते । इसलिये ये हत्या हमारे ऊपर सवार हो जाती हैं । mera maayka and sasural dono patiala mein hi hain. mere father ki to 4 famous shops hains chicken ki in patiala. . ( पढाने वाले को मास्टर । इलाज करने वाले को डाक्टर कहते हैं । किसी भी जीव की हत्या कर उसका बिजनेस करने वाले को कसाई कहते हैं । ये बात शायद उनके ध्यान मे कभी आयी नहीं होगी । मेरा विचार है । कोई भी पढा लिखा सभ्य इंसान अपने को कसाई Butcher कहलाना कभी पसन्द नहीं करेगा । shaadi se pehle tak to mujhe jaisa maayke ka lifestyle mila tab tak maine kuch socha hi nahi tha and is bare mein hamare ghar mein kabhi koi baat hi nahi hui thi ki non-veg khana accha hai ya bura.( अग्यानता और घर के संस्कार से गलती उतनी बडी नहीं होती । लेकिन जान लेने के बाद ये महापाप हो जाता है । ) kyun ki mere papa kehte the the (ab bhi ye hi vichar hain unke) profession koi bhi bura nahi hai. kaam chotta bada nahi hota, kaam to kaam hota hai.( इस तरह एक सुपारी किलर भी अपने काम को ठीक ही बतायेगा । सु्पारी देने वाला किसी से परेशान है । और उसको मरवाना चाहता है । किलर ये तर्क देगा कि वो उसकी समस्या हल कर रहा है । एक वैश्या भी कह सकती है कि वो अपने शरीर से उन लोगों की सेवा करती है । जिनको सेक्स उपलब्ध नहीं है । इस तरह तो वो भी पुन्य काम कर रही है । जरा सोचिये । नन्हे मुन्ने गोल मटोल इंसान के बच्चे खेल रहे हो । तो राक्षस भी उनकी हत्या करने में कांप जायेगा । रंग बिरंगे फ़ुदकते प्यारे से चूजों को इंसान कैसे अपने स्वाद के लिये मार डालता है ? ये सोचकर मेरा तो दिल ही कांप जाता है । लेकिन इंसान जो भी करता है । उसका फ़ल उसे अवश्य भुगतना पडता है । इंसान अपने फ़ायदे के हिसाब से मान लेता है कि जो वह कर रहा है । वो ठीक है । लेकिन यहां इंसान का नहीं । परमात्मा का कानून चलता है । lekin main non-veg khana chorna chahti hun.( मैंने जीवन में हमेशा प्रक्टीकल ही किये है । 20 Year age में यार दोस्तों की बातों में आकर कि मीट मुर्गा अंडा खाने से बाडी बनती हैं । मैंने दो बार मुर्गा पांच छह बार आमलेट और पांच छह बार बायल अंडा और कभी कभी शराब पीकर देखी । ध्यान रहे । सिर्फ़ अनुभव के लिये । और मैंने पाया । मुर्गा अंडा में प्याज अदरक लहसुन और तेज मसालों का ही स्वाद होता है । बाकी मांस चबाने पर बुरी हीक बदबू सी लिजलिजापन लगता है । मुझे बहुत ग्लानि हुयी कि मैं एक चलते फ़िरते जीव को खा गया । मांस मछली अंडा खाने वालों के मुंह से हमेशा बदबू आती है । आपने क्योंकि वेज नानवेज दोनों का अनुभव किया है । जरा विचार करें । ऐसे ही मसालों को डालकर टमाटर आलू । बेंगन का भुर्ता । आलू के परांठे । फ़्राई की अरहर की दाल आदि ज्यादा स्वादिष्ट लगती है या नानवेज ? नानवेज खाकर पेट में वेज खाने की तुलना में भारीपन का अहसास अलग होता है । यही बात शराब के अनुभव में हुयी । मैंने पाया । महंगी शराब से लस्सी । शिकंजी । फ़्रूट जूस आदि पीने से अधिक आनन्द और फ़्रेशनेस का अनुभव होता है । आप ये शुभ कार्य जितनी जल्दी करेंगी उतना ही अच्छा होगा । लेकिन दूसरे अगर खाना चाहते हैं । तो उन पर छोडने के लिये दबाब न डालें । अपने कर्तव्य अनुसार उन्हें बनाकर खिलाने में इतना दोष नहीं है । ) maine ye baat normally jab ghar mein kisi se bhi kahi(maayka ho ya sauraal) to unhe laga ki main mazak kar rahi hun ya fir mera dimaag theek nahi hai. iske bare mein meri aankhen kholiye. ( जीवन पूरा होने के बाद या कभी कभी जीवन में ही जब हमारे कर्मों की सजा मिलती है । तब कोई उस सजा को बांट सकता है क्या ? परिवार जन्म होने के बाद ही मिलता है । जीव अकेला आता है । अकेला जाता है । वहां कोई साथ नहीं देता । परिवार यहीं तक के लिये है । वहां सबको सजा अकेले ही भोगनी पडती है । मुझे नहीं लगता । मां बाप या परिवार कोई भी अपने प्रियजन को गलत शिक्षा देगा । जीवन में दो दिन का मेला जुडा । हंस जब भी उडा । अकेला उडा । अच्छा बुरा । आपका किया । आपको ही भुगतना होगा ।

11 दिसंबर 2010

मैं तो केवल निमित्त ( माध्यम ) हूं । यह सब उसी की कृपा से होता है ।

roop_kaur पोस्ट " वास्तव में ये जीवन भी एक पाठशाला है । " पर । rajeev ji, main kuch time pehle apni padosan ke saath Radha Soami centre gayi thi jo punjab mein hai. wahan 1 sevadaar tha jo us padosan ka rishtedaar tha. usne kaha tha ki radha soami surat shabad yog ka abhiaas karwate hain.( बिलकुल सही है ) shayad koi 5 words(shabad) hain. ( राधा स्वामी में पंचनामा ही दिया जाता है । 5 नाम जो स्वांस के साथ जपे जाते हैं ) jo sirf radha soami's ke pass hain. is se hi mukti hoti hai.( ये भी सही है । ये 5 नाम राधास्वामी के पास हैं । लेकिन ये वो असली नाम नहीं है । हालांकि ये भी सच्चे गुरू से किसी को मिल जांय तो बहुत बडी बात है । परन्तु चरनदास और राधास्वामी मत को चलाने वाले
संत के बाद राधास्वामी में अभी कोई पूरन गुरू मेरी नालेज में नही है । इससे ही मुक्ति होती है की जगह यह कहना अधिक ठीक है । इससे भी मुक्ति होती है । परन्तु गुरू यदि सच्चा हो ? मुक्ति और मुक्त में बहुत बडा अंतर है । आपका पंजाब में रहने का दिल ना हो । और कोई आपको किसी दूसरी और अच्छी ( मगर मनचाही नही ) जगह शिफ़्ट करवा दे । इसको मुक्ति ( पंजाब से ) कहा जायेगा । मगर कोई बंदा । कोई तरीका । आपको ऐसा उपाय बता सके । आप जितनी मर्जी चाहें । जहां जी करे । वहां रहे । इसको मुक्त कहते हैं । आपने कबीर का वह भजन सुना होगा । करम धरम दोऊ बटे जेवरी । मुक्ति भरती पानी । करम धरम मुक्ति भी जहां भक्तों की सेवा करते है । असली मालिक का घर वह है ।
and wo apne radha soami babaji ko puran satguru bata raha tha ( ऐसे मेरे पास भी हजारों लोग आते हैं । पर हम किसी के बारे में बेकार कुछ क्यों कहे । अगर कहने वाला संतुष्ट है । तो इससे अच्छी बात क्या हो सकती है । वो जाने उसका काम जाने । अपने को धोखा देकर । जूठी तसल्ली देकर ही कोई खुश है । तो कोई क्या कर सकता है । and sri krishan ( योग में सबसे उच्च महात्मा । योगेश्वर । मगर ये भी गुरु आधीन होते हैं । 3 लोक की सत्ता के मालिक । मगर परमात्मा नहीं । यहां थोडा ध्यान दे । जब आप श्रीकृष्ण कहती हैं । तो बात अलग हो जाती हैं । एक चींटी में भी परमात्मा ही है । मगर चींटी परमात्मा नहीं होती । दरअसल परमात्मा उसे कहते हैं । जो सबसे परे होता है । श्रीकृष्ण सबसे परे नहीं हैं ।
and guru nanak dev ji ( नानक जी ने उदासीन पंथ चलाया था । जो थोडा अलग सा मैटर है । इसका उत्तर मैं फ़ेस टू फ़ेस या फ़ोन पर तो दे सकता हूं । मगर यहां नहीं । बहुत लोगों की भावनाओं से जुडी बात का समझदारी से उत्तर देना पडता है । वैसे भी इस तरह की बात करना संतमत के खिलाफ़ है । वैसे नानक जी की भक्ति परमात्मा की ही भक्ति थी । नाम खुमारी नानका चडी रहे दिन रात । ) se bhi bada bata raha tha.( हीरा मुख से ना कहे लाख टका मोरो मोल । कोई इंसान परखने से खुद ही पता चल जाता है । मैंने आपसे कहा । समर्पण होते ही 3 मिनट में बृह्मांड की यात्रा शुरू हो जाती है । लेकिन कोई आपको 3 month या 3 साल में भी यात्रा या अलौकिक अनुभव करा सके । तो वह भी बहुत बडा गुरू होगा । लेकिन सतगुरु हरगिज नहीं ।
usne ye bhi kaha tha ki 1 time mein 1 hi satguru hote hain ( गीता में इसको समय के सतगुरु और संतमत की किताबों में जगह जगह बताया गया है । अतः ये कोई बडे रहस्य की बात नहीं है । लेकिन ( वह ) कहने वाला इसका सही मतलब नहीं जानता । परन्तु ये बात एकदम सच है । जिस तरह दो परमात्मा नहीं होते । दो सतगुरु भी नहीं होते । हां गुरु लाखों हो सकते हैं । and is time unke guru hi poore hain and baki sab adhure hain. ( हा हा हा । अगर प्रभु ने चाहा । आपको अच्छा ध्यान करना आ गया तो इसका उत्तर आपको स्वयं ही मिल जायेगा । वास्तव में हमारे गुरुदेव कहते हैं । किसी की कही बात मत मानों । मानों मत खुद जानों । खुद के अनुभव में जो आता है । उसी से असली लाभ होता है । unke guru maine dekhe the satsang mein lekin unke saath hathyaar dhaari bodyguards the. (kya kisi sant ko bodyguards ki zaroorat ho sakti hai) ( हरगिज नहीं । लेकिन समय के अनुसार अपना बचाव करना अवश्य आवश्यक होता है । आपको ध्यान होगा श्रीकृष्ण 17 बार रण छोडकर भागे थे । और उनका एक नाम ही रणछोड पड गया था । जबकि वो कितने पावरफ़ुल थे । लेकिन हर समय बाडीगार्ड रखने वाला संत नहीं हो सकता । वास्तव में सच्चे संत के पास आते ही व्यक्ति की सभी दुष्टता समाप्त हो जाती है । कई संतो के सामने शेर तक कुत्ते के समान पूंछ हिलाने लगे थे । जिनमें गौतम बुद्ध भी थे ।.aur us sevadaar ne kaha tha ki hamare 5 shabadon ke ilawa sampuran mukti ka koi raasta nahi. ( बेचारा । अग्यानवश । गलतफ़हमी का शिकार । जिस मत में जीता है । उसको भी ठीक से न जानने वाला । ) lekin wahan par paath ki lines sri guru granth sahib mein se padhi ja rahi thi. ( थ्योरी कब तक पढोगे । प्रक्टीकल करिये । कार में बैठकर कार चलाने के लिये कार की आरती गायी जाती है या चाबी लगाकर तरीके से चलाया जाता है ? ) and fir bhi ye sikh gurus se apne baba ji ko bahut bada bata rahe the. and wo ye bhi keh raha tha ki yahan par naam daan ya diksha 25 saal ki age ho jaane ke baad milti hai.( हमारे यहां सबसे छोटा शिष्य 3 साल का है । मैंने पहले ही आपको लिखा है । आपके गोद का बच्चा भी आराम से इसको कर सकता है । बस वह कही हुयी बात समझ ले । ये जरूरी है । फ़िर age कुछ भी हो । पर बडों को समय समय पर उसे प्रेरित अवश्य करना होता है । हमारे साधक m and f सुबह जब घर पर ध्यान पर बैठते हैं । तो बच्चे खुद ब खुद प्रेरित होते हैं । वास्तव में अपने बच्चे का ये सबसे बडा हित करना है कि गुरु या सतगुरु से उसको उपदेश कराया जाय । and maine kisi se ye bhi suna hai ki wahan jab naam daan dete hain tab jin logon ko naam daan dena hota hai unko ek saath baitha kar unke purane sevadaar hi naam daan de dete hain.( एकदम गलत । नाम स्वयं गुरु देते है । नामदान देते समय ही ज्यादातर बहुत अनुभव हो जाते हैं । सही दीक्षा कैसे होती है । इस पर मेरे ब्लाग्स पर पहले ही लेख मौजूद है । ) main aisi 2 aur auraton se bhi mili hun jinhone wahan se naam daan liya hai. wo ladies 50 saal se zada age ki hain. un ladies ko naam daan liye hue 20 saal se bhi zada ho gaye. lekin unmein se 1 ka kehna hai ki mera naam japne ko ya abhiyaas karne ko bilkul bhi dil nahi lagta.( हमारे एक साधक राधारमण गौतम की मांजी लगभग 70 साल की हैं । वह इतना भजन ( नाम जपना ) करती हैं कि कभी कभी मैं भी हैरान हो जाता हूं । वास्तव में किसी को भी नाम जपने से जो प्राप्ति होती है । आनन्द प्राप्त होता है । तो वो उसको स्वयं ही करता है । नानक जी ने कहा था । बोदा नशा शराब का उतर जाय प्रभात । नाम खुमारी नानका चडी रहे दिन रात । लेकिन जब कुछ भी प्राप्त ही न हो तो इंसान कहां तक झक मारता रहे । आप इनसे बात करना चाहे तो 0 97602 32151 पर बात कर सकती हैं । राधारमण गौतम के बारे में लेख भी ब्लाग पर मौजूद है । and dusri ka haal ye hai ki uske ghar mein kalesh khatam nahi hua and wo pichle kuch saalon se lagataar bimaar jaisi hi hai. सुखी मीन जहां नीर अगाधा जिमि हरि शरन न एक हू बाधा । मछली समुद्र में जाकर भी परेशान रहे । इसका मतलब समुद्र झूठा है । निज अनुभव तोहे कहूं खगेसा । बिन हरि भजन न मिटे कलेशा । haan 1 aur mili thi teesri usne bhi wahin se naam daan liya hai lekin uska kehna hai ki usne khud baba ji se naam daan liya hai. lekin wo lady itni jhoothi hai ki shayad is janam mein mujhe jitne jhoote mile wo un sab mein no.1 hai. ( दुनिया में झूठ ही अधिक है और लोग सच में कम झूठ में जीना अधिक पसन्द करते हैं । please is baare mein kuch apni salaah mujhe dein आशा है । आपको कुछ तो संतुष्टि हुयी होगी ।
roop_kaur पोस्ट " वास्तव में ये जीवन भी एक पाठशाला है । " पर । 1 zaroori baat aur rajeev ji, please aap meri baaton se naraz mat hona. ( मैं कभी नाराज नहीं होता । जब आप जैसा परमात्मा को चाहने वाला कोई प्रेमी भक्त मिलता है । तो मुझे बेहद खुशी होती है । वास्तव में यह आपका मुझ पर उपकार ही है कि आपने सतसंग का मौका दिया । aap sochte honge ki ye lady to piche hi padh gayi. ( वास्तव में आप मेरे पीछे नहीं परमात्मा के पीछे पडी हुयी है । जरा गहराई से सोचिये । आप राजीव में इंट्रेस्टिड थोडे ही है । बल्कि उसी परमात्मा के बारे में अधिक से अधिक जानना चाहती है । उसे प्राप्त करना चाहती है । राजीव तो महज एक पोस्टमेन है । जो आपका खत परमात्मा तक पहुंचाता है । और उसका जबाब आप तक । वास्तव में जिस तरह एक अच्छा गुरु मिलना मुश्किल है । उसी तरह एक अच्छा शिष्य मिलना भी मुश्किल होता है । इस तरह आप मुझ पर उपकार ही कर रही हैं । मैं तो केवल निमित्त ( माध्यम ) हूं । यह सब उसी की कृपा से होता है । lekin meri mazboori hai mujhe mere sawaalon ke jawab kahin mil nahi rahe the. aap maane ya na maane sirf aapke blog se hi mujhe mere sawaalon ke zawab mil rahe hain. ( वास्तव में ये गुरुकृपा और परमात्मा की मुझ पर दया ही है । वरना मैं किसी मतलब का नहीं हूं । isliye ab aap se hi umeed hai. so, mere par apni kripa rakhen. साहिब आपकी इच्छा पूरन करे । मेरी यही भावना है ।
roop_kaur पोस्ट " वास्तव में ये जीवन भी एक पाठशाला है । " पर ।rajeev ji, hans diksha ya aatm gyaan ki diksha se hum physical body se nikal kar suksham body ke dwara kahin bhi aa ja sakte hain. ( बिलकुल सही । लेकिन साधना को रसगुल्ला खाना मत समझ लेना । यहां तक पहुंचने के लिये बहुत मेहनत और लगन की जरूरत होती है । means is earth par bhi kahin bhi aa ja sakte hain. ( निश्चय ही ) kya us time hamara suksham body kisi ko dikhayi nahi dega aur hum kya sabhi ko dekh sakte hain.( आम आदमी को नही दिखायी देगा । परन्तु अच्छे साधक । सिद्ध और जो योनियां सूक्ष्म शरीर में हैं वे न सिर्फ़ देखते है । वरन बातचीत भी करते हैं । ये जल्दी ही हो जाता है । बहुत ऊंची साधना हो जाने पर ही हम दूसरों (आम आदमी ) को देख सकते हैं । यह थोडा कठिन है । and agar aatm gyaan ki sadhna se agla maanav janam pakka hai to kya hum apni marzi se kisi aur dharam ya society mein janam le sa kte hain. jaise sikh se hindu ya hindu se sikh. ( अवश्य पर पूरे कर्म संस्कार मिट जाने के बाद ही । वैसे भी हर आत्मा इच्छानुसार ही जन्म लेती है । जहां आसा तहां वासा । and kya main agle janam mein purush janam mein bhi ja sakti hun. is bare mein bhi kuch batayein अगर आप मीरा जैसी स्थिति को पा लें तो ऐसा हो सकता है । ध्यान रहे आत्मा न स्त्री है न पुरुष ।
roop_kaur पोस्ट " वास्तव में ये जीवन भी एक पाठशाला है । " पर । thanx rajeev ji, aap baki questions ka answers bhi zaldi de dijiye and sirf thode se sawaal aur hain jinko main aapse time to time puchti rahungi. really lot of thanx.
धन्यवाद मैडम । मैं जल्दी ही कोशिश करूंगा । आप बेझिझक चाहे जितने सवाल पूछे । हमारे गुरुदेव कहते
हैं । जीव को चेताने के समान पुन्य कोई नहीं है । अगर तुम्हारे द्वारा एक भी जीव चेत ( जाग ) गया । तो
ये बहुत बडी बात होती है । फ़िर कोई मैं पर्सनल तो आपको उत्तर दे नहीं रहा । ब्लाग पर प्रकाशित होने के
कारण बहुत लोग इससे लाभ उठायेंगे । इसलिये आप बेहद पुन्य का कार्य कर रही हैं । इसमें कोई शक नहीं
है । thanx again madam ।

10 दिसंबर 2010

वास्तव में ये जीवन भी एक पाठशाला है ।

roop_kaur पोस्ट roop_kaur जी रब्ब आपकी ये मुराद पूरी करे । पर । rajeev ji, 1 zaroori baat ye hai ki jab tak main college mein thi tab sirf physical body ko hi sab kuch samajhati thi. lekin kuch time pehle jab wo padosan mili tab mujhe pata laga ki physical body hi sab kuch nahi iske andar aatma bhi hoti hai. lekin ab is time meri soch ye hai ki wo aatma(soul) main hi hun. main ye physical body nahi hun, ye body meri hai lekin main iske andar jo aatma hai (main wo hun). aur suna hai ki aatma ya soul ya rooh ye 1 bahut hi suksham prakash jaisi hoti hai. aur ye aatma Anaadi, Ajanma, Ajar, Amar aur Abinashi hone ke kaaran sada se hi iska astitav hai and hamesha hi rahega. it means ye aatma jo meri asli pehchaan hai ya jo mera asli savroop hai ye Anadi aur Anant hai. please mujhe is baare mein aap khud kuch batayie apne next article mein. i shall be very thankful to you.
@ roop_kaur जी । early morning आपके message देखे । जैसा कि आपने ( ऊपर ) लिखा है । बस इतनी ही बात समझाने के लिये मुझे खासतौर पर female को बहुत मेहनत करनी होती है । इतनी बात का ग्यान होते ही ye body meri hai lekin main iske andar jo aatma hai (main wo hun). कोई भी साधना बेहद आसान और सरल हो जाती है । आपकी family position के हिसाब से आप बेहतर साधना कर सकती है । अकेलेपन के इंसान को यदि प्रभु भक्ति प्राप्त हो जाय । तो वह वरदान के समान है । although मेरे blogs में अलग अलग article में साधना के बारे में काफ़ी कुछ matter है । फ़िर भी आपके कहने पर मैं soul का चक्र बता रहा हूं । अभी का इंसान योनि में जन्म । 0 to 17 year तक young age यानी बचपन के मस्ती के दिन । 17 to 55 जवानी के दिन । इसमें शादी बच्चे sex life और धन कमाना । औरत के लिये घर संभालना । 55 to 70 बुढापे का सफ़र । और अपने बच्चों को फ़लते फ़ूलते देखना । जो धन सम्मान आदि कमाया । उसका भोग करना । 70 to 125 ( इंसान की real age 125 ही होती है । ) बुढापे के कष्ट । और जीवन से मोहभंग । इस समय अहसास होता है । कि जीवन बेकार गया । और चीजों के साथ नाम भक्ति की होती । तो संतुष्टि होती । 70 to 125 किसी भी समय मौत बुला ले जायेगी ।

after death 84 लाख योनियों में साडे बारह लाख साल तक पशु पक्षी कीट पतंगा आदि योनियों में बेहद कष्ट से रहना । इसके बाद फ़िर से मानुष जन्म । ये सामान्य rule है । यहां 1 खास बात मुझे याद आ रही है । male से female या female से male ये change लाखों जन्म मानुष योनि के बाद हो पाता है । इसका कारन स्वभाव में स्थित रहने के कारन होता है । 1 female 84 में जाने के बाद भी female ही पैदा होगी । आपने कालेज टू पडोसन जो भी सीखा । सुन्दर है । वास्तव में ये जीवन भी एक पाठशाला है । हमारा शरीर अखिल बृह्मांड का map है । 9 द्वार के घर में हम रहते हैं । 2 कान 2 आंख 2 नाक 1 mouth 1 योनि या लिंग 1 गुदा । मृत्यु के समय कान से प्राण निकलने पर भूत प्रेत । आंख से कीट पतंगा । नाक से पक्षी । मुंह से पशु । योनि या लिंग से जलजीव मछली आदि । गुदा से नरक । ये पिंड शरीर ( आई ब्रो के नीचे ) का विवरण है । हम क्योंकि इन्ही अंगो से बरताव करते रहे । अतः ऊपर की बात नही जानते । लिहाजा 84 में जाने की यही मजबूरी हो जाती है । आई ब्रो
के बीच बिंदी या टीका का स्थान बृह्मांड में जाने के लिये द्वार है । यह lock होता है । इसकी चाबी पहुंचे हुये संतो के पास होती है । यह यदि समरपण हो जाय । तो 3 मिनट में खुल जाता है । और दिव्य साधना बडी आसानी से शुरू हो जाती है । इसके कुछ ऊपर जाने पर 10 वां द्वार मिलता है । जिसको एक बार जान लेने के बाद हमेशा मोक्ष होने तक मनुष्य शरीर ही प्राप्त होगा । अंत में इतना ही कहूंगा । realy glad to meet you । समय समय पर आपके प्रश्नों का उत्तर देता रहूंगा । अभी आपके सभी Q का ans नहीं हुआ है । शाम तक शायद दे पाऊं । आपका दिन मंगलमय हो । सत श्री अकाल ।

क्षुद्र को ही उत्तेजित किया जा सकता है

1 यूरोप का विचारशील नास्तिक हुआ - बर्क । वह 1 विवाद में उतरा था 1 पादरी के साथ । तो पहला ही तर्क बर्क ने उपस्थित किया । उसने अपनी घड़ी हाथ से निकाली । और कहा कि - मैं तुम्हारे परमात्मा बताना चाहता हूं कि अगर वह सर्वशक्तिमान है । तो इतना ही करे कि मेरी घड़ी को रोक दे । इसी वक्त । इतना भी तुम्हारा परमात्मा कर दे । तो भी मैं समझ लूंगा कि वह है । लेकिन घड़ी चलती रही । परमात्मा ने इतना भी न किया । सर्वशक्तिमान । इतनी छोटी सी शक्ति भी न दिखा सका । जो कि 1 छोटा बच्चा भी पटककर कर सकता था । बर्क ने कहा कि - प्रमाण जाहिर है । कोई परमात्मा नहीं है । लेकिन बर्क कर क्या रहा था ? वह सिर्फ अहंकार को चोट पहुंचा रहा था । वह यह कह रहा है कि - अगर हो । तो इतना सा करके दिखा दो । बर्क समझ ही नहीं पा रहा । मुद्दे की बात ही उसकी चूक गई । परमात्मा के पास कोई अहंकार नहीं है । आप इसलिए उसे उत्तेजित नहीं कर सकते । उत्तेजित उसे किया जा सकता है - जहाँ अस्मिता हो । असल में क्षुद्र को ही उत्तेजित किया जा सकता है । विराट को उत्तेजित करने का कोई उपाय नहीं है ।
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चांद का भारी प्रभाव है । आपके रोएं रोएं पर प्रभाव है । आपके शरीर में 75%  पानी है । और उस पानी का वही गुणधर्म है । जो सागर के पानी का है । तो चांद आपको आपके 75%  व्यक्तित्व को खींचता है । और आंदोलित करता है । आपको पता है । पूर्णिमा की रात दुनिया में सर्वाधिक लोग पागल होते हैं । पूर्णिमा की रात दुनिया में सबसे ज्यादा पाप होते हैं । पूर्णिमा की रात दुनिया में सबसे ज्यादा हत्याएं होती हैं । आत्महत्याएं होती हैं । क्योंकि पूरा चांद आदमी के मन को उसी तरह खींचता है । जैसे सागर में लहरों को । इसलिए पुराना शब्द है पागल के लिए - चांदमारा । अंग्रेजी में शब्द है - लूनाटिक । इसका दूसरा पक्ष भी है कि पूर्णिमा को बुद्धत्व भी प्राप्त होता है ।
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यह ॐ सृजन की शक्ति का सूत्र है । यह महासृजन की शक्ति का सूत्र है । इससे हम जीवन के मूल केंद्र पर पहुंच जाते हैं । जहाँ से सारी सृष्टि विकसित हुई है । उस गंगोत्री पर । जहाँ से जीवन की सारी गंगा बहती है । लेकिन उसके पहले सारी वासनाएं जड़ मूल से खो जानी चाहिए । नहीं तो उसका प्रतिफलन विनाश होगा । ॐकार वैसा ही सूत्र है । जैसा किं एटामिक फिजिक्स का सूत्र है कि हाथ में पड़ते ही विनाश का महा मंत्र मिल गया । आइंस्टीन ने कहा है मरने के कुछ दिन पहले कि - अगर मुझे दुबारा जन्म मिले । तो मैं किसी गांव में प्लंबर होना पसंद करूंगा । लेकिन अब दुबारा आइंस्टीन होने की इच्छा नहीं है । क्योंकि मुझे पता नहीं था कि मेरे हाथ से विनाश की शक्ति का सूत्र निकल रहा है । इस ॐकार की ध्वनि के साथ 1 होते ही, जो भी इच्छा है । वह तत्क्षण पूरी हो जाती है । इसलिए शर्त है कि वासनाएं छोड्कर ही ॐकार की साधना करनी है । नहीं तो आप क्षुद्र से भर जाएंगे । और विराट की ऊर्जा क्षुद्र में खो जाएगी ।
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1 मुसलमान बादशाह हुआ । उसका नौकर उसे बड़ा प्रिय था - 1 नौकर । इतना प्रिय था कि रात उसके कमरे में भी वह नौकर सोता ही था । उससे बड़ी निकटता थी । बड़ी आत्मीयता थी । दोनों जंगल जा रहे थे । शिकार पर निकले थे । 1 वृक्ष के नीचे खड़े हुए । सम्राट ने हाथ बढ़ाया । और फल तोड़ा । जैसे उसकी सदा आदत थी । कुछ भी उसे मिले । तो वह नौकर को भी देता था । वह मित्र जैसा था नौकर । उसने उसे काटा । 1 कली नौकर को दी । उसने खाई । और उसने कहा - अहो भाग्य ! 1 और दें । दूसरी भी ले ली । वह भी खा ली । बड़ा प्रसन्न हुआ । कहा - 1 और दें । 1 ही बची । 1 टुकड़ा ही बचा सम्राट के हाथ में । 3 उसे दे दिए । सम्राट ने कहा - यह तो तू हद कर रखा है । अब 1 मुझे भी चखने दे । और तेरा भाव देखकर । तेरी प्रसन्नता देखकर ऐसा लगता है । कोई अनूठा फल है । उसने कहा कि - नहीं मालिक । फल निश्चित अनूठा है । मगर खाऊंगा मैं ही । आप नहीं । छीन झपट करने लगा । सम्राट नाराज हुआ । उसने कहा - यह भी सीमा के बाहर की बात हो गई । दूसरा फल भी नहीं है वृक्ष पर । सम्राट ने छीन झपटी में ही अपने मुंह में फल का टुकड़ा रख लिया - जहर था । थूक दिया । उसने कहा कि - नासमझ ! और तू मुस्करा रहा है ? तूने कहा क्यों नहीं ? उस नौकर ने कहा - जिन हाथों से बहुत मीठे फल खाए । 1 जहरीले फल के लिए क्या बात उठानी । क्या चर्चा करनी ? जिन हाथों से बहुत मिष्ठान्न मिले । जिस प्रसाद से जीवन भरा है । उसके हाथ से 1 अगर कड़वा फल भी मिल गया । तो उसकी बात ही क्यों उठानी ? उसको कहां रखना तराजू पर ? इसलिए जिद कर रहा था कि 1 टुकड़ा और दे दें कि आपको पता न चल जाए । क्योंकि वह पता चल जाए आपको । तो भी जाने अनजाने शिकायत हो गई । अगर आपके हाथ में 1 टुकड़ा छोड़ दिया मैंने । कुछ न कहा कि कड़वा है । सिर्फ छोड़ दिया । और आप जान गए कि कड़वा है । तो मैंने कह ही दिया । बिना कहे कह दिया । इसलिए छीन झपट कर रहा था मालिक । माफ कर दें । चाहता था । यह पता न चले । अनुग्रह अखंड रहे । शिकायत की बात न उठे । इसलिए छुड़ाने की कोशिश कर रहा था । आप माफ कर दें । 
भक्त का यही भाव है - परमात्मा के प्रति । जिस हाथ से इतना मिला है । जिसके दान का कोई अंत नहीं है । जिसका प्रसाद प्रतिपल बरस रहा है । स्वांस स्वांस में जिसकी सुवास है । धड़कन धड़कन में जिसका गीत है । क्या शिकायत करनी उसकी ? क्या दुख की बात उठानी ? छोड़ो । दुख की चर्चा बंद करो । अन्यथा दुख बढ़ेगा । दुख की उपेक्षा करो । दुख में रस मत लो । घाव में उंगली डालकर मत चलाओ । नहीं तो घाव हरा है । हरा ही बना रहेगा । वह कभी भरेगा कैसे ? यह खुजलाहट बंद करो । ओशो
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जन्मों जन्मों से हमने दुख का अनुभव जाना । लेकिन किस कारण ? हमें हमारी भूल नहीं दिख पाती ।
- नहीं । न तो जन्मों जन्मों से कुछ जाना है । न तुमने दुख जाना है । अन्यथा भूल दिख जाती । यही भूल है कि तुम समझ रहे हो कि तुमने जाना है । और जाना नहीं । अब यह भूल छोड़ो । अब फिर से अ ब स से शुरू करो । अभी तक तुम्हारा जाना हुआ किसी काम का नहीं । अब फिर से आंख खोलो । और देखो । हर जगह, जहां तुम्हें सुख की पुकार आए । रुक जाना । वह दुख का धोखा है । मत जाना । कहना - सुख हमें चाहिए ही नहीं । शांति को लक्ष्य बनाओ । सुख को लक्ष्य बनाकर अब तक रहे हो । और दुख पाया है । अब शांति को लक्ष्य बनाओ । 
शांति का अर्थ है - न सुख चाहिए । न दुख चाहिए । क्योंकि सुख दुख दोनों उत्तेजनाएं हैं । और शांति अनुत्तेजना की अवस्था है । और जो व्यक्ति शांत होने को राजी है । उसके जीवन में आनंद की वर्षा हो जाती है । जैसा मैंने कहा - सुख दुख का द्वार है । ऐसा शांति आनंद का द्वार है । साधो शांति । आनंद फलित होता है । आनंद को तुम साध नहीं सकते । साधोगे तो शांति को । और शांति का कुल इतना ही अर्थ है कि अब मुझे सुख दुख में कोई रस नहीं । क्योंकि मैंने जान लिया । दोनों 1 ही सिक्के के 2 पहलू हैं । अब मैं सुख दुख दोनों को छोड़ता हूं । जो दुख को छोड़ता हैं । सुख को चाहता है । वह संसारी है । जो सुख को मांगता है । दुख से बचना चाहता है । वह संसारी है । जो सुख दुख दोनों को छोड़ने को राजी है । वह - संन्यासी है । संन्यासी पहले शांत हो जाता है । लेकिन संन्यासी की शांति संसारी को बड़ी उदास लगेगी । मंदिर का सन्नाटा मालूम होगा । वह कहेगा - यह तुम क्या कर रहे हो ? जी लो । जीवन थोड़े दिन का है । यह राग रंग सदा न रहेगा । कर लो भोग लो । उसे पता ही नहीं । शांति का जिसे स्वाद आ गया । उसे सुख दुख दोनों ही तिक्त और कड़वे हो जाते हैं । और शांति में जो थिर होता गया । शांति यानी - ध्यान । शांति में जो थिर होता गया । बैठ गई जिसकी ज्योति शांति में । तार जुड़ता गया । 1 दिन अचानक पाएगा । आनंद बरस गया । शांति है साज का बिठाना । और आनंद है । जब साज बैठ जाता है । तो परमात्मा की उंगलियां तुम्हारे साज पर खेलनी शुरू हो जाती है । शांति है स्वयं को तैयार करना । जिस दिन तुम तैयार हो जाते हो । उस दिन परमात्मा से मिलन हो जाता है । इसलिए हमने परमात्मा को सच्चिदानंद कहा है । वह सत है । वह चित है । वह आनंद है । उसकी गहनतम आंतरिक अवस्था आनंद है । ओशो
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1 साहब ने 1 आलसी और कामचोर आदमी को नौकर रख लिया । वह नौकर कोई और नहीं । चुनाव में हारा हुआ 1 नेता ही था । 1 दिन उन्होंने नौकर से कहा - जाओ, बाजार से सब्जी ले आओ । नौकर ने कहा - साहब, मैं इस शहर में नया आया हूं । कहीं गुम हो जाऊंगा । यह सुनकर मालिक ने खुद ही बाजार से जाकर सब्जी खरीदी । और नौकर से कहा - लो, अब इसे पकाओ । इस पर नौकर ने कहा - साहब, इस गैस के चूल्हे की मुझे आदत नहीं है । कहीं सब्जी जल गयी तो ? यह सुनकर मालिक ने खुद ही सब्जी पकाकर नौकर से कहा - अब खाना खा लो । नौकर ने बड़े सहज भाव से कहा - हुजूर, हर बात पर न कहना अच्छा नहीं लगता । आप कहते हैं । तो खा लेता हूं । तुम पूछते हो । राजनीति क्या है ? जरा चारों तरफ आंख खोलो । जहां धोखा देखो । समझना वहीं राजनीति हैं । जहां बेईमानी देखो । वहीं समझना राजनीति है । जहां जेब कटती देखो । समझना वहीं राजनीति है । जहां तुम्हारी गर्दन को कोई दबाये । और कहे कि मैं सेवक हूं । जन सेवक हूं । समझना कि वहीं राजनीति है ।
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जब तक गांव नहीं मिटेगा । वह गुलामी नहीं मिटेगी । छोटे छोटे गांव की गुलामी तुम्हें दिखायी नहीं पड़ती । तुम कवियों की कहानियों और कविताएं पढ़ लेते हो । सोचते हो कि अहा, गावों में कैसा रामराज्य । कैसा पंचायत राज्य । और गांव में कैसे लोग मजा कर रहे हैं - कैसी स्वभाविकता । प्राकृतिकता । तुम्हें गांव की स्थिति का कोई अंदाज नहीं है । इस देश का गांव 1 तरह का कारागृह है । इस गांव में जितना शोषण हो सकता है । शहर में नहीं हो सकता । गांव में हरिजन है । उसको कुएं पर पानी नहीं भरने दिया जा सकता । सह सबके साथ पांत में बैठकर भोजन भी नहीं कर सकता । पांत में बैठकर भोजन करने की तो बात दूर । उसकी छाया किसी पर पड़ जाए । तो गांव के लोग मिलकर उसकी हत्या कर दें । गांव इतनी छोटी जगह है कि वहां कोई आदमी व्यक्तिगत जीवन तो जी ही नहीं सकता । वहां कोई निजी जीवन नहीं है और । जहां निजता नहीं है । वहां स्वतंत्रता नहीं हो सकती । शहरों ने निजता दी है । शहरों में व्यक्ति स्वतंत्र हो गये हैं ।
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मैंने सुना है कि नादिरशाह किसी स्त्री के प्रति लोलुप था । लेकिन वह स्त्री उसके प्रति बिलकुल ही अनासक्त थी । पर नादिरशाह के 1 सैनिक के प्रति पागल है । स्वभावत: नादिर के लिए बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया । पकड़वा भिजवाया दोनों को । पूछा अपने वजीरों से कि कोई नई सजा खोजो । जो कभी न दी गई हो । ऐसी कोई सजा है । जो कभी न दी गई हो । सब सजाएं चुक गई हैं । वजीर बड़ी मुश्किल में पड़े । नई नई सजाएं खोजकर लाते । लेकिन नादिर कहता कि यह हो चुका । यह कई बार दी जा चुकी है । हम ही दे चुके हैं । दूसरे दे चुके हैं । नई चाहिए । और सच में ही 1 बूढ़े वजीर ने नई सजा खोज ली । आप भी न सोच सकेंगे कि नई सजा क्या हो सकती थी ? नई सजा यह थी कि दोनों को नग्न करके । एक दूसरे के चेहरों को आमने सामने करके । दोनों को 1 खंभे से बांध दिया गया । कभी सोचा भी नहीं होगा किसी ने । 1 दिन 2  दिन, एक दूसरे के शरीर से बास आने लगी । मलमूत्र छूटने लगा । 3 दिन - एक दूसरे के चेहरे को देखने की भी इच्छा न रही । 4 दिन - एक दूसरे पर भारी घृणा पैदा होने लगी । 5 दिन - नींद नहीं । मलमूत्र, गंदगी, और बंधे हैं दोनों एक साथ । यही चाहते थे । 15 दिन - दोनों पागल हो गए कि एक दूसरे की गर्दन काट दें । और नादिर रोज आकर देखता कि कहो प्रेमियो, इच्छा पूरी कर दी न । मिला दिया न दोनों को । और ऐसा मिलाया है कि छूट भी नहीं सकते । जंजीरें बंधी हैं । 15 दिन बाद - जब उन दोनों को छोड़ा । तो कथा है कि उन्होंने लौटकर एक दूसरे को जिंदगी में न दुबारा देखा । और न बोले । जो भागे एक दूसरे से । तो फिर लौटकर कभी नहीं देखा । क्या हुआ ? मोह पैदा होने का उपाय न रहा । अमोह पैदा हो गया । करीब करीब जिसको हम विवाह कहते हैं । वह भी नादिरशाह का बहुत छोटे पैमाने पर प्रयोग है । बड़े छोटे पैमाने पर । किसी बहुत होशियार आदमी ने कोई गहरी ईजाद की है ।
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पहले की स्त्रियां घूंघट में छुपी होती थी । पति भी नहीं देख पाता था सूरज की रोशनी में । कभी खुले में बात भी नहीं कर पाता था । अपनी पत्नी से भी बात चोरी से ही होती थी । रात के अंधेरे में । वह भी खुसुर फुसुर । क्योंकि सारा बड़ा परिवार होता था । कोई सुन न ले । आकर्षण गहरा था । मोह जिंदगी भर चलता था । स्त्री उघड़ी । परदा गया । लेकिन साथ ही मोह क्षीण हुआ । स्त्री और पुरुष आज कम मोह ग्रस्त हैं । आज स्त्री उतनी आकर्षक नहीं है । जितनी सदा थी । और यूरोप और अमेरिका में और भी अनाकर्षक हो गई है । क्योंकि चेहरा ही नहीं उघड़ा । पूरा शरीर भी उघड़ा । आज यूरोप और अमेरिका के समुद्र तट पर स्त्री करीब करीब नग्न है । पास से चलने वाला रुककर भी तो नहीं देखता । पास से गुजरने वाला ठहरकर भी तो नहीं देखता कि - नग्न स्त्री है ।
कभी आपने देखा । बुरके में ढकी औरत जाती हो । तो पूरी सड़क उत्सुक हो जाती है । ढके का आकर्षण है । क्योंकि ढके में बाधा है । जहां बाधा है । वहां मोह है । जितना ज्यादा काम से पैदा हुआ है । उतना काम में डाली गई सामाजिक बाधाओं से पैदा हुआ है । अब मैं मानता हूं कि आज नहीं कल । 50 साल के भीतर । सारी दुनिया में घूंघट वापस लौट सकता है । आज कहना बहुत मुश्किल मालूम पड़ता है । यह भविष्यवाणी करता हूं - 50 साल में घूंघट वापस लौट आएगा । क्योंकि स्त्री पुरुष इतनी अनाकर्षक हालत में जी न सकेंगे । वे आकर्षण फिर पैदा करना चाहेंगे । आने वाले 50 वर्षों में स्त्रियों के वस्त्र फिर बड़े होंगे । फिर उनका शरीर ढकेगा ।
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जैसे ही सदगुरु विदा होता है । वैसे ही 1 जाल इकट्ठा हो जाता है वहां । जो उस सदगुरु के नाम का शोषण शुरू कर देते हैं । इसे रोका नहीं जा सकता । इसे रोकना असंभव है । कौन रोके ? कैसे रोके ? वह होता ही रहेगा । चालबाज आदमी । होशियार आदमी सदगुरु के नाम का लाभ उठायेंगे । उसकी जिंदगी में तो नहीं ले सकते । उसकी मौजूदगी में तो मुश्किल पड़ती है । लेकिन जब वह मौजूद नहीं रहेगा । तो उसकी कब्र बनाकर बैठ जायेंगे । चमत्कारों की चर्चाएं चलायेंगे । कहानियां फैलायेंगे । बाजार लगायेंगे । दुकान खोल लेंगे ।
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सुंदर और असुंदर देखने वाले की व्याख्या है । सुंदर असुंदर उसमें कुछ भी नहीं है । व्याख्याएं बदलती हैं । तो सौंदर्य बदल जाते हैं । चीन में चपटी नाक सुंदर हो सकती है । भारत में नहीं हो सकती । चीन में उठे हुए गाल की हड्डियां सुंदर हैं । भारत में नहीं हैं । अफ्रीका में चौड़े ओंठ सुंदर हैं । और स्त्रिया पत्थर लटकाकर अपने ओंठों को चौड़ा करती हैं । सारी दुनिया में कहीं चौड़े ओंठ सुंदर नहीं हैं । पतले ओंठ सुंदर हैं । अफ्रीका में जो स्त्री पागल कर सकती है पुरुषों को । वही भारत में सिर्फ पागलों को आकर्षित कर सकती है । क्या हो गया ? वे हमारी सांस्कृतिक व्याख्याएं हैं । 1 समाज ने क्या व्याख्या पकड़ी है ? इस पर निर्भर करता है । फिर फैशन बदल जाते है । सौंदर्य बदल जाता है । तथ्य वही के वही रहते हैं ।