18 दिसंबर 2010

चलो एंजाय करते हैं ।


roop_kaur पोस्ट " पर ठगे जाने वाले अन्धे हैं क्या ? " पर ।
rajeev ji, agar hum surat shabad yog ki sadhna lagataar mean daily karne lag jayen to agar humein kisi aise ghar mein kabhi rukna padhe jaise ye upper wala case tha and humko pata na ho ki wahan kya hai ya nahi to kya wahan rukna dangerous hai?
पहले तो सच्चे गुरु की शरण में आते ही ऐसी बातें कि हम किसी डेंजरस जोन में फ़ंस जांय । होता ही नहीं है । यदि हो भी जाय । तो जिस नाम ( को ) के अधीन बडी बडी महा शक्तियां सिर झुकाती हैं । वहाँ बेचारे भूत प्रेत क्या करेंगे ? रामायण में है । नाम परम लघु जासु वश विधि हरि हर सुर सर्व । मदमत्त गजराज को अंकुश कर ले खर्व । ~
rajeev ji, jaisa aapne bataya ki surat shabad yog amrit wele mein karna chahiye to kya us time room mein andhera rakhna chahiye ya koi light jala leni chahiye. (
हल्का अंधेरा होना उत्तम है । फ़्रेश मूड में नयी बहू की तरह मेल फ़ीमेल दोनों मौसम के अनुसार एक चादर या शाल से अपना पूरा चेहरा और नाभि तक का हिस्सा उससे ढक लें । मच्छर भी डिस्टर्ब नहीं कर पाते । है ना इजी ।
and please batayein exactly amrit vela kitne se kitne baje tak hota hai.
सुबह के 4 बजे से 6 बजे तक । हमारे अधिकांश साधक सुबह 4 से 8 तक ध्यान पर खुशी खुशी बैठते हैं । और उन्हें समय का पता तक नहीं चलता । हैं । चार घन्टे हो गये । कमाल है भाई ।
rajeev ji, agar humein ya kisi ko bhi surat shabad yog ki sadhna karte hue 10 saal se upper ho jayein to kya ( jaisa apne pehle bhi bataya tha ki time ki piche ja kar beeta hua incident bhi dekh sakte hain ) so is tarah aane wala time bhi dekh sakte hain.
जी हाँ ! लेकिन कोई कोई स्टूडेंट एक क्लास दस साल में रो पीटकर पास कर पाता है । और कोई होनहार बहुत तेजी से सीखता है । यह उसके ऊपर निर्भर करता है । गुरु को आज्ञाकारी समर्पित समझदार लगन शील शिष्य ही प्रिय होता है । उसी पर उनकी भरपूर कृपा होती है । 
 it means dheere dheere sadhna se hamari drishti trikaal drishti ho jati hai.is tarah to hum apna pichla janam bhi dekh sakte hain
पिछले जन्म का रिकार्ड तीसरी बाडी कारण शरीर में होते है । तीसरे शरीर में प्रवेश के लिये काफ़ी साधना मेहनत और गुरु्कृपा की आवश्यकता होती है । मैंने न्यूज में देखा । एक लेडी किसी चैनल पर बिना किसी साधना के पिछला जन्म दिखा देती है । सोचो यदि ऐसा होता । तो भीष्म पितामह जैसी दिव्य आत्माओं की क्या वैल्यू है ? जो बेहद ज्ञानी होने पर भी 100 जन्म तक देख पाते हैं । और उनका 106 वां जन्म जानने के लिये योगीराज कृष्ण को ध्यान करना पडता है ।
and dusre ka future bhi dekh sakte hai and kya kisi ke mann ki baat bhi jaan sakte hain ?
कुछ भी असंभव नहीं । सब कुछ संभव है । पर उद्देश्य भलाई ही होना चाहिये । अन्यथा नियम के विरुद्ध जाने पर अंत में साधक राक्षस योनि में जाता है ।  
rajeev ji, previous article mein aapne likha tha ki sab yoniyan jyoti par hi banti hain to ye jyoti kya hai 
ज्योति एज दीपक ज्योति । पर इसका असली स्वरूप अक्षर होता है । जैसे कुम्हार के चाक पर चढी मिट्टी से अलग अलग तरह के बर्तन बन जाते है । चाक तो बस गोल गोल घूमता ही रहता है । 
 aapne ye bhi likha tha ki wo jyoti aatma nahi hai to fir aatma ka real sawroop kya hai. please is bare mein zaroor batayein
आप कितनी ही बार कहें । बिना हमारी दीक्षा । बिना उचित साधना के । इस रहस्य को मैं किसी कीमत पर नहीं बता सकता । लेकिन शर्त पूरी हो जाने पर सरलता से इसको खुद जाना जा सकता है । सो आय म वेरी सारी ।
and main sochti hu ki har aatma apne real sawroop ko bhul jati hai
यह सच है । और इसीलिये जीव अलग अलग स्थितियों में असहाय सा भटकता है । 
janam lete waqt and dheere dheere apne ko physical body hi samjhane lag jati hai. jis kaaran usko raag dvesh utpan hota hai nahi to asal mein to ye duniya aatma ke liye musafir khana hai and ye physical body 1 kiraye ka ghar(haan wo baat alag hai ki ye maanav body bahut important hai)
ये योगमाया देवी के कारण होता हैं । जिन्हें मैं प्यार से मायावती कहता हूँ । 
rajeev ji, hum janam lete waqt grabh( pregnancy ke kis period mein enter karte hai
सामान्य स्थिति में चार महीने पूरे होने पर ।
ya hamare garbh mein jaane se hi aurat (shaddishuda and sexually active lady) pregnant hoti hai.
औरत पुरुष के वीर्य और स्वयं के अंडे के योनि में जुडते ही । बाद में उसके गर्भाशय में जाकर ठहर जाने से प्रेगनेंट हो जाती है । लेकिन तब वो सिर्फ़ पिंडी जीव होता है । जीवात्मा नहीं ।
 kyun ki koi kehta hai ki garbh ke pehle second mein aatma ( janam lene wali ) enter kar jati hai
कभी नहीं ।
and koi kehta hai ki meeting point ke time enter karti hai.is ke bare mein bhi batayein
संभोग क्रिया करने वाले सभी मेल फ़ीमेल जानते हैं । क्लायमेक्स पर पुरुष के शिश्न से वीर्य तीन झटकों में निकलता है । पहली बार सतगुण युक्त वीर्य । 2 रज एन्ड तीसरा झटका तम । इन पार्ट में कौन सा वीर्य अंडे से मिला है । उसी आधार पर संतान गुण वाली पैदा होती है । लेकिन सामान्य से हटकर अकाल मौत मरे री बोर्न इंसान के आंकडे और शोध रिजल्ट बताते हैं । कि आत्मा पहले महीने से लेकर नौंवे महीने तक किसी भी टाइम गर्भ में शिफ़्ट हो सकती है । या की जाती है । ऐसा विशेष स्थिति में होता है । जिसको टेम्पररी अटैचमेंट भी कह सकते हैं । इसके विपरीत साधु संत और दिव्य आत्मायें । अवतार जब शरीर धारण करते हैं । तो वो एक सेकेंड के लिये भी गर्भवास में नही जाते । प्रसव के बाद जब बाडी योनि से बाहर आ जाती है । तब वे उसमें शिफ़्ट करते हैं । इसलिये गर्भ में पल रहे जीव को पिंड ( शरीर ) कहते हैं । जीवात्मा नहीं । )
 and janam lene se pehle kya aatma ko pata hota hai thoda time pehle ki main kahan (kis ghar mein and kis aurat ke) janam lene ja raha hun ya ja rahi hun.
आमतौर पर पता नहीं होता । मृत्यु के बाद और जन्म होते समय मूर्छा ( बेहोशी ) जैसी स्थिति होती है । हां एकदम मृत्यु से ठीक पहले । गर्भ में । और जन्म हो जाने के बाद । कुछ क्षणों तक खुद के अनेकों जीवन चक्र की रील घूमती है । जिस पर माया परदा डाल देती है । लेकिन गर्भ में जीवात्मा हो जाने के बाद । वह अपने बहुत जन्मों को जानता है । और गर्भ में ही चिंतन करता है कि मैंने अपने असंख्य जन्म विषय वासना में गंवा दिये । और फ़िर से गर्भ में कष्ट भोग रहा हूं । इस जन्म में भक्ति और ग्यान द्वारा खुद का उद्धार अवश्य करूंगा । लेकिन जय हो मायावती की । कुछ ही दिनों में कहने लगता है । हाय माम । हाय डैड । हाय डार्लिंग । चलो एंजाय करते हैं ।
 rajev ji, ye jo maanav janam hai iske 2 main parts hain man and woman lekin hijda bhi hota hai to us aatma ne aisa kaunsa paap kiya hota hai previously jo usko hijda ke roop mein janam milta hai?
अब यहां बहुत से लिंग होने पर भी कटाकर हिजडा बन जाते हैं । बहुत सी लेडी इंजेक्शन आदि से पुरुष बन रही हैं । औरत औरत से सेक्स करती है । आदमी आदमी से सेक्स कर रहा है । ये दोनों ही जानवरों को भी नहीं छोड रहे । इनकी मति क्यों मारी गयी है ? आप पहले इसका उत्तर दें । वास्तव में संभोग के दौरान बहुत फ़ीमेल सोचती हैं कि इसको ( मेल ) बहुत मजा आ रहा है । मैं भी इसके मजे को अनुभव कर पाती । जबकि एकदम अपोजिट मेल सोचता है कि हार्ड वर्क मैं कर रहा हूं । ये फ़ुल्ली एंजाय कर रही है । ये भावना उनमें फ़ीड हो जाती हैं । इस तरह वे दोनों ही कनफ़्यूज्ड हो जाते हैं । तब भगवान को भी मौज आ जाती है । यार तू दोनों मजे एक साथ लेकर देख । इसीलिये हिजडे के लिंग योनि ब्रेस्ट शेव आदि सभी एक साथ होते है । इसी को रामायण में कहा है । जाकी रही भावना जैसी । हरि मूरत देखी तिन तैसी । )
 in the end rajeev ji, main ye baat waise hi puch rahi hun bura mat maaniyega is time aapki age kya hai (agar aap batana chahen to
 40 year । पन्द्रह तक बेहद पढाकू । इसी उमर तक बहुत अध्ययन कर लिया । सोलह में बहुत बडी ट्रेजिडी । इसके बाद जीवन संघर्ष के साथ ही कुछ कुछ साधना भी । 17 to 33 विभिन्न ज्ञान । द्वैत साधना । जीवन के उतार चडाव । 33 से अब तक । महाराज जी की शरण में । आत्म ज्ञान के विभिन्न पहलू पता चलने के बाद जीवन से नीरसता । )
 mujhe aapke answers ka besabri se intezaar rahega.bye. ( मेनी मेनी थैंक्स । 
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