13 दिसंबर 2010

तो जैसे सोने पर सुहागा ।


rajeev ji, main ab filmon ki fan nahi rahi. time milne par tv par aastha channel hi dekhti hun. kuch khaas programme hain jo main dekhti hun. 1. brahmkumaris inka kehna hai ki 3 cheezen Anaadi hain paramatma, aatma and prakirti.
वैसे ये बडा अदभुत खेल है । आरम्भ में केवल परमात्मा ही था । प्रकृति जो नारी स्वरूपा है । परमात्मा से ही प्रकट हुयी है । और उसके अधीन या दासी है । ये नारी रूपी प्रकृति चेतन रूपी पुरुष से निरन्तर भोग कर रही है । लेकिन चेतन निर्लिप्त रहता है ।
inka ye bhi kehna hai ki aatma paramatma ka ansh hai aatma paramatma nahi hai.
ये लोग त्राटक साधना करवाते हैं । उसको भी ठीक से नहीं जानते । त्राटक बहुत ही मामूली साधना होती है । आप समझ सकती है । कि तब ये आत्मा परमात्मा के बारे में क्या बता पायेंगे ।
2. shiv yog inka kehna hai ki shiv hi anant paramatma hain ?
पहली बात शिव और शंकर जी दो अलग बात हैं । परमात्मा नाम और गुण सबसे परे यानी अलग है । हालांकि शिव योग बहुत ऊंची बात है । पर जिस तरह लोग TV पर बात कर देते हैं । उससे आम लोगों को ऐसा भृम हो जाता है । मानों साधना करना कोई testy sweet खाना हो । हालत खराब हो जाती है ।
and aatma hi paramatma hai ye aatma ko divine being kehte hain,
किसी हद तक सच है । पर वो सच बहुत अलग हटकर है ।
ye kehte hain ki aap log aatma ho physical body nahi ho
अभी तो दोनों ही हो । अगर बाडी नही है । तो फ़िर हम किसमें रहते हैं ?
ye physical body aapki hai aap khud being of light ho.
ये एकदम सच है । अगर वापस प्राप्त हो जाय तो ।
and ye shri vidhya ya maha vidha par bahut zor dete hain means devi poojan par.
ये इच्छाशक्ति होती है । यही योगमाया या महामाया है । ये संतो की दासी होती है । द्वैत में इसका ही बोलबाला है । पर अद्वैत में इसका महत्व नहीं होता । )
3. osho inke programme par aaj kal osho shailendra ji aa rahe hain ye kehte hain ki aatma hi satya hai physical body to likea cloth hai (according to Geeta)
इसमें क्या रहस्य की बात है ? आज कोई इंसान है । आगे 84 में चूहा बिल्ली पशु पक्षी आदि बनेगा । इसी को लाइक ए क्लाथ कहा है । ये तो सभी जानते हैं ।
and inka kehna hai ki 'aad sach' means beginning means from very beginning
ओशो के बाद इस मंडल में कोई भी अच्छा ग्यानी तक नही हुआ । ये ॐ को सतनाम बताते हैं । और इनके यहां तीन सतगुरु है ?  ॐ बाडी को कहते है । वास्तव में ये ओशो की गूढ बातों का क्या अर्थ है । उसको भी ठीक से नहीं जानते ।
inke anusaar ye shuruaat kabhi hui hi nahi ye aad ko nahi anaad ko maante hain.
ऐसा कैसे हो सकता है ? जो चीज आज है । उसकी कभी न कभी शुरूआत अवश्य हुयी थी । आदि ( शुरूआत ) सृष्टि है । अनादि परमात्मा है । )
4. deepak bhai desai (jainism) ye kehte hain ki 'aatma so parmatma' koi seprate paramatma nhai hai  नही हैं । तो फ़िर सत्ता किसकी चल रही हैं ?
aatma hi sab kuch hai iske total karm khatam hone par isko moksh milta hai.
यह सच है । परन्तु कुछ अलग तरह से । क्योंकि बंधन और मोक्ष मन के धर्म हैं । आत्मा के नहीं ।
inke anusaar moksh mein kisi bahut ucch place par jagah mil jati hai jahan aatma chetan roop ho kar rest karti hai.
मोक्ष मुक्ति को कहते हैं । मुक्ति और मुक्त में बहुत अंतर है । ये में पहले ही आपको बता चुका । ये सब किताबें पढकर बोलते हैं । प्रक्टीकल का अनुभव इनके पास नहीं है । असली बात कुछ और ही है । जो बहुत हटकर है । आप कबीर को पढें । जो समझ में न आये मुझसे पूछना । कबीर की । अनुराग सागर । मूल्य 100 रु० किताब पढें । आपको बहुत से उत्तर मिल जायेंगे ।
5. gurbaani katha vichaar inka kehna hai ki hum sab log human beings hain(yahan par physical body par hi zor diya gaya hai) hamare andar jo aatma hai wo rabb ki jot hai
ज्योति यानी अक्षर पर ही सभी योनियों के शरीर बनते हैं । जो कोई जैसा सोचता है । वैसा ही हो जाता है । मैंने आपसे कहा । असली ग्यान बहुत ही दुर्लभ है । जो कभी कभी ही प्रगट होता है ।
in ke according hum khud aatma nahi hain hum physical body hai aatma hum se seperate hai). ( ये बात खिचडी टायप की है । रांग है । अतः इसका ans नहीं बन सकता । please in sab questions ke bare mein kuch jaankaari dein please mujhe appke articles ka intezaar rahega.

rajeev ji, aap apni us 6 months wali durlabh sidhi ke bare mein likhen.
समय और मूड होने पर मैं कोशिश करूंगा ।
main aapse sahmat hun ki meri situation ke hisaab se mere liye (agar maine karni ho to) aatm gyaan ki sadhna hi theek rahegi.
ये साधना भी द्वैत की सभी साधनाओं के ऊपर है ।
but main sirf jigyasa vash jaanna chahti hi special secrets ke bare mein kyun ki main apni saari life saas bahu ke zaghde mein waste nahi karna chahti. mere vichaar se bilkul kuch na jaanne se kuch na kuch jannna behtar hai.
मनुष्य जीवन का असली लक्ष्य यही है ।
aap beshaq apni marzi se hi lekin durlabh secret sadhnas ke bare mein time to time article likhte rahen.
लोगों को इस ग्यान का फ़ायदा हो । इसके लिये मैं अधिक से अधिक जानकारी देने की कोशिश करता हूं । ) chahe wo aapke personal experience ho ya kisi aur sadhakon ke.
मैं आपसे सहमत हूं । पर साधना के नियम अनुसार सारी बात संकेत में ही कही जाती है ।
rajeev ji kya sachmuch apsara hoti hain ya yakshini jinka aapke articles mein jikar aya hai.
द्वैत की साधना में तो यही सब ज्यादा होता है । इसी में वाममार्गी साधना भोग प्रधान होती है । जिसका लालच तो बहुत होता है । परन्तु अंत लाखों साल का नरक होता है । अप्सरा यक्षिणी दोनों होती है । जो हंस ग्यान में भी मिलती है ।
and univesre mein kya sachmuch pret lok, andhere lok, suksham lok etc hain.
ये तो होते ही हैं । इनके अलावा भी बहुत कुछ होता है । ये सबसे बडे जादूगर का खेल जो है । )

rajeev ji, ye prasun ji kaun hain jinka jikar apki pret stories mein aya hai.
जैसा कि मैंने ऊपर भी कहा है । प्रत्येक साधक और उसकी साधना गुप्त होती है । आम लोगों को अलौकिक ग्यान से परिचित कराने के लिये । और जिन बातों से इंसान का फ़ायदा होता है । केवल उतनी ही बात बताने का नियम है । इसका उलंघन करने पर पूरी साधना ही नष्ट हो जाती है । वास्तव में किसी भी सच्चे साधक के घरवाले और उसकी बीबी या पति को भी पता नहीं चल पाता कि वो क्या चीज है ? लेकिन इस स्कूल के क्लासफ़ेलो एक दूसरे के बारे में कुछ कुछ जान जाते हैं ।
aur ye ghost stories jo apke articles mein hain kya ye pure haqeeqat hai.
 हकीकत इससे भी बढकर होती है । जो साधना करने पर पता चलती है । अगर पूरी बातें ज्यों की त्यों लिखी जाय । तो कोई भी दीवाना हो सकता है ।
 aur ye jo universe hai jismein countless stars hain kya is universe mein aur bhi itne kism ki duniya hai jisko jaanna kalpana se door hai.
 इतनी चित्र विचित्र सृष्टि है । कि साधक को लगता है । भाड में जाय दुनियादारी । बस योग करो । इसी में मजा आता है । उस आनन्द के सामने दुनियां की हर चीज फ़ीकी हो जाती है ।
 maine science mein padha tha in school ki kuch stars to itne bade hain ki hamare sun se bhi thousand gunnaa bade and countless stars ki 1 galaxy hai and galaxies bhi coutless hain.
ये सच है । सूर्य आदि अनेकों हैं ।
kya ye univesre endless hai jisko antheen kaha jaye.
ये सच नहीं है । क्योंकि मनुष्य की बाडी और यूनिवर्स की शेप सेम है । पर ये किस तरह से है । इसको जानना मामूली बात नहीं है । हां मनुष्य के लिये ये एन्डलेस के समान ही है ।
mere hisaab se modern science in baaton ke bare mein zada nahi bata sakti. kyun ki modern science humko means hamari physical body ko man made materials dwara sukh araam pahuncha sakti hai is se zada uski hadh nahi.
ये बिग्यान जो भी है उसी बिग्यान से आता है । पर अभी ये चींटी के बराबर भी नहीं है । )

rajeev ji, surat shabad yog advait ki sadhna hai, kya ye moksha and bhog dono deti hai.
इसका पहला स्टेप हंस है । हंस क्वालीफ़ाई कर लेने पर सुरति शब्द योग शुरू होता है । इसलिये कह सकते हैं कि इसमें भोग और मोक्ष दोनों ही हैं । जब तक कोई अपनी इच्छाओं का भोग नहीं कर लेता । हंस से आगे नहीं बढ सकता । इच्छा काया इच्छा माया इच्छा जगत बनाया । इच्छा पार गये जो उनका पार न पाया ।
kyun ki dwait ki sadhna bhog deti hai moksh nahi. adwait ki sadhna and dwait ki sadhna dono ko 1 hi jeevan mein kiya ja sakta hai.
साधना द्वैत से शुरू होकर अद्वैत पर समाप्त होती है । हंस द्वैत से ही शुरू होता है । अतः जाहिर है कि इसको पास कर लें । तो एक ही जीवन में दोनों को कर स्कते हैं ।
adwait ki sadhna ke saath dwait ki koi bhi satvik sadhna. aapki nazar mein
इसी हंस से सब मिल जाता है । एक हि साधे सब सधे । सब साधे सब जाय । रहिमन सींचो मूल को फ़ूले फ़ले अघाय । इसी के लिये कहा है ।
is time poora satguru kaun hai is waqt kyun ki poora satguru 1 time mein 1 hi hota hai.  आप पहले गुरु को तो जान लें । सतगुरु बहुत बडी बात है । मैंने पहले ही कहा । रहस्य किसी सीमा तक ही बताये जा स्कते हैं । surat shabad yog ke kya kuch niyam(rules) bhi hain.
खासतौर पर नानवेज खाने से हानि होती है । बाकी कोई भी नियम नहीं है । जरूरी नही आप वाथ लेकर ही अभ्यास या नाम कमाई करें ।
 isko 1 din mein kitna time karna chahiye 1 hour ya 2 hour.
जो साधक सुबह 15 मिनट से शुरूआत करके 3 घंटे बैठने का अभ्यास कर लेते हैं । उन्हें बहुत जल्दी सफ़लता मिलती है । इसके अलावा रात को लेटकर ( सोने से पहले ) ध्यान करने से भी बहुत लाभ होता है । जितना करते हैं । उसी रेशियो में फ़ायदा होता है ।
aur kya surat shabad yog ki diksha lene ke baad agar iski sadhna shuru kar di jaye to jab tak moksh nahi mil jata to kya tab tak maanav janam hi milta rahega.
निश्चय ही । और भी बहुत कुछ मिलता है ।
jo log dwait ki sadhna karte hain kya unko dobara maanav jeevan nahi milta.
ये लोग देवता अप्सरा यक्ष स्वर्ग आदि भोगों को प्राप्त करते हैं । ये कुन्डलिनी वाला योग होता है । इसमें मनुष्य जन्म नहीं होता ।
jo log sadharan ghareku pooja paath karte hain pori sharadha se kya unko maanav jeevan dobara mil sakta hai.
मिलता है । मगर 84 भोगने के बाद । साधारण पूजा से अगला ही जन्म मनुष्य का हो जाय । ऐसा नहीं होता । अगर ऐसा होता । तो मनुष्य शरीर की क्या वैल्यू होती । जिसके लिये देवता भी तरसते हैं ।
agar kisi insaan ki koi desire adhuri reh gayi ho jis par wo bahut mohit ho kya uska agla janam kya hoga.
जन्म मरन अपनी इच्छा से होता । तो लोग पता नहीं क्या क्या करते ? बहुत चकरघिन्नी वाला खेल है ये । )

rajeev ji, maine suna hai ki daan punya ka bahut mahtavya hai.
जो भी दान किया जाता है । वो आगे के लिये खेत में बीज बोने के समान है । इच्छा रखकर दान करने से हजार गुना । बिना इच्छा रखे दान करने से अगले जन्मों में लाख गुना होकर मिलता है । यही नियम पाप करने के फ़ल पर लागू होता है ।
koi kehta hai ki paise ka daan karo
तो आगे पैसा मिलेगा
ya khaane pine ki cheezon ka
तो आगे खाने पीने की चीजों का भंडार मिलेगा ।
ya vidhya daan ( ये भी ठीक है ।
ya ang(body part)daan karo.
ये बकबास है । ब्लड । वो भी जरूरी होने पर दान करना ठीक होता है । या मरने के बाद बाडी का दान कर दो । शरीर बहुत कीमती है । साधना में स्वस्थ शरीर का बहुत ही महत्व है ।
 kya daan ka mahtavya hai. samaaj mein koi agar rich lekin sundar nahi hai, agar koi sundar hai to rich nahi hai, koi rich hai to physically fit nahi hai etc etc
सब अपने कर्म फ़ल अनुसार मिलता है ।
and ye bhi suna hai ki bikhari ko daan dena chahiye ya nahi.
हरगिज नहीं । दान हमेशा जरूरतमन्द को दें । मन्दिर । धनी बाबाओं आदि को किया दान बेकार जाता है । ) western countries mein purush balwaan hain and ladies sundar lekin wahan nastikta bahut hai
वो लोग भोगवादी स्वभाव के अधिक हैं । पाप कर लो फ़िर कनफ़ेस कर लो । वाहियात झूठी तसल्ली देते हैं खुद को ।
 and yahan bhi nastik jo hain wo dusron ko bhi naastik banane mein lage hain.
दुनियां में सब तरह के लोग होते हैं ।
meri soch jo badali hai kya ye bhi kisi pichle janam ke karm ka result hai
निश्चय ही ।
and mujhko jo sundar physical body mili hai ye kisi pichle janam ke punya ke kaaran hai
निश्चय ही । विचारों के अनुसार शरीर और फ़ेस बनता है ।
ya family breed ke kaaran kyun ki mere nanihaal ki baki auratein bhi sundar hain jaise meri mother, mausi, cousin sisiters etc.
फ़ैमिली ब्रीड आदि भी कर्म फ़ल से ही हो जाती है ।
 hum logon ke pariwaar 1947 mein pakistan ke punjab ke sargodha district se yahan india mein aye the. surat shabad yog ki practice mein kya daan punya ka bhi koi fayda hai. agar ye dono kiya jayen to.
तो जैसे सोने पर सुहागा । 
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