15 सितंबर 2010

क्यों लोगो को अज्ञान और नर्क की आग में झोंक रहे हो ।




सौरभ आत्रेय पोस्ट शंकराचार्य को कामकला का ग्यान कैसे हुआ पर वाह भाई वाह क्यों लोगो को असत्य बताकर अपनी दूकान चला रहे हो महाराज । इस कहानी में बिलकुल भी सत्य नहीं है और ना ही ऐसा कहीं इतिहास में लिखा है । सबसे पहले तो कामकला नाम की कोई चीज़ धर्मशास्त्रों में नहीं है । यह कामकला निकृष्ट वाममार्गियों की देन है । धर्मशास्त्रों में और महापुरुषों ने स्त्री और पुरुष का सयोंग सन्तान उत्पत्ति के लिये बताया है । न कि मनोरंजन के लिये । इस तरह की कहानियाँ और कामकला सब पाखण्डियों की देन है । चलो मैं इस लेख से सम्बन्धित आपसे कुछ प्रश्न करता हूँ ।1 यह कहानी आपने कहाँ पढ़ी । और किस महापुरुष द्वारा लिखी गयी है ? इसकी क्या प्रमाणिकता है ?2 कर्म का भोक्ता कौन होता है । आत्मा या शरीर ? यदि आत्मा होती है । तो इस झूठी कहानी के अनुसार 3 क्या परस्त्री से सम्भोग करना व्यभिचार और पाप के अन्तर्गत नहीं आता ?कृपया लोगो में अन्धविश्वास और भ्रम न बढ़ाएं । यह मेरी आप से विनती है। और लोगो से यह विनती है । कि बिना सोचे समझे । बिना प्रमाण के । बिना तर्क वितर्क के किसी की बातों पर ऐसे ही विश्वास न करें ।
@ सबसे पहले तो कामकला नाम की कोई चीज़ धर्मशास्त्रों में नहीं है ?
@ धर्मशास्त्रों में और महापुरुषों ने स्त्री और पुरुष का सयोंग सन्तान उत्पत्ति के लिये बताया है । न कि मनोरंजन के लिये ?
@ शंकराचार्य ने सम्भोग करने के लिये राजा के शरीर में प्रवेश क्यों किया ?
सौरभ आत्रेय पोस्ट भगवान का मन्त्रालय । ministry of god पर क्यों पुराणों के गपोडे सुना के लोगो को अज्ञान और नर्क की आग में झोंक रहे हो । इन बकवासबाजियों के चक्कर में हिन्दूधर्म का सर्वनाश हो गया । अब तो आँखे खोल लो । क्या बताये इस अज्ञानता के अन्धकार और स्वार्थी लोगो के चंगुलता और मूर्खता से हमारा देश कब बाहर निकलेगा । पुराण हमारी मान्य पुस्तकें नहीं हैं । उनमें कितनी ही बेसिर पैर की कितनी ही अनेक अतार्किक बातें लिखी हैं । इस बात को समझो।
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