20 अप्रैल 2010

जिन्दगी का हिसाब किताब


मैं आपसे कहूँ कि 36 500 रु कितने है अधिक या कम . तो आप कहेगे कि क्या अजीव प्रश्न है ये प्रश्न आपकी जिन्दगी से बहुत बङा ताल्लुक रखता है . अगर आप 100 बरस की निर्विघ्न आयु जीते है तो इंसान की जिंदगी इतने ही दिनों की होती है , अब आप एक और हिसाब लगाओ यदि आप 8 घन्टे सोते और सुबह शाम 2 -2 घन्टे आपके खाने पीने स्नान आदि दिनचर्या में निकल जाते हैं जो कि अमूमन हरेक के निकल ही जाते हैं तो आपके कुल 12 घन्टे ऐसे हुये जिनमें आप को मजबूरन समय देना ही पङेगा . इसका मतलब यह हुआ कि 24 घन्टे में से

आपके 12 घन्टे प्रतिदिन अर्थहीन जानें ही हैं और इसका सीधा सा अर्थ ये हुआ कि आपकी एक्टिव लाइफ़ सिर्फ़ 50 बरस की रह गयी वो भी तब जब आप 100 बरस तक निरोग जिंये अन्यथा आप स्वयं अन्दाजा लगा सकते हैं .

अब इसमें सोचिये कि 18 या 20 तक तो हमें ठीक से समझ ही नहीं आ पाती .फ़िर जब कुछ समझते भी हैं तो अम्मा अब्बा वो अजीव लड्डू खिला देते हैं जिसको खाने वाला भी पछताता है और न खाने वाला भी

" रघुनन्दन फ़ूले न समाये लगुन आयी हरे हरे.." समझ गये .

अब थोङा ग्यान ध्यान की तरफ़ रुख जाता भी तो कामिनी या कन्त पीछा नहीं छोङते..इस ख्वावम ख्यालम से पिंड छूटता है तब तक आंगन में "हुआ हुआ" होने लगती है..पहले लिपिस्टिक पाउडर की चिंता वाला अब टाफ़ी चाकलेट की फ़िक्र में जुट जाता है......

after 60 year of life ..

अरे लुट गयो रे ..काहे चक्कर में पङ गयो में..क्योंकि तब तक सुहावनी (डरावनी) लगने लगती है .बच्चा यदि नेह करता भी है तो उसके पास टाइम नहीं है ...कहने का अर्थ ये कि 60 तक की लाइफ़ अमूमन इसी तरह निकल जाती है . धीरे धीरे शरीर जर्जर होने लगता है और आपको लगता है कि कुछ ऐसा है जो कहीं खो गया है और जिसकी आपको तलाश है कुछ ही समय बाद काल झपट्टा मार देता है और आपको 84 में डाल दिया जाता है विचार कर देखो दोष किसका था .

एक भरम था जो जीया मैंने एक भरम था जो खाया मैंने
एक भरम था जो पीया मैंने सच यह है किसी और को नहीं
खुद को था धोखा दिया मैंने
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