20 मार्च 2010

हमारी गलतफ़हमियां

हमारी गलतफहमियां क्या है ?
हजारों बरसों से आत्मज्ञान गुप्त होने से समाज के लोग कई ग़लतफ़हमी का शिकार होते हैं .
मीरा हमेशा ही कृष्ण की भक्ति करती रही ?
गलत, मीरा ने रैदास जी से ज्ञान लिया था और उन्हें गुरु धारण किया था उन्हें महामंत्र की दीक्षा श्री रैदास जी के द्वारा हुई थी तब ही उन्होंने कहा था ..पायो जी मैंने नाम रतन धन पायो .
हनुमान जी हमेशा दशरथ पुत्र राम के भक्त थे ?
गलत, त्रेता युग मैं कबीर साहेब ज़ब मुनीन्द्र स्वामी के नाम से प्रकट हुए थे तब उनसे हनुमान जी की मुलाकात हुई थी कबीर साहेब ने उनसे कहा के तुम असली राम को जानते हो तब कबीर साहेब ने उनको असली राम के बारे मैं बताया और नाम का ज्ञान कराया ..नाम रसायन तुम्हारे पासा सदा रहो रघुपति के दासा रामसेतु के समय पत्थरों पर "राम"लिखा गया था ?
गलत , राम लिखने से पत्थर तैरते तो किसी के द्वारा आज भी तैरते यह अत्यंत रहस्य की बात है जिसे ज्ञान मैं ऊंची स्थित होने पर ही बताया जाता है
महर्षि वाल्मिक ने मरा मरा जपा था ?
गलत , वास्तव मैं नाम गुप्त होने के कारण नहीं खोला गया यदि मरा मरा जपने से कोई वाल्मिक जैसा (एक चोर से) हो सकता है तो आजकल भी लोग मरा मरा जप कर वाल्मिक हो सकते हैं क्या आपने कभी सोचा है के आज तक कोई दूसरा वाल्मिक पैदा नहीं हुआ ये भी बेहद रहस्य की बात है हाँ ये बात बताई जा सकती है कि वाल्मिक को संतों ने उसी नाम का ज्ञान दिया था जो ढाई अक्षर का महा मंत्र है शंकर जिसका जाप करते है मीरा जिसका जाप करती थी हनुमान जिसका जाप करते थे तुलसी को दुसरे गुरु के द्वारा ये नाम मिला था और उन्होंने बालकाण्ड और उत्तरकाण्ड मैं इसका विस्तार से वर्णन किया है
इसी नाम के प्रभाव से पत्थर पानी पर तेरे थे ,इसी नाम के प्रभाव से कोई भी राक्षसी शक्ति प्रहलाद का बाल्वांका नहीं कर सकी थी इसी नाम से ध्रुव को अमरता प्राप्त हुई थी यही नाम ईसामसीह के पास था यही नाम मुहम्मद साहेब के पास था
वास्तव मैं इस नाम के अतिरिक्त किसी मैं ये शक्ति नहीं है के वो जीव को आत्मज्ञान करा सके जितने भी जीव आजतक तारे या तारे गए है वो इसी ढाई अक्षर के महामंत्र जिसको संतो कि भाषा मैं नाम भी कहते है के द्वारा ही तारे गए है
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